Rana Hijab

Rana Hijab Lives in Fatehgarh, Uttar Pradesh, India

कुछ इस तरह बिखरी सी ज़िन्दगी को संवार लेती हूं , जो इस दिल तक आता है वो बस कागज़ पर उतार लेती हूं !! ...#nationalbaalshreeawardee(acting) #poet #kvian #rashufrvr❤️ #dancelover #foodie #lovemyparents #actinglover #poetrylover #luvwriting

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"ना तुम्हारी थी ख़ता , ना था मेरा ही कुसूर , यूं तो ख़ुदा भी मुझसे रूठा था और कुछ वक़्त भी मजबूर ।।"

ना तुम्हारी थी ख़ता , ना था मेरा ही कुसूर , यूं तो ख़ुदा भी  मुझसे रूठा था और कुछ वक़्त भी  मजबूर ।।

#वक़्त #ख़ुदा #मजबूरियां #कुसूर

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"कभी सच्ची मोहब्बत को ऐसे भी आज़माया करते हैं , अक्सर ताउम्र साथ चलने का वादा करने वाले राहों में छोड़ जाया करते हैं।।"

कभी सच्ची मोहब्बत को ऐसे भी आज़माया करते हैं , अक्सर ताउम्र साथ चलने का वादा करने वाले राहों में छोड़ जाया करते हैं।।

#वादे #राहें #ताउम्रमोहब्बत

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"वह उसकी ज़िन्दगी का महज़ क़िस्सा नहीं कहानी बनना चाहती थी , वक़्त के साथ रुक जाए वह नहीं रवानी बनना चाहती थी।। दौर-ए मुश्किल तो परख़ है ख़ुदा की, कि वह उस दौर में उसकी आसानी बनना चाहती थी।। साथ चलते वह तो ज़माना हैरान रह जाता , कि वह लोगों की वजह-ए हैरानी बनना चाहती थी।। शुरुआती रौनकों का क्या करना जनाब? वह तो उसकी आखिरत की जवानी बनना चाहती थी।। बाहरी इश्क़ की कहां चाह थी कभी उसे, वह तो इश्क़ उसका रूहानी बनना चाहती थी।। ख्वाहिशों के दरख़्त के पत्ते अक्सर चंद लम्हों में गिर जाया करते हैं, ताउम्र वफ़ा कर वह तो उसकी ज़िंदगानी बनना चाहती थी।। हवा के झोंके तो बारिशों से पहले भी आया करते हैं, कि वह तो उस बारिश का पानी बनना चाहती थी।। जिसका साथ पाकर ख़ुश रहता हमेशा वह , ख़ुदा की लाज़िम वह मेहरबानी बनना चाहती थी ।। वह उसकी ज़िंदगी का महज़ क़िस्सा नहीं कहानी बनना चाहती थी।। मगर अफ़सोस कि वह कहानी न बन पाई बस इक क़िस्सा बन कर ही रह गई, उसकी मुकम्मल सी ज़िन्दगी का इक अधूरा सा हिस्सा बन के रह गई ।।"

वह उसकी ज़िन्दगी का महज़ क़िस्सा नहीं कहानी बनना चाहती थी , वक़्त के साथ रुक जाए वह नहीं रवानी बनना चाहती थी।। दौर-ए मुश्किल तो परख़ है ख़ुदा की, कि वह उस दौर में उसकी आसानी बनना चाहती थी।।  साथ चलते वह तो ज़माना हैरान रह जाता , कि वह लोगों की वजह-ए हैरानी बनना चाहती थी।। शुरुआती रौनकों का क्या करना जनाब? वह तो उसकी आखिरत की जवानी बनना चाहती थी।। बाहरी इश्क़ की कहां चाह थी कभी उसे, वह तो इश्क़ उसका रूहानी बनना चाहती थी।। ख्वाहिशों के दरख़्त के पत्ते अक्सर चंद लम्हों में गिर जाया करते हैं, ताउम्र वफ़ा कर वह तो उसकी ज़िंदगानी बनना चाहती थी।। हवा के झोंके तो बारिशों से पहले भी आया करते हैं, कि वह तो उस बारिश का पानी बनना चाहती थी।। जिसका साथ पाकर ख़ुश रहता हमेशा वह , ख़ुदा की लाज़िम वह मेहरबानी बनना चाहती थी ।। वह उसकी ज़िंदगी का महज़ क़िस्सा नहीं कहानी बनना चाहती थी।। मगर अफ़सोस कि वह कहानी न बन पाई बस इक क़िस्सा बन कर ही रह गई, उसकी मुकम्मल सी ज़िन्दगी का इक अधूरा सा हिस्सा बन के रह गई ।।

