verma priya✍️

verma priya✍️ Lives in Durgapur, West Bengal, India

poetry is my passion not a proffesion🙏🙏

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"कुछ बीते हुए लम्हे , कुछ गुजरे हुए पल कुछ पिछली बुरी यादें, कुछ गुजरे हुए कल भूल चुका मैं सब कुछ, जो सहा था मैंने कल जीवन का आनंद आज में, ये है सबसे हसीन पल क्यों सोचूं अतीत के विषय में, या भविष्य का कल आज से बेहतर क्या देगा? , अगला और पिछला कल"

कुछ बीते हुए लम्हे , कुछ  गुजरे हुए पल 
कुछ पिछली बुरी यादें, कुछ गुजरे हुए कल 
 भूल चुका मैं सब कुछ, जो सहा था मैंने कल
 जीवन का आनंद आज में,  ये है सबसे हसीन पल
  क्यों सोचूं अतीत के विषय में, या भविष्य का कल
 आज से बेहतर क्या देगा? , अगला और पिछला कल

#Missing #peace #Quote #Love #poem Kuldeep Kumar tushar pandit♥️♥️ 😘 😘 😘😘 Ume inworld Neeraj Mishra Yogesh

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"मुरली मनोहर गोविंद गिरधारी, तेरी छवि प्रभु दुनिया में न्यारी सूरत है रमणीय कृति है प्यारी, जैसे खिली हो पुष्पों की क्यारी सजल तेरे नेत्रों में यमुना का पानी, मुख में भरा है करुण मधुर वाणी हृदय में तेरे सकल विश्व की कहानी, अधरों पर है केवल नाम राधा रानी सूरत में तेरी अमृत बसी है, श्रृंगार में अनुपम शोभा बसी है तुझसे ही चमके सूरज की लाली, तेरी महिमा मालिक जगत में निराली तू जो हंसे तो हंसे सृष्टि सारी, गर बहे तेरे आंसू, तो आए विध्वंस की बारी तू चाहे तो रोगी भी स्वस्थ रहें, तू चाहे तो विपत्ति न कष्ट रहे देख लू ग़र जो तेरा रोज मुखड़ा, मिलता है मुझको आनंद का टुकड़ा मोर पंख से मस्तक सजाना, मुरली के तानों से वैराग्य गाना गोपियों के संग रास रचाना, ख्वाबों सा लगता तेरा हर फसाना जीवन से गम का ही भोजन मिला है, जरा मुझे आनंद की रोटी खिला ना डूब रही मेरी कश्ती ए मालिक, जरा मेरी कश्ती किनारे लगा ना बहुत ही सुना तेरे मुरली के चर्चे, जरा आज फिर तू वो मुरली बजा ना बुलाते थे तुम जिससे राधा को पहले , जरा आज फिर तू वो धुन गुनगुना ना बरसों से व्याकुल है नेत्र ये मेरे , जरा अपनी अनुपम छटा तू दिखा ना सुनाकर स्नेहसंगीत मुरारी, मेरे अधीर कर्णों को तृप्ति दिला ना विकल है ह्रदय तेरे दर्शन को मालिक, जरा अपने दर्शन की अमृत पिला ना करुण प्रेम संगीत सुनाते थे जैसे, वही राग फिर आज हमें भी सुना ना"

मुरली मनोहर गोविंद गिरधारी, तेरी छवि प्रभु दुनिया में न्यारी
 सूरत है रमणीय कृति है प्यारी, जैसे खिली हो पुष्पों की क्यारी
 सजल तेरे नेत्रों में यमुना का पानी, मुख में भरा है करुण मधुर वाणी
 हृदय में तेरे सकल विश्व की कहानी, अधरों पर है केवल नाम राधा रानी
 सूरत में तेरी अमृत बसी है, श्रृंगार में अनुपम शोभा बसी है
 तुझसे ही चमके सूरज की लाली, तेरी महिमा मालिक जगत में निराली
 तू जो हंसे तो हंसे सृष्टि सारी, गर बहे  तेरे आंसू, तो आए विध्वंस की बारी
 तू चाहे तो रोगी भी स्वस्थ रहें, तू चाहे तो विपत्ति न कष्ट रहे 
 देख लू ग़र जो तेरा रोज मुखड़ा, मिलता है मुझको आनंद का टुकड़ा 

 मोर पंख से मस्तक सजाना, मुरली के तानों से वैराग्य गाना
 गोपियों के संग  रास रचाना, ख्वाबों सा लगता तेरा हर फसाना
 जीवन से गम का ही भोजन मिला है, जरा मुझे आनंद की रोटी खिला ना
डूब रही मेरी कश्ती ए मालिक, जरा मेरी कश्ती किनारे लगा ना
 बहुत ही सुना तेरे मुरली के चर्चे, जरा आज फिर तू वो मुरली बजा ना
 बुलाते थे तुम जिससे राधा को पहले , जरा आज फिर तू वो धुन गुनगुना ना
 बरसों से व्याकुल है नेत्र ये मेरे , जरा अपनी अनुपम छटा तू दिखा ना
 सुनाकर स्नेहसंगीत मुरारी, मेरे अधीर कर्णों को तृप्ति दिला ना
 विकल है ह्रदय तेरे दर्शन को मालिक, जरा अपने दर्शन की अमृत पिला ना
 करुण प्रेम संगीत सुनाते थे जैसे,  वही राग फिर आज हमें भी सुना ना

#God #Love #peace #poem #Quote tushar pandit♥️♥️ 😘 😘 😘😘 Sundeepak Sandeep Bouncer VINAY KUMAR Rahul Kavi (8924899247)

