Nojoto: Largest Storytelling Platform

New मजदूर पेंशन योजना Quotes, Status, Photo, Video

Find the Latest Status about मजदूर पेंशन योजना from top creators only on Nojoto App. Also find trending photos & videos about, मजदूर पेंशन योजना.

    PopularLatestVideo

DR. LAVKESH GANDHI

पेंशन # पेंशन -की -टेंशन # yqlifelessons yqjivan #

read more
पेंशन 

पेंशन आने वाली है 
अब खूब सजेगी थाली 
चार दिनों के बाद 
फिर आएगी अँधियाली 
यही तो है बुढ़ापे में 
पेंशन की कहानी 
 #पेंशन #
#पेंशन -की -टेंशन #
#yqlifelessons #yqjivan #

SHOONYA

#पुरानी पेंशन योजना #अशोक गहलोत #विचार

read more
आ बैठ मारे कने, थारी पुराणी पेंशण बांधू।
केवण हाला केवेला, जादूगर कीकर करियो जादू।।
आ बैठ मारे कने, थारी पुराणी पेंशण बांधू।
जो कोई ना कर सकियो वो कर ने दिखा दूं,।।
आ बैठ मारे कने, थारी पुराणी पेंशण बांधू।
NPS/OPS रो झगड़ों आज बंद करा दूं।
आ बैठ मारे कने, थारी पुराणी पेंशण बांधू।।
कोई ओ थे पुराणी पेंशण हाला हो?
इन बाता रो आज अंत करवा दूं,
आ बैठ मारे कने,थारे भी पुराणी पेंशण बंधा दूं।।

© SHOONYA #पुरानी पेंशन योजना
#अशोक गहलोत

Dinesh Yadav

नई पेंशन योजना का विरोध #न्यूज़

read more
mute video

Dr Satish Maurya

मजबूर मजदूर

read more
साथ मे बच्चे 
नन्हें नन्हें पैर ,सहा न जाय काली रोड की तपिश,और दूरी का जहर ऊपर से प्यास और भूख का कहर, मोटर न सवारी मीडिया ले रहे फ़ोटो बारी बारी
मजदूर और उनके बच्चों की मजबूरी 
ले रहे पत्रकार फ़ोटो बारी बारी, मजबूर मजदूर

Pradeep Kumar Mishra

mute video

monu agrawal

मजबूर मजदूर #poem

read more
mute video

DHIRAJ GARG

मजबूर मजदूर #nojotovideo

read more
mute video

jagdish dawar

# मजबूर मजदूर

read more
mute video

Satish Kaushal

मजदूर मजबूर #कविता

read more
बहुत कुछ कहके हम फसना नही चाहते,
दो वक्त की रोटी मिल रही है वही बहुत है..
सच बोलकर इन रोटियों के लिए 
तरसना नही चाहते..
समय और हालात एक सा नहीं रहता,
आज है तो कल भी आएगा
जो चमक रहा है दिन के उजालों की तरह,
वक्त का पहिया घूमेगा और 
वो भी ढल ही जायेगा..
इतना कुछ कहके भी क्या होने वाला है
तेरे हिस्से में जितनी मुस्कुराहट है मुस्कुराले
क्यों की तू तो ऐसे ही रोने वाला है...
तू मजदूर है मजबूर रहेगा,
तुझे इंसान कौन समझता यहां
तेरे दर्द तेरे है यहां 
तेरे दर्द को कौन सहेगा..
मत सुना अपने दर्द जमाने को
लोग तेरा मजाक बनाएंगे
तू रोएगा और ये मुस्कुराएंगे

©Satish Kaushal मजदूर 
मजबूर

कौशिक

मजबूर मजदूर

read more
हां मजदूर हूं मैं
पर उस से कहीं ज्यादा मजबूर हूं मैं
दिन भर मेहनत कर पसीना बहाता हूं
तब कहीं जाकर मुठ्ठी भर कमाता हूं                               
 मजदूर हूं 
अपना घर  परिवार छोड़के आता हूं
 शौक नहीं मजबूर हूं
 इसलिए शहर शहर ठोकरें खाता हूं
सोचता था एक धागा हूं जिसमे शहरों के मोती पिरोता हूं
सोचता था मै वो कड़ी हूं जो भारत को भारत होने देता हूं 
 ये मोटर,ये गाड़ी आलीशान बंगले साहब
 सब बने मेरे ही पसीने से हैं
 वो संसद जिसमे होती है  साजिशे मेरे ही खिलाफ
 वो भी इन्हीं हाथो के नगीने हैं
लोग देखते है कारीगरी तो तारीफ करते हैं
जब मेरे  लिए कुछ करने की बारी होती है
तब बस टीवी के आगे बातें करते हैं
बहुत तो कहते हैं 
ये मजदूर है टिकता नहीं है एक जगह
देश में महमारी फैलाने की यही है बस एक वजह
  मुझे तो कोई शौक नहीं   दर दर भटकने का
  रोटी कपड़ा मिलता यहीं पर  तो साहब क्यों करता 
  मीलों का पैदल सफर
क्या देखते नहीं या दिखता ही नहीं हुक्मरानों को
देश का सिपाही देश में ही मोहताज है
दाने दाने को  
(देश में मजदूर होना अभिशाप है
मजदूर होने की सज़ा पूरा परिवार भुगतता है) मजबूर मजदूर
loader
Home
Explore
Events
Notification
Profile