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New इंदरगढ़ महाराज कीर्तन Status, Photo, Video

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हिंदू हृदय सम्राट महाबली महा पराक्रमी सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वाले परम प्रतापी महाराज महाराणा प्रताप जी की जयंती पर सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि फूड मंत्र परिवार छतरपुर ©Ritesh Gupta

#पौराणिककथा #maharanapratap  हिंदू हृदय सम्राट महाबली महा पराक्रमी सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वाले परम प्रतापी महाराज महाराणा प्रताप जी की जयंती पर सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि 

फूड मंत्र परिवार छतरपुर

©Ritesh Gupta

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ महामृत्युंजय;- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ हे तीन आँखों वाले महादेव, हमारे पालनहार, पालनकर्ता, जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बिना किसी यत्न के डाल से अलग हो जाता है, कृपया कर हमें उसी तरह इस दुनिया के मोह एवं माया के बंधनों एवं जन्म मरण के चक्र से मुक्ति दीजिए 🙏 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की स्वयं पर विश्वास करना सफलता प्राप्त करने का सबसे पहला रहस्य है..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की प्रशंसा हृदय से,हस्तक्षेप बुद्धिमत्ता से और प्रतिक्रिया विवेक से करने में ही समझदारी है अन्यथा मौन ही उतम है..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की अहसास सच्चे हों वही काफी है यकीन तो लोग सच पर भी नहीं करते है..., आखिर में एक ही बात समझ आई की यूं तो उलझे है सभी अपनी उलझनों में पर सुलझाने की कोशिश हमेशा होनी चाहिए...! बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....! 🙏सुप्रभात 🌹 आपका दिन शुभ हो विकास शर्मा'"शिवाया" 🔱जयपुर -राजस्थान 🔱 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#समाज  ✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️

               महामृत्युंजय;-
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
हे तीन आँखों वाले महादेव,  हमारे पालनहार, पालनकर्ता, जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बिना किसी यत्न के डाल से अलग हो जाता है,  कृपया कर हमें उसी तरह इस दुनिया के मोह एवं माया के बंधनों एवं जन्म मरण के चक्र से मुक्ति दीजिए 🙏

🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की स्वयं पर विश्वास करना सफलता प्राप्त करने का सबसे पहला रहस्य है...,

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की प्रशंसा हृदय से,हस्तक्षेप बुद्धिमत्ता से और प्रतिक्रिया विवेक से करने में ही समझदारी है अन्यथा मौन ही उतम है...,

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की अहसास सच्चे हों वही काफी है यकीन तो लोग सच पर भी नहीं करते है...,

आखिर में एक ही बात समझ आई की यूं तो उलझे है सभी अपनी उलझनों में पर सुलझाने की कोशिश हमेशा होनी चाहिए...!                   
             
बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....!
🙏सुप्रभात 🌹
आपका दिन शुभ हो 
विकास शर्मा'"शिवाया" 
🔱जयपुर -राजस्थान 🔱

©Vikas Sharma Shivaaya'

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ महामृत्युंजय;- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृत

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अपने पार्टनर का प्रेम कैसे प्राप्त करें

Saturday, 7 May | 09:10 am

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Kabir Is Supreme God आध्यात्मिक ज्ञान न होने से मानव की वर्तमान सोच:- अधिक से अधिक धन अर्जित कर मान बड़ाई प्राप्ति हेतु अभी जो चाहे वो कर लो

