verma priya

verma priya Lives in Durgapur, West Bengal, India

काशी पुण्य की नगरी और सकल विश्व का पारस है मन्त्रमुग्ध कर लेता सबको ये रंगरेज़ बनारस है 💗🇮🇳🌅⛵🍯🦚🐦🦜💐🥰

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"कुछ बीते हुए लम्हे , कुछ गुजरे हुए पल कुछ पिछली बुरी यादें, कुछ गुजरे हुए कल भूल चुका मैं सब कुछ, जो सहा था मैंने कल जीवन का आनंद आज में, ये है सबसे हसीन पल क्यों सोचूं अतीत के विषय में, या भविष्य का कल आज से बेहतर क्या देगा? , अगला और पिछला कल ©✍️verma priya"

कुछ बीते हुए लम्हे , कुछ  गुजरे हुए पल 
कुछ पिछली बुरी यादें, कुछ गुजरे हुए कल 
 भूल चुका मैं सब कुछ, जो सहा था मैंने कल
 जीवन का आनंद आज में,  ये है सबसे हसीन पल
  क्यों सोचूं अतीत के विषय में, या भविष्य का कल
 आज से बेहतर क्या देगा? , अगला और पिछला कल

©✍️verma priya

#Missing #peace #Quote #Love #poem Mr_Sheikh Sunil Mehra Tanya Hari Tiya Shashi Kushwaha

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"मुरली मनोहर गोविंद गिरधारी, तेरी छवि प्रभु दुनिया में न्यारी सूरत है रमणीय कृति है प्यारी, जैसे खिली हो पुष्पों की क्यारी सजल तेरे नेत्रों में यमुना का पानी, मुख में भरा है करुण मधुर वाणी हृदय में तेरे सकल विश्व की कहानी, अधरों पर है केवल नाम राधा रानी सूरत में तेरी अमृत बसी है, श्रृंगार में अनुपम शोभा बसी है तुझसे ही चमके सूरज की लाली, तेरी महिमा मालिक जगत में निराली तू जो हंसे तो हंसे सृष्टि सारी, गर बहे तेरे आंसू, तो आए विध्वंस की बारी तू चाहे तो रोगी भी स्वस्थ रहें, तू चाहे तो विपत्ति न कष्ट रहे देख लू ग़र जो तेरा रोज मुखड़ा, मिलता है मुझको आनंद का टुकड़ा मोर पंख से मस्तक सजाना, मुरली के तानों से वैराग्य गाना गोपियों के संग रास रचाना, ख्वाबों सा लगता तेरा हर फसाना जीवन से गम का ही भोजन मिला है, जरा मुझे आनंद की रोटी खिला ना डूब रही मेरी कश्ती ए मालिक, जरा मेरी कश्ती किनारे लगा ना बहुत ही सुना तेरे मुरली के चर्चे, जरा आज फिर तू वो मुरली बजा ना बुलाते थे तुम जिससे राधा को पहले , जरा आज फिर तू वो धुन गुनगुना ना बरसों से व्याकुल है नेत्र ये मेरे , जरा अपनी अनुपम छटा तू दिखा ना सुनाकर स्नेहसंगीत मुरारी, मेरे अधीर कर्णों को तृप्ति दिला ना विकल है ह्रदय तेरे दर्शन को मालिक, जरा अपने दर्शन की अमृत पिला ना करुण प्रेम संगीत सुनाते थे जैसे, वही राग फिर आज हमें भी सुना ना ©✍️verma priya"

मुरली मनोहर गोविंद गिरधारी, तेरी छवि प्रभु दुनिया में न्यारी
 सूरत है रमणीय कृति है प्यारी, जैसे खिली हो पुष्पों की क्यारी
 सजल तेरे नेत्रों में यमुना का पानी, मुख में भरा है करुण मधुर वाणी
 हृदय में तेरे सकल विश्व की कहानी, अधरों पर है केवल नाम राधा रानी
 सूरत में तेरी अमृत बसी है, श्रृंगार में अनुपम शोभा बसी है
 तुझसे ही चमके सूरज की लाली, तेरी महिमा मालिक जगत में निराली
 तू जो हंसे तो हंसे सृष्टि सारी, गर बहे  तेरे आंसू, तो आए विध्वंस की बारी
 तू चाहे तो रोगी भी स्वस्थ रहें, तू चाहे तो विपत्ति न कष्ट रहे 
 देख लू ग़र जो तेरा रोज मुखड़ा, मिलता है मुझको आनंद का टुकड़ा 

