arpit shukla

arpit shukla Lives in Varanasi, Uttar Pradesh, India

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"वो मुझसे मोह्हबत करे या बेवफा निकले, पर अपना समय मुझे अता कर दे, उसे दिन काटना हो काट ले किसी और के साथ, बस रातें मुझे अता कर दे........."

वो मुझसे मोह्हबत करे या बेवफा निकले, पर अपना समय मुझे अता कर दे, उसे दिन काटना हो काट ले किसी और के साथ, बस रातें मुझे अता कर दे.........

 

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"अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा नहीं कहते, हम इश्क़ को बेवफा नहीं कहते, ग़ज़ल कितनी भी पुरानी हो, हम उसे बूढा नहीं कहते और मजहब के नाम पर जंग छिड़नी हो छिड़ जाये, हम शायर हैं साहेब हिंदी और उर्दू दोनो को माँ कहते हैं भाषा नहीं कहते और हिंदी ने ना हिन्दू कहा है खुद को न उर्दू ने मुस्लमान हम दोनों को एक ही कहते है जुदा नहीं कहते......."

अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा नहीं कहते, हम इश्क़ को बेवफा नहीं कहते, ग़ज़ल कितनी भी पुरानी हो, हम उसे बूढा नहीं कहते और मजहब के नाम पर जंग छिड़नी हो छिड़ जाये,  हम  शायर हैं साहेब  हिंदी और उर्दू दोनो को माँ कहते हैं भाषा नहीं कहते और हिंदी ने ना हिन्दू कहा है खुद को न उर्दू ने मुस्लमान हम दोनों को एक ही कहते है जुदा नहीं कहते.......

हिंदी और उर्दू को जुदा नहीं कहते.....

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"राहें बहुत प्यारा था अपना गांव जब उसमे एक ही सडक हुआ करती थी, कम से कम राश्तो के बहाने से, रिश्ते बने रहा करते थे........."

राहें बहुत प्यारा था अपना गांव जब उसमे एक ही सडक हुआ करती थी, कम से कम राश्तो के बहाने से, रिश्ते बने रहा करते थे.........

 

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"होंठ और तिल मैंने जितने भी खुशनुमा काम किये होंगे, उन सबका हिसाब नज़र आ रहा था, उसने चूमा था मुझे अपने सुर्ख होठों की लाली के साथ,देखा खुद को आईने मे उस रोज , साहेब मैं गुलाब नज़र आ रहा था......❤️❤️"

होंठ और तिल  मैंने जितने भी खुशनुमा काम किये होंगे, उन सबका हिसाब नज़र आ रहा था, उसने चूमा था मुझे अपने सुर्ख होठों की लाली के साथ,देखा खुद को आईने मे  उस रोज ,  साहेब मैं गुलाब नज़र आ रहा था......❤️❤️

मै गुलाब नज़र आ रहा था.....

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"मै मीनार पर चढ़कर आशमाँ छू रहा था, झुककर देखा तो पिता का कन्धा नज़र आया, राहें आसान होती जा रहीं थी मेरी, मै सोचता था की कौन है जो मेरे लिए राश्ते बना रहा, मुड़कर देखा तो माँ का चेहरा नज़र आया...."

मै मीनार पर चढ़कर आशमाँ छू रहा था, झुककर देखा तो पिता का कन्धा नज़र आया, राहें आसान होती जा रहीं  थी मेरी, मै सोचता था की कौन है जो मेरे लिए राश्ते बना रहा,  मुड़कर देखा तो माँ का चेहरा नज़र आया....

माँ का चेहरा नज़र आया.


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