Er. Dhiru Kohli

Er. Dhiru Kohli

  • Popular
  • Latest
  • Repost
  • Video

""

"निकल पड़ा हूं मंजिल की तलाश में, पर जाना अभी बहुत दूर है। थक रहा हूं चलते चलते , लेकिन मंजिल पाने का फितूर है। लाजमी है आपका कहना , देखकर मेरी हालत को। आजा बैठ थोड़ा सांस ले ले। पर साहब! आज बैठ गया तो बैठा रह जाऊंगा। अभी निकल जाता हूं, पहुंचकर मंजिल में फिर बैठ जाऊंगा। धीरज कोहली"

निकल पड़ा हूं मंजिल की तलाश में,
पर जाना अभी बहुत दूर है।
थक रहा हूं चलते चलते ,
लेकिन मंजिल पाने का फितूर है।
लाजमी है आपका कहना ,
देखकर मेरी हालत को।
आजा बैठ थोड़ा सांस 
ले ले।
पर साहब!
आज बैठ गया तो बैठा रह जाऊंगा।
अभी निकल जाता हूं,
पहुंचकर मंजिल में
फिर बैठ जाऊंगा।



                                         
                                                  धीरज कोहली

#alonesoul

54 Love
2 Share

""

"चोट जिस्म की तो अक्सर भर जाती है, पर चोट दिल की नासूर बन जाती है। कोई हालत देखकर हस्ता है, तो कोई उपहास के व्यंग कसता है। यूं तो समझौते खूब किए हैं जिंदगी से। कभी गम में भी हसे है, कभी खुशियों में भी खोए रहते हैं। बड़ी खुशियों की तो कभी आस तक नहीं की, और खुशियां भी हामारी रास्ता भटक गई हैं। शायद कोई नाराजगी है जिंदगी की मुझसे , होठों तक अाई हसी को भी लौटा देती है। सिसक –सिसक कर आंसू गिरते थे, पर कोई न हालत देखता था। पानी से आंसू खून बन गए, और दिलवाला यह देखकर हस्ता था। जो लाया था बनाकर जिंदगानी मुझको, उसी ने नज़रों पर गिराया था । कद्र न जानी उसने मेरी, गैरों की उसने मुझे बताया था । घुट–घुट कर मैने आंसू पिए है, और शब्दो के तीर खाए हैं। एक होती अकेली जान तो मेरी, मरना भी मुझको गवारा था। अब माली भी थी मै बगिया की अपनी, जिसमे सुंदर फूल खिले थे। बस जी रही हूं देखकर उनको, फिर भी जब मालिक से सितम मिले थे। मै सहारा थी उनकी जिंदगी का, और यह जान ही जीने का मकसद थे। सहन तो कर ली चोट चरित्र की, यह सोच की दर्द मिला भी तो अपनों से। हारी नहीं हूं खुद से कभी मै, ना जिंदगी कभी हार पाई है। अब तो गम में भी खुशियां ढूंढ लेती हूं, मेरी खुशियां ही मेरे बच्चो में समाई हैं। @ ✍️Dheeraj कोहली"

चोट जिस्म की तो अक्सर भर जाती है,
पर चोट दिल की नासूर बन जाती है।
कोई हालत देखकर हस्ता है,
तो कोई उपहास के व्यंग कसता है।
यूं तो समझौते खूब किए हैं जिंदगी से।
कभी गम में भी हसे है,
कभी खुशियों में भी खोए रहते हैं।
बड़ी खुशियों की तो कभी आस तक नहीं की,
और खुशियां भी हामारी रास्ता भटक गई हैं।
शायद कोई नाराजगी है जिंदगी की मुझसे ,
होठों तक अाई हसी को भी लौटा देती है।
सिसक –सिसक कर आंसू गिरते थे,
पर कोई न हालत देखता था।
पानी से आंसू खून बन गए,
और दिलवाला यह देखकर हस्ता था।
जो लाया था बनाकर जिंदगानी मुझको,
उसी ने नज़रों पर गिराया था ।
कद्र न जानी उसने मेरी,
गैरों की उसने मुझे बताया था ।
घुट–घुट कर मैने आंसू पिए है,
और शब्दो के तीर खाए हैं।
एक होती अकेली जान तो मेरी,
मरना भी मुझको गवारा था।
अब माली भी थी मै बगिया की अपनी,
जिसमे सुंदर फूल खिले थे।
बस जी रही हूं देखकर उनको,
फिर भी जब मालिक से सितम मिले थे।
मै सहारा थी उनकी जिंदगी का,
और यह जान ही जीने का मकसद थे।
सहन तो कर ली चोट चरित्र की,
यह सोच की दर्द मिला भी तो अपनों से।
हारी नहीं हूं खुद से कभी मै,
ना जिंदगी कभी हार पाई है।
अब तो गम में भी खुशियां ढूंढ लेती हूं,
मेरी खुशियां ही मेरे बच्चो में समाई हैं।

                                                   @ ✍️Dheeraj कोहली

# दर्द



#Min@kshi goy@l:-) @nanhi_shayrana/stories" title="@nanhi_shayrana">#@nanhi_shayrana #Isha Rajput #Vks Siyag #राधा.....राजपूत...💞

54 Love
1 Share

""

"मै करता हूं दीदार तेरा, पर लफ्ज़ नहीं है दीदारे हुस्न बयां करने को। तू है उस तराशी हुई मूरत की तरह, जो चंद तारीफों की मोहताज नहीं हैं। ♥️ धीरज कोहली"

मै करता हूं दीदार तेरा,
पर लफ्ज़ नहीं है दीदारे हुस्न बयां करने को।
तू है उस तराशी हुई मूरत की तरह,
जो चंद तारीफों की मोहताज नहीं हैं।

♥️

                    


                               धीरज कोहली

#allalone @खुले जहां के आजाद मुसाफ़िर

54 Love
2 Share

""

"हा जरूर ये रात आधी है, और दिल में दबी बात अधी है। तूने गम दिए, सितम दिए तो क्या? हैरान क्यों हो? अभी तो ये सांस बाकी है। धीरज कोहली"

हा जरूर ये रात आधी है,
 और दिल में दबी बात अधी है।
तूने गम दिए, सितम दिए 
तो क्या?
हैरान क्यों हो?
अभी तो ये सांस बाकी है।





                     
                                   धीरज कोहली

#मुसाफ़िर ज़िन्दगी के

49 Love
4 Share

""

"देखकर मेरी नम आंखों को, लगे हैं पूछने लोग मुझसे। इतने गम में क्यों हो? उनके पूछने का शुक्रिया भी हमने यूं अदा किया, जनाब! ये गम समझने की ख्वाहिश ही तो हमे खुशी देती है। धीरज कोहली"

देखकर मेरी नम आंखों को,
लगे हैं पूछने लोग मुझसे।
इतने गम में क्यों हो?
उनके पूछने का शुक्रिया भी हमने यूं अदा किया,
जनाब!
ये गम समझने की ख्वाहिश ही तो हमे खुशी देती है।




           
                                      धीरज कोहली

# खुशियों से समझौता नहीं,और गामो से दोस्ती।

49 Love
1 Share