 मोर पंख से मस्तक सजाना, मुरली के तानों से वैराग्य गाना
 गोपियों के संग  रास रचाना, ख्वाबों सा लगता तेरा हर फसाना
 जीवन से गम का ही भोजन मिला है, जरा मुझे आनंद की रोटी खिला ना
डूब रही मेरी कश्ती ए मालिक, जरा मेरी कश्ती किनारे लगा ना
 बहुत ही सुना तेरे मुरली के चर्चे, जरा आज फिर तू वो मुरली बजा ना
 बुलाते थे तुम जिससे राधा को पहले , जरा आज फिर तू वो धुन गुनगुना ना
 बरसों से व्याकुल है नेत्र ये मेरे , जरा अपनी अनुपम छटा तू दिखा ना
 सुनाकर स्नेहसंगीत मुरारी, मेरे अधीर कर्णों को तृप्ति दिला ना
 विकल है ह्रदय तेरे दर्शन को मालिक, जरा अपने दर्शन की अमृत पिला ना
 करुण प्रेम संगीत सुनाते थे जैसे,  वही राग फिर आज हमें भी सुना ना

©✍️verma priya

#God #Love #peace #poem #Quote About Me. पूरा देसी हूं Vikky Singh Srawan Kumar Khichi Nidhi Karan Meshram

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"पूरब से तुम आते हो सिंदूरी रंग संग लाते हो उज्जवल किरणे धरा पर, प्रत्येक सुबह फैलाते हो घन के भीतर दूर कहीं, तम का प्रभाव छुपाते हो लेकर भोर का संदेशा, तुम कितनी दूर से आते हो शिक्षा शासन कारोबार में, कितना हाथ बटाते हो संपूर्ण जगत की काया, अपनी महिमा से चमकाते हो पशु पंछी के करुण स्वर से, जीवन का राग सुनाते हो स्वर्ण की चमक से धरा को, अतिशय रमणीय बनाते हो मानव के भीतर कार्य का उत्साह, उषा के संग लाते हो ईश्वर की महिमा के जैसे, संपूर्ण धरा पर छाते हो काशी बनारस आर्यवर्त की, गलियों को अतिशय भाते हो गंगा यमुना की धारा में, अनुपम कांति लाते हो वन उपवन, पुष्प कलियों की, शोभा को अपूर्व बनाते हो तन मन को एक नई चेतना, हर नई सुबह दे जाते हो यकीं भरोसा ज्ञान की अलख, निखिल जगत में जगाते हो ©✍️verma priya"

पूरब से तुम आते हो 
सिंदूरी रंग संग लाते हो
 उज्जवल किरणे धरा पर, प्रत्येक सुबह फैलाते हो
घन के भीतर दूर कहीं, तम का प्रभाव छुपाते हो
 लेकर भोर का संदेशा, तुम कितनी दूर से आते हो
 शिक्षा शासन कारोबार में, कितना हाथ बटाते हो
 संपूर्ण जगत की काया,  अपनी महिमा से चमकाते हो
 पशु पंछी के करुण स्वर से, जीवन का राग सुनाते हो
 स्वर्ण की चमक से धरा को,  अतिशय रमणीय बनाते हो
 मानव के भीतर कार्य का उत्साह, उषा के संग लाते हो
 ईश्वर की महिमा के जैसे,  संपूर्ण धरा पर छाते हो
 काशी बनारस आर्यवर्त की, गलियों को अतिशय भाते हो
 गंगा यमुना की धारा में, अनुपम कांति लाते हो
 वन उपवन, पुष्प कलियों की, शोभा को अपूर्व बनाते हो
 तन मन को एक नई चेतना,  हर नई सुबह दे जाते हो
 यकीं भरोसा ज्ञान की अलख, निखिल जगत में जगाते हो

©✍️verma priya

#beauty_of_nature #peace #Quote #poem #Love आशीष त्रिपाठी अश्क irslan khan Aazadपँछी Vivek Muskan डॉ.अजय मिश्र

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#Daughters day @Ayush Gondane @Neeraj Bakle (neer✍🏻) @pooja negi# @Girdhari tiwari @रोहित तिवारी ।

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"गिरकर स्याही पन्ने पर, एक दाग़ हो गयी पता चला न उसे की, वो बर्बाद हो गयी ग़र सजा दिया पन्ने पर, मन का राग हो गयी दुःख सुख की अनुभूति का, एक बाग़ हो गयी प्रतियां छपी ग़र उसकी, फिर किताब हो गयी किया सफर तय पूरा तो, आबाद हो गयी ©✍️verma priya"

गिरकर स्याही पन्ने पर, एक दाग़ हो गयी 
पता चला न उसे की, वो बर्बाद हो गयी 
ग़र सजा दिया पन्ने पर,  मन का राग हो गयी 
दुःख सुख की अनुभूति का,  एक बाग़ हो गयी 
 प्रतियां छपी ग़र उसकी,  फिर किताब हो गयी 
किया सफर तय पूरा तो,  आबाद हो गयी

©✍️verma priya

#Quote #poem #peace #ink #Love Vijay Rawat Krishna's Devotees tushar pandit♥️♥️ 😘 😘 😘😘 VINAY PANWAR INDIAN ARMY💕💕 Neeraj Bakle (neer✍🏻)

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