कवि राहुल पाल

कवि राहुल पाल Lives in Faizabad, Uttar Pradesh, India

लेखक ,कवि ,छात्राध्यापक .. ((( मेरा परिचय ))) फैज़ाबाद में मैं रहता हूँ ,राहुल मेरा नाम । लिखना और पढ़ाना बस दो ही मेरे काम ।। ग्रेजुएशन मैंने कर लिया D.EL.ED. की पढ़ाई जारी है । शिक्षा का विस्तार करू अध्यापक बनने की तैयारी है ।। पापा की मैं जान हूँ ,पापा है मेरी जान । मैय्या मेरी ममता की मूर्ति ,भाई मेरी शान ।। जो कुछ मिला है प्रभु से बस हो जाये न अभिमान । सबसे मिल मिला के रहू ,आदत मेरी है देना सबको सम्मान ।। दोस्तों की क्या बात करू जो चुलबुले है नठखट जिनके अंदाज । तराने इनके खुशनुमा है मिलकर दुनिया खुश हो जाती है आज ।। इश्क़ विस्क का कोई चक्कर नहीं अपना तो हर किसी से प्रेम का नाता है । प्रेम की भाषा जो मुझसे बोले वो हर कोई मेरे मन को भाता है ।। ((( " कवि राहुल पाल "))) फ़ैज़ाबादी

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"बचपन और रूठना हे प्रभु ! बहुत अक्ल लेकर क्या होगा , मुझे अक्ल का कच्चा कर दो ! आज मुझे फिर बच्चा कर दो !! चाँद हमारे पीछे भागे , बादल को हम टॉर्च दिखाए! अपनी लम्बी लाठी लेकर, दूर आसमां तक पहुचाएं!! झूठ बोलते थक आया हूँ , रूठे तो माँ की प्यार भरी खुशियां दे दो ! आओ मुझको सच्चा कर दो , आज मुझे फिर बच्चा कर दो !! "" राहुल """

बचपन और रूठना    हे प्रभु !
बहुत अक्ल लेकर क्या होगा ,
मुझे अक्ल का कच्चा कर दो !
आज मुझे फिर बच्चा कर दो !!

चाँद हमारे पीछे भागे ,
बादल को हम टॉर्च दिखाए!
अपनी लम्बी लाठी लेकर,
दूर आसमां तक पहुचाएं!!

झूठ बोलते थक आया हूँ ,
रूठे तो माँ की प्यार भरी खुशियां दे दो !
आओ मुझको सच्चा कर दो ,
आज मुझे फिर बच्चा कर दो !!

"" राहुल ""

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"मजदूर के झोपड़े को खण्डहर बना दिया , उस शहजादियों के शहर की लड़की ने ! बनाया था चुन चुनकर तिनका तिनका जोड़कर जिसे उस मंजर को तनिक पल में पसमंजर बना दिया !! (((( "" राहुल "")))) नोट- यहाँ झोपड़े से तात्पर्य मानव शरीर से तथा शहर की लड़की से तात्पर्य मौत की शहजादी से है ......"

मजदूर के झोपड़े को खण्डहर बना दिया ,
उस शहजादियों के शहर की लड़की ने !
बनाया था चुन चुनकर तिनका तिनका जोड़कर जिसे
उस मंजर को तनिक पल में पसमंजर बना दिया !!

(((( "" राहुल ""))))

नोट- यहाँ झोपड़े से तात्पर्य मानव                   
                          शरीर से                                      
तथा शहर की लड़की से तात्पर्य                    
मौत की शहजादी से है ......

 

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"ख़ामोश मैं ख़ामोश हूँ खामोशियो को न तोड़ो तो ही अच्छा है , हाँ तेरी नादानी सच्ची थी ,हाँ मेरा बचपना सच्चा है ! तू जो इक बार कह तो देती हर इम्तहान से गुजर जाता , तू काश मुझे समझ पाती काश मैं तुम्हे समझ पाता !!"

ख़ामोश  मैं ख़ामोश हूँ खामोशियो को न  तोड़ो तो ही अच्छा है ,
हाँ तेरी नादानी सच्ची थी  ,हाँ मेरा बचपना सच्चा है !
तू जो इक बार कह तो देती हर इम्तहान से गुजर जाता ,
तू काश मुझे समझ पाती काश  मैं तुम्हे समझ पाता  !!

#nojotohindi #nojoto
#khamoshiya
#Pyar

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"यकीन **नन्ही बेटी की अर्जी ** " ऐ माँ तेरी आँचल में मैं भी तो उछल सकती हूं , तेरे पहलू के सायों में मै भी सम्भल सकती हूं ! मुझे तो यकीं है क्या तुझे यकीन नही , बड़ी होकर मै भी दुनिया बदल सकती हूं !! ★★और आपने पिता से कहती है ★★ बापू मेरे तेरे स्नेह का कर्ज मैं भी चुका सकती हूं , मुझे बेशक भुला देना पर तुझे भुला नही सकती हूं ! मान मर्यादा में रहूंगी तेरे हर नियम में ढल सकती हूं , दुनिया करे चाहे लाखो सितम हर सितम सह सकती हूं ! बस यही अर्जी है मुझे कोख में मत मारना बाबुल मेरे , मैं भी तेरे बेटों से आगे निकल सकती हूँ !!! ((( "राहुल "")))"

यकीन **नन्ही बेटी की अर्जी  **

" ऐ माँ तेरी आँचल में मैं भी तो उछल सकती हूं ,
तेरे पहलू के सायों में मै भी सम्भल सकती हूं !
मुझे तो यकीं है क्या तुझे यकीन नही ,
बड़ी होकर मै भी दुनिया बदल सकती हूं !!

★★और आपने पिता से कहती है ★★
बापू मेरे तेरे स्नेह का कर्ज मैं भी चुका सकती हूं ,
मुझे बेशक भुला देना पर तुझे भुला नही सकती हूं !
मान मर्यादा में रहूंगी तेरे हर नियम में ढल सकती हूं ,
दुनिया करे चाहे लाखो सितम हर सितम सह सकती हूं !
बस यही अर्जी है मुझे कोख में मत मारना बाबुल मेरे ,
मैं भी तेरे बेटों  से आगे निकल सकती हूँ !!!

((( "राहुल "")))

#नन्ही_बेटी_की_अर्जी
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#भाषा_हिंदी
#शैली_भावात्मक
#रस_करुण
#विधा_कथानक

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"#OpenPoetry उनका ही जहाँ में कोई सम्मान नही है , जिनको बड़ो के आदर का ज्ञान नहीं है ! ए-मंदिर मस्जिद में दुआ मांगने वालों , माँ-बाप से बढ़कर कोई भगवान नही है !! 🙏🏾 "" राहुल '''"

#OpenPoetry उनका ही जहाँ में कोई सम्मान नही है ,
जिनको बड़ो के आदर का ज्ञान नहीं है  !
ए-मंदिर मस्जिद में दुआ मांगने वालों ,
माँ-बाप से बढ़कर कोई भगवान नही है !!
🙏🏾                          
"" राहुल '''

#सुबह_की_पंक्ति_मेरे_माता_पिता_के_नाम
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