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अनुषी का पिटारा "अंग प्रदेश "

नमस्ते हमसे आप दुनिया बेहतर हैं समझते
चलते चलें बेफिक्र, पर ज़िंदगी नहीं है सस्ते
हम हाथ नहीं मलते, इसे जोड़ कर हैं चलते
क्योंकि मन में "राम" दिलों में आप जो बसते

"शुभ प्रभात, जय श्रीराम, राधेराधे"

©अनुषी का पिटारा.. #सर्वहारा #सीख 

#hands
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DB BKD

क्रांति #क्रांति

27 Views

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Dr Arun Pratap Singh Bhadauria

विश्वाश सर्वहारा का खोया

विश्वाश सर्वहारा का खोया #विचार

1,387 Views

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Kranti Thakur

मोहब्बत ठहराव ढूँढता है
और तुम अटकने की आदी हो
मैं खामोशियों को लिखता हूँ
तुम भावपूर्ण सहज़ादी हो

- क्रांति #क्रांति
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NARPAT SINGH

क्रांति

क्रांति

30 Views

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Author Harsh Ranjan

क्रांति किसी कुचले इंसान का
हिम्मतवर और सुंदर सपना है,
भूखी दुनिया की आखिरी ख्वाहिश
उसकी सारी लड़ाइयां, उसकी फरमाइश,
रोटी से रोटी तक होती है।
दलने के लिए तो वेश्याएँ भी दली जाती हैं,
वो अपने निचले अंगों के पीछे
अपना पेट उठाये चली जाती हैं,
इस दुनिया को जो मैंने पाया है
बुजुर्गों ने सोलह आने सच बताया है,
असंतोष भूख से बड़ी बला होती है।
भूखी आबादी क्रांति नहीं करती।
कुचल देना अंध-व्यवस्थाओं
की कला होती है फिर भी
ये पिसे हुए, घिसे हुए लोग
जब थोड़ा आदतन, थोड़ा मजबूरन
सपने देखते हैं तो समझ लीजिए
या तो उनके पेट भरे हैं
या तो उनके सामने उनके चहेते मरे पड़े हैं।




 क्रांति

क्रांति

0 Love

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राजेश कुमार बी.जी

सब्र का बांध जब टूटता है 
तो ज्वालामुखी सा फूटता है 
हद हे ज्यादा जुलम जालिम के
क्रांति को जन्म देते हैं

          .......राजेश बी.जी क्रांति

क्रांति

12 Love

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𝓂𝓊𝓀𝑒𝓈𝒽 𝓅𝒶𝓇𝑒𝑒𝓀

में कोई कथा नही क्रांति सुनाने आया हूं,,
हर फोजी के दिल की ,,,,,,,
                        देश भक्ति गाने आया हूं ।।

में कारतुस नहीं चलता तो क्या हुआ ,,,,,,,,,,,
खुद की कलम चलाने आया हूं ।    
में भी एक देश भक्त हूँ ,,,,,,,,
मेरा फर्ज निभाने आया हु ।।
 #NojotoQuote क्रांति

क्रांति

8 Love

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Somanath AH

आरंभ है युद्ध का लाखों सिरों का कटना बाकी है।
भड़क गई है चिंगारी,
आग लगना बाकी है।
                  **क्रांति** क्रांति

क्रांति

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Manmohan Dheer

वो उठा
उठ कर देखा
फिर सो गया
कोई और जाग रहा था
उसे उठना ही पड़ा
उसने देखा
साथी सो गया था
वो अकेला हो गया 
.
क्रान्ति स्थगित हो गई 
.
धीर क्रांति

क्रांति

0 Love

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Sandeep Prajapati

evm हटाओ ,
देश बचाओ। क्रांति

क्रांति

5 Love

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Anil Singhania

आसान नहीं है, क्रांतिकारी होना.. 

क्रांति करने से पहले क्रांति करनी होती है
खुद के साथ 
 और लाना पड़ता है इंक़लाब ख़ुद में,किसी इंक़लाब से पहले
 और.. 
दुश्मन से पहले मारना पड़ता है 
ख़ुद के रिश्तों को 
ख़ुद की चाहतों को 
ख़ुद के परिवार को 
और  
ख़ुद की हसरतें तो दबा देनी होती हैं नारों में  !

