हिमपुत्री किरन पुरोहित

हिमपुत्री किरन पुरोहित Lives in Karnaprayag, Uttarakhand, India

एक बाल कवयित्री किरण पुरोहित हिम पुत्री . अब आप YouTube पर 'किरण पुरोहित हिम पुत्री' चैनल पर मेरे quots पढ़ सकते हैं चमोली गढ़वाल से हूं शब्दों को पिरोना जानती हूं आशा है आप शब्द माला को पसंद करेंगे yourquot - #kiranpurohit कलम क्रांति साहित्यिक संस्था गोपेश्वर से जुड़ी हिन्दी साहित्य रत्न सम्मान से सम्मानित काव्य शिरोमणि गोपालदास नीरज स्मृति सम्मान से सम्मानित

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"घूंघट में चाँद जलभर गगरी लाती प्रातः ठुमक ठुमक चल बांद मुख को ओढनी से ढकती है वो देखो घूंघट में चांद"

घूंघट में चाँद जलभर गगरी लाती प्रातः 
ठुमक ठुमक चल बांद 
मुख को ओढनी से ढकती है 
वो देखो घूंघट में चांद

बांद - गढ़वाली मूल का शब्द इसका अर्थ. सुंदर स्त्री से होता है

शृंगार रस की चाशनी भीगा चांद का यह दृश्य आपको पसंद आएगा . #nojoto
#nojotohindi #nojotoofficial #bestofnojoto #Kalamse #Shayari

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"एक तू है, एक चाँद है एक यहां मेरे दिल के अंदर श्रृंगार प्रेम का नाद है सच है ये दोनों ही जग में एक तू है एक चांद है"

एक तू है, एक चाँद है एक यहां मेरे दिल के अंदर 
श्रृंगार प्रेम का नाद है 
सच है ये दोनों ही जग में
एक तू है एक चांद है

#चांद #Kalamse #करवाचौथ
प्रेम के पर्व करवाचौथ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

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"ज़न्नत काश्मीर को जन्नत कहने ,वाले थोड़े लोग वही हैं जो मेरे गढवाल -कुमांऊ , की धरती पर आए ना जन्नत और कहीं नहीं जग में ,कहते सारे लोग यहां के जन्नत है जग यह नाम मात्र को, जन्नत बसती सिर्फ यहां"

ज़न्नत काश्मीर को जन्नत कहने ,वाले थोड़े लोग वही हैं
जो मेरे गढवाल -कुमांऊ , की धरती पर आए ना 
जन्नत और कहीं नहीं जग में ,कहते सारे लोग यहां के
जन्नत है जग यह नाम मात्र को, जन्नत बसती सिर्फ यहां

गंगा जमुना निकली जहां से
हम बसते हैं वहां
...........Kiran purohit
#Kalamse #hindiquot

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सचमुच हर रंग में हर ढंग में हर शहर कुछ अलग है आप भी अपने शहर की कहानी लिखें जैसे कि मैंने अपने पहाड़ी शहर की लिखी है. #kiranpurohit #himpotri #gadhwal #uttrakhand #MeRaSher

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"चाँद की रोशनी में कुछ यूँ तुम साथ रहो जैसे पुष्पों में सुगंध नदीतट बहे पवन अतिमंद प्रकृति में बसे प्रिय वसंत कली में रसहर सु मकरंद"

चाँद की रोशनी में  कुछ यूँ तुम साथ रहो जैसे पुष्पों में सुगंध 
नदीतट बहे पवन अतिमंद 
प्रकृति में बसे प्रिय वसंत
कली में रसहर सु मकरंद

चांद की रोशनी में
............किरन पुरोहित हिमपुत्री

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