Rashmi Arya

Rashmi Arya Lives in Varanasi, Uttar Pradesh, India

N.R एक दिल हैं एक जान हैं दोनों तुझपे कुर्बान हैं 💞💞

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"त्यौहार तो अपनो के साथ ही मनाने के लिए बना हैं|बिन अपनो के त्यौहार फीकी होती हैं|आप जीवन में कितने बड़े ओहदे पर हो ,कुछ भी हो,पर त्यौहार घर पर ही मनाये|खुशियाँ अपनो से बाँटने पर और बढ़ती हैं|इसलिए समय निकाल के अपनो के साथ त्यौहार मनाये ना कि दूर से| पता नहीं आज हो हम कल ना रहे| रश्मि आर्य"

त्यौहार तो अपनो के साथ ही मनाने के लिए बना हैं|बिन अपनो के त्यौहार फीकी होती हैं|आप जीवन में कितने बड़े ओहदे पर हो ,कुछ भी हो,पर त्यौहार घर पर ही मनाये|खुशियाँ अपनो से बाँटने पर और बढ़ती हैं|इसलिए समय निकाल के अपनो के साथ त्यौहार मनाये ना कि दूर से|
पता नहीं आज हो हम कल ना रहे|

रश्मि आर्य

अपनो से दूर होके कोई त्यौहार ,कोई मना नहीं सकता|क्योकिं त्यौहार अपनो के लिए ही बनाया गया हैं💞💞💞💞

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"ज़िंदगी की शाम कितनी हसीन कितनी प्यारी थी वो शाम जो मैंने तुम्हारे संग बितायी थी| सच कहूँ वो मेरे ज़िंदगी की सबसे कीमती शाम थी...... रश्मि आर्य"

ज़िंदगी की शाम कितनी हसीन कितनी प्यारी थी
वो शाम 
जो मैंने तुम्हारे संग बितायी थी|
सच कहूँ 
वो मेरे ज़िंदगी की सबसे कीमती
शाम थी......
रश्मि आर्य

मेरी ज़िंदगी की सबसे खुबसूरत शाम
जो गुजारी थी मैंने तुम संग|

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"माँ का आँचल हजार बार गिर जाओ उठाती हैं माँ| गम कितना भी हो मुस्काती हैं माँ| वैसे तो लज्जा ही स्त्री का गहना हैं| सबके सामने ही दूध पिलाती हैं माँ|| पिता के मार और डाँट से बचा के| अपने आँचल में मुझे छुपाती हैं माँ|| रश्मि आर्य"

माँ का आँचल हजार बार गिर जाओ उठाती हैं माँ|
गम कितना भी हो मुस्काती हैं माँ|
वैसे तो लज्जा ही स्त्री का गहना हैं|
सबके सामने ही दूध पिलाती हैं माँ||
पिता के मार और डाँट से बचा के|
अपने आँचल में मुझे छुपाती हैं माँ||

रश्मि आर्य

हर गम में मुस्काती हैं माँ......

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"#Joker दिल में छुपे दर्द कब तक छुपाओगे|| जोकर बन सबको कब तक हँसाओगे| कोई नही समझता यहाँ दर्द किसी का| अपने आप को कब तक रूलाओगे||"

#Joker  दिल में छुपे दर्द कब तक छुपाओगे||
जोकर बन सबको कब तक हँसाओगे|
कोई नही समझता यहाँ दर्द किसी का|
अपने आप को कब तक रूलाओगे||

जोकर बन कब तक दूसरो को हँसाओगे.....

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"इश्क़ का अंजाम माना तू मेरी किस्मत में नहीं बस इसलिए तुझे छोड़ दूँ? ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं तो क्या मैं जीना छोड़ दूँ ? माना हक नहीं मेरा तुझपर तो परवाह करना छोड़ दूँ? माना कि हम मिल नहीं सकते तुझे खुदा से माँगना छोड़ दूँ? रश्मि आर्य"

इश्क़ का अंजाम माना तू मेरी किस्मत में नहीं 
बस इसलिए तुझे छोड़ दूँ?
ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं
तो क्या मैं जीना छोड़ दूँ ?
 माना हक नहीं मेरा तुझपर
तो परवाह करना छोड़ दूँ?
माना कि हम मिल नहीं सकते
तुझे खुदा से माँगना छोड़ दूँ?

रश्मि आर्य

#ishq मेरी किस्मत में नहीं तो क्या इश़्क करना छोड़ दूँ....

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