अंजलि जैन

अंजलि जैन Lives in Bhilwara, Rajasthan, India

My insta id pokharanaanju मन जब उद्विग्न या प्रसन्न होता है तो लिखने पर ही शांत होता हैं!!

https://youtu.be/K4pq81rjx0E

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"पहले पास - पड़ोस से तो बातें करलें फ़िर चंदा से भी करेंगे! पहले धरती से तो प्यार करलें फ़िर चंदा से भी करेंगे! पहले धरती पर तो जी - भर जी लें फ़िर चंदा पर भी मरेंगे!"

पहले पास - पड़ोस से तो बातें करलें
फ़िर चंदा से भी करेंगे!
पहले धरती से तो प्यार करलें
फ़िर चंदा से भी करेंगे!
 पहले धरती पर तो जी - भर जी लें 
फ़िर चंदा पर भी मरेंगे!

#चंदा पर भी.... #23. 07.20#321

#MoonHiding

65 Love

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"उनमें से कुछ तो डूब जाते हैं हताशा के कुएँ में! कोई बात नहीं, ये जीना जान तो जाते हैं बहुत सुन्दर - सुन्दर, बड़ी - बड़ी बातें नहीं आती इनको पर दुनिया से हारना इनको नहीं आता! जीवन से भागना इनको नहीं आता! थोड़े में गुजारा करने की कला आती है इनको बड़ा - बड़ा दिखावा करना नहीं आता! हँसते - खिलखिलाते हैं हर हाल में छोटी - छोटी बातों पर रोना इनको नहीं आता! फख्र होता है इनके जीवट पर किसी के सामने हाथ फैलाना इनको नहीं आता!!"

उनमें से कुछ तो डूब जाते हैं हताशा के कुएँ में!
कोई बात नहीं, ये जीना जान तो जाते हैं
बहुत सुन्दर - सुन्दर, बड़ी - बड़ी बातें नहीं आती इनको
पर दुनिया से हारना इनको नहीं आता!
जीवन से भागना इनको नहीं आता!
थोड़े में गुजारा करने की कला आती है इनको
बड़ा - बड़ा दिखावा करना नहीं आता!
हँसते - खिलखिलाते हैं हर हाल में
छोटी - छोटी बातों पर रोना इनको नहीं आता!
फख्र होता है इनके जीवट पर
किसी के सामने हाथ फैलाना इनको नहीं आता!!

#antichildlabourday #12. 06.20

36 Love

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"नफरत का बोझ, दो दिन भी न उठाया गया, भुलाने में ही सा र है, ये आज समझ में आया!!"

नफरत का बोझ, दो दिन भी न उठाया गया,
भुलाने में ही सा र है, ये आज समझ में आया!!

#Jo_beet_gayi_so_baat_gayi #13. 2.20

35 Love

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"#WorldEnvironmentDay उपभोक्ता वादी संस्कृति को ख़त्म करें हम ये परिग्रह, ये हिंसा, ये अति उपभोग लील रही है धरती को, सृष्टि को, पर्यावरण को भारतीय संस्कृति - संतोष मयी, अहिंसा मयी प्रेम मयी, त्याग मयी! जीवन है तो विकास है जीवन के लिए पर्यावरण आधार है पर्यावरण के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं जिम्मेदारी समझें हम सबकी रक्षा करें हम जिएं और जीने दें.... सभी को धरती को, पानी को, हवा को, जीव मात्र को! क्यों करते हैं हम कृत्रिम शृंगार क्यों करते हैं हम पशु - पक्षियों का आहार? प्रकृति ने अनंत दिया है हमें उसी में से थोड़ा ग्रहण करें हम शेष प्रकृति में ही रहने दें तो बनी रहेगी सुन्दर धरती, सुंदर आकाश, सुंदर संसार! इन सबकी कीमत पर मत करो विकास कूदरत ने दिया सादा और प्यारा जीवन ऊँचे विचारों से करें इसका सम्मान!!! जय भारत! जय हिंद! वन्दे मातरम!!!"

#WorldEnvironmentDay उपभोक्ता वादी संस्कृति को ख़त्म करें हम
ये परिग्रह, ये हिंसा, ये अति उपभोग लील रही है
धरती को, सृष्टि को, पर्यावरण को
भारतीय संस्कृति - संतोष मयी, अहिंसा मयी
प्रेम मयी, त्याग मयी!
जीवन है तो विकास है
जीवन के लिए पर्यावरण आधार है
पर्यावरण के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं
जिम्मेदारी समझें हम
सबकी रक्षा करें हम
जिएं और जीने दें.... सभी को
धरती को, पानी को, हवा को, जीव मात्र को!
क्यों करते हैं हम कृत्रिम शृंगार
क्यों करते हैं हम पशु - पक्षियों का आहार? 
प्रकृति ने अनंत दिया है हमें 
उसी में से थोड़ा ग्रहण करें हम 
शेष प्रकृति में ही रहने दें 
तो बनी रहेगी सुन्दर धरती, सुंदर आकाश, सुंदर संसार! 
इन सबकी कीमत पर मत करो विकास 
कूदरत ने दिया सादा और प्यारा जीवन 
ऊँचे विचारों से करें इसका सम्मान!!! 
जय भारत! जय हिंद! वन्दे मातरम!!!

#WorldEnvironmentDay #भाग 2#05.06.20

35 Love

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"ग़लत पर किया गया विश्वास और सही पर किया गया अविश्वास दोनों ही जीवन को ग़लत दिशा में धकेल देते हैं!!"

ग़लत पर किया गया विश्वास और 
सही पर किया गया अविश्वास
दोनों ही जीवन को 
ग़लत दिशा में धकेल देते हैं!!

#mentalHealth #19. 06.20

34 Love