Kumar

Kumar Lives in Alwar, Rajasthan, India

जब लफ्ज़ों को मेरे वो समझ ना सके, ख़ामोशी तब मुझे इख़्तियार करनी पड़ी!! तन्हाइयों में बैठकर तन्हा न कर मुझे, मैं घुट के मर न जाऊ ऐसा न कर मुझें,

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