पिंकू कुमार झा

पिंकू कुमार झा Lives in Gandhinagar, Gujarat, India

काव्य और हिंदी साहित्य के प्रति घोर निष्ठावान... “हम बाहरी दुनिया में तब तक शांति नहीं पा सकते हैं जब तक कि हम अन्दर से शांत न हों।”

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"अपने आप के भी पीछे खड़ा हूँ मैं, ऐ जिंदगी कितना धीरे चला हूँ मैं । मुझे जगाने जो और भी हसीन होकर आते थे , उन ख्वाबों को सच समझकर सोया रहा हूँ मैं । ©पिंकू कुमार झा"

अपने आप के भी पीछे खड़ा हूँ मैं,
ऐ जिंदगी कितना धीरे चला हूँ मैं ।
मुझे जगाने जो और भी हसीन होकर आते थे ,
उन ख्वाबों को सच समझकर सोया रहा हूँ  मैं ।

©पिंकू कुमार झा

#Nojoto

13 Love

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"दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाये वो मिट्टी है जो ना मिले सोना है अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा हर पल पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को आकाश की चादर है धरती का बिछौना है ©पिंकू कुमार झा"

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये वो मिट्टी है जो ना मिले सोना है

अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है

ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर पल पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है

आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है

©पिंकू कुमार झा

#Bate

#Darknight

21 Love

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"कहना था बहुत कुछ पर फर्क कहाँ पड़ता है हँसने मुस्कुराने से जख्म कहाँ भरता है उन्हें जाना था कही और थोड़ी देर ठहर गए थे मनोरंजन के काबिल हम ही पात्र रह गए थे क्या बुरा क्या भला अब कौन सा हम भी अच्छे है पर अंजान थे उस खेल के जिसके तब वो पक्के थे। @pkjha"

कहना था बहुत कुछ पर 
फर्क कहाँ पड़ता है
हँसने मुस्कुराने से
जख्म कहाँ भरता है 
उन्हें जाना था कही और 
थोड़ी देर ठहर गए थे 
मनोरंजन के काबिल 
हम ही पात्र रह गए थे
क्या बुरा क्या भला अब
कौन सा हम भी अच्छे है
पर अंजान थे उस खेल के
जिसके तब वो पक्के थे।

@pkjha

#दिल की बात

47 Love

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"है मुझको मालूम, हवाएँ ठीक नहीं हैं क्योंकि दर्द के लिए दवाएँ ठीक नहीं हैं गजलें भी अपनी राग सुनाती रही मगर असर मेरी जख्मों पे बिल्कुल ठीक नही हैं । वैसे, जो सबके उसूल, मेरे उसूल हैं लेकिन ऐसे भी नहीं कि बिल्कुल फिजूल हैं तय है ऐसी हालत में, कुछ घाटे होंगे- लेकिन ऐसे सब घाटे मुझको क़बूल हैं। बातें भी ऐसी है अब सही नही जाती है, मुँह देखे की भी है पर कही नही जाती है मैं कैसे उनसे, प्रणाम के रिश्ते जोडूँ- जिनकी नाव पराए घाट ही बही जाती है ।"

है मुझको मालूम, हवाएँ ठीक नहीं हैं
क्योंकि दर्द के लिए दवाएँ ठीक नहीं हैं
गजलें भी अपनी राग सुनाती रही मगर
असर मेरी जख्मों पे बिल्कुल ठीक नही हैं ।

वैसे, जो सबके उसूल, मेरे उसूल हैं
लेकिन ऐसे भी नहीं कि बिल्कुल फिजूल हैं
तय है ऐसी हालत में, कुछ घाटे होंगे-
लेकिन ऐसे सब घाटे मुझको क़बूल हैं।

बातें भी ऐसी है अब  सही नही जाती है,
मुँह देखे की भी है पर कही नही जाती है
मैं कैसे उनसे, प्रणाम के रिश्ते जोडूँ-
जिनकी नाव पराए घाट ही बही जाती है ।

#दिलकीबात

68 Love

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"मेरे मन का दीपक तब हर पथ पर दिये जलाता है मुँदी-मुँदी-सी इन अँखियों में स्वप्न नए बरसाता है भूल के ममता की हर लोरी तोड़ के मन-तन की हर डोरी देश की सीमाओं पर हँस-हँस प्राणों की जब खेले होरी वो सैनिक है कमल राष्ट्र का नेह से शीश झुकाता है भारत माँ के मुकुट को माणिक एक नया मिल जाता है । हर वीर सपूत को ये मेरा मन लख-लख बार नमन कर जाता है ।"

मेरे मन का दीपक तब हर
पथ पर दिये जलाता है
मुँदी-मुँदी-सी इन अँखियों में
स्वप्न नए बरसाता है

भूल के ममता की हर लोरी
तोड़ के मन-तन की हर डोरी
देश की सीमाओं पर हँस-हँस
प्राणों की जब खेले होरी
वो सैनिक है कमल राष्ट्र का
नेह से शीश झुकाता है

भारत माँ के मुकुट को माणिक
एक नया मिल जाता है ।
हर वीर सपूत को ये मेरा मन
लख-लख बार नमन कर जाता है ।

#salutearmy

61 Love