shashi bala

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"ख़ुशी और ग़म बस यही फ़र्क है खुशी और गम में एक दाग को छिपा देता हैं दूसरा दाग को दिखा देता हैं"

ख़ुशी और ग़म बस यही फ़र्क है खुशी और गम में एक दाग को छिपा देता हैं दूसरा दाग को दिखा देता हैं

खुशी और गम

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"इश्क़ और चर्चा कभी हम भी निगाहें मिला बैठे थे, जंग अपने दिल से हार बैठे थे। उस पर अपना सब कुछ वार बैठे थे, शहर की विशेष चर्चा में अा बैठे थे। रस्में सारी की सारी भुला बैठे थे,"

इश्क़ और चर्चा कभी हम भी निगाहें मिला बैठे थे,
जंग अपने दिल से हार बैठे थे।
उस पर अपना सब कुछ वार बैठे थे,
शहर की विशेष चर्चा में अा बैठे थे।
रस्में सारी की सारी भुला बैठे थे,

इश्क़ के चर्चे

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"निगाहें और नशा कौन कहता है आंखे कत्ल करती है और नशीली होती हैं। काम तो निगाहें करती हैं सहाब बिन बोतल की शराब रखती हैं। आंखे नहीं निगाहें ही मां, बहन, बीवी और बेटी की पहचान बता देती हैं।।"

निगाहें और नशा कौन कहता है आंखे कत्ल करती है
और नशीली होती हैं।
काम तो निगाहें करती हैं सहाब बिन बोतल
की शराब रखती हैं।
आंखे नहीं निगाहें ही मां, बहन, बीवी और बेटी की पहचान बता देती हैं।।

 

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"राहें ना जाने कितने राहगीर रोज गुजरते हैं बिना थके सब सहती है राहें। जिनपर चले सभी वीर बारी बारी संजोए रहती हैं गाथाएं सारी की सारी।।"

राहें ना जाने कितने राहगीर रोज गुजरते हैं
बिना थके सब सहती है राहें।
जिनपर चले सभी वीर बारी बारी
संजोए रहती हैं गाथाएं सारी की सारी।।

राहें

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"राहें कौन कहता है सब कुछ बदल गया चालीस बसंत बीत गए वो राहे आज भी वही कि वहीं हैं। धूमने के बाद सारी दुनिया बचपन की यादों की फिजाएं आज भी वही हैं।।"

राहें कौन कहता है सब कुछ बदल गया
चालीस बसंत बीत गए वो राहे आज भी वही कि वहीं हैं।
धूमने के बाद सारी दुनिया बचपन की यादों
की फिजाएं आज भी वही हैं।।

राहें

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