Kunal Rajput (नज़र نظر)

Kunal Rajput (नज़र نظر)

ज़ख़्म-ए-दिल और दरपेश इक आइना अक्स कुछ भी नहीं शक्ल-ए-शाईरी है زخم ے دل اور درپیش اک آئنہ عکس کچھ بھی نہیں شکل ے شیری ہے ― नज़र / نظر

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"रही है (ग़ज़ल) तहज़ीब हाफ़ी"

रही है (ग़ज़ल)
तहज़ीब हाफ़ी

#Tahzeeb_haafi

किसे ख़बर है कि उम्र बस उस पे ग़ौर करने में कट रही है
कि ये उदासी हमारे जिस्मों से किस ख़ुशी में लिपट रही है

अजीब दुख है हम उस के हो कर भी उस को छूने से डर रहे हैं
अजीब दुख है हमारे हिस्से की आग औरों में बट रही है

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#jaunElia

काम की बात मैं ने की ही नहीं
ये मिरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं

ऐ उमीद ऐ उमीद-ए-नौ-मैदाँ
मुझ से मय्यत तिरी उठी ही नहीं

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#ghazal

मैं उसको चाह के अपने मकान में भी नहीं
न ख़ुद में रह सका उसके जहान में भी नहीं
میں اسکو چاہ کے اپنے مکان میں بھی نہیں
ن خد میں رہ سکا اسکے جہاں میں بھی نہیں

कहानी के सभी उनवान से तो मिट चुका था

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"रक्खा है (ग़ज़ल)"

रक्खा है (ग़ज़ल)

#ghazal

जाने किस किस ने क्या क्या छुपा रक्खा है
शक्ल की आड़ ने सब रिदा रक्खा है

جانے کس کس نے کیا کیا چھپا رکّھا ہے
شکل کی آڑ نے سب ردا رکّھا ہے

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#ghazal

मुझे कभी भी कोई भी हुनर नहीं आया
सुख़न का शौक़ था बे-शक़ मगर नहीं आया
مجھے کبھی بھی کوئی بھی ہنر نہیں آیا
سخن کا شوق تھا بے شق مگر نہیں آیا
न जाने कौन सी वहशत थी सब तड़प रहे थें
मगर कोई भी उधर से इधर नहीं आया

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