laxman sharma

laxman sharma Lives in Jaipur, Rajasthan, India

देख तो दिल कि जां से उठता है ये धुआं सा कहां से उठता है गोर किस दिल-जले की है ये फलक शोला इक सुबह यां से उठता है नाला सर खेंचता है जब मेरा शोर एक आसमान से उठता है लड़ती है उस की चश्म-ऐ-शोख जहां इक आशोब वां से उठता है सुध ले घर की भी शोला-ऐ-आवाज़ दूद कुछ आशियां से उठता है बैठने कौन दे है फिर उस को जो तेरे आस्तां से उठता है यूं उठे आह उस गली से हम जैसे कोई जहां से उठता है इश्क इक 'मीर' भारी पत्थर है बोझ कब नातावां से उठता है MSc mathematics student

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