OM BHAKAT

OM BHAKAT "MOHAN,(कलम मेवाड़ की) Lives in Rajsamand, Rajasthan, India

मैं ओम भक्त मोहन,,,,,कवि,लेखक,गज़ल , संगीत, सामाजिक कार्य कर्ता,राष्ट्रीय सेवा योजना,स्काउटर,प्रवक्ता, और प्रकृति प्रेमी हुँ,,,,मुलत संगीत मेरी दुनियाँ है,,,,, विज्ञान मेरा जीवन

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",,जैसे आजाद हुआ पंछी,गुलामी की जंजीरो से,जैसे नुतन उडाने सिख रहा हो,नुतन द्विज नभमडंल में,,omj"

,,जैसे आजाद हुआ पंछी,गुलामी की जंजीरो से,जैसे नुतन उडाने सिख रहा हो,नुतन द्विज नभमडंल में,,omj

पराधीन सपनेहुँ सुख नाहिं,,,,,,,,,,,,,,,,,गोस्वामी तुलसीदास के द्वारा अंकित पंक्ति रामबाण सी है,, यह हमे ,,,,हम पंछी उन्मुक्त गगन के,पिंझड़ बंद ना गा पायेगे,,,,,,का शत प्रतिशत बिम्बार्पण है,,,,,जो आजादी को स्वर्ग कहता है,,,

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"क्योकि ममता की मार भी ईश्वर का उपहार है जो एक बचपन के गुजर जाने के बाद नसीब नही होती,,,omj"

क्योकि ममता की मार भी ईश्वर का उपहार है जो एक  बचपन के गुजर जाने के बाद नसीब नही होती,,,omj

माँ की मार ईश्वर का उपहार है, जो बचपन के बाद हर किसी के नसीब नही होती,,,ममता की मार वह पवित्र प्यार है जो हमेशा हमे सही रास्तो पर जाने का संकेत करती है जिसमे शत्रुता,द्वेषता नही होती,,,, सिर्फ अपने लाल का सुधार भविष्य होता है,,,,,,,,,,माँ की मार हमे जीवन जीना सीखा देती है जो बडे नसीब वालो को मिल ती है,,,, इसलिये माँ मारे गी,,,, ओम भक्त मोहन बनाम कलम मेवाड की कृत9549518477 @Harshul Pandey @Madhu Kaur @Darpana Singh @Lakshmi Srivastav @Wagish Chandra

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छोटा परिवार,सुखी परिवार,,,,,,म्हारे छोटो सो परिवार म्हारे खुशीयाँ रो आधार,,दाता मैं थाँसुँ काई माँगा,,,काई माँगा रे दाता मै थाँसुँ काई माँगा,,, परिवार नियोजन एक स्वर्णिम सलाह,,,,,, दोस्तों,,जनसंख्या विस्फोट हमारे देश की सबसे बडी समस्या है,,,जो भुखमरी,बेरोजगारी,आदि का कारण है,,अत परिवार नियोजन करे,,,,क्योकि छोटा परिवार सुखी परिवार,,यह केवल मेरा सुझाव है आप मानने को बाध्य नही है तथापि,,,,, विन्रम अपील,, ओम भक्त मोहन बनाम कलम मेवाड की9549518477

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ओम भक्त मोहन बनाम कलम मेवाड की

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"देश वतन मेरा वहाँ जा रहा है ,जिसके लायक था,,,परम वैभवं नेतुतंस्वराष्ट्रंम्,,"

देश वतन मेरा वहाँ जा रहा है ,जिसके लायक था,,,परम वैभवं नेतुतंस्वराष्ट्रंम्,,

देश मेरा विकास के चरम पर,अग्रसर है नित नित,,कदम कदम लिख रहा कहानी एक कदम पुरोधा,,निज जीवन का त्याग कर,बनकर वो संन्यासी सा राम,,,,,लेकर यह सकल्प ,,,,, सौगंध मुझे इस मिट्टी की,यह देश नही झुकने दुँगा,,,,,,,,,मेरा वतन विश्व पटल पर अपनी छाप छोडने जा रहा है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ओम भक्त मोहन बनाम कलम मेवाड की,,,,,,यह मेरे विचार है मेरे देखने का तरीका है,,हो सकता है मेरे विचार आपको पसंद नही लेकिन मै आपके विचारो को प्रकट करने मे सहायता करुँगा,,,,वाल्तेयर सर की यह पंक्ति मेरी प्रेरणास्त्रोत है

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