varsha ✍️

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I'm Not Alone ... Becuse Loneliness Always With Me ,,😥💔

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"Dil Shayari ye raat ki tanhaai.. or teri yaado k saaye. kese roke aanshu apne.. or kese iss dil ko samjhaye... #NojotoQuote"

Dil Shayari  ye raat ki tanhaai.. 
or teri yaado k saaye. 
kese roke aanshu apne.. 
or kese iss dil ko samjhaye...  #NojotoQuote

 

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"#OpenPoetry mil mujhse, tujhe btaye kabhi.. tujhe tujse hi ru-b-ru kraye kabhi, dhokha aur freb teri fitrat h, fir v tujhe aajmaye kabhi tune jo dard diye,,, sayad hi bhar paye kabhi meri v duaa me ashar ho or khuda bhi,, tujhe , tujhsa milaye kabhi."

#OpenPoetry mil mujhse,
tujhe btaye kabhi..
tujhe tujse hi ru-b-ru kraye kabhi,
dhokha aur freb teri
fitrat h,
fir v tujhe aajmaye kabhi
tune jo dard diye,,,
sayad hi bhar paye kabhi
meri v duaa me ashar
ho or khuda bhi,,
tujhe , tujhsa milaye kabhi.

 

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"एहसास ज़िन्दगी हैं और ज़िन्दगी ही है एहसास , बिगड़ते सवारते हालातो को सिखाती एक क्लास ,, हर रोज़ कुछ नया किस्सा , लिख जाती है जो पन्नो पे, किताब सी है ये ज़िन्दगी ,लम्हे कराती आभास ,, खुशियों की बारिश में , अपनो का साथ , गम के बादल में , उन्ही अपनो का उपहास ,, भीड़ में खोजते रहते है हम, जाने पहचाने चेहरों को , जैसे पतझड़ में सब प्राणी , करते बसंत की आस ,, जलती धूप सी परेशानियां है , कभी आग है सांसों में , कभी मस्ती का आनदं है , जैसे बरस रहा हो रास ,, कितने ही राज़ लिए फिरती है , ये अनजाने राहों पर , कही अनजाने रिस्तो से दिलाती है , सदियों का विस्वास ,, कभी सत्य कभी झूठ , कभी निराश कभी उल्लास , हर पल चलना सिखाती वो , जैसे हो एक माँ की अरदास ,, हँसते हुए भी रुलाया इसने , कभी रोते हुए भी हँसा दिया , जो कभी दोस्त थे वो दुश्मन बने , कभी दुश्मन आये पास ,, कभी छोड़ देते थे थाली में अन्न , कभी खाली रही थाली , ज़िन्दगी ने कभी सरताज बनाया , कभी पाई पाई को मोहताज़,, किसी लम्हे ने ठोकर देकर तोड़ दिया, किसी लम्हे ने खुद से नाता जोड़ दिया , कभी महफ़िल में तन्हा चीखे , कभी तन्हा में जिये हो के बिंदास,, कभी हिम्मत की आहट , कभी ज़िम्मेदारी की शुरुवात है , हर पल जी लो ज़िन्दगी अपनी, ज़िन्दगी कुछ नही , सिर्फ है एक एहसास ,,"

एहसास ज़िन्दगी हैं और ज़िन्दगी ही है एहसास ,
बिगड़ते सवारते हालातो को सिखाती एक क्लास ,,

हर रोज़ कुछ नया किस्सा , लिख जाती है जो पन्नो पे,
किताब सी है ये ज़िन्दगी ,लम्हे कराती आभास ,,

खुशियों की बारिश में , अपनो का साथ ,
 गम के बादल में , उन्ही अपनो का उपहास ,,

भीड़ में खोजते रहते है हम, जाने पहचाने चेहरों को ,
जैसे पतझड़ में सब प्राणी , करते बसंत की आस ,,

जलती धूप सी परेशानियां है , कभी आग है सांसों में ,
कभी मस्ती का आनदं है , जैसे बरस रहा हो रास ,,

कितने ही राज़ लिए फिरती है , ये अनजाने राहों पर ,
कही अनजाने रिस्तो से दिलाती है , सदियों का विस्वास ,,

कभी सत्य कभी झूठ , कभी निराश कभी उल्लास ,
हर पल चलना सिखाती वो , जैसे हो एक माँ की अरदास ,,

हँसते हुए भी रुलाया इसने , कभी रोते हुए भी हँसा दिया ,
जो कभी दोस्त थे वो दुश्मन बने , कभी दुश्मन आये पास ,,

