Safar Ka musafir

Safar Ka musafir Lives in Amlar, Madhya Pradesh, India

अनजान ही सही कोई रिश्ता तो हुआ, में ना सही मेरी यादों ने तो तुझे छुवा. आग लगा लो छुप के तुम, कहीं तो दिखाई देगा धुआ.।

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"रिश्ते एक नाज़ुक सा बंधन सारी दुनिया से परे प्यार को भी अपने वश में कर ले उसी का नाम रिश्ता है कितना भी नाराज़ हो कितना भी परेशान हो बस परिवार कहे हम है ना तो सब ठीक हो जाता है। *माँ पापा*"

रिश्ते एक नाज़ुक सा बंधन 
सारी दुनिया से परे 
प्यार को भी अपने वश में कर ले
उसी का नाम रिश्ता है

कितना भी नाराज़ हो कितना भी परेशान हो
बस परिवार कहे हम है ना तो सब ठीक हो जाता है। 


*माँ पापा*

aap ka to har dam sath he warna me lad jau duniya se esi mujhse kaha baat hai।

32 Love

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"ये दुनिया के खेलो से दूर चलना मेरे यार, ये वो ही है जो भाई को भाई नहीं रहने देते।"

ये दुनिया के खेलो से दूर चलना मेरे यार,
ये वो ही है जो भाई को भाई नहीं रहने देते।

we all indian ।।।।।

31 Love

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"इश्क़ और चर्चा सारी दुनिया से छुपा के बिना किसी से पूछे किया गया एक काम इश्क़ और इस सारे जन्हा को देख कर इश्क से दूर होना पड़े वो कारण चर्चा वो होता है ना, इश्क़ अच्छा रहा बस चर्चे ने जन ले ली।"

इश्क़ और चर्चा सारी दुनिया से छुपा के
बिना किसी से पूछे किया 
गया एक काम इश्क़
और 
इस सारे जन्हा को देख कर इश्क से
दूर होना पड़े वो कारण
चर्चा 
वो होता है ना, इश्क़ अच्छा रहा 
बस चर्चे ने जन ले ली।

चर्चे बहुत थे मेरी मोहब्बत के अगर में भी ना सोचता किसी का तो यार मेरे साथ होता।

31 Love

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"शाम और इंतज़ार बहुत उदास होकर हर शाम में तेरा इंतजार करता हूं , ए दिल, जान ,जिंदगी कैसे बताऊं में तुझे आज भी वैसे ही प्यार करता हूं"

शाम और इंतज़ार बहुत उदास होकर हर शाम में तेरा इंतजार करता हूं ,
ए दिल, जान ,जिंदगी कैसे बताऊं में तुझे आज भी     
वैसे ही प्यार करता हूं

इंतजार आज भी तेरी याद बन के साथ है।

28 Love

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"हुनर तजुर्बों से ज्यादा अब में हुनर को देखने लगा हूं, भूक मिटाई जिसने अब में उसको फेकने लगा हूं। इंसान हूं में हर किसी को समझाना पड़ता है , भर जाए किसी का पेट फिर बाकी सारा खाना सड़ता है खिला दो किसी भूखे को बहुत कुछ मिलता हे, बड़ी से बड़ी खाई में गिरा इंसान भी जिंदा निकलता है।"

हुनर तजुर्बों से ज्यादा अब में हुनर को देखने लगा हूं,
भूक मिटाई जिसने अब में उसको फेकने लगा हूं।
इंसान हूं में हर किसी को समझाना पड़ता है ,
भर जाए किसी का पेट फिर बाकी सारा खाना सड़ता है


खिला  दो किसी भूखे को बहुत कुछ मिलता हे,
बड़ी से बड़ी खाई में गिरा इंसान भी जिंदा निकलता है।

har baat ka mtlb he or insaan Bhi mtlbi hi।

26 Love