Y!shù Raj💕

Y!shù Raj💕 Lives in Bhagalpur, Bihar, India

''लगता है आज ज़िन्दगी हमसे कुछ खफा है.., चलिये छोड़िये कौन सी पहली दफा है।'' बस यूं ही!🌝

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"Happiness in 5 Words when we are with ourselves."

Happiness in 5 Words  when we are with ourselves.

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"'Love' in 7 words you + me = we is love."

'Love' in 7 words you + me = we 
is love.

#Love
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8 Love

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"Fear in 3 Words Thinking about future."

Fear in 3 Words  Thinking about future.

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8 Love

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"us din jane se pahle roka kyun nahi mujhe waise to baat-baat pr toka karte the na tum, phir us din roka kyun nahi kahte the meri aankhon me aansu achhe nahi lagte tumhe , pr us din bahot roya tha mai😓 pyar to tumne bhi kiya tha mujhse, phir us din jaane se pahle roka kyun nahi mujhe, kyun nahi roka, kyun??? kaash! ek baar tumne he kah di hoti ''ruk jao" to aaj ham paas hote, ek dusre ke saath hote! 💕 (Y!SHU RAJ)"

us din jane se pahle
roka kyun nahi mujhe
waise to baat-baat pr toka karte the
na tum, phir us din roka kyun  nahi
kahte the meri aankhon me 
aansu achhe nahi lagte tumhe ,
 pr us din bahot roya tha mai😓
pyar to tumne bhi kiya tha mujhse,
 phir  us din jaane se pahle 
roka kyun nahi mujhe,
 kyun nahi roka, kyun???
kaash! ek baar tumne he kah di hoti  
''ruk jao"
to aaj ham paas hote, 
ek dusre ke saath hote!
💕
(Y!SHU RAJ)

 

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"Under the sky कभी-कभी मैं बैठ जाता हूँ गुज़रे हुए लम्हों के पत्तों की छाँव में, सुकून दे जाती है मद्धम-मद्धम सी सरसराहटें इसकी। इन्हीं सरसराहटों में जब बरसती है सुखी-बेजान सी पत्तें मुझपर, और भिंगो जाती है इन मद्धम उदास आँखों को तो चुपके से..., चुपके से छुपा लेता हूँ इसे उन्हीं पत्तों के भीड़ में और कुछ इस क़दर ये पत्तें एहसास दिला जाती है.., तुम्हारा मेरे पास होने का इसलिए, कभी-कभी मैं बैठ जाता हूँ गुज़रे हुए लम्हों के पत्तों की छाँव में सुकून दे जाती है मद्धम-मद्धम सीं हवाएं इसकी। :-यीशू राज"

Under the sky   कभी-कभी मैं बैठ जाता हूँ
 गुज़रे हुए लम्हों के पत्तों की छाँव में,
  सुकून दे जाती है
मद्धम-मद्धम सी सरसराहटें इसकी।

इन्हीं सरसराहटों में जब
 बरसती है सुखी-बेजान सी पत्तें मुझपर,
और भिंगो जाती है इन
 मद्धम उदास आँखों को तो चुपके से..., 
चुपके से छुपा लेता हूँ इसे उन्हीं पत्तों के भीड़ में
और कुछ इस क़दर ये पत्तें 
एहसास दिला जाती है..,
तुम्हारा मेरे पास होने का इसलिए,

कभी-कभी मैं बैठ जाता हूँ
गुज़रे हुए लम्हों के पत्तों की छाँव में
सुकून दे जाती है
 मद्धम-मद्धम सीं हवाएं इसकी।
  
                                 :-यीशू राज

#कभी_कभी_मैं_बैठ_जाता_हूँ

#BENEATH_THE_TREE
#under_the_sky

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