दमन कटारिया

दमन कटारिया

हरियाणवी,हिंदी कवियाऐ

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"तु तै गई भुल मेरे पै तु क्योकर भुली जावैगी दिल रात मन्ने तु बैरन कितना अक सतावैगी आख बंद पे भी तु, आख खुले पे भी तु दिख्खै यै आख लाल रहन लगी इनमे कै खून कडवावैगी ना आता मेरे पे बोलना झूठ ना मारना कोई बेमौत न्यु बता मेरे मरे पै वो पीला सुट पहण के आवैगी नाम एक बै लिख कै कई बै मिटा दिया है तेरा इब के पेज नी अपने नाम की पूरी किताब पावैगी मेरी किस्मत ते "दमन" पै जा रही है म्हारे घर का "दीप" कद बुझावैगी तु तै गई भुल मेरे पे तु क्योकर भुली जावैगी"

तु तै गई भुल मेरे पै तु क्योकर भुली जावैगी
दिल रात मन्ने तु बैरन कितना अक सतावैगी
आख बंद पे भी तु, आख खुले पे भी तु दिख्खै
यै आख लाल रहन लगी इनमे कै खून कडवावैगी

ना आता मेरे पे बोलना झूठ ना मारना कोई बेमौत
न्यु बता मेरे मरे पै वो पीला सुट पहण के आवैगी
नाम एक बै लिख कै कई बै मिटा दिया है तेरा
इब के पेज नी अपने नाम की पूरी किताब पावैगी

मेरी किस्मत ते "दमन" पै जा रही है 
म्हारे घर का "दीप" कद बुझावैगी 
तु तै गई भुल मेरे पे तु क्योकर भुली जावैगी

भुली जावैगी

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"कोई किसी ले रहा है कोई किसी ले रहा है तु बता अपने भीतर चीज किसी ले रहा है कोई बना दे मखोल शरीफ की बाता का ले कोई शरीफ ऐ औरा के जीसे ले रहा है जो भाई बोल के दोखा कर जा,उसते कह दो अपने धोरे राख जिगरै मै चाहे बात जीसी ले रहा है जो कईया का बेबी ,सोना ,जानु,पानु बन कै रह लिया उस ते क्योकर कहु कै तु चीज कसुती ले रहा है न्यु हल्वै मै ना ले ईस लठ मार मेरी बोली नै मेरी बोली तै ऐ स्वाद तु देशी घी कै ले रहा है ढंग ते बोल ले कर यार "दमन" तु भी सब ते बेमतलब मे सबकी इग्लिश कै जीसे ले रहा है कोई किसी ले रहा है................................"

कोई किसी ले रहा है कोई किसी ले रहा है 
तु बता अपने भीतर चीज किसी ले रहा है
कोई बना दे मखोल शरीफ की बाता का 
ले कोई शरीफ ऐ औरा के जीसे ले रहा है
जो भाई बोल के दोखा कर जा,उसते कह दो
अपने धोरे राख जिगरै मै चाहे बात जीसी ले रहा है
जो कईया का बेबी ,सोना ,जानु,पानु बन कै रह लिया
उस ते क्योकर कहु कै तु चीज कसुती ले रहा है
न्यु हल्वै मै ना ले ईस लठ मार मेरी बोली नै
मेरी बोली तै ऐ स्वाद तु देशी घी कै ले रहा है
ढंग ते बोल ले कर यार "दमन" तु भी सब ते
बेमतलब मे सबकी इग्लिश कै जीसे ले रहा है
कोई किसी ले रहा है................................

