Yogesh Patel

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"भगवान से किसको केसा डर जिसने हम को बनाया वो कैसे डहा सकता है हम पे कहर जिसने पूरी श्रष्टि को बनाया वो डूबने कैसे देगा प्यारा सा दिल जैसा शहर जिसके विश्वाश पर हम पूरी रात सोते है जो जलाता हमारे लिए सुबह का चमकता हुवा पहर मुझे उससे न कोई डर वो है मेरे सात में तब तक हु निडर योगी पटेल"

भगवान से किसको केसा डर 
जिसने हम को बनाया वो 
कैसे डहा सकता है हम पे कहर 
जिसने पूरी श्रष्टि को बनाया 
वो डूबने कैसे देगा प्यारा सा दिल जैसा शहर 
जिसके विश्वाश पर हम पूरी रात  सोते है
जो जलाता हमारे लिए सुबह का चमकता हुवा पहर
मुझे उससे न कोई डर वो है मेरे सात में तब 
तक  हु निडर 

योगी पटेल

#LoveOrFear

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"बदला मिजाज हमने भी थोड़ा बदला है तुम तो चल दिये अपनी चाल हम भी चलते कहा हल्का है बेठ के बात करो जो भी मसला है यू आसमान में गोलियां मत चलाओ क्योकि हमारे पास भी भरा पड़ा असला है योगी पटेल"

बदला मिजाज हमने भी थोड़ा बदला  है 
तुम तो चल दिये अपनी चाल
हम भी चलते कहा हल्का है 
बेठ के बात करो जो भी मसला है
यू आसमान में गोलियां मत चलाओ
क्योकि हमारे पास भी भरा पड़ा असला है  

योगी पटेल

#बदला

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"कॉलेज वाली चाय की टपरी, वो भी क्या दिन थे चाय की छोटी सी टपरी में दोस्तो से बिस्किट को छीनते किसके कितने ये न कोई गिनते रोज झगड़ते नीचे गिर जाते उनको भी बीनते दोस्तो के सात चाय पीने का अलग ही मजा था टपरी का हर एक हिसा अदरक इलाइची से महक ता था हर कोई हर एक घुट को स्वाद से चखता था वह भी क्या दिन थे जब में कॉलेज में पड़ता था योगी पटेल"

कॉलेज वाली चाय की टपरी, वो भी क्या दिन थे 
चाय की छोटी सी टपरी में दोस्तो से बिस्किट को छीनते 
किसके कितने ये न कोई गिनते रोज झगड़ते नीचे गिर जाते उनको भी बीनते 
दोस्तो के सात चाय पीने का अलग ही मजा था
टपरी का हर एक हिसा अदरक इलाइची से महक ता था
हर कोई हर एक घुट को स्वाद से चखता था 
वह भी क्या दिन थे जब में कॉलेज में पड़ता था 

योगी पटेल

#CollegeKiChai

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"इनसे गलती नही इनकी हवश बेनकाब हो गयी भारत के ऐसे सविदान को देख निर्भया की आत्मा जलकर फिर से खाक हो गयी इन्साफ की तो बात ही क्या करूँ तीन चार दिन केंन्डल मार्च चार पाँच सालो से एक माँ पूरे देश मे सिर्फ मजाक हो रही सविदान को अलग रख कर इन्हें बस फाशी दो फन्दे की रस्सियां इन्हें लटकाने के लिये बेताप हो रही रोज क्यो बड रही तारीके लगता है वकील साप की बेटी अभी घर पे सही सलांमत सो रही"

इनसे गलती नही इनकी हवश बेनकाब हो गयी 
भारत के ऐसे सविदान को देख निर्भया की आत्मा जलकर फिर से खाक हो गयी 
इन्साफ की तो बात ही क्या करूँ तीन चार दिन केंन्डल मार्च चार पाँच सालो से एक
माँ पूरे देश मे सिर्फ मजाक हो रही
सविदान को अलग रख कर इन्हें बस फाशी दो फन्दे की रस्सियां इन्हें लटकाने के लिये बेताप हो रही
रोज क्यो बड रही तारीके लगता है वकील साप की बेटी अभी घर पे सही सलांमत सो रही

 

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"मज़बूर मेरे रब जिन्दगी में हमारा इतना तो ना होगा कसूर जो इतनी तकलीफे हमारे ही हिसे में तूने करदी मन्जूर इरादा तो मजबूत है लेकिन तोड़ने के लिए क्यो कर रहा मजबूर योगी पटेल"

मज़बूर 


मेरे रब जिन्दगी में हमारा इतना तो ना होगा कसूर
जो इतनी तकलीफे हमारे ही हिसे में तूने  करदी  मन्जूर
इरादा तो मजबूत है लेकिन तोड़ने के लिए क्यो कर रहा मजबूर 
  
योगी पटेल

#मज़बूर

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