Chandra Shekhar

Chandra Shekhar Lives in Azamgarh, Uttar Pradesh, India

i m a writer and a chemist

shekharmall poetry

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"तुम्हारा जुनूने-ए-शहरीपन एक दिन आदमियत खा जायेगा tumhara junune -ye-saharipan yek din aadmiyat kha jayega save trees save invoirment"

तुम्हारा जुनूने-ए-शहरीपन
एक दिन आदमियत खा जायेगा

tumhara junune -ye-saharipan
yek din aadmiyat kha jayega

save trees save invoirment

save trees###save invoirment##nojoto

6 Love

ऐ शहर वालो तुम जिस इश्क की वकालत कर रहे हो ना
वो मेरे गावँ की पंचायतो मे सरेआम पेड़ो पर लटका दी जाती है
-शेखर

5 Love

"एक गीत समीक्षार्थ हेतु...🙏🙏🙏🙏 अब ना जायें हरिजन कोई उस मन्दिर के कोन किनारें पंडित जी फरमान सुनायें धोती बाधँ कर द्वारे -द्वारे.. रमुआ काका ने बोला हमने मन्दिर के चौखट बाँधे हरखू ने राममूर्ति को रात -रात तक कई बार तराशे बिदियाँ काका बोली हमने मैया की लाली कजरा की हमरे बेटा ने ही रामलल्ला को बासन के झूला डालें अब ना जायें हरिजन कोई उस कूऐं से पानी लाने पंडित जी फरमान सुनायें धोती बाधँ कर द्वारे -द्वारे.. काँपत करीम चचा ने बोला हमने भर मुहँ माटी खाया हम जानत है उस कूऐं मे पानी कैसे- कैसे आया जब एक लोटा ही पानी माँगत झीनिया बेहोश हुई बोले सब जानत है इन गाँवन तक सावन कैसे आया अब ना जायें हरिजन कोई खेतों मे कुदाल चलाने पंडित जी फरमान सुनायें धोती बाधँ कर द्वारे -द्वारे.. -शेखर"

एक गीत समीक्षार्थ हेतु...🙏🙏🙏🙏

अब ना जायें हरिजन कोई उस मन्दिर के कोन किनारें
पंडित जी फरमान सुनायें धोती बाधँ कर द्वारे -द्वारे..

रमुआ काका ने बोला हमने मन्दिर के चौखट बाँधे
हरखू ने राममूर्ति को रात -रात तक कई बार तराशे
बिदियाँ काका बोली हमने मैया की लाली कजरा की
हमरे बेटा ने ही रामलल्ला को बासन के झूला डालें

अब ना जायें हरिजन कोई उस कूऐं से पानी लाने
पंडित जी फरमान सुनायें धोती बाधँ कर द्वारे -द्वारे..

काँपत करीम चचा ने बोला हमने भर मुहँ माटी खाया
हम जानत है उस कूऐं मे पानी कैसे- कैसे आया
जब एक लोटा ही पानी माँगत झीनिया बेहोश हुई
बोले सब जानत है इन गाँवन तक सावन कैसे आया

अब ना जायें हरिजन कोई खेतों मे कुदाल चलाने
पंडित जी फरमान सुनायें धोती बाधँ कर द्वारे -द्वारे..
                                                        -शेखर

#Nojoto#harijan##shekharpoetry

5 Love

"ख़ामोशीं से थककर दीवारों से बातें करना यानी उन रातों का थककर फिर से रातें करना दुनिया बीमार-ए-इश्क समझ बैठी तो क्या कीजे हमनें तो अब तक चाहा था बस दों बाते करना -शेखर"

ख़ामोशीं से थककर दीवारों से बातें करना
यानी उन रातों का थककर फिर से रातें करना

दुनिया बीमार-ए-इश्क समझ बैठी तो क्या कीजे
हमनें तो अब तक चाहा था बस दों बाते करना
                                                       -शेखर

##Nojoto##khamushi##shekharpoetry

5 Love

"सबसे पहले पत्थर किसने मारा अल्लाह् जाने पर मारों- मारों की सबसे पहली आवाज उसी की थी sabse pahle patthar kisne mara allaha jane par maro- maro ki sabse pahli aawaj usi ki thi"

सबसे पहले पत्थर किसने मारा अल्लाह् जाने पर
मारों- मारों की सबसे पहली आवाज उसी की थी
sabse pahle patthar kisne mara allaha jane par
maro- maro ki sabse pahli aawaj usi ki thi

#Nojoto#pattgar#shekharpoetry

5 Love