sukriti Rai

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I am keen of writing poems in Hindi by observing the nature around me I love painting and sketching I too sing and dance as my hobby I help people with disabilities and make them stand by their own on their feet I am NCC cadet and nss volunteer I enjoy listening soft music and also find of eating etc

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"ना धरती की तरह समथल है ना हवा की तरह अविरल है ना अग्नि की भांति ज्वलनशील है उसका अस्तत्व तो इस धरती पर स्थीर है उसका होना एक पीर है वो निरंतर बहती नीर है।"

ना धरती की तरह समथल है
ना हवा की तरह अविरल है
ना अग्नि की भांति ज्वलनशील है
उसका अस्तत्व तो इस धरती पर स्थीर है
उसका होना एक पीर है
वो  निरंतर बहती  नीर है।

#नीर

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"हो सके तो अपना ध्यान रखना वरना धुएं में तो लोग भी खो जाते है आंसू निकले आखों से तो चेहरे की तासीर भी दिख जाते है।"

हो सके तो अपना ध्यान रखना 
वरना धुएं में तो लोग भी खो जाते है
आंसू निकले आखों से
तो चेहरे की तासीर भी दिख जाते है।

#वो हो सके तो!

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"कंकड़ माटी की दुनिया है जहां देखो वहा कोई ना कोई बसा है आते जाते से मुझे लोग दिखाई देते है अनजानों से एक अलग पहचान करवा देते है ऐसे देखोगे तो दिखेगा नहीं मेरे शहर में प्यार से भरे लोग बस्ते है। होता है मंदिर की घंटी का शोर तो कभी तप से तप करने सी शांति ताता बंधता सा दिखाई देता है कभी तो सुनसान सी गालियां नजर आए कभी गलियों और चौबारे को बस नजर भर कर देखती हूं यूं तो कभी नहीं जाती मै बाहर पर अपने शहर को अपने ही अन्दर महसूस कर लेती हूं हवाओं का झोंका मुझे अलग ही मस्ती में लेकर जाता है जब बरसात हो जाए तो बूंद भी उसके साथ प्रेम रस गाते जाते है ये शहर मेरा कैसा है आने जाने वालों से कई बार सुनाई देता है। "

कंकड़ माटी की  दुनिया है
जहां देखो वहा कोई ना कोई बसा है
आते जाते से मुझे लोग दिखाई देते है
अनजानों से एक अलग पहचान करवा देते है
ऐसे देखोगे तो दिखेगा नहीं
मेरे शहर में प्यार से भरे लोग बस्ते है।

होता है मंदिर की घंटी का शोर 
तो कभी तप से तप करने सी शांति
ताता बंधता सा दिखाई देता है कभी 
तो सुनसान सी गालियां नजर आए कभी 

गलियों और चौबारे को बस नजर भर कर देखती हूं
यूं तो कभी नहीं जाती मै बाहर 
पर अपने शहर को अपने ही अन्दर महसूस कर लेती हूं

हवाओं का झोंका  मुझे अलग ही मस्ती में लेकर जाता है
जब बरसात हो जाए तो बूंद भी उसके साथ प्रेम रस गाते जाते है
ये शहर मेरा कैसा है 
आने जाने वालों से कई बार सुनाई देता है।

#MeraShehar #Mera Sheher

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"टूटी हुई तो ना थी बस जुड़ने का इंतजार था कलम किया हुआ गुलाब था जो थी तो कली बस फूल बनने का इंतजार था मुरझा जाती है कभी कभी जब प्यास की तलब होती थी पानी भरमार था बस उसे कोई पीला दे इसी चाहत का इंतजार था टूट ज़रूर जाऊंगी पर बिखरूंगी नहीं हाथो में शोभा देती थी पर उसकी बनूंगी नहीं कभी कांटो से था मेरा वास्ता तो क्या जिसके हाथों में सज जाऊ उसको इश्क़ करवा दूं जो मुझे खुद से जुदा करे उसको नफरत का एहसास दिला दूं कलम की हुई तो थी बस कलम से लिख जाने का इंतजार था।"

टूटी हुई तो ना थी
बस जुड़ने का इंतजार था
कलम किया हुआ गुलाब था
जो थी तो कली बस 
फूल बनने का इंतजार था
मुरझा जाती है कभी कभी
जब प्यास की तलब होती थी
पानी भरमार था
बस उसे कोई पीला दे
इसी चाहत का इंतजार था
टूट ज़रूर जाऊंगी पर बिखरूंगी नहीं
हाथो में शोभा देती थी
पर उसकी बनूंगी नहीं कभी 
कांटो से था मेरा वास्ता  तो क्या 
जिसके हाथों में सज जाऊ उसको इश्क़ करवा दूं
जो मुझे खुद से जुदा करे
उसको नफरत का एहसास दिला दूं
कलम की हुई तो थी
बस कलम से लिख जाने का इंतजार था।

#टूटी से बिखरा नहीं करते।

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#tujheapnepass

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