Lakhvir Singh Samrala

Lakhvir Singh Samrala

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"जुकना, रुकना, थकना, शेड दिया है, हमने, तेरी गर्म हवाओ का रुख, तेरी तरफ ही मोड़ दिया है, हमने। तेरी फितरत है, तू डरने बाले को डरता है, ऐ बुजदिल, तेरी बनाई डर की दीवार को वी तोड़ दिया है, हमने। सुना है तेरी जड़े है बहुत पुरानी, झूठ की, लेकिन तेरे इस झूठ पर, जकीन करना, शोड दिया है, हमने। जुकना, रुकना, थकना, शेड दिया है, हमने,"

जुकना, रुकना, थकना, शेड दिया है, हमने,
तेरी गर्म हवाओ का रुख, तेरी तरफ ही मोड़ दिया है, हमने। 
तेरी फितरत है, तू डरने बाले को डरता है, ऐ बुजदिल, 
तेरी बनाई डर की दीवार को वी तोड़ दिया है, हमने। 
सुना है तेरी जड़े है बहुत पुरानी, झूठ की, 
लेकिन तेरे इस झूठ पर, जकीन करना, शोड दिया है, हमने।
 जुकना, रुकना, थकना, शेड दिया है, हमने,

जुकना, रुकना, थकना, शेड दिया है, हमने,
तेरी गर्म हवाओ का रुख, तेरी तरफ ही मोड़ दिया है, हमने।
तेरी फितरत है, तू डरने बाले को डरता है, ऐ बुजदिल,
तेरी बनाई डर की दीवार को वी तोड़ दिया है, हमने।
सुना है तेरी जड़े है बहुत पुरानी, झूठ की,
लेकिन तेरे इस झूठ पर, जकीन करना, शोड दिया है, हमने।
जुकना, रुकना, थकना, शेड दिया है, हमने,
@Laxmi Kumari @Jagadish Kumawat @Parmjit Kaur @RAVI KANT SAHU @Dr.Imran Hassan Barbhuiya

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"दीपावली नहीं बलिदान दिवस है तेरी कायरता का पैमान दिवस है ! दीपावली नहीं बलिदान दिवस है तेरी कायरता का पैमान दिवस है ! क्योंकि वह था निहत्था पर और तुम शस्त्रधारी मुझको तो तुम किसी तरफ से लगता नहीं भगवान,, क्यों महामुनि शंभूक को, तूने कत्ल किया रे राम क्यों महा मनी शंभूक को, तूने मार दिया रे राम। तेल नहीं यह लहू है वीरों का, जो जलता है दिए के भीतर, देते थे जो शुद्ध को शिक्षा, अपना सादा जीवन जी। कर ! ए मनु तुमने ही मिटाया है इतिहास हमारा, जब उठेगा यह पर्दा सवाल पूछेगा हर एक इंसान क्यों महामुनि शंभूक को, तूने कत्ल किया रे राम क्यों महा मनी शंभूक को, तूने मार दिया रे राम शिक्षा के वह परम गुरु थे थे विद्वान वह धर्मगुरु थे आदि धर्म का सम्मान थे वो क्योंकि तेरे रामराज्य में, ना मिलता था सुधर को ज्ञान ! क्यों महामुनि शंभूक को, तूने कत्ल किया रे राम क्यों महा मनी शंभूक को, तूने मार दिया रे राम"

दीपावली नहीं बलिदान दिवस है 
   तेरी कायरता का पैमान दिवस है !
  दीपावली नहीं बलिदान दिवस है 
   तेरी कायरता का पैमान दिवस है !
    क्योंकि वह था निहत्था पर और तुम शस्त्रधारी 
    मुझको तो तुम किसी तरफ से लगता नहीं भगवान,,
 
    क्यों महामुनि शंभूक को, तूने कत्ल किया रे राम 
    क्यों महा मनी शंभूक को, तूने मार दिया रे राम।
    
   तेल नहीं यह लहू है वीरों का, जो जलता है दिए के     भीतर,
  देते थे जो शुद्ध को शिक्षा, अपना सादा जीवन जी। कर !
     ए मनु तुमने ही मिटाया है इतिहास हमारा, 
     जब उठेगा यह पर्दा
     सवाल पूछेगा हर एक इंसान
    क्यों महामुनि शंभूक को, तूने कत्ल किया रे राम 
    क्यों महा मनी शंभूक को, तूने मार दिया रे राम 
      शिक्षा के वह परम गुरु थे थे विद्वान वह धर्मगुरु थे
    आदि धर्म का सम्मान थे वो
    क्योंकि तेरे रामराज्य में, ना मिलता था सुधर को ज्ञान !
   क्यों महामुनि शंभूक को, तूने कत्ल किया रे राम 
  क्यों महा मनी शंभूक को, तूने मार दिया रे राम

दीपावली नहीं बलिदान दिवस है
तेरी कायरता का पैमान दिवस है !
दीपावली नहीं बलिदान दिवस है
तेरी कायरता का पैमान दिवस है !
क्योंकि वह था निहत्था पर और तुम शस्त्रधारी
मुझको तो तुम किसी तरफ से लगता नहीं भगवान,,

क्यों महामुनि शंभूक को, तूने कत्ल किया रे राम

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