Akshita Jangid(poetess)

Akshita Jangid(poetess) Lives in Jaipur, Rajasthan, India

Insta./@jangid_akshi Write Every Moment

  • Latest
  • Popular
  • Repost
  • Video

""

"कुछ दिखा, पर धुंधला सा है रंग कही, कही बदला सा है देख रहे परवाने जिसको , बचा यहां सब नया सा है ओझल है, आंखो में सबके दिखा नहीं,कोई ख्वाब सा है एक साथी है, कई रंग लिए वो बेकार नही कमाल सा है कुछ दिखा, पर धुंधला सा है रंग कही, कही बदला सा है ©Akshita Jangid(poetess)"

कुछ दिखा, पर धुंधला सा है
रंग कही, कही  बदला सा है 

देख  रहे  परवाने  जिसको ,
बचा  यहां  सब  नया  सा है

ओझल  है, आंखो में  सबके
दिखा नहीं,कोई ख्वाब सा है

एक साथी है, कई  रंग  लिए
वो बेकार नही  कमाल सा है

कुछ दिखा, पर धुंधला सा है
रंग कही, कही  बदला सा है

©Akshita Jangid(poetess)

#moonlight

16 Love

""

"जमाना सारा अब बेपरवाह सा लग रहा है कुछ अपना तो कुछ पराया सा लग रहा है कैसे छिपाए, इश्क़ की ड़ोर हमसे भी छूटी है बिना जताए सब सुना-सुना सा लग रहा है बहती फिजाओं ने ख़ुशी के रंग घोले तो थे बदकिस्मती से अब सब बेरंग सा लग रहा है मंजिल मोहब्बत की ज्यादा कठिन ना थी लोगों का सुनकर, साथ छूटता सा लग रहा है महंगी ख्वाहिशों का असर जो कम होने लगा सस्ती यादों के भाव वो बिकता सा लग रहा है नसीब उसका , पर असर मुझ पर गहरा था वक़्त बदलते, हर सपना टूटता सा लग रहा है बहके नहीं किसी और की बातों से हम मोहब्बत में हर फैसला यूँ सजा सा लग रहा है बदलता, तो वो कभी इश्क़ नाम नहीं होता इश्क़ होते हुए भी वो कोई गुनाह सा लग रहा है जमाना सारा अब बेपरवाह सा लग रहा है कुछ अपना तो कुछ पराया सा लग रहा है ~Akshita Jangid"

जमाना  सारा अब  बेपरवाह  सा  लग रहा है 
कुछ  अपना तो कुछ  पराया  सा  लग रहा है 

कैसे  छिपाए, इश्क़ की ड़ोर हमसे भी छूटी है 
बिना  जताए  सब  सुना-सुना सा  लग रहा है

बहती  फिजाओं  ने  ख़ुशी के  रंग घोले तो थे 
बदकिस्मती से अब सब  बेरंग सा लग रहा है 

मंजिल  मोहब्बत  की  ज्यादा  कठिन  ना थी
लोगों का सुनकर, साथ छूटता सा लग रहा है

महंगी  ख्वाहिशों का असर जो कम होने लगा
सस्ती यादों के भाव वो बिकता सा लग रहा है

नसीब उसका , पर  असर  मुझ पर  गहरा था
वक़्त बदलते, हर सपना टूटता सा लग रहा है

बहके  नहीं   किसी  और   की  बातों  से  हम
मोहब्बत में हर फैसला यूँ सजा सा लग रहा है 

बदलता,  तो  वो कभी  इश्क़  नाम  नहीं होता
इश्क़ होते हुए भी वो कोई गुनाह सा लग रहा है  

जमाना  सारा अब  बेपरवाह  सा  लग रहा है 
कुछ  अपना तो कुछ  पराया  सा  लग रहा है 

~Akshita Jangid

 

40 Love

""

"मैं गज़ल नहीं, अपने भाव लिखती हूँ छिपाए सबसे, कई जज़्बात लिखती हूँ सुना है सबका, पर किया है मन का थोड़े आँसू ,तो, थोड़ा प्यार लिखती हूँ सबको पता और सब जानते है मुझे, ना जाने मैं किस अंजान को लिखती हूँ किस्मत खुली तो मोहब्बत देखी, मैं उसी से जुड़ा अब हर ख़्वाब लिखती हूँ तू मिला या नहीं मिला, मैं तेरी बातें किस्से या कोई नई कहानी लिखती हूँ रही है बातें और छिपे है जज़्बात जब हर पन्नें पर अपना नाम लिखती हूँ मैं गज़ल नहीं, अपने भाव लिखती हूँ छिपाए सबसे, कई जज़्बात लिखती हूँ ~Akshita Jangid"