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एक शादी के निमंत्रण पर जाना था... पर मेरा वहाँ जाने का बिल्कुल मन नहीं था... क्योंकि गाँव की शादी में मुझे कोई रुचि नहीं थीं..।लेकिन घरवालों की जिद्द की वजह से मैं उनके साथ चल दिया...।वहाँ पहुंचकर.....बहाना बनाकर मैं गाँव की गलियों में विचरण करने निकल गया..। घरवालों ने शादी के कार्यक्रम तक आने का कहा..। उनकी बातों को अनसुना कर वहाँ से निकल गया..। विचरण करते करते मैं गाँव के बाहर आ गया था..। वहाँ मैने देखा... एक बड़ी सी लग्जरी गाड़ी में से एक सज्जन उतरे... उनके पहनावे और चाल चलन में उनकी रईसी साफ़ झलक रहीं थीं...। उनकी उम्र यहीं कोई पचास की होगी..। मैने देखा वो सज्जन एक पालिथिन लेकर एक पेड़ के चबुतरे पर गए... फिर उस पालिथिन को चबुतरे पर उड़ेल दिया और आओ आओ की आवाज निकालने लगे... पास के खेतों में चारा चरती हुई कुछ चार पांच गायें आवाज सुनते ही वहाँ आई और गुड़ जो उस सज्जन ने डाला था वो खाने लगी...। कुछ गायों को वो अपने हाथ से खिला रहे थे.. कुछ स्वयं खा रहीं थीं..। वो प्यार से सभी गायों के कभी सिर पर तो कभी गले पर हाथ फेर रहें थें..। कुछ मिनटों बाद सभी गाएं वहाँ से चलीं गई...। यहाँ तक तो सब कुछ सामान्य था... लेकिन उसके बाद जो हुआ वो अविस्मरणीय और आश्चर्य से भरा हुआ था..। मैने देखा.... सभी गायों के चले जाने के बाद उस सज्जन ने वहाँ बचा हुआ गायों का जूठा गुड़ उठाया और खुद खा लिया...। तीन चार टुकड़े उन्होंने उठाएं और खाकर वहाँ से वापस अपनी गाड़ी की ओर चल दिए...। ये सब देखकर मैं सोच में पड़ गया...। इतना अमीर... पैसे वाला शख्स जूठा गुड़ क्यूँ खा रहा हैं.... वो भी गायों का जूठा... जो वो खुद ही लाया था... खाना था तो पहले खुद के लिए निकाल देता..। तरह तरह के सवाल दिमाग में घुम रहें थे..। जिझासा वश में दौड़ कर उनके पास गया और उनकों आवाज देकर रोका :- रुकिए महाराज... कुछ देर ठहरिए... महानुभव मैंने अभी अभी जो देखा... वो मेरे ह्रदय में सौ सवाल पैदा कर गई हैं...। कृपया उनका समाधान किजिए वरना उधल पुथल चलतीं रहेगी..। वो सज्जन मुस्कुराए और बोले:- बोलो बेटा... क्या जानना चाहते हो..। मैने कहा :- महाराज आप खुद इतने अमीर हैं फिर भी आपने गायों का बचा हुआ जूठा गुड़ ही क्यूँ खाया..? वो सज्जन मुस्कुराएं और मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे उसी चबुतरे के पास लेकर गए और बोले:- बेटा बात आज से पैतिंस साल पहले की हैं.... घर में आंतरिक कलह और रोज़ रोज़ के झगड़ों से तंग आकर मैनें अपना घर छोड़ दिया... मैं भागते भागते इस जगह आ पहुंचा...। लेकिन दो दिन बाद ही मेरी हिम्मत जवाब देने लगी...। भूख की वजह से शरीर बेहाल हो गया...। यहाँ इसी जगह पर मैंने देखा की एक सज्जन गुड़ के कुछ टुकड़े गायों के लिए डालकर गया था..। तब यहाँ ये चबुतरा नहीं था...। पीपल का बड़ा सा पेड़ था.। मैं बेहाल सा होकर उसी पेड़ के नीचे बेसुध होकर पड़ा था...। मैने देखा वो सज्जन गुड़ डालकर चला गया... तब कुछ एक दो गाएं वहाँ आई और गुड़ को सिर्फ सुंघ कर वापस लौट गई....। मैं भूख के मारे निठाल सा हो गया था.. कोई रास्ता ना देख... मैने वो मिट्टी में रखा हुआ गुड़ साफ़ किया और झट से खा गया..। दो दिन बाद पेट में कुछ गया तो एक शांति सी मिली.... मैं वहीं उस पेड़ के नीचे सो गया..। सुबह हुई... अपने नित्य कर्म करके मैं काम की तलाश में निकल पड़ा....। लेकिन दुर्भाग्य मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा था...। कहीं काम नहीं मिला.. थक कर भूख से बेहाल होकर शाम ढलते ही मैं फिर उसी जगह आ पहुंचा...। आज भी वो सज्जन आए... गुड़ डाला और चले गए...। कल ही की तरह गायें आई.. गुड़ को देखा और बिना खाए चलीं गई...। मैं भी भूखा तो था ही... बिना समय गंवाएं झट से सारा गुड़ खा गया... और उसी पेड़ के नीचे सो गया..। अगले दिन फिर काम की तलाश में निकल गया...। इस बार ऊपरवाले को मुझपर दया आई और मुझे एक ढाबे पर काम मिल गया..। अब मैं वहीं रहकर काम करने और रहने लगा..। कुछ दिन बाद मालिक ने कुछ पैसे दिए..... ।मैनें एक किलो गुड़ लिया और ना जाने कौनसी शक्ति थीं जो मुझे वहाँ खींच रहीं थी...।वहां से सात किमी पैदल चलकर मैं उसी पेड़ के पास आया और सारा गुड़ डाल दिया....। गाएं भी नजदीक ही थीं...मेरे आवाज लगाते ही तुरंत आ गई..।इस बार मैने देखा की गाएं ने सारा गुड़ खा लिया...। यानि उन दो दिनों मैं उन गायों ने जानबूझकर गुड़ नहीं खाया था...। उन्होंने मेरे लिए गुड़ छोड़ दिया था...। उनकी ये ममता देखकर मेरा दिल भर आया..। मैं ढाबे पर आकर सोचता रहा...। कुछ समय बाद ही मुझे एक फर्म में काम मिला...। निरंतर कड़ी मेहनत से मैं बहुत जल्द एक फर्म का मालिक बन गया..। शादी हुई... बच्चे हुएं...। दिन ब दिन मैं तरक्की करता गया...। लेकिन अपने इस लंबे सफर में मैने कभी गाय माता को नहीं भुलाया...। मैं अक्सर यहाँ आता रहता हूँ और इनको गुड़ खिलाने के साथ साथ इनका स्नेह पाता हूँ...। आज मैं पांच फर्म का मालिक हूँ...। धन दौलत की कोई कमी नहीं हैं... लेकिन जो सुकून मुझे यहाँ आकर मिलता हैं... वो कहीं नहीं मिलता...। जो मिठास इनके जूठे गुड़ में मिलती हैं... वो किसी व्यंजन में नहीं मिलतीं..। इन गायों की ममता की वजह से ही मैं आज जिंदा हूं...। इनका उपकार तो मैं कभी नहीं भुला सकता..। मैं लाखों रुपये गौशाला में दान करता हूँ... लेकिन इन गायों का स्नेह मुझे आजभी यहाँ खींच लाता हैं...। ऐसा कहते कहते वो सज्जन भावुक हो गए और वहाँ से चले गए...। मैं कुछ पल उनको जातें देखता रहा... फिर ना जाने क्या सोचता हुआ... मैने भी वहाँ रखा एक गुड़ का टुकड़ा लिया और अपनी जिहृवा पर रखा.... सचमुच उसके जैसी मिठास मैने कभी महसूस नहीं की थी..। किसी ने सच ही कहा हैं गाय सच में हमारी माता तुल्य होतीं हैं..। उनकी ममता सच में अद्भुत हैं..। मैं उनके बारे में सोचता हुआ...। शादी के कार्यक्रम में शरीक होने चल पड़ा और इस बार दिल से मैने सारे कार्यक्रम का आनंद उठाया...। ©Diya Jethwani

