Vishal Raj

Vishal Raj Lives in Mandla, Madhya Pradesh, India

Non-Professional Writer Works :- Shayri Poetry Story Fav Line - "थोड़ी सी मीठी ज़रा सी कड़वी है सौ ग्राम जिंदगी सँभाल के खर्ची है" (लेखक - विभू पूरी जी) Fav Writer - Living Legend Gulzar Sahab Fav Music - Sufi Songs Fav Singer - N/A Fav Movie - Nanak Shah Fakir The Rebelious Flower

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"इन मस्त निगाहों से इकरार तो कर देखो, इस दिल के तरानों में एतबार तो कर देखो, ज़ज़्बात जो कहते हैं इजहार तो कर देखो, जरा मेरी तरफ से भी इक बार कभी देखो.. हर गम को चुरा लेंगे फरियाद तो कर देखो, धड़कन में बसा लेंगे इक आह तो भर देखो, मेरा इश्क हकीकत है तुम प्यार तो कर देखो, जरा मेरी तरफ से भी इक बार कभी देखो, सोचा था क्या दिन होंगे जब, हम जो तुम्हारे कहलायेंगे, प्यार की छांव में बैठे, ज़ुल्फ़ तुम्हारे सहलायेंगे, इस दिल में मची हलचल हम तुमको सुनाएंगे, हर रोज़ जो बुनते हैं सब ख्वाब दिखाएंगे, मेरे ख्वाबों की दुनिया में आकर के ज़रा देखो, जरा मेरी तरफ से भी इक बार कभी देखो ..... - विशाल 'राज़'"

इन मस्त निगाहों से इकरार तो कर देखो,
इस दिल के तरानों में एतबार तो कर देखो,
ज़ज़्बात जो कहते हैं इजहार तो कर देखो,
जरा मेरी तरफ से भी इक बार कभी देखो..

हर गम को चुरा लेंगे फरियाद तो कर देखो,
धड़कन में बसा लेंगे इक आह तो भर देखो,
मेरा इश्क हकीकत है तुम प्यार तो कर देखो,
जरा मेरी तरफ से भी इक बार कभी देखो,

सोचा था क्या दिन होंगे जब, हम जो तुम्हारे कहलायेंगे,
प्यार की छांव में बैठे, ज़ुल्फ़ तुम्हारे सहलायेंगे,

इस दिल में मची हलचल हम तुमको सुनाएंगे,
हर रोज़ जो बुनते हैं सब ख्वाब दिखाएंगे,
मेरे ख्वाबों की दुनिया में आकर के ज़रा देखो,
जरा मेरी तरफ से भी इक बार कभी देखो .....

- विशाल 'राज़'

#मेरी_तरफ

10 Love

"Maa जो कर्ज़ तुम्हारा मोल सके, वो दाम कहाँ से लाऊं माँ, उपकार तुम्हारा तौल सके, वो फर्ज कहाँ से लाऊं माँ, जो दर्द तुम्हारा झेल सके, वो देह कहाँ से लाऊं माँ, आँचल से भी शीतल जो, वो छावं कहां से लाऊं माँ, आशा की जो ज्योत तुममे, वो नैन कहाँ से लाऊं माँ, जो गोद मे तेरे प्राप्त हुआ, वो चैन कहाँ से लाऊं माँ, ममता को जो जान सके, वो ज्ञान कहाँ से लाऊं माँ, जो भाव तुम्हारे भीतर है, वो सार कहाँ से लाऊं माँ, जो प्रेम सुगन्धित तुममे है, वो पुष्प कहाँ से लाऊं माँ, आभार तुम्हारा इतना है, मैं शब्द कहाँ से लाऊं माँ.... - विशाल 'राज'"

Maa     जो कर्ज़ तुम्हारा मोल सके,
वो दाम कहाँ से लाऊं माँ,
उपकार तुम्हारा तौल सके,
वो फर्ज कहाँ से लाऊं माँ,
                                             जो दर्द तुम्हारा झेल सके,
                                             वो देह कहाँ से लाऊं माँ,  
                                             आँचल से भी शीतल जो,
                                             वो छावं कहां से लाऊं माँ,
आशा की जो ज्योत तुममे,
वो नैन कहाँ से लाऊं माँ,
जो गोद मे तेरे प्राप्त हुआ,
वो चैन कहाँ से लाऊं माँ,
                                          ममता को जो जान सके,
                                          वो ज्ञान कहाँ से लाऊं माँ,
                                          जो भाव तुम्हारे भीतर है,
                                          वो सार कहाँ से लाऊं माँ,
जो प्रेम सुगन्धित तुममे है,
वो पुष्प कहाँ से लाऊं माँ,
आभार तुम्हारा इतना है,
 मैं शब्द कहाँ से लाऊं माँ....

