विवेक

विवेक Lives in Kalyan, Maharashtra, India

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"आज कुछ लिखने का मन हुआ तो मोबाईल मेरा कागज पेन हुआ कुछ अपने कुछ पराये अल्फाज उतारे ऑनलाईन की हवाओ ने यहाँ वहाँ बिखारे किसी ने सराहा ,नज़रअंदाज भी करे कोई इंटरनेट पे यारो पेशकश की यही 'रीत है नई खुद ही लिखू कभी खुद ही मिटाता हूँ बदलते जमाने का गीत नया गाता हूँ"

आज कुछ लिखने का मन हुआ
तो मोबाईल मेरा कागज पेन हुआ

कुछ अपने कुछ पराये अल्फाज उतारे
ऑनलाईन की हवाओ ने यहाँ वहाँ बिखारे

किसी ने सराहा ,नज़रअंदाज भी करे कोई
इंटरनेट पे यारो पेशकश की यही 'रीत है नई

खुद ही लिखू कभी खुद ही मिटाता हूँ
बदलते जमाने का गीत नया गाता हूँ

#InspireThroughWriting

88 Love

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"साहित्यसंगीतकलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:। तृणं न खादन्नपि जीवमानस्तद्भागधेयं परमं पशूनां॥ अर्थात साहित्य संगीत कला आदि क्षेत्र का ज्ञान या उस मे रुचि ना दिखाने वाले इंसान इंसान नही बल्कि पूँछ और सिंग रहित पशू समान होते है I ये तो अन्य पशूओंका धन्यभाग है के वे तृण ( घास ) का सेवन नही करते , वर्ना उस बेचारे पशुओंका का जीना दुश्वार हो जाता"

साहित्यसंगीतकलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:।

तृणं न खादन्नपि जीवमानस्तद्भागधेयं परमं पशूनां॥

अर्थात

साहित्य संगीत कला आदि क्षेत्र का ज्ञान या 
उस मे रुचि ना दिखाने वाले इंसान इंसान नही 
बल्कि पूँछ और सिंग रहित पशू समान होते है I
ये तो अन्य पशूओंका धन्यभाग है के वे तृण   ( घास ) का सेवन नही  करते , वर्ना उस बेचारे पशुओंका का जीना दुश्वार हो जाता

साहित्य / कलाप्रेमी ...

80 Love

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"दोस्त कौन होता है जिसके साथ हम सुख दुख शेअर करते है कोई गलती बताते वक्त शरमाते नही कोई पराक्रमकी बात हो तो कब उसे बताते ऐसा मन करता है जिसको धोखा देने का मन नही होता जिसके साथ झुठ बोल नही पाते क्यूं की उसकी जरूरत ही नही होती पाप पुण्यकी बाते करते बक्त मन कचोटता नही सामने गड्डा है ये चेतावनी देता तो है पर न मानने पर खुद ही हमारे साथ जो कुदता है जिसकी खुशी हमे अपनी लगती है और हमारा गम जिसे अपना लगे जो बिनमाँगे मुसीबत में काम आये जो गलती पर हकसे डाँटता है .लेकिन उसी बात पे औरों से हमारे लिए लडता है जो छोटीसी बात पे रुँठता है और बडी गलती नजर अंदाज करता है .. वही सच्चा दोस्त है"

दोस्त कौन होता है

जिसके साथ हम सुख दुख शेअर करते है
कोई गलती बताते वक्त  शरमाते नही
कोई पराक्रमकी बात हो तो 
कब उसे बताते ऐसा मन करता है
जिसको धोखा देने का मन नही होता
जिसके साथ झुठ बोल नही पाते 
क्यूं की उसकी जरूरत ही नही होती
पाप पुण्यकी बाते करते बक्त मन कचोटता नही
सामने गड्डा है ये चेतावनी देता तो है पर
न मानने पर खुद ही हमारे साथ जो कुदता है
जिसकी खुशी हमे अपनी लगती है
और हमारा गम जिसे अपना लगे
जो बिनमाँगे मुसीबत में काम आये
जो गलती पर हकसे डाँटता है .लेकिन
 उसी बात पे औरों से हमारे लिए लडता है
जो छोटीसी बात पे रुँठता है
और बडी गलती नजर अंदाज करता है ..

वही सच्चा दोस्त है

मित्रता दिनकी शुभकामनाएँ ..

78 Love

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"॥ सुभाषित॥ चन्दनं शीतलं लोके चंदनादपि चंद्रमा: | चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगत: || अर्थात चन्दन शीतल होता है उससे ज्यादा शीतलता चंद्रमा की प्रकाश में होती है किंतु सबसे ज्यादा शीतलता साधू जन ( अच्छा इंसान ) के संग प्राप्त होती है"

॥ सुभाषित॥

चन्दनं शीतलं लोके चंदनादपि चंद्रमा: |
चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगत: ||

अर्थात
चन्दन शीतल होता है उससे ज्यादा शीतलता चंद्रमा की प्रकाश में होती है
किंतु सबसे ज्यादा शीतलता साधू जन ( अच्छा इंसान ) के संग प्राप्त होती है

#MoonHiding

76 Love

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"जिम्मेदारीयाँ और जरूरते भी थोडीही पैसा भी कम था कोई कुछ भी कहे मगर बचपन में दम था ..."

जिम्मेदारीयाँ और जरूरते भी थोडीही
पैसा भी कम था
कोई कुछ भी कहे मगर
बचपन में दम था ...

बचपन :

73 Love