SAURABH SURYANSHI

SAURABH SURYANSHI

खुद ही लिखता हूं खुद ही को सुनाता हूं गाने तो नहीं आता फिर भी गुनगुनाता हूं क्या अच्छा क्या बुरा फर्क है नजरिए का दिल तू खुश रह हरपल यही समझाता हूं

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