Er Shivam Tiwari

Er Shivam Tiwari Lives in Varanasi, Uttar Pradesh, India

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में जन्मा...यहीं पला-बड़ा... प्रयागराज(इलाहाबाद) में अध्ययन हुआ, आठवीं कक्षा से शब्दों में खेला...तकनीकी में अव्वल रहा स्पोर्ट्स में फेल रहा....दसवीं कक्षा से अभियंता (Engineer) होना चाहा... अब तक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय में अभियंता करने में अग्रसर रहा..... पर कविताएँ जस की तस जारी रही.... पहले लिखा मौसम और माहौल पर, फिर देशभक्ति खून के उबाल पर, जब दिल धड़कने लगा....तब लिखा मैनें प्यार, इजहार, इंकार और इकरार पर.... जीता हूँ कल्पना में, कविताओं के रस में, गा भी लेता हूँ भक्ति के कुछ धारा.... अच्छा हूँ, बूरा हूँ जैसा भी हूँ कवि हूँ....पेट भले ना भरे आत्मा तृत्प रहती है, देखना ये है सांसो के साथ शब्दों की सरिता कब तक बहती है...!

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#मेरी_कविता_कहीं_खो_गयी

#SpanishLove

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"चांद भी क्या खूब है, न सर पर घूंघट है, न चेहरे पे बुरका, कभी करवाचौथ का हो गया, तो कभी ईद का, तो कभी ग्रहण का तो कभी पूनम का अगर ज़मीन पर होता तो टूटकर विवादों मे होता, अदालत की सुनवाइयों में होता, अखबार की सुर्ख़ियों में होता, लेकीन "शुक्र है आसमान में बादलों की गोद में है, इसीलिए ज़मीन में कविताओं और ग़ज़लों में महफूज़ है” ©Shivam Tiwari"

चांद भी क्या खूब है,
न सर पर घूंघट है,
न चेहरे पे बुरका,

कभी करवाचौथ का हो गया,
तो कभी ईद का,
तो कभी ग्रहण का
तो कभी पूनम का
अगर

ज़मीन पर होता तो
टूटकर विवादों मे होता,
अदालत की सुनवाइयों में होता,
अखबार की सुर्ख़ियों में होता,

लेकीन

"शुक्र है आसमान में बादलों की गोद में है,
इसीलिए ज़मीन में कविताओं और ग़ज़लों में महफूज़ है”

©Shivam Tiwari

चांद भी क्या खूब है,
न सर पर घूंघट है,
न चेहरे पे बुरका,

कभी करवाचौथ का हो गया,
तो कभी ईद का,
तो कभी ग्रहण का
कभी पूनम का

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"उन भारतीय नारियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं जिनकें चाँद सरहद पर खड़े हो कर हमारी रक्षा कर रहे है... ©Shivam Tiwari"

उन भारतीय नारियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं 
जिनकें चाँद सरहद पर खड़े हो कर हमारी रक्षा कर रहे है...

©Shivam Tiwari

#जय_जवान_जय_किसान_💪
#जय_हिन्द

#Karwachauth

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#साल2020
#nojotoapp
#nojoto🖋️🖋️
#nojotonews #nojotohindi
#प्रेम #कविता…
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@Priya Gour @Pratibha Tiwari(smile)🙂 @khubsurat @indira @Sudha Tripathi @Priya dubey

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"श्रीरामचरित मानस के अयोध्या कांड में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है। बारहिं बार लाइ उर लीन्ही। धरि धीरजु सिख आसिष दीन्ही॥ अचल होउ अहिवातु तुम्हारा। जब लगि गंग जमुन जल धारा॥ भावार्थ:-उन्होंने सीताजी को बार-बार हृदय से लगाया और धीरज धरकर शिक्षा दी और आशीर्वाद दिया कि जब तक गंगाजी और यमुनाजी में जल की धारा बहे, तब तक तुम्हारा सुहाग अचल रहे॥ ©Shivam Tiwari"

श्रीरामचरित मानस के अयोध्या कांड में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है। 

बारहिं बार लाइ उर लीन्ही। धरि धीरजु सिख आसिष दीन्ही॥
अचल होउ अहिवातु तुम्हारा। जब लगि गंग जमुन जल धारा॥
भावार्थ:-उन्होंने सीताजी को बार-बार हृदय से लगाया और धीरज धरकर शिक्षा दी और आशीर्वाद दिया कि जब तक गंगाजी और यमुनाजी में जल की धारा बहे, तब तक तुम्हारा सुहाग अचल रहे॥

©Shivam Tiwari

#सब_अच्छा_होगा

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