आशुतोष यादव

आशुतोष यादव Lives in Ballia, Uttar Pradesh, India

wish me on - 7 jun follow me on insta-- https://www.instagram.com/im_ashutosh_yadav engineeering sutdents contact &whatsap- 6387788411 👇👇 बेअसर रहतीं है अब, बातें सबकी... मुमकिन नहीं है अब मेरा , पहले जैसा होना..!! 🤔🤔

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"तरक्की-ए-शहर की हालत नाजुक पड़ गयी है। गाँव जो फिर से सहारा बना है सबके लिए। __आशुतोष यादव__"

तरक्की-ए-शहर की हालत नाजुक पड़ गयी है।
गाँव जो फिर से सहारा बना है सबके लिए।

__आशुतोष यादव__

#कोरोना #गांव_ही_है_सहारा taqi kazmi Omi Sharma शिल्पा यादव .. Annu Sharma @Pooja Rajput

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"बन्जर धरती को कर गए मृदित देश-सेवा में कर प्राण विसर्जित अपने लहू से धरा को किये सृजित। जुनून-ए-आजादी के इस कदर थे मतवाले जीवन-मरण से निर्द्वन्द्व थे बड़ी हिम्मत वाले राष्ट्र की आज़ादी खातिर कहां थे रुकने वाले। रणचण्डी में देकर प्राणों की पूर्णाहुति सदा के लिए जीवंत हो गए महान विभूति वतन की आज़ादी को दिला दी स्वीकृति। सत्तावन की क्रांति सैंतालीस तक चली दुस्साहसी अंग्रेजो के लहू की नदी बही अनेको भारत माँ के रणधीरों की हड्डी गली। लहू का एक-एक कतरा लबरेज था जोश से भड़क उठे थे अंग्रेजी प्रभुत्व के सितम के रोष से अंग्रेजी हुकूमत घुटने टेकी,आज़ादी के उद्घोष से। ~आशुतोष यादव"

बन्जर धरती को कर गए मृदित
देश-सेवा में कर प्राण विसर्जित
अपने लहू से धरा को किये सृजित।

जुनून-ए-आजादी के इस कदर थे मतवाले
जीवन-मरण से निर्द्वन्द्व थे बड़ी हिम्मत वाले
राष्ट्र की आज़ादी खातिर कहां थे रुकने वाले।

रणचण्डी में देकर प्राणों की पूर्णाहुति
सदा के लिए जीवंत हो गए महान विभूति
वतन की आज़ादी को दिला दी स्वीकृति।

सत्तावन की क्रांति सैंतालीस तक चली
दुस्साहसी अंग्रेजो के लहू की नदी बही
अनेको भारत माँ के रणधीरों की हड्डी गली।

लहू का एक-एक कतरा लबरेज था जोश से
भड़क उठे थे अंग्रेजी प्रभुत्व के सितम के रोष से
अंग्रेजी हुकूमत घुटने टेकी,आज़ादी के उद्घोष से।

                ~आशुतोष यादव

आप सभी प्रियजनों को 🇮🇳स्वतंत्रता दिवस🇮🇳 की 73 वी वर्षगाँठ की ढेर सारी शुभकामनाएं
🙏🙏🙏🙏🇮🇳🇮🇳

#independenceday2020
#स्वतंत्रतादिवस #स्वतंत्रता_दिवस_स्पेशल #स्वतंत्रता_दिवस_की_हार्दिक_शुभकामनाएँ @siyaaa🖤 @Sethi Ji @sheetal pandya मेरे शब्द @Prashant Kumar Tiwari @Heart beat..... 💞

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"अपने गमो का वसीयत-नामा करू किसको, सब बन बैठे है गमो का सौदागर देखा जिसको। @आशुतोष यादव"

अपने गमो का वसीयत-नामा करू किसको,
सब बन बैठे है गमो का सौदागर देखा जिसको।


   
 @आशुतोष यादव

@Amita Tiwari🎤✍️🎸 @Ramjeet Sharma(Mr. Wow🙈😍) @himanshi Singh @Internet Jockey @Raghu

