Saurabh sharma

Saurabh sharma Lives in Agra, Uttar Pradesh, India

एक शाम बेबक्त सी कोई, तोड़ दिया उसे । कलम पहले भी चलाई , बस एक मोड़ दिया उसे। #अहसास

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"ख्वाब गीले हो गए हैं निचोड़ दूँ क्या। हाथ पीले हो गए है उसके छोड़ दूँ क्या। #सौरभ"

ख्वाब  गीले  हो गए हैं  निचोड़ दूँ क्या।
हाथ पीले हो गए है उसके छोड़ दूँ क्या।

#सौरभ

#ज़िंदिगी एक रश्म है।

75 Love

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"इस पल को बड़े अरमानो से सजाया है। मेरे भीतर मैने कुछ चरागों को भुजाया है। मेरे सारे खजाने लुट गए छुपाते छुपाते, किसी अपने ने मेरी जागीर को तस्वीर में सजाया है। #सौरभ"

इस पल को बड़े अरमानो से सजाया है।
मेरे भीतर मैने कुछ चरागों को भुजाया है।

मेरे सारे खजाने लुट गए छुपाते छुपाते,
 किसी अपने ने मेरी जागीर को तस्वीर में सजाया है।

#सौरभ

तस्वीरो के सिलसिले।।।

66 Love

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"रातों में यादों की पनाह में सो जाता हूं। बात जब उससे करता हु तो खो जाता हूं। #अहसास"

रातों  में  यादों की पनाह  में सो जाता हूं।
बात जब उससे करता हु तो खो जाता हूं।

#अहसास

#ज़िंदिगी एक रश्म है।

61 Love

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"मुझे अपने कमरे के कोने में सुराख़ दिखता है। पता नही क्यों उसमे मकड़ी का ख्वाब दिखता है। मालुम था कि ये सपनो की दुनिया है, यहाँ आसमान तो हर रोज बिकता है। मैने एक रोज रूह में झाँककर देखा है, मुझे अभी भी अपनी माँ का नाम दिखता है। किसी पर प्यार भरी कहानी लिखना चाहता हूँ, हाथ तो प्यार के बाद सिर्फ माँ का नाम लिखता है।"

मुझे अपने कमरे  के  कोने  में सुराख़ दिखता है।
पता नही क्यों उसमे मकड़ी का ख्वाब दिखता है।

मालुम था कि ये सपनो की दुनिया है,
यहाँ आसमान तो हर रोज बिकता है।

मैने  एक  रोज  रूह  में  झाँककर  देखा  है,
मुझे अभी भी अपनी माँ का नाम दिखता है।

किसी  पर  प्यार भरी  कहानी  लिखना चाहता हूँ,
  हाथ तो प्यार के बाद सिर्फ माँ का नाम लिखता है।

#ज़िंदिगी एक रश्म है।

60 Love

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"रकीब की ज़िंदिगी खुशहाल करके, क्या मिला तुझे, मुझे बेहाल करके। तेरी मोह्हबत दिल में सलामत रखी है, फिर क्या मिला तुझे सवाल करके। #अहसास"

रकीब  की  ज़िंदिगी  खुशहाल  करके,
क्या   मिला तुझे,  मुझे  बेहाल  करके।
तेरी मोह्हबत दिल में सलामत रखी है,
फिर  क्या  मिला  तुझे  सवाल  करके।

#अहसास

#ज़िंदिगी एक रश्म है।

54 Love