#प्रेरक #PARENTS  एक शादी के निमंत्रण पर जाना था... पर मेरा वहाँ जाने का बिल्कुल मन नहीं था... क्योंकि गाँव की शादी  में मुझे कोई रुचि नहीं थीं..।लेकिन घरवालों की जिद्द की वजह से मैं उनके साथ चल दिया...।वहाँ पहुंचकर.....बहाना बनाकर मैं गाँव की गलियों में विचरण करने निकल गया..। घरवालों ने शादी के कार्यक्रम तक आने का कहा..। उनकी बातों को अनसुना कर वहाँ से निकल गया..। विचरण करते करते मैं गाँव के बाहर आ गया था..। 
वहाँ  मैने देखा... एक बड़ी सी लग्जरी गाड़ी में से एक सज्जन उतरे... उनके पहनावे और चाल चलन में उनकी रईसी साफ़ झलक रहीं थीं...। उनकी उम्र यहीं कोई पचास की होगी..। 
मैने देखा वो सज्जन एक पालिथिन लेकर एक पेड़ के चबुतरे पर गए... फिर उस पालिथिन को चबुतरे पर उड़ेल दिया और आओ आओ की आवाज निकालने लगे... पास के खेतों में चारा चरती हुई कुछ चार पांच गायें आवाज सुनते ही वहाँ आई और गुड़ जो उस सज्जन ने डाला था वो खाने लगी...। कुछ गायों को वो अपने हाथ से खिला रहे थे.. कुछ स्वयं खा रहीं थीं..। वो प्यार से सभी गायों के कभी सिर पर तो कभी गले पर हाथ फेर रहें थें..। कुछ मिनटों बाद सभी गाएं वहाँ से चलीं गई...। यहाँ तक तो सब कुछ सामान्य था... लेकिन उसके बाद जो हुआ वो अविस्मरणीय और आश्चर्य से भरा हुआ था..। 
मैने देखा.... सभी गायों के चले जाने के बाद उस सज्जन ने वहाँ बचा हुआ गायों का जूठा गुड़ उठाया और खुद खा लिया...। तीन चार टुकड़े उन्होंने उठाएं और खाकर वहाँ से वापस अपनी गाड़ी की ओर चल दिए...। ये सब देखकर मैं सोच में पड़ गया...। इतना अमीर... पैसे वाला शख्स जूठा गुड़ क्यूँ खा रहा हैं.... वो भी गायों का जूठा... जो वो खुद ही लाया था... खाना था तो पहले खुद के लिए निकाल देता..। तरह तरह के सवाल दिमाग में घुम रहें थे..। जिझासा वश में दौड़ कर उनके पास गया और उनकों आवाज देकर रोका :- रुकिए महाराज... कुछ देर ठहरिए... महानुभव मैंने अभी अभी जो देखा... वो मेरे ह्रदय में सौ सवाल पैदा कर गई हैं...। कृपया उनका समाधान किजिए वरना उधल पुथल चलतीं रहेगी..। 
वो सज्जन मुस्कुराए और बोले:- बोलो बेटा... क्या जानना चाहते हो..। 
मैने कहा :- महाराज आप खुद इतने अमीर हैं फिर भी आपने गायों का बचा हुआ जूठा गुड़ ही क्यूँ खाया..? 
वो सज्जन मुस्कुराएं और मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे उसी चबुतरे के पास लेकर गए और बोले:- बेटा बात आज से पैतिंस साल पहले की हैं.... घर में आंतरिक कलह और रोज़ रोज़ के झगड़ों से तंग आकर मैनें अपना घर छोड़ दिया... मैं भागते भागते इस जगह  आ पहुंचा...। लेकिन दो दिन बाद ही मेरी हिम्मत जवाब देने लगी...। भूख की वजह से शरीर बेहाल हो गया...। यहाँ इसी जगह पर मैंने देखा की एक सज्जन गुड़ के कुछ टुकड़े गायों के लिए डालकर गया था..। तब यहाँ ये चबुतरा नहीं था...। पीपल का बड़ा सा पेड़ था.। मैं बेहाल सा होकर उसी पेड़ के नीचे बेसुध होकर पड़ा था...। मैने देखा वो सज्जन गुड़ डालकर चला