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manoj kumar jha"Manu"

चिकित्सा को ईश्वरीय ज्ञान समझें चिकित्सक।

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जो चिकित्सक अपने स्वार्थ
एवं इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति की
परवाह न करते हुए केवल प्राणियों के कल्याण की भावना से ही चिकित्सा कार्य करते हैं, 
वे ही सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक कहलाने के योग्य हैं।
चरक संहिता
चि० १/४/५८ चिकित्सा को ईश्वरीय ज्ञान समझें
चिकित्सक।

कवि आदित्य बजरंगी

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Dr Op Singh

आयुर्वेद चिकित्सा संबंधी जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं !! #विचार

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Anjana Gupta Astrologer

वेद और चिकित्सा

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भारत के किस वेद में मिलता है चिकित्सा सम्बन्धी ज्ञान?  ऋग्वेद : ऋक अर्थात् स्थिति और ज्ञान। ऋग्वेद सबसे पहला वेद है जो पद्यात्मक है। इस वेद की 5 शाखाएं हैं - शाकल्प, वास्कल, अश्वलायन, शांखायन, मंडूकायन। इसमें भौगोलिक स्थिति और देवताओं के आवाहन  इसमें जल चिकित्सा, वायु चिकित्सा, सौर चिकित्सा, मानस चिकित्सा और हवन द्वारा चिकित्सा आदि की भी जानकारी मिलती है। ऋग्वेद के दसवें मंडल में औषधि सूक्त यानी दवाओं का जिक्र मिलता है। इसमें औषधियों की संख्या 125 के लगभग बताई गई है, जो कि 107 स्थानों पर पाई जाती है। औषधि में सोम का विशेष वर्णन है। ऋग्वेद में च्यवनऋषि को पुनः युवा करने की कथा भी मिलती है। वेद और चिकित्सा

Anjana Gupta Astrologer

वेद और चिकित्सा

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भारत के किस वेद में मिलता है चिकित्सा सम्बन्धी ज्ञान?  सामवेद : साम का अर्थ रूपांतरण और संगीत। सौम्यता और उपासना। इस वेद में ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप है।  इस वेद को संगीत शास्त्र का मूल माना जाता है। इसमें सविता, अग्नि और इंद्र देवताओं के बारे में जिक्र और मन की चिकित्सा का संबंध है। वेद और चिकित्सा

Anjana Gupta Astrologer

वेद और चिकित्सा

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भारत के किस वेद में मिलता है चिकित्सा सम्बन्धी ज्ञान?  यजुर्वेद : यजुर्वेद का अर्थ : यत् + जु = यजु। यत् का अर्थ होता है गतिशील तथा जु का अर्थ होता है आकाश। श्रेष्ठतम कर्म की प्रेरणा। यजुर्वेद में यज्ञ की विधियां और यज्ञों में प्रयोग किए जाने वाले मंत्र हैं। यज्ञ के अलावा तत्वज्ञान, इस वेद की दो शाखाएं हैं शुक्ल और कृष्ण।
 
कृष्ण :वैशम्पायन ऋषि का सम्बन्ध कृष्ण से है। कृष्ण की चार 
शुक्ल : याज्ञवल्क्य ऋषि का सम्बन्ध शुक्ल से है। शुक्ल की दो शाखाएं हैं।, दिव्य वैद्य और कृषि विज्ञान का भी विषय.और चिकित्सा हैं। वेद और चिकित्सा
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