शिखर सिंह

शिखर सिंह Lives in Lucknow, Uttar Pradesh, India

poet and writer

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""कुदरत भी कितनी हसीन होती है, कहर भी ढाती है तो खूबसूरत लगती है।""

"कुदरत भी कितनी हसीन होती है,
कहर भी ढाती है तो खूबसूरत लगती है।"

#ख़ूबसूरत_सितम
"कुदरत भी कितनी हसीन होती है,
कहर भी ढाती है तो खूबसूरत लगती है।"

21 Love

"बदनसीबों की बस्ती में ,
ख़ुशनसीब हो गया हूँ,
जबसे तेरे रूबरू हो गया हूँ,
तेरे करीब हो गया हूँ!"

19 Love
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"एक बात पूछ लूँ.... बस इतना कहकर मैंने इज़हार कर दिया, बस उसके एक जवाब ने सब ख़ामोश कर दिया, और एक कश्मकश सी तिलमिला उठी मेरे जहन में, लगता है शायद उसने इन्कार कर दिया। -शिखर सिंह"

एक बात पूछ लूँ....
बस इतना कहकर मैंने इज़हार कर दिया, 
बस उसके एक जवाब ने सब ख़ामोश कर दिया, 
और एक कश्मकश सी तिलमिला उठी मेरे जहन में, 
लगता है शायद उसने इन्कार कर दिया।

-शिखर सिंह

एक बात पूछ लूँ....
बस इतना कहकर मैंने इज़हार कर दिया,
बस उसके एक जवाब ने सब ख़ामोश कर दिया,
और एक कश्मकश सी तिलमिला उठी मेरे जहन में,
लगता है शायद उसने इन्कार कर दिया।

12 Love

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"हसरतें बुदबुदाती रहीं कि, अपना बना लूं उसको, मग़र मैं ही बेवकूफ़ था, जो ख़ामोश रह गया।"

हसरतें बुदबुदाती रहीं कि,
अपना बना लूं उसको,
मग़र मैं ही बेवकूफ़ था,
जो ख़ामोश रह गया।

हसरतें बुदबुदाती रहीं कि,
अपना बना लूं उसको,
मग़र मैं ही बेवकूफ़ था,
जो ख़ामोश रह गया।

12 Love

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"दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा, कभी रूठा कभी मनाया, ख़्वाब देखे बहोत से, पूरे न हुए तो ठुकराया, मुश्किल सफर है खुशियों का, रोकर भी मंज़िल तक पहुचाया। दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा, मुख़्तसर हँसाता, तो अक्सर रुलाता, आस लगाए रहता खुशियों की, गम की और बाहें फैलाता, इतराता बहोत सबके सामने, अकेले में सिमट सा जाता।। दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा, मचलता, बहकता... फिर संभल जाता, अपनी सिसकियों से, सहम सा वो जाता, चहकता, इतराता... वो फिर मुस्कुराता। दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा, बाहों में बाहें डाल के चलता, खुद मर-मर कर, जीना सिखाता, दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा।। -शिखर सिंह @slekh__stories"

दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा,
कभी रूठा कभी मनाया,
ख़्वाब देखे बहोत से, पूरे न हुए तो ठुकराया,
मुश्किल सफर है खुशियों का, रोकर भी मंज़िल तक पहुचाया।
दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा,
मुख़्तसर हँसाता, तो अक्सर रुलाता,
आस लगाए रहता खुशियों की, गम की और बाहें फैलाता,
इतराता बहोत सबके सामने, अकेले में सिमट सा जाता।।
दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा,
मचलता, बहकता... फिर संभल जाता,
अपनी सिसकियों से, सहम सा वो जाता,
चहकता, इतराता... वो फिर मुस्कुराता।
दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा,
बाहों में बाहें डाल के चलता, 
खुद मर-मर कर, जीना सिखाता,
दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा।।

-शिखर सिंह
@slekh__stories

दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा,
कभी रूठा कभी मनाया,
ख़्वाब देखे बहोत से, पूरे न हुए तो ठुकराया,
मुश्किल सफर है खुशियों का, रोकर भी मंज़िल तक पहुचाया।
दिल बेचारा...! खुद से जीता दुनिया से हारा,
मुख़्तसर हँसाता, तो अक्सर रुलाता,
आस लगाए रहता खुशियों की, गम की और बाहें फैलाता,
इतराता बहोत सबके सामने, अकेले में सिमट सा जाता।।

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