कवि देवीलाल पंवार‌

कवि देवीलाल पंवार‌ Lives in Sri Vijaynagar, Rajasthan, India

समाजसेवी ,कवि,लेखक ‌-आत्मविज्ञान 'अमृत ॑

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"कविता मुझे अच्छा नहीं लगता"

कविता मुझे अच्छा नहीं लगता

 

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"अनजान"

अनजान

 

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"जिन्दा लोग इतने खुदगर्ज हूऐ मुर्दो की किमत लगाने मे बस जो घायल हुए उन्हें तस्वीर पूजने की आदत हो गई।"

जिन्दा लोग इतने खुदगर्ज हूऐ
मुर्दो की किमत लगाने मे
बस जो घायल हुए
उन्हें  तस्वीर पूजने की आदत हो गई।

#disturbed

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"ऐ मुस्कुराकर आने वाली रंग बिखेर कर जाने वाली तूं फिर आना हमने तुम्हारे लिए नये साल का केलेण्डर मंगवा रखा है"

ऐ मुस्कुराकर आने वाली
रंग बिखेर कर जाने वाली
तूं फिर आना
हमने तुम्हारे लिए
नये साल का केलेण्डर मंगवा
रखा है

#Happy_holi

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"ऐ मेरे क़ातिल तू मुझे नहीं, मेरे अरमान जला सकता है, मैं तो अपने ख्वाबों की चिता पर हर रोज सोता हूं, मेरी मर्यादाओं की भष्म में जब चाहे तलाश लेना एक एक फकीर हर कलम बाज के पास मिलता है।"

ऐ मेरे क़ातिल तू मुझे नहीं, 
मेरे अरमान जला सकता है,
मैं तो अपने ख्वाबों की चिता पर हर रोज सोता हूं,
मेरी मर्यादाओं की भष्म में
जब चाहे तलाश लेना
एक एक फकीर हर
कलम बाज के पास मिलता है।

 

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