गया... तब कुछ एक दो गाएं वहाँ आई और गुड़ को सिर्फ सुंघ कर वापस लौट गई....। मैं भूख के मारे निठाल सा हो गया था.. कोई रास्ता ना देख... मैने वो मिट्टी में रखा हुआ गुड़ साफ़ किया और झट से खा गया..। दो दिन बाद पेट में  कुछ गया तो एक शांति सी मिली.... मैं वहीं उस पेड़ के नीचे सो गया..। सुबह हुई... अपने नित्य कर्म करके मैं काम की तलाश में निकल पड़ा....। लेकिन दुर्भाग्य मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा था...। कहीं काम नहीं मिला.. थक कर भूख से बेहाल होकर शाम ढलते ही मैं फिर उसी जगह आ पहुंचा...। आज भी वो सज्जन आए... गुड़ डाला और चले गए...। कल ही की तरह गायें आई.. गुड़ को देखा और बिना खाए चलीं गई...। मैं भी भूखा तो था ही... बिना समय गंवाएं झट से सारा गुड़ खा गया... और उसी पेड़ के नीचे सो गया..। अगले दिन फिर काम की तलाश में निकल गया...। इस बार ऊपरवाले को मुझपर दया आई और मुझे एक ढाबे पर काम मिल गया..। अब मैं वहीं रहकर काम करने और रहने लगा..। कुछ दिन बाद मालिक ने कुछ पैसे दिए..... ।मैनें एक किलो  गुड़ लिया और ना जाने कौनसी शक्ति थीं जो मुझे वहाँ खींच रहीं थी...।वहां से सात किमी पैदल चलकर मैं उसी पेड़ के पास आया और सारा गुड़ डाल दिया....। गाएं भी नजदीक ही थीं...मेरे आवाज लगाते ही तुरंत आ गई..।इस बार मैने देखा की गाएं ने सारा गुड़ खा लिया...। यानि उन दो दिनों मैं उन गायों ने जानबूझकर गुड़ नहीं खाया था...। उन्होंने मेरे लिए गुड़ छोड़ दिया था...। उनकी ये ममता देखकर मेरा दिल भर आया..। मैं ढाबे पर आकर सोचता रहा...। कुछ समय बाद ही मुझे एक फर्म में काम मिला...। निरंतर कड़ी मेहनत से मैं बहुत जल्द एक फर्म का मालिक बन गया..। शादी हुई... बच्चे हुएं...। दिन ब दिन मैं तरक्की करता गया...। लेकिन अपने इस लंबे सफर में मैने कभी गाय माता को नहीं भुलाया...। मैं अक्सर यहाँ आता रहता हूँ और इनको गुड़ खिलाने के साथ साथ इनका स्नेह पाता हूँ...। आज मैं पांच फर्म का मालिक हूँ...। धन दौलत की कोई कमी नहीं हैं... लेकिन जो सुकून मुझे यहाँ आकर मिलता हैं... वो कहीं नहीं मिलता...। जो मिठास इनके जूठे गुड़ में मिलती हैं... वो किसी व्यंजन में नहीं मिलतीं..। इन गायों की ममता की वजह से ही मैं आज जिंदा हूं...। इनका उपकार तो मैं कभी नहीं भुला सकता..। मैं लाखों रुपये गौशाला में दान करता हूँ... लेकिन इन गायों का स्नेह मुझे आजभी यहाँ खींच लाता हैं...। 
ऐसा कहते कहते वो सज्जन भावुक हो गए और वहाँ से चले गए...। 
मैं कुछ पल उनको जातें देखता रहा... फिर ना जाने क्या सोचता हुआ... मैने भी वहाँ रखा एक गुड़ का टुकड़ा लिया और अपनी जिहृवा पर रखा.... सचमुच उसके जैसी मिठास मैने कभी महसूस नहीं की थी..। किसी ने सच ही कहा हैं गाय सच में हमारी माता तुल्य होतीं हैं..। उनकी ममता सच में अद्भुत हैं..। मैं उनके बारे में सोचता हुआ...। शादी के कार्यक्रम में शरीक होने चल पड़ा और इस बार दिल से मैने सारे कार्यक्रम का आनंद उठाया...।

