कवि संदीप कुमार तिवारी

कवि संदीप कुमार तिवारी Lives in Bihar, Bihar, India

Please Subscribe my YouTube channel 9798580789👇

https://www.youtube.com/c/kavyasafarsahitya

  • Popular
  • Latest
  • Repost
  • Video

""

"मत पूछो कितने हजार बार रोयें। तुम्हें देखकर हम बार-बार रोयें। मेरी माँ तेरे पैरों में ये छाले नहीं रे, मेरे दिल के घाव के तार-तार रोयें। महल वालों देख लो ये रोटी और चावल, तेरे दर तक देने वाला प्यार-व्यार रोये। आज भी कुछ ठेकों पे हंसती है शराब, यहाँ भूख और बेबसी गला फाड़ रोयें। हम मुफलिसी के रौनक तेरे शहर से लौटें, तेरा खली घर और खाली द्वार-वार रोये। ✍️संदीप कुमार तिवारी"

मत पूछो कितने हजार बार रोयें। 
तुम्हें देखकर हम बार-बार रोयें। 

मेरी माँ तेरे पैरों में ये छाले नहीं रे,
मेरे दिल के घाव के तार-तार रोयें।

महल वालों देख लो ये रोटी और चावल, 
तेरे दर तक देने वाला प्यार-व्यार रोये।

आज भी कुछ ठेकों पे हंसती है शराब,
यहाँ भूख और बेबसी गला फाड़ रोयें।

हम मुफलिसी के रौनक तेरे शहर से लौटें,
तेरा खली घर और खाली द्वार-वार रोये।

       ✍️संदीप कुमार तिवारी

#poor

33 Love
2 Share

""

"मेरा भी कुछ हाल ऐसा है। की एक दिन साल जैसा है। जिंदगी से तरासता हूँ मौत मैं, अ जी! ये भी कमाल कैसा है। आपकी बेवफाई और क्या कहें, बस एक नागिन के चाल जैसा है। सितम ये की कुछ सितम हीं नहीं, खाली मन में एक बवाल जैसा है। शांत जल में चल दियें कंकर वो मारकर, अब ये पानी भुचाल जैसा है । उनका तो कोई खबर ही नही 'संदीप' अपना सुनाओ की हाल कैसा है ।"

मेरा भी कुछ हाल ऐसा है।
की एक दिन साल जैसा है।

जिंदगी से तरासता हूँ मौत मैं,
अ जी! ये भी कमाल कैसा है।

आपकी बेवफाई और क्या कहें,
बस एक नागिन के चाल जैसा है।
  
सितम ये की कुछ सितम हीं नहीं, 
खाली मन में एक बवाल जैसा है।

शांत जल में चल दियें कंकर वो मारकर,
अब ये पानी भुचाल जैसा है ।

उनका तो कोई खबर ही नही 'संदीप' 
अपना सुनाओ की हाल कैसा है ।

#Moon

33 Love

""

"कुछ शेर 👇 यहां जिस्म की तासीर बदल दी गई हम समझते रहें तकदीर बदल दी गई अरे आज तक तो कुछ बदला हीं नहीं कभी कैद तो कभी ज़ंजीर बदल दी गई ये जीवन के अंधेरों में रौशनी भी नहीं बस वक्त-दर-वक्त क़ंदील बदल दी गई जिन रास्तों से होकर हम आजतक चले उन रास्तों की सारी मंजिल बदल दी गई ऐ किस्मत कम्बख़त! पर तू नहीं बदला जिस्म बदल दी गई और जां बदल दी गई हम मुफिलिसों की टोली जब भी गई बहारों में वहां फूलों की सारी महफिल बदल दी गई ✍️संदीप कुमार तिवारी"

कुछ शेर 👇

यहां जिस्म की तासीर  बदल दी गई
हम समझते रहें तकदीर बदल दी गई 

अरे आज तक तो कुछ बदला हीं नहीं 
कभी कैद तो कभी ज़ंजीर बदल दी गई

ये जीवन के अंधेरों में रौशनी भी नहीं
बस वक्त-दर-वक्त क़ंदील बदल दी गई

जिन रास्तों से होकर हम आजतक चले
उन रास्तों की सारी मंजिल बदल दी गई 

ऐ किस्मत कम्बख़त! पर तू नहीं बदला
जिस्म बदल दी गई और जां बदल दी गई

हम मुफिलिसों की टोली जब भी गई बहारों में 
वहां फूलों की सारी महफिल बदल दी गई

✍️संदीप कुमार तिवारी

#well sad

30 Love
2 Share

""

"जो जाते हैं वो लौट के जरूर आते हैं! वो लोग कभी नहीं आते जो चले जाते हैं!! 😭🥀🌹"

जो जाते हैं वो लौट के जरूर आते हैं!
वो लोग कभी नहीं आते जो चले जाते हैं!!

😭🥀🌹

#irrfankhan

28 Love

""

"यहां से सभी दूर चले जाते हैं। पर हमें सभी याद रह जातें हैं। सिर्फ चंद साँसों का जगड़ा है, हम फिर भी समझ नहीं पाते हैं। ✍️संदीप कुमार तिवारी और काव्य सफ़र टिम के तरफ से भावपूर्ण श्रधान्जली 🌹🥀🌹😔🙏 आप हमेशा याद रहोगे। जिस प्रकार 'कपूर' जलकर भी एक अनूठा सुगंध वायुमंडल में छोड़ देता है;वैसे ही आप अमर रहोगे।"

यहां से सभी दूर चले जाते हैं। 
पर हमें सभी याद रह जातें हैं।
सिर्फ चंद साँसों का जगड़ा है, 
हम फिर भी समझ नहीं पाते हैं।

   ✍️संदीप कुमार तिवारी और काव्य सफ़र टिम के तरफ से भावपूर्ण श्रधान्जली 🌹🥀🌹😔🙏

आप हमेशा याद रहोगे। 
जिस प्रकार 'कपूर' जलकर भी एक अनूठा सुगंध वायुमंडल में छोड़ देता है;वैसे ही आप अमर रहोगे।

#RishiKapoor

27 Love