RJ PandiT

RJ PandiT Lives in Kanpur, Uttar Pradesh, India

तुम्हें खुद से कंहा फुर्सत, हम अपने गम से कब खाली। चलो बस हो गया मिलना ,न तुम खाली न हम खाली।।

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#शायरी

#Nojoto

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तुमने मोहब्बत देखी है , वफ़ा नही देखी। पिंजरे खोल भी दो , तो कुछ पंछी उड़ा नही करते।। ©RJ PandiT

#शायरी #Photos  तुमने मोहब्बत देखी है , वफ़ा नही देखी।

पिंजरे खोल भी दो , तो कुछ पंछी उड़ा नही करते।।

©RJ PandiT

#Photos #Nojoto #Love

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नोजोटो कभी तो शो पूरा चलने दो🙏

नोजोटो कभी तो शो पूरा चलने दो🙏

Tuesday, 18 October | 12:45 am

76 Bookings

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सजी थी झूठ की महफ़िल, बड़े फनकार बैठे थे।

सजी थी झूठ की महफ़िल, बड़े फनकार बैठे थे।

Monday, 17 October | 11:11 pm

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#प्रेरक

हारेंगे नही दोस्त #Nojoto

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हर दिन की तरह आज भी स्कूल की घण्टी बजने वाली थी। जल्दी घर जाने की नही थी, बेचैनी तो इस बात की थी कि वो कंही दूर न निकल जाए। उसके साथ घर तक जाना न जाने क्यों जिंदगी का सबसे बेहतरीन सफर लगता था। उसके घर से थोड़ा पहले ही दूर हो जाता था, क्योंकि उसकी बूढ़ी दादी हमेशा बाहर चबूतरे पर बैठी रहती थी। पर ये क्या "आज वो बूढ़ी दादी नही दिखी तो" न जाने क्यों मेरी उत्सुकता का प्रमुख आकर्षण वो खाली चबूतरा था। सायद निश्छल बचपन इसी को कहते हैं, सारी बेचैनी इस बात की थी कि दादी ठीक तो है, वो खाली चबूतरा मानो खुद में निराश बैठा हो अपने अकेलेपन से परेशान , उस पुराने चबूतरे की शान थी वो बूढ़ी दादी। हाँ मेरे बचपन वाले प्यार में कंही रोड़ा जरूर थी, पर उसे देख कर भी अच्छा लगता था। आज वो गली ,वो चबूतरा, वो मकान सब खाली है। बूढ़ी दादी, वो और हमारा बचपन। सब खुद को खोज रहे हैं , जिंदगी है कि दूर निकलती जा रही।✍️ ©RJ PandiT

#ज़िन्दगी #nojohindi #dadiji #Walk  हर दिन की तरह आज भी स्कूल की घण्टी बजने वाली थी।
जल्दी घर जाने की नही थी, 
बेचैनी तो इस बात की थी कि वो कंही दूर न निकल जाए।
उसके साथ घर तक जाना न जाने क्यों जिंदगी का सबसे बेहतरीन सफर लगता था।
उसके घर से थोड़ा पहले ही दूर हो जाता था, क्योंकि उसकी बूढ़ी दादी हमेशा बाहर चबूतरे पर बैठी रहती थी।
पर ये क्या "आज वो बूढ़ी दादी नही दिखी तो" न जाने क्यों मेरी उत्सुकता का प्रमुख आकर्षण वो खाली चबूतरा था।

सायद निश्छल बचपन इसी को कहते हैं, सारी बेचैनी इस बात की थी कि दादी ठीक तो है, वो खाली चबूतरा मानो खुद में निराश बैठा हो अपने अकेलेपन से परेशान , उस पुराने चबूतरे की शान थी वो बूढ़ी दादी।
हाँ मेरे बचपन वाले प्यार में कंही रोड़ा जरूर थी, पर उसे देख कर भी अच्छा लगता था।
आज वो गली ,वो चबूतरा, वो मकान सब खाली है।
बूढ़ी दादी, वो और हमारा बचपन।
सब खुद को खोज रहे हैं , 
जिंदगी है कि दूर निकलती जा रही।✍️

©RJ PandiT

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