Alok Tripathi

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आलोकजी शास्त्री इन्दौर

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"दिये जलायें ,,,,,,,,,,,,,,,,,,, भारत की संप्रभुता में मिल छोटा सा अभियान चलायें आलो मिलकर दिये जलायें अंधकार ये फैला देखो अपने घर में तुम भी बैठो विश्व महामारी को मिलकर घर में रक्षित होकर फेंको विश्व पताका फहरे अपनी एक प्रकाश की ज्योत दिखायें आओ मिलकर दिये जलायें,,,,, ये स्पर्श बिमारी दुश्कर मत उलझो तुम इसमें फंसकर कुंठित भाव निकालो मन से मिट सकते हो इसमें लुटकर मानवता के लिये चलो अब आज एकतासंघ बनायें आओ मिलकर दिये जलायें,,,,, आपस का विद्वेष त्यागकर मुरछा सेे अब उठो जागकर बन निर्भीक स्फूर्ति अपनाओ रखो हाथ में दिये जलाकर भय दुविधा की दुस्तरता से सबको अवगत आज करायें आओ मिलकर दिये जलायें,,,,,, देश प्रेम की अलख यही है यही एकता पुंज घडी़ है भारत मांता वरद् हस्त से आशिष देने आज खड़ी है मां के चरणों में झुककरके एक शूत्र की राग सुनायें आओ मिलकर दिये जलायें,,,, आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983"

दिये जलायें
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भारत की संप्रभुता में मिल
छोटा सा अभियान चलायें
आलो मिलकर दिये जलायें
अंधकार ये फैला देखो
अपने घर में तुम भी बैठो
विश्व महामारी को मिलकर
घर में रक्षित होकर फेंको
विश्व पताका फहरे अपनी
एक प्रकाश की ज्योत दिखायें
आओ मिलकर दिये जलायें,,,,,
ये स्पर्श बिमारी दुश्कर
मत उलझो तुम इसमें फंसकर
कुंठित भाव निकालो मन से
मिट सकते हो इसमें लुटकर
मानवता के लिये चलो अब
आज एकतासंघ बनायें
आओ मिलकर दिये जलायें,,,,,
आपस का विद्वेष त्यागकर
मुरछा सेे अब उठो जागकर
बन निर्भीक स्फूर्ति अपनाओ
रखो हाथ में दिये जलाकर
भय दुविधा की दुस्तरता से
सबको अवगत आज करायें
आओ मिलकर दिये जलायें,,,,,,
देश प्रेम की अलख यही है
यही एकता पुंज घडी़ है
भारत मांता वरद् हस्त से
आशिष देने आज खड़ी है
मां के चरणों में झुककरके
एक शूत्र की राग सुनायें
आओ मिलकर दिये जलायें,,,,
आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983

 

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"कोरोना ,,,,,,,,,,,,, सूनी सूनी राहें कुछ कहती हैं बस्ती में सन्नाटे की धुन बजती है सहमी सहमी हवा बह रही धीरे धीरे घर में कैद परिंदों की ये जंजीरे खुशियों का चहचहा नही दिखता है अब किलकारी बच्चों की मूक बनी है अब सूरज कब उग आता है छज्जे पर अपने पता नही चलता लगता है सब ये सपने इंशानों की चहल पहल बंध गइ घरों में पढे लिखों की सभी अकल झुक गइ दरों में पास पास रहकर दूरी सहने की आदत गाते हैं सब गीत सभी मिल एक स्वरों में आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983"

कोरोना
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सूनी सूनी राहें कुछ कहती हैं
बस्ती में सन्नाटे की धुन बजती है
सहमी सहमी हवा बह रही धीरे धीरे
घर में कैद परिंदों की ये जंजीरे
खुशियों का चहचहा नही दिखता है अब
किलकारी बच्चों की मूक बनी है अब
सूरज कब उग आता है छज्जे पर अपने
पता नही चलता लगता है सब ये सपने
इंशानों की चहल पहल बंध गइ घरों में
पढे लिखों की सभी अकल झुक गइ दरों में
पास पास रहकर दूरी सहने की आदत
गाते हैं सब गीत सभी मिल एक स्वरों में
आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983

