Virendra Pratap Singh

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जो समझ आता है वही लिखता हूँ में अपने आप को लेखक बताता हूँ।

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"रूठे हैं वो इस तरह से लगता है वो जिद्दी हो गयें हैं पढ़ना चाहा था उन्हें नई किताब की तरह पर अब लगता है वो रद्दी हो गयें हे । ऐं जो आज दामन पर दाग है तुम्हारे वो खुद के दिऐं हे या दुसरों से नवाजें गयें है चलो छोड़ो जाने देते हैं पर अब उनके लहजे मिजाज से पता लगता है वो पहले से ओर ज्यादा भद्दे हो गये हैं ।। -:कुंवरसाहब डायरी"

रूठे हैं वो इस तरह से लगता है वो जिद्दी हो गयें हैं 
पढ़ना चाहा था उन्हें नई किताब की तरह पर अब
लगता है वो रद्दी हो गयें हे ।
ऐं जो आज दामन पर दाग है तुम्हारे वो खुद के दिऐं हे
या दुसरों से नवाजें गयें है
चलो छोड़ो जाने देते हैं पर अब उनके लहजे मिजाज से पता लगता है वो पहले से ओर ज्यादा भद्दे हो गये हैं ।।
-:कुंवरसाहब डायरी

#कुंवरसाहब डायरी @मेरी कोशिश @belong boy @Farhat Ullah @Naveen sharma @Aparna Adarsh

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"क्युं लोग ताउम्र लगा देते हैं घर बनाने में, जब उन्हें घर से बेघर ही होना होता है। किसके लिए वर्तमान ओर भूत को जलाते है यें लोग, जब उनका भविष्य किसी ओर को ही अंधेरे में करना होता है। #बेटा #बाप #बूढ़ा -कुंवरसाहब डायरी"

क्युं लोग ताउम्र लगा देते हैं घर बनाने में,
जब उन्हें घर से बेघर ही होना होता है।
किसके लिए वर्तमान ओर भूत को जलाते है यें लोग,
जब उनका भविष्य किसी ओर को ही अंधेरे में करना होता है।
#बेटा #बाप #बूढ़ा
              
                       -कुंवरसाहब डायरी

वृद्ध आश्रम,
क्यूँ
#कुंवरसाहब डायरी

#lightindark

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#कुंवरसाहब डायरी

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"सिर्फ कितावों तक सीमित रह गई इनकी विचारधारा, हर गन्दे काम होते है यह है इनकी तस्वीर के नीचे का नजारा -: कुंवरसाहब डायरी"

सिर्फ कितावों तक सीमित रह गई इनकी विचारधारा, 
हर गन्दे काम होते है  यह है इनकी तस्वीर के नीचे का नजारा 
-: कुंवरसाहब डायरी

चलिये परिवर्तन की ओर सिर्फ जंयतिओं पर याद करने से, हम गांधीवादी नही हो सकतें।।

#AajKeGandhi

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"मोहब्बत , प्यार सबकी अपनी अपनी परिभाषा है , असल में मेरे दोस्त इसकी कोई भाषा नहीं बस सिर्फ आशा है। -: कुंवरसाहब डायरी"

मोहब्बत , प्यार सबकी अपनी अपनी परिभाषा है ,
असल में मेरे दोस्त इसकी कोई भाषा नहीं बस सिर्फ आशा है।
-: कुंवरसाहब डायरी

चल ना यार जब आशा करनी ही है तो खुद से करते हैं
#nt Love Only Live

#lostinthoughts

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