#क़िस्सा #कहानी #अधूरीख्वाहिशें #इश्क़ #नमुकम्मल #जज़्बात

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"अनजान थे जिस दर्द से कल तक, आज यूं उससे वास्ता हो गया, हम अकेले थे अकेले ही रहे , वक़्त चलता गया और तन्हां रास्ता हो गया।।"

अनजान थे जिस दर्द से कल तक, आज यूं उससे वास्ता हो गया, हम अकेले थे अकेले ही रहे , वक़्त चलता गया और तन्हां रास्ता हो गया।।

#रास्ते #वक़्त #अनजान #राहेंऔरवह

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"मां मैं तेरे आंगन की थी फुलझड़ी, द्वार पे थी जब मैं खड़ी धीरे से इक झोंका आया , चंद लमहों में मैने ख़ुद को अंधेरे में पाया, मैं चीखी थी, चिल्लाई थी, मां तू कहती थी कि ख़ुदा हर तरफ है , तो क्यों उस दिन वह भी मुझे बचा न पाया ? मां मैं तो तेरी लाडली थी, फिर कैसे हो गई मैं तुझसे दूर? तू ही बता क्या था मेरा कुसूर? मां तूने कल हाथों से सिले थे जो कपड़े तार तार हो गए , मैं तो छोटी सी कली थी , जिस पर कितने वार हो गए , नन्हें पौधे सी खड़ी थी अकेली , झोंकों ने मुझे किया मजबूर , मां तू ही बता क्या था मेरा कुसूर? मां तुझे कैसे आएगी मेरे बिना नींद , भैया बाबा घर में सब कैसे मनाएंगे ईद? बाबा किसे देंगे ईदी , उन्होंने ने तो अपनी लाडली ही खो दी , मैं थी मासूम मैं जो गई चला गया तेरे घर का नूर, बाबा तू ही बता क्या था मेरा कुसूर? इंसानियत से इंसाफ मांगती हूं ,आवाज़ को उठना होगा , मैं हर मर्यादा लांघती हूं , अलविदा मैं तो थी बेकसूर , हैवानियत ने किया मुझे सबसे दूर ए-दुनिया तू बताना ज़रूर आख़िर क्या था मेरा कसूर!!??"

मां मैं तेरे आंगन की थी फुलझड़ी, द्वार पे थी जब मैं खड़ी धीरे से इक झोंका आया , चंद लमहों में मैने ख़ुद को अंधेरे में पाया, मैं चीखी थी, चिल्लाई थी, मां तू कहती थी कि ख़ुदा हर तरफ है , तो क्यों उस दिन वह भी मुझे बचा न पाया ? मां मैं तो तेरी लाडली थी, फिर कैसे हो गई मैं तुझसे दूर? तू ही बता क्या था मेरा कुसूर? मां तूने कल हाथों से सिले थे जो कपड़े तार तार हो गए , मैं तो छोटी सी कली थी , जिस पर कितने वार हो गए , नन्हें पौधे सी खड़ी थी अकेली , झोंकों ने मुझे किया मजबूर , मां तू ही बता क्या था मेरा कुसूर? मां तुझे कैसे आएगी मेरे बिना नींद , भैया बाबा  घर में सब कैसे मनाएंगे ईद? बाबा किसे देंगे ईदी , उन्होंने ने तो अपनी लाडली ही खो दी , मैं थी मासूम मैं जो गई चला गया तेरे घर का नूर, बाबा तू ही बता क्या था मेरा कुसूर? इंसानियत से इंसाफ मांगती हूं ,आवाज़ को उठना होगा  , मैं हर मर्यादा लांघती हूं , अलविदा मैं तो थी बेकसूर , हैवानियत ने किया मुझे सबसे दूर ए-दुनिया तू बताना ज़रूर आख़िर क्या था मेरा कसूर!!??

#justiceforrapevictims #justiceforgirls #stopit #girlsrblessingsofgod #Society #Shame #justice #raiseurvoice

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