©Diya Jethwani

कर्म #PARENTS

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#कविता  स्मरण कर वीर शिवाजी महाराज का
दुश्मन के झुकते शीष मिलेंगे
तेरे संगी बन स्वयं कष्ट को हरने
वो समक्ष खड़े जगदीश मिलेंगे

©Navin Gautam

स्मरण कर वीर शिवाजी महाराज का दुश्मन के झुकते शीष मिलेंगे तेरे संगी बन स्वयं कष्ट को हरने वो समक्ष खड़े जगदीश मिलेंगे ©Navin Gautam

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जय श्री राम जय श्री राधे जय बाबा जी महाराज की ©Ashvindra Raja Raja

#समाज #MeriEid  जय श्री राम जय श्री राधे जय बाबा जी महाराज की

©Ashvindra Raja Raja

#MeriEid

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भागवत प्रवक्ता पंडित श्री राजेश कृष्ण जी महाराज मोबाइल नंबर 961 7779519 ©Rajesh Vaishanw neora

#समाज  भागवत प्रवक्ता पंडित श्री राजेश कृष्ण जी महाराज मोबाइल नंबर 961 7779519

©Rajesh Vaishanw neora

जय श्री राधे

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एक साधु जंगल में अपनी कुटिया बनाकर रहता था। एक दिन अचानक जोरों की वर्षा होने लगी।साधु ने कुटिया के दरवाजे को खोल दिया।राहगीर वर्षा से बचने के लिए साधु की कुटिया में आने लगे।कुटिया काफी छोटी थी। धीरे-धीरे कुटिया भरने लगी।पुनः कुछ राहगीर आ गये।एक राहगीर ने आवाज लगाई साधु महाराज मैं बरसात में भीग रहा हूं। मेरे साथ पत्नी और बच्चे हैं।कृपा कर दरवाजा खोलिए और हम लोगों को बचा लीजिए। कुटिया में पहले से मौजूद राहगीर साधु से बोल उठे।बाबा अब दरवाजा नहीं खोलिएगा।यहां पर जगह नहीं बची है।बाहर खड़े उस राहगीर से कह दीजिए कि कहीं और दूसरी जगह चला जाए। अगर वो लोग यहां आ गए तो हम सब को बाहर निकलना पड़ेगा। और हम लोग उनकी जगह भीग जाएंगे।साधु ने मना करने के बावजूद दरवाजा खोल दिया और बरसात में भींगते हुए राहगीर को प्रवेश कराते हुए खुद बाहर निकल गए। साधु ने पहले राहगीर से कहा यदि यही व्यवहार तुम्हारे साथ भी होती तो तुम भींगने से कैसे बचते?विपत्ति के समय यदि हम किसी भी कीमत पर बचना चाहते हैं तो हमें दूसरों के बचने के बारे में भी सोचना चाहिए। स्वार्थ में हम खुद के बारे में तो सोचते हैं परंतु दूसरों के बारे में सोचना बंद कर देते हैं।साधु की बात सभी राहगीर को समझ में आ गई थी। ©S Talks with Shubham Kumar

#प्रेरक #writings  एक साधु जंगल में अपनी कुटिया बनाकर रहता था। एक दिन अचानक जोरों की वर्षा होने लगी।साधु ने कुटिया के दरवाजे को खोल दिया।राहगीर वर्षा से बचने के लिए साधु की कुटिया में आने लगे।कुटिया काफी छोटी थी। धीरे-धीरे कुटिया भरने लगी।पुनः कुछ राहगीर आ गये।एक राहगीर ने आवाज लगाई साधु महाराज मैं बरसात में भीग रहा हूं। मेरे साथ पत्नी और बच्चे हैं।कृपा कर दरवाजा खोलिए और हम लोगों को बचा लीजिए। कुटिया में पहले से मौजूद राहगीर साधु से बोल उठे।बाबा अब दरवाजा नहीं खोलिएगा।यहां पर जगह नहीं बची है।बाहर खड़े उस राहगीर से कह दीजिए कि कहीं और दूसरी जगह चला जाए। अगर वो लोग यहां आ गए तो हम सब को बाहर निकलना पड़ेगा। और हम लोग उनकी जगह भीग जाएंगे।साधु ने मना करने के बावजूद दरवाजा खोल दिया और बरसात में भींगते हुए राहगीर को प्रवेश कराते हुए खुद बाहर निकल गए। साधु ने पहले राहगीर से कहा यदि यही व्यवहार तुम्हारे साथ भी होती तो तुम भींगने से कैसे बचते?विपत्ति के समय यदि हम किसी भी कीमत पर बचना चाहते हैं तो हमें दूसरों के बचने के बारे में भी सोचना चाहिए। स्वार्थ में हम खुद के बारे में तो सोचते हैं परंतु दूसरों के बारे में सोचना बंद कर देते हैं।साधु की बात सभी राहगीर को समझ में आ गई थी।

©S Talks with Shubham Kumar

स्वार्थ नहीं #writings

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#सुप्रभात #विचार #nojotohindi #Good  .  🌷G⭕⭕D🌷
    
🌴〽🔘➰ N❗N G🌴
   
जय श्री वीर तेजाजी महाराज की जी 
    
मनुष्य का सच्चा साथी और हर स्थिति में उसे संभालने वाला अगर कोई है तो वह आत्मविश्वास ही है...!

