सुधांशु पांडे़

सुधांशु पांडे़

किसी पनघट पर अगर कोई कान्हा बंसी बजाए ताे उस बंशी की धुन में मुग्ध हो जाने वाली राधा के गम आंसुओं को लिखने वाला प्रेम का कवि हूँ.............

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some special shayri by sudhanshupandey970@gmail.com @Lucifer..👑 @Dervaliya Anil @$ubha$"शुभ" @Ritika suryavanshi @Girish @mon2 raj @shivam kumar mishra @रोहित तिवारी । @Anuradha Vishwakarma @My_Words✍✍ @Prakash Keshari @Puspa Kri @Sunil Kumar Upadhyay @Gunjan Anand @Sewli Karmakar

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"मैं रचनाएं इसलिए करता हूं क्योंकि वो लोगों को अच्छी लगे या ना लगे पर हमें हमें जीना सिखाती हैं -"सुधांशु पांड़े"-"

मैं रचनाएं  इसलिए करता हूं क्योंकि वो लोगों को अच्छी लगे या ना लगे पर हमें  हमें जीना सिखाती हैं
-"सुधांशु पांड़े"-

Good thougth by hindi famous poet sudhanshu pandey....

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"-"दीपावली"- जलाते रहे हैं दीपक खुशी का, भुलाते रहे हैं गम हम सभी का, अंधेरों को दीपक ठहरने दिया ना, किसी की मोहब्बत ने मरने दिया ना, चमकती निशाकर न नवरत की दुनिया, चमकती बहुत है अयोध्या की गलियां, कोलाहल खुशी देखकर उस नगर का, लगता है दिल को मिला कोई दिल का, पटाखों से गूंजा माहौल उस जगहे का, समझते जहां सब प्रबलता दीए का, सुन के गर्जन बमों के विस्फोट का, आ गया काल लगता है लंकेश का, लाते हैं प्रतिमा जो उस ईस का, रिद्धि सिद्धि से भरता है घर आदमी का। -"सुधांशु पांड़े"-"

-"दीपावली"-
जलाते रहे हैं दीपक खुशी का,
भुलाते रहे  हैं गम हम सभी का,

अंधेरों को दीपक ठहरने दिया ना,
किसी की मोहब्बत ने मरने दिया ना,

चमकती निशाकर न नवरत  की दुनिया,
 चमकती बहुत है अयोध्या की गलियां,

कोलाहल खुशी देखकर उस नगर का,
लगता है दिल को मिला कोई दिल का,

पटाखों से गूंजा माहौल उस जगहे का,
समझते जहां सब प्रबलता दीए का,

सुन के गर्जन बमों के विस्फोट का,
आ गया काल लगता है लंकेश का,

लाते हैं प्रतिमा जो उस ईस का,
रिद्धि सिद्धि से भरता है घर आदमी का।

-"सुधांशु पांड़े"-

happy diwlai to all my frinde.

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"गम की बदली में चमकता एक सितारा हैं, आज अपना हो ना हो पर कल हमारा है, गम की गैरों की नहीं बल्कि अपना सहारा हैं, आज अपना हो या ना हो पर कल हमारा है, गर्दिशों में हार कर ओ बैठने वाले, तुझको क्या खबर नहीं अपने भी पैरों में छाले हैं, पर नहीं रुकते कदम की मंजिल ने पुकारा हैं, आज अपना हो ना हो पर कल हमारा हैं। यह कदम मै से है जो सागर पाट देते हैं, ये वो धाराएं हैं जो पर्वत काट देते हैं, स्वर्ग इन हाथों ने धरती पर उतारा हैं, आज अपना हो ना हो पर कल हमारा है। सच है डूबा सा है दिल जब तक अंधेरा हैं, इस रात के उस पार लेकिन फिर सवेरा हैं, हर समंदर का कहीं पर तो किनारा हैं, आज अपना हो ना हो पर कल हमारा है।।। -"सुधांशु पांड़े"-"

गम की बदली में चमकता एक सितारा हैं,
आज अपना हो ना हो पर कल हमारा है,
गम की गैरों की नहीं बल्कि अपना सहारा हैं,
आज अपना हो या ना हो पर कल हमारा है,

गर्दिशों में हार कर ओ बैठने वाले,
तुझको क्या खबर नहीं अपने भी पैरों में छाले हैं,
पर नहीं रुकते कदम की मंजिल ने पुकारा हैं,
आज अपना हो ना हो पर कल हमारा हैं।

यह कदम मै से है जो सागर पाट देते हैं,
ये वो धाराएं हैं जो पर्वत काट देते हैं,
स्वर्ग इन हाथों ने धरती पर उतारा हैं,
आज अपना हो ना हो पर कल हमारा है।

सच है डूबा सा है दिल जब तक अंधेरा हैं,
इस रात के उस पार लेकिन फिर सवेरा हैं,
हर समंदर का कहीं पर तो किनारा हैं,
आज अपना हो ना हो पर कल हमारा है।।।

-"सुधांशु पांड़े"-

"सुधांशु पांड़े" की अमर लेखनी से...

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"😘"

😘

Mr.sudhanshu pandey.

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