#चीज_कौण_किसी_ले_रहा_है
#हरियाणा#हरियाणवी
#हरियाणवी_कविता

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"प्यार होगा मन्ने तेरे ता है थोड़ा सा इंसाफ करिए मेरी नजर लागी तेरे मन में तु रह माफ करिए वह तेरा हंसना चाल ना बोलना गाना बाहगया रै कुछ गलत कह दिया हो मन्नै माफ करिए चोट लगी तेरे थी जी मेरा कती टूट गया था कुछ ज्यादा कह दि हो मन्नै माफ करिए मेरा प्यार तेरे ताई सदा बना रहेगा रो रो ना दोबारा मन्नै तु उदास करिए तेरा खिलखिलाते चेहरा उम्मीद है मेरी किसी दिन मेरी बात लागगै गलत माफ करिए मैं चाहूं तू आवे सुर्ख जोड़े में घर मेरे मेरे दिल में कुछ और हो तब बात साफ करिए जो बात है प्यार की सदा छुपाए राख्खुगा कदे तन्नै जरूर पडे इस सन्यासी न याद करिये"

प्यार होगा मन्ने तेरे ता है थोड़ा सा इंसाफ करिए 
मेरी नजर लागी तेरे मन में तु रह माफ करिए

 वह तेरा हंसना चाल ना बोलना गाना बाहगया रै
 कुछ गलत कह दिया हो मन्नै माफ करिए 

चोट लगी तेरे थी जी मेरा कती टूट गया था
 कुछ ज्यादा कह दि हो मन्नै माफ करिए

 मेरा प्यार तेरे ताई  सदा बना रहेगा
 रो  रो ना दोबारा मन्नै तु  उदास करिए 

तेरा खिलखिलाते चेहरा उम्मीद है मेरी
 किसी दिन मेरी बात लागगै गलत माफ करिए 

मैं चाहूं तू आवे सुर्ख जोड़े में घर मेरे मेरे 
दिल में कुछ और हो तब बात साफ करिए 

जो बात है प्यार की सदा छुपाए राख्खुगा
कदे तन्नै जरूर पडे इस सन्यासी न याद करिये

 

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"बढ़ रही है जब बुराई राम की खामोशी का का क्या कारण है मै हु शिवभक्त नाम मेरा रावण है आज का राम व्यस्त कहां है लेने में अग्नि परीक्षा आज के साधु भी हो गए हैं पापी सही से दो रामायण की शिक्षा फिर वह कृष्ण चुप बैठा क्यों है इन रेपो पर लगता है पड़ी है सबको अपनी अपनी कुर्सी की प्रतिष्ठा इन हादसों का अब कोई बचा क्या तारण है में हु शिवभक्त नाम मेरा रावण है मेरे पुतलो की ऊंचाई से बुराई का पता लगाया जाता है मानव पाप ये तेरा यह क्यों नहीं बताया जाता है वह सीता आज भी अग्नि परीक्षा दे रही है "राम" आज भी उसको अग्नि परिक्षा से गुजारा जाता है मैं तो हो गया बची तपिश और ये जलावन है मे हु शिव भक्त मेरा नाम रावण है ज्ञान में शान में कई मर्यादा पुरुषोत्तम पर भारी हूं ब्राह्मण हूं धर्म से शिव का परम पुजारी हूं सीता का साफ चरित्र दिया था उसको मैंने उसकी हार से जीत की मेरी जीत से हार की जंग आज भी जारी है देखो दशमी अश्विन की पर "दीप" जले मेरे कारण है मै हु शिवभक्त मेरा नाम रावण है"

बढ़ रही है जब बुराई राम की खामोशी का का क्या कारण है
 मै हु शिवभक्त नाम मेरा रावण है
 
आज का राम व्यस्त कहां है लेने में अग्नि परीक्षा 
आज के साधु भी हो गए हैं पापी सही से दो रामायण की शिक्षा
 फिर वह कृष्ण चुप बैठा क्यों है इन रेपो पर 
लगता है पड़ी है सबको अपनी अपनी कुर्सी की प्रतिष्ठा 
इन हादसों का अब कोई बचा क्या तारण है 
 में हु शिवभक्त नाम मेरा रावण है 