क्योंकि आत्मविश्वास ही हमारी बिखरी हुई समस्त चेतना और ऊर्जा को एकत्रित करके लक्ष्य की दिशा में लगाता है...!!
  
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

        🙏 🌹🌻 शूप्रभात🌻🌹🙏
                                                    
        🌹🙏  आपका दिन मंगलमय हो!🙏🌹

©CHOUDHARY HARDIN KUKNA

#सुप्रभात #Nojoto #Good #nojotohindi Madhusudan Shrivastava ANOOP PANDEY (इमोशनल किंग ) ds@entertainer.... Shashank Rajput SOHRAB KHAN F

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🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् सदा वसंतम हृदयारविंदे भवम भवानी सहितं नमामि || कर्पूरगौरं-कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले। करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं। संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं। भुजगेंद्रहारम्- इसका अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं। सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं,उनको मेरा नमन है🙏 ✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की हम जिनके झूठ का मान रख लेते हैं वो समझते हैं कि हमें बेवक़ूफ़ बना दिया ..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की सतगुरु- परमात्मा का प्यार एक सागर की तरह है,हम इसकी शुरूआत देख सकते हैं परंतु अंत नहीं ..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की दो बातों पर नियंत्रण होना जरूरी है-आमदनी पर्याप्त ना हो तो खर्चों पर और जानकारी प्रर्याप्त न हो तो शब्दों पर..., आखिर में एक ही बात समझ आई की मेहनत का मार्ग सरल तो नहीं होता पर हां सफलता मिलने के बाद जिंदगी को सरल जरूर बना देता है ...! बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....! 🙏सुप्रभात 🌹 आपका दिन शुभ हो स्वरचित स्वमौलिक विकास शर्मा'"शिवाया" 🔱जयपुर -राजस्थान 🔱 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#समाज  🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्
सदा वसंतम हृदयारविंदे
भवम भवानी सहितं नमामि ||

कर्पूरगौरं-कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।
करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं।
संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं।
भुजगेंद्रहारम्- इसका अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं।
सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं,उनको मेरा नमन है🙏

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की हम जिनके झूठ का मान रख  लेते हैं वो समझते हैं कि हमें बेवक़ूफ़ बना दिया ...,

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की सतगुरु- परमात्मा का प्यार एक सागर की तरह है,हम इसकी शुरूआत देख सकते हैं परंतु अंत नहीं ...,
          
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की दो बातों पर नियंत्रण होना जरूरी है-आमदनी पर्याप्त ना हो तो खर्चों पर और जानकारी प्रर्याप्त न हो तो शब्दों पर...,

आखिर में एक ही बात समझ आई की मेहनत का मार्ग सरल तो नहीं होता पर हां सफलता मिलने के बाद जिंदगी को सरल जरूर बना देता है ...!

बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....!
🙏सुप्रभात 🌹
आपका दिन शुभ हो 
स्वरचित स्वमौलिक
विकास शर्मा'"शिवाया" 
🔱जयपुर -राजस्थान 🔱

©Vikas Sharma Shivaaya'

🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् सदा वसंतम हृदयारविंदे भवम भवानी सहितं नम

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कहीं भजन कीर्तन की चर्चा पढ़ता कहीं अजान , अल्ला को ललकार रहे हैं कहीं वीर हनुमान , राजनीति के इस दलदल में कैसा उलट-पुलट है , नेताओं की मस्ती कटती व्याकुल हर इंसान ! अशांत (पटना) ©Ramshloksharmaashant

#blindtrust  कहीं भजन कीर्तन की चर्चा
पढ़ता  कहीं अजान ,
अल्ला  को  ललकार  रहे हैं
कहीं   वीर  हनुमान ,
राजनीति के  इस दलदल में
कैसा उलट-पुलट है ,
नेताओं   की   मस्ती  कटती
व्याकुल  हर  इंसान !

अशांत (पटना)

©Ramshloksharmaashant

कविता #blindtrust

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अनन्त कोटि ब्रह्मांड का एक रति नहीं भार ! कुल सतगुरु एक है वो कबीर सृजनहार!! 🙏 तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ©Satyapal Singh

#हर_सूर्यास्त_हमारे_जीवन_से_एक_दिन_कम_कर_देता_है_लेकिन_हर_सूर्योदय_हमें_आशा_भरा #कीउम्मीदकरें #देता_है #दिन_दे #इसलिए #विचार  अनन्त कोटि ब्रह्मांड का एक रति नहीं भार ! 
कुल सतगुरु एक है वो कबीर सृजनहार!! 