 

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"करोना 2 ,,,,,,,,,,,,,,,, बार बार हाथों को साबुन से हमको अब धोना है ।किसको पता नही है फैला जग में आज करोना है । बच्चे बूढे़ नौजवान इसके नजरों बच जायें । बचकर रहें सभी कोइ इसके चंगुल में फंस जायें।। चीन और दुनियां में बस इसका हि रोना रोना है।। किसको पता नही,,,,,, इटली और इरान अमेरिका सबकी बुद्धी चतराइ ।कोशिस और खोज सबकी है इसके आगे शरमाइ ।। चीन आततायी की गलती सबको मिलकर ढोना है ।। किसको पता नही,,,,,,,,,, ज्योतिष कहता सूर्य बुध राहू का ताना बाना बाना है । जिसको महादशा लग जाये उसका नही ठिकाना है ।। कोइ कहता ये तो कोइ लगता जादू टोना है ।। किसको पता नही,,,,,,,,, मोदीजी ने समझाया है थाली शंख बजाओ तुम । मिलना जुलना बंद करो अब घर में किर्तन गाओ तुम ।। दूर रहो तुम सावधान जीवन को यदि संजोना है।। किसको पता नही,,,,,, सुनो महामारी है ये इसको हल्के में मत लेना ।। सरकारी आदेशों को अक्षरसः पालन कर लेना ।। कुछ दिन दूरी कर लोगों से इस पर विजय प्राप्त करलो। बाकी जीवन शाकाहारी में हि बस संचित कर लो ।। संयम और सुरक्षित जीवन प्राणायाम परायण हो ।जीवन में सुख चाहो तो नित पाठ करो रामायण हो । स्वच्छ और सादा जीवन में हमें समर्पित होना है ।। किसको पता नही,,,,,,, आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983"

करोना 2
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बार बार हाथों को साबुन से हमको अब धोना है ।किसको पता नही है फैला जग में आज करोना है ।
बच्चे बूढे़ नौजवान इसके नजरों बच जायें ।
बचकर रहें सभी कोइ इसके चंगुल में फंस जायें।।
चीन और दुनियां में बस इसका हि रोना रोना है।।
किसको पता नही,,,,,,
इटली और इरान अमेरिका सबकी बुद्धी चतराइ ।कोशिस और खोज सबकी है इसके आगे शरमाइ ।।
चीन आततायी की गलती सबको मिलकर ढोना है ।।
किसको पता नही,,,,,,,,,,
ज्योतिष कहता सूर्य बुध राहू का ताना बाना बाना है ।
जिसको महादशा लग जाये उसका नही ठिकाना है ।।
कोइ कहता ये तो कोइ लगता जादू टोना है ।।
किसको पता नही,,,,,,,,,
मोदीजी ने समझाया है थाली शंख बजाओ तुम ।
मिलना जुलना बंद करो अब घर में किर्तन गाओ तुम ।।
दूर रहो तुम सावधान जीवन को यदि संजोना है।।
किसको पता नही,,,,,,
सुनो महामारी है ये इसको हल्के में मत लेना ।।
सरकारी आदेशों को अक्षरसः पालन कर लेना ।।
कुछ दिन दूरी कर लोगों से इस पर विजय प्राप्त करलो।
बाकी जीवन शाकाहारी में हि बस संचित कर लो ।।
संयम और सुरक्षित जीवन प्राणायाम परायण हो ।जीवन में सुख चाहो तो नित पाठ करो रामायण हो ।
स्वच्छ और सादा जीवन में हमें समर्पित होना है ।।
किसको पता नही,,,,,,,
आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983

कोरोना

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