Haseeb Anwer

Haseeb Anwer Lives in Bhopal, Madhya Pradesh, India

Engineer | Writer | Poet | shayar | Lyricist

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"हवा के साथ मुझें अब बहना आ गया , मुश्किलों को देखकर भी अब सहना आ गया , नही हिम्मत थी कभी लफ्ज़ों को बयां करने की इस भागदौड़ सी ज़िन्दगी में अब कहना आ गया। -Haseeb Anwer"

हवा के साथ मुझें अब बहना आ गया ,
मुश्किलों को देखकर भी अब सहना आ गया ,
नही हिम्मत थी कभी लफ्ज़ों को बयां करने की 
इस भागदौड़ सी ज़िन्दगी में अब कहना आ गया।

                                       -Haseeb Anwer

-Haseeb Anwer #nojotohindi

19 Love

"चलो आज कुछ तुम्हें किस्से सुनाता हूं , थोड़ी अपनी थोड़ी तुम्हारी बातें बताता हूं । वो जब पहली बार हम मिले थे उन गलियों में उन यादों को फिर से एक बार दोहराता हु । मैंने तो आज तक कोई शायरी लिखी भी नही बस तुम्हारे बातों को अपने शब्दों से सजाता हु । मैं तन्हा रह भी लेता हु ,और थोड़ा बेख़बर भी हु कभी मायुस बैठकर सिर्फ़ तुम्हें ही गुनगुनाता हु । मुझें कोई दूसरा क्या समझ सकता है अब उनकी सोच को मैं धुओं की तरह उड़ाता हु । तुम्हारे नाम का टैटू तो नही गुदवाया हु अब तक हा तुम्हारे नाम को ही हमेशा दिल में बसाता हु । जरूरी ये भी नही इश्क़ में शायरी करना , अब दिल की बातों को लफ्ज़ो तक बस ले आता हूं । चलो आज कुछ तुम्हें किस्से सुनाता हूं थोड़ी अपनी थोड़ी तुम्हारी बातें बताता हूं । -हसीब अनवर"

चलो आज कुछ तुम्हें किस्से सुनाता हूं , 
थोड़ी अपनी थोड़ी तुम्हारी बातें बताता हूं ।
वो जब पहली बार हम मिले थे उन गलियों में 
उन यादों को फिर से एक बार दोहराता हु ।
मैंने तो आज तक कोई शायरी लिखी भी नही 
बस तुम्हारे बातों को अपने शब्दों से सजाता हु ।
मैं तन्हा रह भी लेता हु ,और थोड़ा बेख़बर भी हु
कभी मायुस बैठकर सिर्फ़ तुम्हें ही गुनगुनाता हु । 
मुझें कोई दूसरा क्या समझ सकता है अब 
उनकी सोच को मैं धुओं की तरह उड़ाता हु ।
तुम्हारे नाम का टैटू तो नही गुदवाया हु अब तक 
हा तुम्हारे नाम को ही हमेशा दिल में बसाता हु । 
जरूरी ये भी नही इश्क़ में शायरी करना , 
अब दिल की बातों को लफ्ज़ो तक बस ले आता हूं ।
चलो आज कुछ तुम्हें किस्से सुनाता हूं 
थोड़ी अपनी थोड़ी तुम्हारी बातें बताता हूं ।

-हसीब अनवर

 

9 Love

"तेरी यादें भी बिल्कुल इस इतवार जैसी है ना चाह कर भी तुझे चाहना बेकार जैसी है । अब तो हर लफ्ज़ में तुम्हें ही समेटता हु मैं ये पहली दफा नही अब हर बार जैसी है । लगाना आंखों में काजल ये ख़ुमार जैसी है नज़र से फिर नज़र मिलाना बेकरार जैसी है अपने बदन से यू दुपट्टा ना सरकने देना तुम ये अदा भी तुम्हारी बेसुमार जैसी है । तुमसे मिलना और बिछड़ जाना त्यौहार जैसी है हर शाम उसी राह पर भटकना इंतजार जैसी है तुम्हें पाने की चाहत में सौ बार सजदा किया तुम्हारा मिलना भी कोई तलबगार जैसी है । इश्क़ में हर एक कि हालत भी बीमार जैसी है सब कुछ धुंधला सा है या फिर अंधकार जैसी है । अपने नज़रों से वार करना छोड़ भी दो अब तुम इस शहर में इश्क़ अब तो व्यापार जैसी है । ये दुनिया अब अकेली नही पुरी बाजार जैसी है कदम जहा भी रखो सारे घर बार जैसी है । इश्क़ करने के अलावा और कुछ हो नही सकता यहाँ के सारे लड़के अब लाचार जैसे है । -हसीब अनवर"

तेरी यादें भी बिल्कुल इस इतवार जैसी है
ना चाह कर भी तुझे चाहना बेकार जैसी है ।
अब तो हर लफ्ज़ में तुम्हें ही समेटता हु मैं
ये पहली दफा नही अब हर बार जैसी है ।

लगाना आंखों में काजल ये ख़ुमार जैसी है
नज़र से फिर नज़र मिलाना बेकरार जैसी है
अपने बदन से यू दुपट्टा ना सरकने देना तुम
ये अदा भी तुम्हारी बेसुमार जैसी है ।

तुमसे मिलना और बिछड़ जाना त्यौहार जैसी है
हर शाम उसी राह पर भटकना इंतजार जैसी है
तुम्हें पाने की चाहत में सौ बार सजदा किया
तुम्हारा मिलना भी कोई तलबगार जैसी है ।

इश्क़ में हर एक कि हालत भी बीमार जैसी है
सब कुछ धुंधला सा है या फिर अंधकार जैसी है ।
अपने नज़रों से वार करना छोड़ भी दो अब तुम
इस शहर में इश्क़ अब तो व्यापार जैसी है ।

ये दुनिया अब अकेली नही पुरी बाजार जैसी है
कदम जहा भी रखो सारे घर बार जैसी है ।
इश्क़ करने के अलावा और कुछ हो नही सकता
यहाँ के सारे लड़के अब लाचार जैसे है ।

-हसीब अनवर

इतवार जैसी है । #nojoto #OpenPoetry

9 Love

"किसी को इश्क हुआ किसी को प्यार हुआ हमे तो जब भी हुआ सर्दी और बुखार हुआ ।"

किसी को इश्क हुआ किसी को प्यार हुआ 
हमे तो जब भी हुआ सर्दी और बुखार हुआ ।

 

9 Love

"मेरे ख़्वाबो की तुम एक कहानी बन गयी , तकिये , चादर सब के सब पानी बन गयी"

मेरे ख़्वाबो की तुम एक कहानी बन गयी ,
तकिये , चादर सब के सब पानी बन गयी

 

8 Love