महबूबा बनाना पड़ता है गोली, टोली और किताबों को,  
और हाँ 

क्रांति भी यूँ ही नहीं आती किसी लफ़्फ़ाज़ के साथ,  
चुनती है 
अपना महबूब ख़ुद !!!
जो  करेगा मुहब्बत उससे किसी मुहब्बत से ज्यादा !!!!

क्यूंकि मुहब्बत नहीं है आसान, 
और आसान नहीं है 
क्रांतिकारी होना !!!!!
तीनों चिर युवाओं को नमन !! क्रांति

क्रांति

11 Love

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Author Harsh Ranjan

क्रांति किसी कुचले इंसान का
हिम्मतवर और सुंदर सपना है,
भूखी दुनिया की आखिरी ख्वाहिश
उसकी सारी लड़ाइयां, उसकी फरमाइश,
रोटी से रोटी तक होती है।
दलने के लिए तो वेश्याएँ भी दली जाती हैं,
वो अपने निचले अंगों के पीछे
अपना पेट उठाये चली जाती हैं,
इस दुनिया को जो मैंने पाया है
बुजुर्गों ने सोलह आने सच बताया है,
असंतोष भूख से बड़ी बला होती है।
भूखी आबादी क्रांति नहीं करती।
कुचल देना अंध-व्यवस्थाओं
की कला होती है फिर भी
ये पिसे हुए, घिसे हुए लोग
जब थोड़ा आदतन, थोड़ा मजबूरन
सपने देखते हैं तो समझ लीजिए
या तो उनके पेट भरे हैं
या तो उनके सामने उनके चहेते मरे पड़े हैं।




 क्रांति

क्रांति

0 Love

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Kranti Thakur

तुम्हारी यादोँ का कारोबार मैं नहीं कर सकता।
मैं ठहरा सपनो का सौदागर।
अपनी चाहत अपनी ख़्वाहिशें नहीँ बेच सकता।।

- क्रांति #ख़्वाहिशें #क्रांति
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Kranti Thakur

आज़ अपने ज़ज़्बातों को थाम लेना।
हो सके तो सब्र से ज़रा काम लेना।
अबके शायद मैं वापस लौटूँ ही नहीं।
सरहदों पर बाँकी है अभी बहुतों से इंतकाम लेना।।

     - क्रांति #ज़ज़्बात #क्रांति
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Kranti Thakur

एक अरसे से तीनों साथ नहीं हैं
कलम, वक़्त और मैं।।

- क्रांति #मैं #क्रांति
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Kranti Thakur

सारे इल्ज़ामो से आज दुनीयाँ को बस इतना जाना।

बदनाम होने से कहीँ बेहतर है बुरा हो जाना।।

- क्रांति #इलज़ाम #क्रांति
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Kranti Thakur

#OpenPoetry गर क़ायदे से इन आँखों को तुमने पढ़ लिया होता।
तो ज़माने भर की गफलतों से यूँ गुमराह फिर ना होते।।

- क्रांति #गफ़लत #क्रांति
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Kranti Thakur

अब तो खुद से भी कोई उम्मीद नहीं बाँकि
फिर नाउम्मीदी का तुमसे गिला कैसा।।

-क्रांति #उम्मीद #क्रांति
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Kranti Thakur

शिकवे थे जब तुम अपने थे
तुमने समझा है पराया
तो फिर शिकायत कैसी।।

- क्रांति #शिकायत #क्रांति
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Kranti Thakur

सुकून-ए-दिल की कीमत भी मेरे आँसु थे
आज छलक आये तो ज़िन्दगी कुछ आसान हुई।।

- क्रांति #सुकून #क्रांति
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NARPAT SINGH

संचार क्रांति

संचार क्रांति

45 Views

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Kranti Thakur

आज बचपन के टूटे खिलौने को देख ये एहसास हुआ।
बचपन तो अब भी वहीँ है
वक़्त की दौर में बस हमने अपना बचपना खोया।।

     - क्रांति #बचपन #क्रांति
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Kranti Thakur

दो लोगोँ की मोहब्बत पे
गर ज़माने को ईश्क़ आ जाये
ईश्क़ तीन तरफ़ा हो
तो यक़ीनन मंज़िलों को पा जाये।।

