Ritika suryavanshi

Ritika suryavanshi Lives in Delhi, Delhi, India

insta ritikasingh_yoga

  • Popular Stories
  • Latest Stories

"दुनिया में सभी अपना प्यार दिखाते हैं, पर कोई बिना दिखाए भी इतना प्रेम करती हैं वो और कोई नही मेरी माँ हैं !! ऋतिका सूर्यवंशी..."

दुनिया में सभी अपना प्यार दिखाते हैं,
पर कोई बिना दिखाए भी इतना प्रेम करती हैं
वो और कोई नही मेरी माँ हैं !!

ऋतिका सूर्यवंशी...

 

957 Love
11 Share

"खिड़कियां खोल दो शीशे के रंग भी मिटा दो परदे हटा दो हवा आने दो धूप भर जाने दो दरवाजा खुल जाने दो मैं आजाद हुई हूं सूरज गया है मेरे कमरे में अंधेरा मेरे पलंग के नीचे छिपते-छिपते पकड़ा गया है धक्के लगाकर बाहर कर दिया गया है उसे धूप से तार-तार हो गया है वह मेरे बिस्तर की चादर बहुत मुचक गई है बदल दो इसे मेरी मुक्ति के स्वागत में अकेलेपन के अभिनन्दन ऋतिका सिंह.. ,"

खिड़कियां खोल दो
शीशे के रंग भी मिटा दो
परदे हटा दो
हवा आने दो
धूप भर जाने दो
दरवाजा खुल जाने दो

मैं आजाद हुई हूं
सूरज गया है मेरे कमरे में
अंधेरा मेरे पलंग के नीचे छिपते-छिपते
पकड़ा गया है
धक्के लगाकर बाहर कर दिया गया है उसे
धूप से तार-तार हो गया है वह
मेरे बिस्तर की चादर बहुत मुचक गई है
बदल दो इसे
मेरी मुक्ति के स्वागत में

अकेलेपन के अभिनन्दन
ऋतिका सिंह..
,

 

804 Love
3 Share

"दुआ हमारी उसने जो चाहा मिल गया, खुशिया सारी नसीब हुई मानो या ना मानो ज़माना, दुआ हमारी ही कबूल हुई वो एक शाम थी जब, आख़िरी बार तुमसे नज़र हुई उस शाम के बाद हमारी, ना अभी तक कोई सहर हुई कभी रहते थे हम तुम्हारे, ख़यालो का नूर बनकर वो ख़याल कहाँ खो गये इसकी, किसिको खबर तक नही हुई"

दुआ हमारी

उसने जो चाहा मिल गया,
खुशिया सारी नसीब हुई
मानो या ना मानो ज़माना,
दुआ हमारी ही कबूल हुई

वो एक शाम थी जब,
आख़िरी बार तुमसे नज़र हुई
उस शाम के बाद हमारी,
ना अभी तक कोई सहर हुई

कभी रहते थे हम तुम्हारे,
ख़यालो का नूर बनकर
वो ख़याल कहाँ खो गये इसकी,
किसिको खबर तक नही हुई

 

707 Love
5 Share

" 💚 Life Shayari 💚 जिंदगी में क्यों भरोसा करते हो गैरों 😏 पर, जब चलना है अपने ही पैरों 👣"



💚 Life Shayari 💚

जिंदगी में क्यों भरोसा करते हो गैरों 😏 पर, जब चलना है अपने ही पैरों 👣

 

666 Love
4 Share

"दिल बेचैन सा क्यूँ है – आज गरीबों का अगर जीवन नहीं देखा तो क्या देखा, कोई उजड़ा हुआ गुलशन नहीं देखा तो क्या देखा, हक़ीक़त रूबरू होकर तुम्हें अनुभव दिलाएगी, बिना घर का कोई आँगन नहीं देखा तो क्या देखा। ऋतिका सूर्यवंशी ....."

दिल बेचैन सा क्यूँ है – आज 


गरीबों का अगर जीवन नहीं देखा तो क्या देखा, कोई उजड़ा हुआ गुलशन नहीं देखा तो क्या देखा, हक़ीक़त रूबरू होकर तुम्हें अनुभव दिलाएगी, बिना घर का कोई आँगन नहीं देखा तो क्या देखा।


                   ऋतिका सूर्यवंशी .....

#गरीबी

649 Love