Vishal / Aadinath

Vishal / Aadinath Lives in Sangli, Maharashtra, India

lover, devotee, Warrior

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"उसकी गांव से निकलती हर बारात से डर लगता है... दुरी की एक आहट से भी.. दिल को अब डर लगता है... दुर जाता हुआ एक कदम भी.. उठाने में बडा जोर लगता है... दुर ही है और बिछडेंगेही हम, दिल की तो तय्यारी भी शुरु है... कई मिले तो मैं कैसे सह पाऊंगा... मिलन के खयाल से भी; डर लगता है... ~अनंत○"

उसकी गांव से निकलती 
हर बारात से डर लगता है...

दुरी की एक आहट से भी..
दिल को अब डर लगता है...

दुर जाता हुआ एक कदम भी..
उठाने में बडा जोर लगता है...

दुर ही है और बिछडेंगेही हम, 
दिल की तो तय्यारी भी शुरु है...

कई मिले तो मैं कैसे सह पाऊंगा...
मिलन के खयाल से भी; डर लगता है...

~अनंत○

#steps

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"आप मेरे दिल के लफ्जों को, बस लफ्ज कहकर भूला देते हो... मेरे ताजे हरे जखमों मे जैसे आप नमक ही घुला देते हो..... आपने जो कहा भी नही, मैं समझा भी और मान भी लिया.. मैने शरम छोडकर जो लफ्जों में कहा... आपने तो उसे, दिल्लगी का नाम दिया... मुझे कभी तो कोई पढेगा, इसलीये भाव, शब्दों में लिखता हुं... कोई खुली आँख से देख नही पाता ... किसिको बंद आंखों से भी दिखता हुं.. आदिसोहम...☘️🌸 ©Vishal / Aadinath"

आप मेरे दिल के लफ्जों को,
बस लफ्ज कहकर भूला देते हो...
मेरे ताजे हरे जखमों मे जैसे
आप नमक ही घुला देते हो.....

आपने जो कहा भी नही,
मैं समझा भी और मान भी लिया..
मैने शरम छोडकर जो लफ्जों में कहा...
आपने तो उसे, दिल्लगी का नाम दिया...

मुझे कभी तो कोई पढेगा,
इसलीये भाव, शब्दों में लिखता हुं...
कोई खुली आँख से देख नही पाता ...
किसिको बंद आंखों से भी दिखता हुं..


आदिसोहम...☘️🌸

©Vishal / Aadinath

#MorningTea

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"There are many which come & go. but one with calibre remains evergreen ©Vishal / Aadinath"

There are many which come & go.

but one with calibre remains evergreen

©Vishal / Aadinath

#hbdvirat

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"To the Betrayed Partner... Will You be able to kill the man, who is already dead... Who is connected with You, with 'that' invisible thread... He is never ever defeated, still standing tall... He pierces it with love, whatever is the wall.. Offer him more, He does enjoy the sorrow... It's like killing the giant, with an blunt arrow... There is a rare species of Life, we call it lover, The patience loses its patience, to make him over.... Gather the courage, to bear his genuine smile... When you will return back, He will accept in a while.... Those are lovers, who are in the state of indifference, May it be the God, or a person's Reverence😍 Aadinatha/Vishal ©Vishal / Aadinath"

To the Betrayed Partner...



Will You be able to kill the man, who is already dead...
Who is connected with You, with 'that' invisible thread...

He is never ever defeated, still standing tall...
He pierces it with love, whatever is the wall..

Offer him more, He does enjoy the sorrow...
It's like killing the giant, with an blunt arrow...

There is a rare species of Life, we call it lover,
The patience loses its patience, to make him over....

Gather the courage, to bear his genuine smile...
When you will return back, He will accept in a while....


Those are lovers, who are in the state of indifference,
May it be the God, or a person's Reverence😍





Aadinatha/Vishal

©Vishal / Aadinath

#allalone

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"इस एक समर्पण के आगे टूटे मेरे कई संकल्प... जब देखा तुझे, तुझे ही देखा दिखा ना कोई और विकल्प.. हार गया मै, हारता ही रहा.. तुझपे मरकर ही जीता रहा... मेरी हार ने मुझे मुकम्मल किया... तुफानों में जैसे, जलता दिया.... संकल्प, अकड सब पिघल गया... मेरे सर को, जो तेरा दर मिल गया.... हाथों को अपने हमने खुला धर दिया... सारे भार को प्रभू, तेरे हवाले कर दिया.... जीने यह अजब सलिका, बडा ही रंग लाया.... हारे हुए एक राही को, जब तुमने पुत्र सा अपनाया.... अब पिघल कर खत्म होना चाहता हुं... मैं तुझ मे घुलकर, तू होना चाहता हुं.... तू मुझे मार ही देगा, यह चाह लिये... फिर से नतमस्तक होता हुं... आदिनाथ... ©Vishal / Aadinath"

इस एक समर्पण के आगे 
टूटे मेरे कई संकल्प...
जब देखा तुझे, तुझे ही देखा
दिखा ना कोई और विकल्प..

हार गया मै, हारता ही रहा..
तुझपे मरकर ही जीता रहा...
मेरी हार ने मुझे मुकम्मल किया...
तुफानों में जैसे, जलता दिया....

संकल्प, अकड सब पिघल गया...
मेरे सर को, जो तेरा दर मिल गया....
हाथों को अपने हमने खुला धर दिया...
सारे भार को प्रभू, तेरे हवाले कर दिया....

जीने यह अजब सलिका,
बडा ही रंग लाया....
हारे हुए एक राही को,
जब तुमने पुत्र सा अपनाया....

अब पिघल कर खत्म होना चाहता हुं...
मैं तुझ मे घुलकर, तू होना चाहता हुं....
तू मुझे मार ही देगा, यह चाह लिये...
फिर से नतमस्तक होता हुं...



आदिनाथ...

©Vishal / Aadinath

#LostInNature

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