कभी छोड़ देते थे थाली में अन्न , कभी खाली रही थाली ,
ज़िन्दगी ने कभी सरताज बनाया , कभी पाई पाई को मोहताज़,,

किसी लम्हे ने ठोकर देकर तोड़ दिया, किसी लम्हे ने खुद से 
नाता जोड़ दिया ,
कभी महफ़िल में तन्हा चीखे , कभी तन्हा में जिये हो के बिंदास,,

कभी हिम्मत की आहट , कभी ज़िम्मेदारी की शुरुवात है ,
हर पल जी लो ज़िन्दगी अपनी, ज़िन्दगी कुछ नही , सिर्फ है एक एहसास ,,

#nojotoapp#nojotonews
Arsh Rekha💕Sharma(मंजुलाहृदय) Sudha Tripathi aman6.1 कवि राहुल पाल अंकित सारस्वत

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"बंद दरवाज़े के पीछे , सिसकियां बंद हो के रह गई,, एक बेटी की इज़्ज़त बाप के हाँथो, नीलाम हो के रह गई,, जिसने उसे एक रुप दिया ,एक आकर दिया,, उसी आकार की बोटी बोटी हराम हो कर रह गई,, माँ ने आँचल से मुँह, बंद कर चीखें दबा दी हलक में,, दिया घर का हवाला और, उसकी इज़्ज़त कुर्बान हो कर रह गई,, दिन तो कट जाता था , खुद को आँचल में छुपाते हुए,, रात उसका ज़िस्म जैसे राशन की दुकान हो कर रह गई,, उसने अपने रूप को सजाया था, साजो श्रृंगार से बहुत,, रूह उसकी उजड़ी , बिया वान हो कर रह गई,, अपने जन्म देने वाले के हक़ में, भी उसे कुछ कर गुजरना था,, अब वो मासूम बच्ची कहाँ,, नोट बनाने का सामान हो कर रह गई,, समाज के कुछ शरीफ़ चेहरे, रात अंधेरे में उनके पॉव को चूमते,, वही लड़की दिन के उजाले में, किसी की बेटी- बहन हो कर रह गई, भूखे पेट और घर में बुझता चूल्हा, में हिम्मत जब हर गई,, नौकरी की तलाश में दर दर भटकी, अब बदनाम हो कर रह गई,, कोई देवता , कोई प्रेमी, कोई साधु - संतों की दुकान में , कई चेहरे के रूप में इतना नोचा के, अब वो सिर्फ शमशान हो कर रह गई"

बंद दरवाज़े के पीछे , सिसकियां बंद हो के रह गई,,
एक बेटी की इज़्ज़त बाप के हाँथो, नीलाम हो के रह गई,,

जिसने उसे एक रुप दिया ,एक आकर दिया,,
उसी आकार की बोटी बोटी हराम हो कर रह गई,,

माँ ने आँचल से मुँह, बंद कर चीखें दबा दी हलक में,,
दिया घर का हवाला और, उसकी इज़्ज़त कुर्बान हो कर रह गई,,

दिन तो कट जाता था , खुद को आँचल में छुपाते हुए,,
रात उसका ज़िस्म जैसे राशन की दुकान हो कर रह गई,,

उसने अपने रूप को सजाया था, साजो श्रृंगार से बहुत,,
रूह उसकी उजड़ी , बिया वान हो कर रह गई,,

अपने जन्म देने वाले के हक़ में, भी उसे कुछ कर गुजरना था,,
अब वो मासूम बच्ची कहाँ,, नोट बनाने का सामान हो कर रह गई,,

समाज के कुछ शरीफ़ चेहरे, रात अंधेरे में उनके पॉव को चूमते,,
वही लड़की दिन के उजाले में, किसी की बेटी- बहन हो कर रह गई,

भूखे पेट और घर में बुझता चूल्हा, में हिम्मत जब हर गई,,
नौकरी की तलाश में दर दर भटकी, अब बदनाम हो कर रह गई,,

कोई देवता , कोई प्रेमी, कोई साधु - संतों की दुकान में , 
कई चेहरे के रूप में इतना नोचा के, अब वो सिर्फ शमशान हो कर रह गई

#nojotoapp#nojotonews

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"#OpenPoetry jo zindagi k safar me sath h.. zruri to nhi k wo dil me v ho.."

#OpenPoetry jo zindagi k safar me sath h..
zruri to nhi k wo dil me v ho..

 

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