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#Daughters day @Ayush Gondane @Neeraj Bakle (neer✍🏻) @pooja negi# @Girdhari tiwari @रोहित तिवारी ।

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"पूरब से तुम आते हो सिंदूरी रंग संग लाते हो उज्जवल किरणे धरा पर, प्रत्येक सुबह फैलाते हो घन के भीतर दूर कहीं, तम का प्रभाव छुपाते हो लेकर भोर का संदेशा, तुम कितनी दूर से आते हो शिक्षा शासन कारोबार में, कितना हाथ बटाते हो संपूर्ण जगत की काया, अपनी महिमा से चमकाते हो पशु पंछी के करुण स्वर से, जीवन का राग सुनाते हो स्वर्ण की चमक से धरा को, अतिशय रमणीय बनाते हो मानव के भीतर कार्य का उत्साह, उषा के संग लाते हो ईश्वर की महिमा के जैसे, संपूर्ण धरा पर छाते हो काशी बनारस आर्यवर्त की, गलियों को अतिशय भाते हो गंगा यमुना की धारा में, अनुपम कांति लाते हो वन उपवन, पुष्प कलियों की, शोभा को अपूर्व बनाते हो तन मन को एक नई चेतना, हर नई सुबह दे जाते हो यकीं भरोसा ज्ञान की अलख, निखिल जगत में जगाते हो"

पूरब से तुम आते हो 
सिंदूरी रंग संग लाते हो
 उज्जवल किरणे धरा पर, प्रत्येक सुबह फैलाते हो
घन के भीतर दूर कहीं, तम का प्रभाव छुपाते हो
 लेकर भोर का संदेशा, तुम कितनी दूर से आते हो
 शिक्षा शासन कारोबार में, कितना हाथ बटाते हो
 संपूर्ण जगत की काया,  अपनी महिमा से चमकाते हो
 पशु पंछी के करुण स्वर से, जीवन का राग सुनाते हो
 स्वर्ण की चमक से धरा को,  अतिशय रमणीय बनाते हो
 मानव के भीतर कार्य का उत्साह, उषा के संग लाते हो
 ईश्वर की महिमा के जैसे,  संपूर्ण धरा पर छाते हो
 काशी बनारस आर्यवर्त की, गलियों को अतिशय भाते हो
 गंगा यमुना की धारा में, अनुपम कांति लाते हो
 वन उपवन, पुष्प कलियों की, शोभा को अपूर्व बनाते हो
 तन मन को एक नई चेतना,  हर नई सुबह दे जाते हो
 यकीं भरोसा ज्ञान की अलख, निखिल जगत में जगाते हो

#beauty_of_nature #peace #Quote #poem #Love @आशीष त्रिपाठी अश्क @irslan khan @Aazadपँछी @Vivek Muskan @डॉ.अजय मिश्र

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"#NationalYouthDay सरहद के दायरे में रहकर देश की सुरक्षा संभव नहीं उसके लिए एयर स्ट्राइक करना ही पड़ता है जब हैवानियत बढ़ जाए धरा पर, तब कुरुक्षेत्र में उतरना ही पड़ता है प्रेम न्याय की परिपाटी पर, जिहादी मंसूबों को मरना ही पड़ता है ग़र मानवता का कत्ल हुआ, तो शिव तांडव करना ही पड़ता है ग़र सीमा लाँघे आतंकी, तो रक्तपात करना ही पड़ता है जब भेड़िए हो जाए खूंखार, तो सिंह को मैदान में उतरना ही पड़ता है केवल प्रहार ही काफी नहीं, उनका सर्वनाश करना ही पड़ता है गुलाब जैसे देश की रक्षा, जवानों को, कांटो के जैसा करना ही पड़ता है कश्मीर की माटी में, सुगंधित केसर को पनपना ही पड़ता है, शत्रु के लिए जवानों को, नागफनी बनना ही पड़ता है जब थम ना पाए ज्वाला तो गंगा को आगे बढ़ना ही पड़ता है सृष्टि के कल्याण के लिए लहरों की चिंगारी से लड़ना ही पड़ता है"

#NationalYouthDay   सरहद के दायरे में रहकर देश की सुरक्षा संभव नहीं
 उसके लिए एयर स्ट्राइक करना ही पड़ता है
 जब हैवानियत बढ़ जाए धरा पर,  तब कुरुक्षेत्र में उतरना ही पड़ता है
 प्रेम न्याय की परिपाटी पर,  जिहादी मंसूबों को मरना ही पड़ता है
 ग़र मानवता का कत्ल हुआ,  तो शिव तांडव करना ही पड़ता है
 ग़र सीमा लाँघे आतंकी, तो रक्तपात करना ही पड़ता है
 जब भेड़िए हो जाए खूंखार, तो सिंह को मैदान में उतरना ही पड़ता है
 केवल प्रहार ही काफी नहीं, उनका सर्वनाश करना ही पड़ता है
 गुलाब जैसे देश की रक्षा,  जवानों को, कांटो के जैसा करना ही पड़ता है
  कश्मीर की माटी में, सुगंधित केसर को पनपना ही पड़ता है, 
 शत्रु के लिए जवानों को, नागफनी बनना ही पड़ता है
 जब थम ना पाए ज्वाला तो गंगा को आगे बढ़ना ही पड़ता है
 सृष्टि के कल्याण के लिए लहरों की चिंगारी से लड़ना ही पड़ता है

#National_Youth_Day #peace #Love #Quote #poem irslan khan Neeraj Bakle (neer✍🏻) Somendra Pratap Singh "गुमनाम" Poetry Stage

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