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"ek dost aisa bhi hai mera"

ek dost aisa bhi hai mera

 ज़ख्म दिल मे कुछ यूँ समेट कर बैठा है, कोई आरज़ू है , जो दिल मे दबा कर बैठा है ।एक दोस्त कुछ ऐसा भी है मेरा खुद को कत्ल कर डाला दूसरों  की खातिर ।हाले-दिल भी न बता सका  ,डर था उसे कहीं कोई खता ना कर बैठे ,ज़ख्म दिल मे कुछ यूँ समेट कर बैठा है, कोई आरज़ू है , जो दिल मे दबा कर बैठा है ।एक दोस्त कुछ ऐसा भी है मेरा ।

चेहरे की ख़ामोशी सब बयाँ करती है , आंखों का उसकी वो नम सा रहना ,बतलाता है जैसे ज़रूरत है उसे तेरी।सादगी कुछ ऎसी भी है उसमें ,मानो दिल को दरिया बना बैठा हो ।

कैसे जीता होगा वो तन्हा उसकी यादों मे, रोता होगा ना वो तन्हाईओं मे अक्सर छुप -छुप के ,जब तेरी  यादें दिल चरती होंगी उसका , कितनी तकलीफ होती होगी न उसे जब वो उसके सामने से गुजरता होगा ,ज़ख्म दिल मे कुछ यूँ समेट कर बैठा है, कोई आरज़ू है , जो दिल मे दबा कर बैठा है ।एक दोस्त कुछ ऐसा भी है मेरा ।

खुद को चुका होगा ना वो अब तक , तुझे तलाश करते करते ,

इस उम्मीद पे ज़िन्दा होगा शायद  ,कोई कयामत हो और तू लौट आये , कयामत की तलाश में रोज मरता होगा ना वो , जिंदा तो होगा फिर भी ना जाने क्यों ज़िन्दगी की तलाश करता होगा ना वो, खुदा से फ़रियाद किया करता होगा तेरे लौट आने की  और फिर उसका टूट जाना ,मानो जैसे उसकी हर साँस का सिसकियों में बदलती चली जा रही हो, ना जाने कितनी तकलीफ में जीता होगा ना वो शक़्स ,ओर वो शक़्स ज़ख्म दिल मे कुछ यूँ समेट कर बैठा है, कोई आरज़ू है , जो दिल मे दबा कर बैठा है ।एक दोस्त कुछ ऐसा भी है मेरा।


कैसे रहगुज़र करता होगा ना वो ,तेरे बिन, अब तक तो उसे ये दुनिया उसे दुश्मन सी नज़र आने लगी होगी , ओर उसके दिल में एक डर घर बना चुका होगा अब तक ,यूँ डर -डर के तन्हाइयों में कैसे जीता होगा ना वो ,दोस्तों का वो दगा करना ना जाने कितनी दफा याद आता होगा उसे ,सोते वक्त भी वो करवटें बदलता फिरता होगा , हाले-दिल भी ना बता सका वो   ,डर था उसे कहीं कोई खता ना कर बैठे ,ज़ख्म दिल मे कुछ यूँ समेट कर बैठा है, कोई आरज़ू है , जो दिल मे दबा कर बैठा है ।एक दोस्त कुछ ऐसा भी है मेरा।
#Friend#Life#Pain#Love#Poetry

36 Love

मेरी पहली मुलाकात हो तुम,मेरी माँ हो तुम।

साया बनके हर पल जो साथ रही मेरे ,हर एक मुसीबत पे जिसका नाम मेरी ज़ुबाँ पर सबसे  पहले आया , मेरी ज़िंदगी का वो हसीं ख्वाव हो तुम ,मेरी पहली मुलाकात हो तुम मेरी माँ ही तुम ।

हमेशा पलकों पे मोतियों सा सजाया है तुमने मुझे ,मेरे हर ज़ख्म  का दर्द जिसने  यूँ ही बेबजह सहा ,मेरे ज़िन्दगी का वो सबसे हसीन खुदा हो तुम,मेरी पहली मुलाकात हो तुम , मेरी माँ  हो ।

दुनिया में प्यार के तमाम खज़ानों में सबसे बड़ा प्यार का खजाना हो तुम, मेरी पहली मुलाकात हो तुम, मेरी माँ हो तुम।

कितनी फिक्र होती है ना तुम्हें मेरी, जो कभी मुझे ख़रोंच भी तो माँ की सांसे रुक जाया करती हैं ।जो कभी मैं बारिश में थोड़ा भीग जाऊँ तो , माँ का वो एहसास मानो हम समुद्र में डूब के आये हों।कितना प्यारा लगता है ना।

इस पूरी कायनात का सबसे खूबसूरत चेहरा हो तुम, वैसे तो चांद सबसे रौशन है,पर उस चांद से भी तेज रोशनी की मिसाल हो तुम। मेरी पहली मुलाकात हो तुम,मेरी माँ हो तुम।