- क्रांति #ईश्क़ #क्रांति
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Kranti Thakur

दूर आसमान में उभरता हुआ चाँद दिखा,
तो ये एहसास हुआ शाम घिर आई है।
फिर यादोँ का वक़्त हुआ है,
फिर चारोँ तरफ तन्हाई है।।

अँधेरों ने दामन थामा है।
गुमसुदा फिर अपनी ही परछाई है।
फिर यादोँ का वक़्त हुआ है।
फिर चारोँ तरफ तन्हाई है।।

- क्रांति #तुम्हारी_याद #क्रांति
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Kranti Thakur

हमने चाहा था दिल को तुम्हारा मिले
तुम तो लेकर बेवफ़ाई हमसे हर बार मिले।
सूरत थी तेरी भोली वो चेहरा था तेरा सादा
उस सादगी के पीछे क्या खूब तुम फनकार मिले।
लेकर चेहरा तेरा नज़र में हम शेहराओँ में भटकते रहे।
तेरी मासूमियत के पीछे वो चेहरे भी दाग़दार मिले।
तेरी बेवफ़ाई से शर्मिंदा फिर मोहब्बत है।
क्युँ बनके मोहब्बत के तुम हमसे गुनाहगार मिले।
दिल में था तेरे झूठ तेरी मासूमियत भी झूठी थी।
और होंठों पर लेकर झूठ तुम नजाने कितनी बार मिले।
तेरे दिल में था कोई और तो एक बार हमसे कह देते।
तेरा ये सितम भी हँस हँस कर हम सह लेते।
पर तुम्हे तो शौक़ था इस दिल के क़त्ल करने का।
तो तरीके और भी थे ज़माने में क़त्ल करने के।
बस तुम्हें तो यार मेरे बेवफ़ाई के ही औज़ार मिले।
गिला तुमसे नहीं है अब शिकायत है उस खुद से।
मेरे मौला मेरे नसीब में ये कैसे वफ़ादार मिले।
या तो अब ज़मीं से कोई ज़लज़ला उठा तूँ।
या फिर आसमाँ से तूँ बिजलियाँ गिरा दे।
मौला तेरे ज़हान में तनहा बड़ा है दिल।
या तो मुझे बुला ले या ज़मीं पर तूँ आकर मिल।
तेरी बंदगी से ज्यादा मुझे ईश्क़ थी सनम से।
तो हिस्से में मेरे दिल के क्युँ ऐसे बेवफा यार मिले।
अब ज़ुस्तज़ु है तेरी ना उस बेवफ़ा सनम की।
रुख़्सत तेरे ज़हान से मुझको तो एकबार मिले।
रुख़्सत तेरे ज़हान से मुझको तो एकबार मिले।।

           - क्रांति #बेवफ़ाई #क्रांति
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Kranti Thakur

#DearZindagi  ये जो गुज़र रही है हवाएँ तेरे एहसासों की
ये जो महक रही हैं फ़ज़ाएँ तेरे आँचल सी
है ये चांदनी रात या तुम बेहिज़ाब से निकल आये
हूँ मैं आसमाँ में या तुम ज़मीं पर कहीँ उतर आये
तेरे सबनमी होंठों की है ये गुफ़्तगू कैसी
यूँ के मेरे कानों में घुल गयी हो चासनी जैसी
ये तेरा अक्स क्युँ उभर आया है मेरे सीने में
बड़ा सुकून सा आया है फिर ख़्वाबों में तेरे जीने में
आज सारे ज़ख्म जैसे खो गएँ हों मेरे आहों के
यूँ के सारे फासलों ने दम तोड़ दी हो राहोँ के
मेरी ख़्वाहिशों के जैसे तूँ ही तूँ मयस्सर हो कहीँ
सारी ज़िन्दगी सिमट आई हो जैसे तेरी बाँहों में।।

- क्रांति #एहसास #क्रांति
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Kranti Thakur

मंजिलोँ की फ़िक्र भला है किसको
गर हमसफ़र तुम हो
फ़िर ताउम्र ये सफ़र अच्छा है।।

    - क्रांति #हमसफर #क्रांति
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