- विशाल 'राज'

#माँ

9 Love

"ग़ज़ल ज़रा पास तो आकर देखो कभी, क्या शोर मचा है दिल में, हर शाम लिखा करते थे ग़ज़ल, अब गूंज रहा है दिल में,, ज़रा पास तो आ... तुम्हारे बिना यहां हमको, न इक पल भी चैन आता है, तुम्हारे ही नाम से हमको, ये अपना वजूद भाता है, मगर बिन तुम्हारे, अब कैसे गुज़ारे,, कहो कोई पूछ रहा है दिल में.... ज़रा पास तो आकर देखो कभी, क्या शोर मचा है दिल में, हर शाम लिखा करते थे ग़ज़ल, अब गूंज रहा है दिल में,, ज़रा पास तो आ... - विशाल राज"

ग़ज़ल

ज़रा पास तो आकर देखो कभी, क्या शोर मचा है दिल में,
हर शाम लिखा करते थे ग़ज़ल, अब गूंज रहा है दिल में,,

ज़रा पास तो आ...

तुम्हारे बिना यहां हमको, न इक पल भी चैन आता है,
तुम्हारे ही नाम से हमको, ये अपना वजूद भाता है,
मगर बिन तुम्हारे, अब कैसे गुज़ारे,, कहो कोई पूछ रहा है दिल में....

ज़रा पास तो आकर देखो कभी, क्या शोर मचा है दिल में,
हर शाम लिखा करते थे ग़ज़ल, अब गूंज रहा है दिल में,,

ज़रा पास तो आ...

- विशाल राज

#जरा_पास

9 Love

"जीवन-दर्शन (भाग-२) खुदगर्ज़ी के पेड़ लगाकर, अपना बाग सजाए । बुरे वक्त के मौसम में, कड़वे फल बरसाए ।। दौलत की मदहोशी में, अपनी जमीर गवाए । मुसीबत की धूप चढ़े, छाँव न मिलने पाए ।। दूजे मन को चोट लगाकर, अपना रूप छिपाए । अपने मन को चोट लगे, आंसू रोक न पाए ।। दीन के छत को तोड़कर, घर अपना महल बनाए । बर्बादी की आग लगे, सब राख ढेर हो जाए ।। - विशाल राज"

जीवन-दर्शन (भाग-२)

खुदगर्ज़ी के पेड़ लगाकर, अपना बाग सजाए ।
बुरे वक्त के मौसम में, कड़वे फल बरसाए ।।

दौलत की मदहोशी में, अपनी जमीर गवाए ।
मुसीबत की धूप चढ़े, छाँव न मिलने पाए ।।

दूजे मन को चोट लगाकर, अपना रूप छिपाए ।
अपने मन को चोट लगे, आंसू रोक न पाए ।।

दीन के छत को तोड़कर, घर अपना महल बनाए ।
बर्बादी की आग लगे, सब राख ढेर हो जाए ।।

- विशाल राज

#जीवन_दर्शन_भाग_२

8 Love

"मिट्टी का बदन, चमकता लिबास और कागजी टुकड़ा, कब तक ठहरेगा, इसलिए जब मन करता है तो कुछ लिख लेता हूँ, एक वही रह जाएगा मेरे जाने के बाद, तुम पढोगे तो याद करोगे, वरना वक़्त तो हर घाव को भर ही देता है तुम भी एक दिन भूल जाओगे ।।"

मिट्टी का बदन, चमकता लिबास और कागजी टुकड़ा, 
कब तक ठहरेगा,
इसलिए
जब मन करता है तो कुछ लिख लेता हूँ, 
एक वही रह जाएगा मेरे जाने के बाद,
तुम पढोगे तो याद करोगे,
वरना
वक़्त तो हर घाव को भर ही देता है 
तुम भी एक दिन भूल जाओगे ।।

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8 Love