हर दिन ना जाने कितनी दफा कितनी दफा याद करती होगी वो हमें,हर पल ना जाने कितनी दुआएं देती होगी वो हमें,न जाने कितनी रातें जागते हुए गुज़री होगी उसकी , सिर्फ हमें सुलाने के लिए ।

ना जाने क्यों मेरी गलतियों को हर दफा नज़र अंदाज़ कर देती है वो , सच कहूं तो मुझे उसमे खुदा नज़र आता है, सच में पूरी कायनात हो तुम ।मेरी पहली मुलाकात हो तुम,मेरी माँ हो तुम।


खुद कितनी भी तकलीफ मे क्यों न  हो फिर भी सबकुछ भूल के हमारे ख़्याल मे लग जाती है।

एक पल की फुरसत भी नहीं है उसके पास , मेरे लिए आशियाँ जो बनाना है ।

मुसाफिर बना डाला हमारी ज़ररूरतों ने, माँ को।

ज़िन्दगी का एक सच्चा एहसास है माँ। ज़िन्दगी की सबसे बडी जररूत है माँ ।

ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल माँ ने दिए है। इस पूरे जहांन पर भारी है एक माँ।

खुशियों के एक अनमोल सफर में ही बीते उसकी ये तमाम उम्र, मेरी माँ को ज़िन्दगी की वो उम्र देना ।

मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन ख्वाब हो तुम ,मेरी पहली मुलाकात हो तुम,मेरी माँ हो तुम।
#Mother#Motherslove#Life#Wholeworld

19 Love

मेरी पहली मुलाकात हो तुम,मेरी माँ हो तुम।

साया बनके हर पल जो साथ रही मेरे ,हर एक मुसीबत पे जिसका नाम मेरी ज़ुबाँ पर सबसे  पहले आया , मेरी ज़िंदगी का वो हसीं ख्वाव हो तुम ,मेरी पहली मुलाकात हो तुम मेरी माँ ही तुम ।

हमेशा पलकों पे मोतियों सा सजाया है तुमने मुझे ,मेरे हर ज़ख्म  का दर्द जिसने  यूँ ही बेबजह सहा ,मेरे ज़िन्दगी का वो सबसे हसीन खुदा हो तुम,मेरी पहली मुलाकात हो तुम , मेरी माँ  हो ।

दुनिया में प्यार के तमाम खज़ानों में सबसे बड़ा प्यार का खजाना हो तुम, मेरी पहली मुलाकात हो तुम, मेरी माँ हो तुम।

कितनी फिक्र होती है ना तुम्हें मेरी, जो कभी मुझे ख़रोंच भी तो माँ की सांसे रुक जाया करती हैं ।जो कभी मैं बारिश में थोड़ा भीग जाऊँ तो , माँ का वो एहसास मानो हम समुद्र में डूब के आये हों।कितना प्यारा लगता है ना।

इस पूरी कायनात का सबसे खूबसूरत चेहरा हो तुम, वैसे तो चांद सबसे रौशन है,पर उस चांद से भी तेज रोशनी की मिसाल हो तुम। मेरी पहली मुलाकात हो तुम,मेरी माँ हो तुम।

हर दिन ना जाने कितनी दफा कितनी दफा याद करती होगी वो हमें,हर पल ना जाने कितनी दुआएं देती होगी वो हमें,न जाने कितनी रातें जागते हुए गुज़री होगी उसकी , सिर्फ हमें सुलाने के लिए ।

ना जाने क्यों मेरी गलतियों को हर दफा नज़र अंदाज़ कर देती है वो , सच कहूं तो मुझे उसमे खुदा नज़र आता है, सच में पूरी कायनात हो तुम ।मेरी पहली मुलाकात हो तुम,मेरी माँ हो तुम।


खुद कितनी भी तकलीफ मे क्यों न  हो फिर भी सबकुछ भूल के हमारे ख़्याल मे लग जाती है।

एक पल की फुरसत भी नहीं है उसके पास , मेरे लिए आशियाँ जो बनाना है ।

मुसाफिर बना डाला हमारी ज़ररूरतों ने, माँ को।

ज़िन्दगी का एक सच्चा एहसास है माँ। ज़िन्दगी की सबसे बडी जररूत है माँ ।

ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल माँ ने दिए है। इस पूरे जहांन पर भारी है एक माँ।

खुशियों के एक अनमोल सफर में ही बीते उसकी ये तमाम उम्र, मेरी माँ को ज़िन्दगी की वो उम्र देना ।

मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन ख्वाब हो तुम ,मेरी पहली मुलाकात हो तुम,मेरी माँ हो तुम।
#Mother#Motherslove#Life#Wholeworld

17 Love
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कुछ चीज़ें पत्थर की सही,अच्छी तो है ना ।

कुछ लोगों की ज़िंदगी न सही ज़िन्दा तो है ना ।

टूटा हुआ दिल हो या कोई पत्थर ही सही ,

आरज़ू है , लोगों के तोड़ने के काम आएगा ।

सड़क के किसी कोने में बैठा बिखारी और एक मुस्कुराता हुआ बच्चा दोनों को देख इस दिल को स्कून सा मिलता है ।