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"मानव ही मानव को लगे है खाने, पता नही मानवता लग रही है किस ठिकाने, गुजरते मौसम की तरह अपने हो रहे है बेगाने, मानवता को तार-तार कर रखे जा रहे है सिरहाने। सबकी पड़ी है बस अपनी फिक्र,नही है रिश्तो का मोल, बात- बात पर रिश्ते को दिया जा रहा झुठमुठ को तोल, कोई ठीक नही कब बिगड़ जाये लोगो के बोल, बात पच नही रही कोई कब खोल दे किसी की पोल। अपने फायदे के लिए अपनो से भी लगा रहे है बड़ा से बड़ा दाव, इसीलिए तो मानवता का गिरता जा रहा है निरन्तर भाव, नही रहा अब पहले जैसा लोगो मे एक दूसरे के प्रति चाव, अब तो अपने जहर भरे कण्ठ से लोग दे रहे है बहुत बड़ा घाव। ~आशुतोष यादव"

मानव ही मानव को लगे है खाने,
पता नही मानवता लग रही है किस ठिकाने,
गुजरते मौसम की तरह अपने हो रहे है बेगाने,
मानवता को तार-तार कर रखे जा रहे है सिरहाने। 

  सबकी पड़ी है बस अपनी फिक्र,नही है रिश्तो का मोल,
बात- बात पर  रिश्ते को दिया जा रहा झुठमुठ को तोल,
कोई  ठीक नही  कब बिगड़  जाये लोगो के बोल,
बात पच नही रही कोई कब खोल दे किसी की पोल।

अपने फायदे के लिए अपनो से भी लगा रहे है बड़ा से बड़ा दाव,
इसीलिए तो मानवता का गिरता जा रहा है निरन्तर भाव,
नही रहा अब पहले जैसा लोगो मे एक दूसरे के प्रति चाव,
  अब तो अपने जहर भरे कण्ठ से लोग दे रहे है बहुत बड़ा घाव।

            ~आशुतोष यादव

Diwan G himanshi Singh अरुणशुक्ल अर्जुन @शिल्पा यादव @Sudha Tripathi @Ashish Garg ✍️अजनबी✍️ @Shikha Sharma @Pranshi Singh

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"ज़िन्दगी एक रंगमंच है, यहाँ मिलते बड़ी तंज है। जहाँ मार्तण्ड का होता अस्त है, वही कुमुद हो उठता मद-मस्त है। जहाँ ज्योति का हुआ खात्मा, वही सजीव हुई तिमिर की आत्मा। कोई बूँद-बूँद पानी भरे गागर में, नदी अगाध जल छोड़ आती सागर में। कोई पैसों खातिर निस चमड़ी घिसता है, किसी की चमड़ी पर पैसा ही बिछता है । कही बज रहे निस-दिन बिजयी-गीत, किसी की वांछा,हौसलों को कर रही चित। @आशुतोष यादव"

ज़िन्दगी एक रंगमंच है,
यहाँ मिलते बड़ी तंज है।

जहाँ मार्तण्ड का होता अस्त है,
वही कुमुद हो उठता मद-मस्त है।

जहाँ ज्योति का हुआ खात्मा,
वही सजीव हुई तिमिर की आत्मा।

कोई बूँद-बूँद पानी भरे गागर में,
नदी अगाध जल छोड़ आती सागर में।

कोई पैसों खातिर निस चमड़ी घिसता है,
किसी की चमड़ी पर पैसा ही बिछता है ।

कही बज रहे निस-दिन बिजयी-गीत,
किसी की वांछा,हौसलों को कर रही चित।

   

         @आशुतोष यादव

#ज़िन्दगी_का_सफ़र #ज़िन्दगी_तो_खुद_एक_दिन #ज़िन्दगी_मुश्किलें_एहसास #Nojoto #nojoto_hindi_shayari

#Dwell_in_possibility @himanshi Singh @Shipra Verma @Raj Choudhary @अंकित सारस्वत @🌹Adhoori Khwahish🌹

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