                     🙏 तत्वदर्शी संत रामपाल          जी महाराज

©Satyapal Singh
#पूर्णब्रह्मसन्तरामपाल #विचार

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#पूर्णब्रह्म #जानकारी

#पूर्णब्रह्म सन्त रामपाल जी महाराज

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✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक छठी कविता :- विषय - "कर्मफल" कांटे बिछा कर तू -फूलों की आस ना कर अहंकार दर्शा कर- नम्रता की आस ना कर जख्म को उसके कुरेद कर तू- मरहम की आस ना कर गुनाहों की बखशीश मांग -उससे रहम की फ़रियाद कर -1 तुझे पता है की तूने इम्तिहान में क्या लिखा है प्रश्न पत्र कठिन था -समय कम था -पढ़े हुए से बाहर का आया था ये दर्शा कर तू अपनों को नहीं अपने आपको धोखा दे रहा है तुझे अच्छी तरह पता है परिणाम का -2 एक बात और ये कर्मफल केवल इस जन्म के नहीं ना जाने कितने जन्मों के संचित हैं इसलिए उस परमपिता से धन दौलत ऐश्वर्य नहीं सब जन्मों के जाने अनजाने गुनाहों की बख्शीश मांग -3 ये मत समझ की कोई देख नहीं रहा उस मालिक के सी सी टीवी कैमरे जमीन से आसमान तक अँधेरे से उजाले तक सूर्य से चंद्र तक सब देख रहे हैं -4 करोड़ों अरबों की भीड़ में भी तेरे दुष्कर्म या सत्क्रम तुझे ढून्ढ निकालेंगे ये कर्मफल वो बीज है जो या तो घनी छाँव देगा या देगा तपती धूप ना दे दोष उसको क्यूंकि ये हैं तेरे कर्मों का फल तेरा और केवल तेरा कर्मफल -कर्मफल -5 इसलिए लेना नहीं देना सीख इसलिए अकड़ना नहीं झुकना सीख इसलिए दान कर पुण्य कर सत्कर्म कर क्यूंकि इसी धरती पर है तेरे कर्मों का स्वर्गफल और नरकफल तेरा कर्मफल -कर्मफल -कर्मफल -6 Affirmations :- 1-मैं हर क्षेत्र में कामयाब हो रहा हूँ ... 2-मैं पूरे दिल से आज के दिन का स्वागत करता हूँ ... 3-मुझे आज जो कुछ भी करना है,उसके लिए मैंने अच्छे से सोच रखा है ... 4-मैं अपने जीवन का स्वामी हूँ ... 5-मैं हर काम ईमानदारी से करता हूँ ... 6-दुनिया की हर चीज़ मेरी सफलता के लिए काम कर रही है...! बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....! 🙏सुप्रभात 🌹 आपका दिन शुभ हो स्वरचित स्वमौलिक विकास शर्मा'"शिवाया" 🔱जयपुर -राजस्थान 🔱 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#कविता  ✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️

🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक छठी कविता :-

             विषय - "कर्मफल"

कांटे बिछा कर तू -फूलों की आस ना कर 
अहंकार दर्शा कर- नम्रता की आस ना कर 
जख्म को उसके कुरेद कर तू- मरहम की आस ना कर 
गुनाहों की बखशीश मांग -उससे रहम की फ़रियाद कर -1

तुझे पता है की तूने इम्तिहान में क्या लिखा है 
प्रश्न पत्र कठिन था -समय कम था -पढ़े हुए से बाहर का आया था 
ये दर्शा कर तू अपनों को नहीं अपने आपको धोखा दे रहा है 
तुझे अच्छी तरह पता है परिणाम का -2

एक बात और ये कर्मफल केवल इस जन्म के नहीं 
ना जाने कितने जन्मों के संचित हैं 
इसलिए उस परमपिता से धन दौलत ऐश्वर्य नहीं 
सब जन्मों के जाने अनजाने गुनाहों की बख्शीश मांग -3

ये मत समझ की कोई देख नहीं रहा 
उस मालिक के सी सी टीवी कैमरे 
जमीन  से आसमान तक 
अँधेरे से उजाले तक 
सूर्य से चंद्र तक सब देख रहे हैं -4

करोड़ों अरबों की भीड़ में भी तेरे दुष्कर्म या सत्क्रम 
तुझे ढून्ढ निकालेंगे 
ये कर्मफल वो बीज है जो या तो घनी छाँव देगा  या देगा तपती धूप 
ना दे दोष उसको क्यूंकि ये हैं तेरे कर्मों का फल 
तेरा और केवल तेरा कर्मफल -कर्मफल -5

इसलिए लेना नहीं देना सीख 
इसलिए अकड़ना नहीं झुकना सीख 
इसलिए दान कर पुण्य कर सत्कर्म कर 
क्यूंकि इसी धरती पर है तेरे कर्मों का 
स्वर्गफल और नरकफल 
तेरा कर्मफल -कर्मफल -कर्मफल -6

Affirmations :-
1-मैं हर क्षेत्र में कामयाब हो रहा हूँ ...
2-मैं पूरे  दिल से आज के दिन का स्वागत करता हूँ ...
3-मुझे आज जो कुछ भी करना है,उसके लिए मैंने अच्छे से सोच रखा है ...
4-मैं अपने जीवन का स्वामी हूँ ...