मंदिर मे उस मूर्ति का होना , एहसास है वो मूर्ति पत्थर की सही ज़िन्दा इंसानो से बेहतर तो है ना ।

कुछ चीज़ें पत्थर की सही,अच्छी तो है ना।

चेहरे की मुस्कान हो या लबों की खामोशी ही सही ,

रहने के लिए आशियाँ हो या झोंपड़पट्टी ही सही ,

स्कून है दिल को कुछ न सही कुछ तो है ना ।

कुछ चीज़ें पत्थर की सही,अच्छी तो है ना।

किसी की याद मे आंख से छलकता हुआ वो आँसू,

या फिर किसी की आने की ख़ुशी  में आंखों का छलकना, दोनो में फर्क तो है ना।कुछ चीज़ें पत्थर की सही,अच्छी तो है ना।

किसी के पास बेशुमार दौलत का होना ,किसी के पास दो वक़्त की रोटी ही न सही,किसी के पास ज़िन्दगी की तमाम खुशियां किसी के आंखों की वो नमी ही सही  ,माना यहाँ कुछ लोगों की ज़िंदगी न सही फिर स्कून है दिल को वो ज़िन्दा तो है ना ।माना यहाँ कुछ चीजें पत्थर की है , वो पत्थर ख़ुदा ही सही ,कुछ चीज़ें पत्थर की सही,अच्छी तो है ना।

अगर इंसान -इंसान की मदद करता, तो मंदिर में वो पत्थर की मूर्ति ना होती ।फिर भी स्कून है इस दिल को इंसानो में इंसानियत ना सही ,पत्थर में खुदा की बन्दगी तो है ना ।

कुछ चीज़ें पत्थर की सही,अच्छी तो है ना।

#Love#Stones#God#Quotes#Poetry

17 Love

चले क्यों नहीं जात्ते हो तुम ,मैं तन्हा ही अच्छा हूं ।

माना यहाँ खामोशियों के डेरे हैं ,कोई रहगुजर नहीं ,

था वक़्त वो कोई, जब कभी तन्हाई दिल चीर के मेरी सांसे तक

रोक दिया करती थी , अब तो मेरी सांसे भी मुझे तन्हा छोड़ कर चली गईं ,तुम्हारा होना भी अब तुम्हारे ना होने सा लगता है,चले क्यों नहीं जात्ते हो तुम ,मैं तन्हा ही अच्छा हूं।


इत्तेफाक सी है अब तो जिंदगी भी मेरी ,  दर्द में भी स्कून सा मिलता है , ढलता हुआ सूरज और सबका घर की तरफ लौटना ,   मैं आज भी वहीं का वहीं, पर फिर भी अच्छा लगता है ,तुम्हारे होने के बाबजूद भी तुम्हारे होने का एहसास ना होने से तो कहीं बेहतर है कि तुम चले जाओ ,मैं तन्हाईओं का घर बना के ही रह लूँगा, अब तुम चले भी जाओ ।

चले क्यों नहीं जात्ते हो तुम , मैं तन्हा ही अच्छा हूं ।


हज़्ज़ारों चहरों से इत्तेफाक रखता हूं मैं ,तुम मेरा यकीन करो ,

हर चेहरा एक सा नहीं है यहाँ ,पर ना जाने क्यों सबकी शख्सियत एक सी नज़र आती है । शायद तभी तो मुझे ज़िन्दगी पथर मैं नज़र आती है । दिल करता है मैं भी पथर सा हो जाऊं ,अब मुझे पत्थर होना है तुम चले जाओ ,मैं तन्हा ही अच्छा हूं ।

अब तो जिंगदी की राहें भी अंधेरों मे नज़र सी आती है,

कमबखत ज़िन्दगी से भी क्या शिकवा करूँ ,आखिर है तो वो भी अपनी ही । सब सपनों सा नज़र आता है मुझे ,ख्वाहिश है एक सपना तो पूरा होगा ,सच कहूं तो शायद मेरी तन्हाई ही है मेरा सपना। अब चले क्यों नहीं जात्ते हो तुम ,मैं तन्हा ही अच्छा हूँ।

जी चाहता है , सब कुछ भुला के इस दुनिया को अलविदा कह

 दू,ओर खुद में सिमटने को जी चाहता है, ज़िन्दगी को छोड़ के सब निकले यहाँ बेबफा ,कितना अच्छा होता ना अगर ये ज़िन्दगी भी बेबफा होती ,अब तो बस तन्हा रहना चाहता हूं ,तुम चले क्यों नहीं जाते , मैं तन्हा ही अच्छा हूं ।


ज़िन्दगी भी सज़ा सी होगी ,जब मेरी किसी से बंदगी सी होगी ,कितनी खूबसूरत हो जाएगी ना ज़िन्दगी ,जब चारों ओर लाशें ही लाशें होगी ।अच्छा अब तुम चले भी जाओ ,मैं तन्हा ही अच्छा हूँ

#Life#Love#God#Poetry

17 Love