रमेश प्रेमी

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आध्यात्मिक जीवन

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"पुरानी बिखरी यादें जीवन के गुजरे पल बस याद आते हैं, कभी हँसाते हैं, कभी रुलाते हैं ! गुजरा हुआ कल वापस कहाँ आएगा, कुछ भूल जाते हैं, कुछ याद आते हैं !! ऐ हंसी लमहों तुम याद आना छोड़ दो, बार -बार हमें यूँ सताना छोड़ दो ! यादों से अलग न हो पाएंगे हम, ऐ लमहों तुम याद आना छोड़ दो !!"

पुरानी बिखरी यादें जीवन के गुजरे पल बस याद आते हैं, 
कभी हँसाते हैं, कभी रुलाते हैं !
गुजरा हुआ कल वापस कहाँ आएगा, 
कुछ भूल जाते हैं, कुछ याद आते हैं !!
ऐ हंसी लमहों तुम याद आना छोड़ दो, 
बार -बार हमें यूँ सताना छोड़ दो !
यादों से अलग न हो पाएंगे हम, 
ऐ लमहों तुम याद आना छोड़ दो !!

 

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"एक बार और उलझना है तुमसे एक बार नाराज भी होना है ! तुम्हे हर कीमत पे पाना है, फिर कभी नहीं खोना है !!"

एक बार और उलझना है तुमसे एक बार नाराज भी होना है !
तुम्हे हर कीमत पे पाना है, 
फिर कभी नहीं खोना है !!

 

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"अगर हम बच्चे होते, तो माँ की गोद में सोते, माँ गर नाराज होती, थप्पड़ खाते और रोते ! अंगुली पकड़ कर पिता जी हमें सिखाते चलना, माता जी हमें झुलाती प्रतिदिन पालना ! बच्चे तो होते हैं, हर घर का खिलौना, हमारी किलकारियों से गूंजता घर का कोना कोना !"

अगर हम बच्चे होते, तो माँ की गोद में सोते, 
माँ गर नाराज होती, थप्पड़ खाते और रोते !
अंगुली पकड़ कर पिता जी हमें सिखाते चलना,  
माता जी हमें झुलाती प्रतिदिन पालना !
बच्चे तो होते हैं, हर घर का खिलौना, 
हमारी किलकारियों से गूंजता घर का कोना कोना !

 

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"रिश्ते रिश्ता दिल से हो दिमाग़ से नहीं, तभी चल पाता है ! रिश्ता पानी से हो आग से नहीं, तभी चल पाता है !! रिश्तों में नम्रता बहुत जरुरी है, वायु की प्रतिकूल दिशा में, नाव कौन चला पाता है !!"

रिश्ते रिश्ता दिल से हो दिमाग़ से नहीं, 
तभी चल पाता है !
रिश्ता पानी से हो आग से नहीं, 
तभी चल पाता है !!
रिश्तों में नम्रता बहुत जरुरी है, 
वायु की प्रतिकूल दिशा में, 
नाव कौन चला पाता है !!

 

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"खुदा की रहमत खुद में खुदा का घर है, जाने न हर कोई, जो आत्मज्ञानी है, जाने है बस सोई ! खुदा की रहमत तब होती है, सतगुरु की रहमत जब होती है ! करोगे जब सतगुरु की बन्दगी, कट जाएगी शकून से जिन्दगी ! रहमोकरम से सतगुरु के मिल जायेगा मोक्ष ! जब बन्दगी करोगे सतगुरु की, रहोगे परोक्ष !!"

खुदा की रहमत खुद में खुदा का घर है, जाने न हर कोई, 
जो आत्मज्ञानी है, जाने है बस सोई !
खुदा की रहमत तब होती है, 
सतगुरु की रहमत जब होती है !
करोगे जब सतगुरु की बन्दगी, 
कट जाएगी शकून से जिन्दगी !
रहमोकरम से सतगुरु के मिल जायेगा मोक्ष !
जब बन्दगी करोगे सतगुरु की, रहोगे परोक्ष !!

 

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