BIKHRE PANNE

BIKHRE PANNE Lives in Bikaner, Rajasthan, India

poet.... @Bikhre_panne

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"#OpenPoetry आंखे टूट चुकी है , रूह काँपती हैं , साँसे रुक गयी हैं , धड़कने थम गयी हैं , उम्मीदे टूट गयी हैं , जिंदगी रूठ गयी हैं , ख्वाब मर चुके है , सपने बिखरे पड़े है , आह सीने में अटकी हैं , अब मेरे मर जाने से कोई ज्यादा फर्क नही पड़ेगा । -@Bikhre_panne"

#OpenPoetry आंखे टूट चुकी है ,
रूह काँपती हैं ,
साँसे रुक गयी हैं ,
धड़कने थम गयी हैं ,
उम्मीदे टूट गयी हैं ,
जिंदगी रूठ गयी हैं ,
ख्वाब मर चुके है ,
सपने बिखरे पड़े है ,
आह सीने में अटकी हैं ,

अब मेरे मर जाने से कोई ज्यादा फर्क नही पड़ेगा ।

-@Bikhre_panne

 

25 Love
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"Love quotes in hindi जिन आँसुओ की कीमत ने आसमानों को छूआ था दुनिया के व्यापार में ! वो मेरे अश्क कोड़ियों के दाम बिक गए तेरी मोहब्बत के बाजार में !! @Bikhre_panne. #NojotoQuote"

Love quotes in hindi जिन आँसुओ की कीमत ने आसमानों को छूआ था दुनिया के व्यापार में !
वो मेरे अश्क कोड़ियों के दाम बिक गए तेरी मोहब्बत के बाजार में !!



@Bikhre_panne.                  #NojotoQuote

 

24 Love

"यूँ लाश बन कर फिरना भी सही हैं 'जीत' , अगर सबको जिंदा नजर आओगे तो तुम्हारा कत्ल होता रहेगा । -@Bikhre_panne"

यूँ लाश बन कर फिरना भी सही हैं 'जीत'  ,
अगर सबको जिंदा नजर आओगे तो तुम्हारा कत्ल होता रहेगा ।

-@Bikhre_panne

 

23 Love

"#OpenPoetry जमी से उठा कर पत्थर मुझ पर फेक देता है , जमाना मुझको इंसान नही आसमान समझता हैं । एक शख्स जो बहुत करीब था मेरी रूह के , आजकल वो मुझको एक अनजान समझता हैं । घर से निकल कर रोज खुद की तलाश में जाता हूँ , लौटता हूँ शाम को तो घर मुझको मेहमान समझता हैं । मेरी आँखों के टूट कर बुझ जाने का ग़म नही मुझको, अफसोस हैं कि आईना अब मुझको श्मशान समझता हैं। -@Bikhre_panne"

#OpenPoetry जमी से उठा कर पत्थर मुझ पर फेक देता है ,
जमाना मुझको इंसान नही आसमान समझता हैं ।
एक शख्स जो बहुत करीब था मेरी रूह के ,
आजकल वो मुझको एक अनजान समझता हैं ।
घर से निकल कर रोज खुद की तलाश में जाता हूँ ,
लौटता हूँ शाम को तो घर मुझको मेहमान समझता हैं ।
मेरी आँखों के टूट कर बुझ जाने का ग़म नही मुझको,
अफसोस हैं कि आईना अब मुझको श्मशान समझता हैं।


-@Bikhre_panne

 

23 Love

"एक परिन्दा मर जाए तो बेहतर, रोज कुछ बुरा होता हैं । टूट जाना तो ठीक हैं मगर जुड़ कर टूट जाना बुरा होता हैं उससे पूछो जिसकी आँखे हर पल बहती रहती हैं , वो अपने जन्मदिन पर भी रोया इससे बुरा औऱ क्या होता हैं ।। वक्त का हर लम्हा उसका कत्ल कर रहा हैं बेदर्दी से , मर जाना चाहिए ऐसे शख्स को, उसका जिंदा रहना बुरा होता हैं -@Bikhre_panne"

एक परिन्दा मर जाए तो बेहतर, रोज कुछ बुरा होता हैं ।
टूट जाना तो ठीक हैं मगर जुड़ कर टूट जाना बुरा होता हैं 
उससे पूछो जिसकी आँखे हर पल बहती रहती हैं ,
वो अपने जन्मदिन पर भी रोया इससे बुरा औऱ क्या होता हैं ।।
वक्त का हर लम्हा उसका कत्ल कर रहा हैं बेदर्दी से ,
मर जाना चाहिए ऐसे शख्स को, उसका जिंदा रहना बुरा होता हैं 

-@Bikhre_panne

 

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