#अंजान_लेखक™

#अंजान_लेखक™ Lives in Bhopal, Madhya Pradesh, India

seraching myself in my own words.... क्या फ़र्क पड़ता है कौन हूँ मैं, मेरे शब्दों में मेरे जज़्बात पढ़ सकते हो,इतना ही काफ़ी है...

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"मोहब्बत ख़त्म करके भी उसे दोस्ती की चाह थी, पर मेरे जलते हुए दिल में बस चीखें और आह थी §©®_अंजान लेखक™§"

मोहब्बत ख़त्म करके भी
उसे दोस्ती की चाह थी,
पर 
मेरे जलते हुए दिल में 
बस चीखें और आह थी

§©®_अंजान लेखक™§

#Dard #आह #Pyar #Dosti #अंजान_लेखक™

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"उनकी फ़िक्र क्यों है जिन्हें लौट कर नहीं आना, भुला दो उन्हें भी जैसे गुज़रा हो ज़माना हाल अपना बता कर भी तुमको क्या मिलेगा छोड़ जाने वालों से क्या फिर से दिल जुड़ेगा निकल गए एक बार वो, उस मोड़ से आगे, अब राह तकतें नैनों को शायद ही वो दिखेगा बढ़ो आगे ज़िंदगी में, और भी कई ख़्वाब हैं इश्क़ से भी कीमती, यहाँ और भी तो ताज हैं §©®_अंजान लेखक™§"

उनकी फ़िक्र क्यों है जिन्हें
लौट कर नहीं आना,
भुला दो उन्हें भी 
जैसे गुज़रा हो ज़माना 
                                                    हाल अपना बता कर भी
तुमको क्या मिलेगा
छोड़ जाने वालों से
क्या फिर से दिल जुड़ेगा

निकल गए एक बार वो, 
उस मोड़ से आगे, 
अब राह तकतें नैनों को 
शायद ही वो दिखेगा 
                                                  बढ़ो आगे ज़िंदगी में, 
और भी कई ख़्वाब हैं
इश्क़ से भी कीमती,
 यहाँ और भी तो ताज हैं

 §©®_अंजान लेखक™§

#Zindagi #इश्क़

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"मुद्दतों बाद फिर से मोहब्बत के बादल बरसने को हैं, और कम्बख़्त मन है जो अब तलक बीमार सा है §©®_अंजान लेखक™§"

मुद्दतों बाद फिर से
मोहब्बत के बादल बरसने को हैं,
और कम्बख़्त मन है
 जो अब तलक बीमार सा है
§©®_अंजान लेखक™§

#Mann #बादल #mohabbat #Tanhai #अंजान_लेखक™

68 Love

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"गिरवीं रख देंगे ख़ुद को हम, बस मीठे बोल ही बोल तो दे । हर दर्द बयां कर देंगे हम, कोई नज़रों से मन तौल तो दे ।। - §©®_अंजान लेखक™§"

गिरवीं रख देंगे ख़ुद को हम, 
बस मीठे बोल ही बोल तो दे । 
हर दर्द बयां कर देंगे हम, 
कोई नज़रों से मन तौल तो दे ।।
            - §©®_अंजान लेखक™§

#Girvii #Mann #nazar #Dil @इश्क़

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"बेबस ये मन लाचार सा है उस इश्क़ में ये बीमार सा है हो चला है करने मनमर्जी बारिश के जैसा ख़ुमार सा है क्या क्या सोचे है ये दिन भर जैसे सालों के साल सा है मुझसे मुझको ही छीन लिया फिर भी चाहत ही यार का है §©®_अंजान लेखक™§"

बेबस ये मन लाचार सा है
उस इश्क़ में ये बीमार सा है

हो चला है करने मनमर्जी
बारिश के जैसा ख़ुमार सा है

क्या क्या सोचे है ये दिन भर
जैसे सालों के साल सा है

मुझसे मुझको ही छीन लिया
 फिर भी चाहत ही यार का है
§©®_अंजान लेखक™§

#इश्क़

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