मेरे पुतलो की ऊंचाई से बुराई का पता लगाया जाता है
 मानव पाप ये तेरा यह क्यों नहीं बताया जाता है
 वह सीता आज भी अग्नि परीक्षा दे रही है "राम" 
आज भी उसको अग्नि परिक्षा से गुजारा जाता है
 मैं तो हो गया बची तपिश  और ये जलावन है 
मे हु शिव भक्त मेरा नाम रावण है
 
ज्ञान में शान में कई मर्यादा पुरुषोत्तम पर भारी हूं
 ब्राह्मण हूं धर्म से शिव का परम पुजारी हूं 
सीता का साफ चरित्र दिया था उसको मैंने
 उसकी हार से जीत की मेरी जीत से हार की जंग आज भी  जारी है 
देखो दशमी अश्विन की पर "दीप" जले मेरे कारण है
 मै हु  शिवभक्त मेरा नाम रावण है

रावण हु

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"उस पीले सुट मै मन्नै तु गणी ऐ काच्ची लागे है औ! रामपाल तु मन्नै गणी ऐ आच्छी लाग्गै है खरगोश की डाला हाससै है तु कदै कदै कदै बांदरी की डाला मेरे ते तु रूससे है कदै होजा इतनी मिठ्ठी कदै इतनी कडवी कै नीरी नान खटाई खावै सै अर फ्रुटी नीरी चूसे है सपने मै आना तेरा मन्नै बात या भी कई बै साच्ची लाग्गै है ओ रामपाल.............. देख चाद तारे तोडने आली बात मेरे पास आती नी प्यार है मन्नै तेरे त या बात मन्नै नाट्टी नी अर ईसा है तेरे चक्कर मे कुत्ता की होड़ ना करू कुत्ता होजा चाहे भारी कितना शेर वाली बात आती नी बार-2 यार बदले तेरे भी ब्याह की जल्दबाजी लगी लाग्गै है ओ रामपाल....................... मटक मटक चाल्लै इतनी कितना कहर डावैगी थम जा ना दोबारा पाह मै मोच आ जावैगी अर आख्या ते ऐ हा ना कर दे समझ जाऊगा मै इतना जहर भर भित्तरलै मे कित जावैगी "दिप" तेरे "नैना" मै के सपने रूक गे जो आख लाल है दिल पे तेरे या चोट ताजा लगी लाग्गै है ओ रामपाल............................."

उस पीले सुट मै मन्नै तु गणी ऐ काच्ची लागे है 
औ! रामपाल तु मन्नै गणी ऐ आच्छी लाग्गै है

खरगोश की डाला हाससै है तु कदै कदै
कदै बांदरी की डाला मेरे ते तु रूससे है 
कदै होजा इतनी मिठ्ठी कदै इतनी कडवी
कै नीरी नान खटाई खावै सै अर फ्रुटी नीरी चूसे है 
सपने मै आना तेरा मन्नै बात या भी कई बै साच्ची लाग्गै है
ओ रामपाल.............. 

देख चाद तारे तोडने आली बात मेरे पास आती नी
प्यार है मन्नै तेरे त या बात मन्नै नाट्टी नी
अर ईसा है तेरे चक्कर मे कुत्ता की होड़ ना करू
कुत्ता होजा चाहे भारी कितना शेर वाली बात आती नी
बार-2 यार बदले तेरे भी ब्याह की जल्दबाजी लगी लाग्गै है
ओ रामपाल....................... 

मटक मटक चाल्लै इतनी कितना कहर डावैगी
थम जा ना दोबारा पाह मै मोच आ जावैगी
अर आख्या ते ऐ हा ना कर दे समझ जाऊगा मै
इतना जहर भर भित्तरलै मे कित जावैगी
"दिप" तेरे "नैना" मै के सपने रूक गे जो आख लाल है
दिल पे तेरे या चोट ताजा लगी लाग्गै है 
ओ रामपाल.............................

प्यारी लाग्गै है

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