मैं गज़ल नहीं, अपने भाव लिखती हूँ 
छिपाए सबसे, कई जज़्बात लिखती हूँ

सुना है सबका, पर किया है मन का
थोड़े आँसू ,तो, थोड़ा प्यार लिखती हूँ

सबको पता और सब जानते है मुझे, 
ना जाने मैं किस अंजान को लिखती हूँ

किस्मत खुली तो मोहब्बत देखी, मैं
उसी से जुड़ा अब हर ख़्वाब लिखती हूँ

तू मिला या नहीं मिला, मैं तेरी बातें
किस्से या कोई नई कहानी लिखती हूँ

रही है बातें और छिपे है जज़्बात
जब हर पन्नें पर अपना नाम लिखती हूँ

मैं गज़ल नहीं, अपने भाव लिखती हूँ 
छिपाए सबसे, कई जज़्बात लिखती हूँ

~Akshita Jangid

 

49 Love

""

"एक बात जब इश्क़ की सुनाई थी चार दफ़ा उसका नाम दोहराई थी सुनने को सब आज भी आतुर रहते पर जाने क्यों, सुनाकर मैं पछताई थी इश्क़-इश्क़ बोल कितना नाम पुकारा बदले में मुझे, सबसे मिली तन्हाई थी जब गहराई इश्क़ की नापने चली मैं कैसे कहुँ, मैंने वही हर राह भुलाई थी मोहब्बत से वो भी कभी मुकरा नहीं कुछ बातें मैंने दिल में अपने दबाई थी नफ़रत नहीं, अब बस ख़ामोश हो गई यादों को, मैं किस्सों में जो समाई थी यहाँ, इरादा इश्क़ का बस इश्क़ ही था ना समझ मैं ही इश्क़ गलत ठहराई थी एक बात जब इश्क़ की सुनाई थी चार दफ़ा उसका नाम दोहराई थी ~Akshita Jangid"

एक  बात  जब  इश्क़  की सुनाई  थी 
चार  दफ़ा  उसका  नाम  दोहराई  थी 

सुनने  को सब  आज भी आतुर रहते
पर जाने क्यों, सुनाकर मैं पछताई थी

इश्क़-इश्क़  बोल कितना नाम पुकारा
बदले में मुझे, सबसे मिली तन्हाई थी

जब गहराई  इश्क़ की  नापने चली मैं
कैसे कहुँ, मैंने वही हर राह भुलाई थी

मोहब्बत से  वो भी  कभी मुकरा नहीं
कुछ बातें मैंने दिल में अपने दबाई थी

नफ़रत नहीं, अब बस ख़ामोश हो गई 
यादों को, मैं  किस्सों  में जो समाई थी 

यहाँ, इरादा इश्क़ का बस इश्क़ ही था
ना समझ मैं ही इश्क़ गलत ठहराई थी

एक  बात  जब  इश्क़  की सुनाई  थी 
चार  दफ़ा  उसका  नाम  दोहराई  थी 

~Akshita Jangid

 

33 Love

""

"लोग आते है यहाँ, सिर्फ जाने के लिए बहुत कुछ बदला है इस जमाने के लिए खुशनुमा मिज़ाज यूँ धूमिल सा हो गया बताते है लोग, बस हमें रुलाने के लिए फ़ासला दरमियाँ सब से लेकर बैठे है मिलते है कभी तो सिर्फ सताने के लिए मोहब्बत है, तो फिर मज़बूरी कैसी ? सवाल पड़े है यहाँ जवाब पाने के लिए जमाने में इश्क़ सबका मशहूर ना हुआ कुछ लोग रहे है इश्क़ में फ़साने के लिए बातें इश्क़ की अक्सर खास ही रही ये बातें ही तो है, इश्क़ जताने के लिए चर्चा मोहब्बत का आज आम हो गया अब ये सही है, समय गुजारने के लिए यादों को बुलाने की जरुरत किसे है वो हमेशा तैयार है पास आने के लिए कहो तो, उनसे भी मुलाक़ात करा दे यहाँ सभी तैयार है हमें मिलाने के लिए लोग आते है यहाँ, सिर्फ जाने के लिए बहुत कुछ बदला है इस जमाने के लिए ~Akshita Jangid"

लोग  आते है यहाँ,  सिर्फ जाने के लिए 
बहुत कुछ बदला है इस जमाने के लिए

खुशनुमा मिज़ाज यूँ धूमिल सा हो गया
बताते है लोग, बस हमें रुलाने के लिए

फ़ासला  दरमियाँ सब  से लेकर बैठे है 
मिलते है कभी तो सिर्फ सताने के लिए

मोहब्बत  है, तो  फिर मज़बूरी  कैसी ? 
सवाल पड़े है यहाँ जवाब पाने के लिए

जमाने में इश्क़ सबका मशहूर ना हुआ 
कुछ लोग रहे है इश्क़ में फ़साने के लिए

बातें  इश्क़  की अक्सर  खास  ही  रही 
ये बातें  ही तो है, इश्क़  जताने के लिए 

चर्चा मोहब्बत का  आज आम हो गया 
अब ये  सही है, समय गुजारने के लिए

यादों  को  बुलाने  की जरुरत  किसे है 
वो हमेशा  तैयार है  पास आने के लिए

कहो तो, उनसे  भी  मुलाक़ात  करा दे 
यहाँ सभी तैयार है हमें मिलाने के लिए 

लोग  आते है यहाँ,  सिर्फ जाने के लिए 
बहुत कुछ बदला है इस जमाने के लिए

~Akshita Jangid

 

36 Love