5-मैं हर काम ईमानदारी से करता हूँ ...
6-दुनिया की हर चीज़ मेरी सफलता के लिए काम कर रही है...!

बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....!
🙏सुप्रभात 🌹
आपका दिन शुभ हो 
स्वरचित स्वमौलिक
विकास शर्मा'"शिवाया" 
🔱जयपुर -राजस्थान 🔱

©Vikas Sharma Shivaaya'

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक छठी कविता :- विषय

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🌼🌼शुभ 🌼🌼 💐💐💐प्रभात 💐💐💐 आप सभी पर महाराज शनिदेव एवं पवन पुत्र हनुमान जी की कृपा बनी रहे .. जय शनिदेव महाराज की, जय पवन पुत्र हनुमान जी की शनिदेव का आशिर्वाद हो, हनुमान जी का साथ हो, सभी खुशियों की बरसात हो, हर विपदा का नाश हो, हर मनोकामनाएं आप सभी का पूर्ण हो जो भी आपके पास हो 😊😊😊 ©RAJBHAR KUMAR ANUP

#विचार #good_morning #bajrangbali #jaishanidev  🌼🌼शुभ 🌼🌼
💐💐💐प्रभात 💐💐💐
आप सभी पर महाराज शनिदेव एवं पवन पुत्र हनुमान जी की कृपा बनी रहे .. जय शनिदेव महाराज की, जय पवन पुत्र हनुमान जी की
शनिदेव का आशिर्वाद हो, हनुमान जी का साथ हो, सभी खुशियों की बरसात हो, हर विपदा का नाश हो, हर मनोकामनाएं आप सभी का पूर्ण हो जो भी आपके पास हो 😊😊😊

©RAJBHAR KUMAR ANUP
#ज़िन्दगी

परम् पूज्य श्री जियर स्वामी जी महाराज जी

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✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक पांचवी कविता :- विषय - पुत्रवधु आज फिर एक पुत्रवधु को जलाया गया आज फिर एक पुत्रवधु को घर से निकाला गया आज फिर एक पिता समान ससुर द्वारा पुत्रवधु को नोंचा गया आज फिर एक भाई समान जेठ /देवर द्वारा पुत्रवधु को रौंदा गया-1 क्या पुत्रवधु एक कबाड़ है जिसे जलाया जाता है क्या पुत्रवधु बैंक खाता है जिसके खाली होने पर घर से निकाला जाता है क्या ससुर को पिता तुल्य मानना अपराध है जो उसे नोंचा जाता है क्या जेठ /देवर को मात्र राखी नहीं बाँधने से उसे रौंदा जाता है -2 इतिहास गवाह है की सास पुत्रवधु की सबसे बड़ी दुश्मन इतिहास गवाह है की नन्द और जेठानी सास के दो बाजु क्यों एक पुरानी पुत्रवधु नई पुत्रवधु की दुश्मन अभी तक बना हुआ है पहेली ये प्रश्न -3 पुत्रवधु की एक गलती भी अस्वीकार पुत्र की अनगिनत गलती भी स्वीकार पुत्री 10 बजे भी सोकर उठे तो स्वीकार पुत्रवधु को थोड़ी भी देर हो जाए तो अस्वीकार -4 पुत्र की गलती पर अभी बच्चा है का पर्दा है पुत्रवधु की गलती पर संस्कार गलत का गर्दा है पुत्र निकम्मा नाकाबिल तो भी थक जाता है पुत्रवधु घर ऑफिस सम्हाल कर भी रोबोट है -5 हम क्यों नहीं समझते इन चापलूसों की भाषा की हम बहु नहीं बेटी ले जा रहे हैं की बेटी की आड़ में बेटा पैदा करने की मशीन ले जा रहे हैं की बेटी की आड़ में नौकरानी मुफ्त की ले जा रहे हैं -6 पुत्र बीमार तो डॉक्टर के चक्कर और दवाइयों की भरमार पुत्रवधु बीमार तो देशी घरेलु नुस्खों की बहार पुत्र शारीरिक कमजोर तो भी पुत्रवधु दोषी कब तक होती रहेगी पुत्रवधु की पेशी -7 कब हम समझेंगे की वो भी है किसी बगिया का फूल कब हम समझेंगे की वो भी है किसी माँ बाप की नाजुक कली कब हम समझेंगे की वो भी है छोटी की सहेली कब हम उसको एक इंसान समझेंगे -कब आखिर कब -8 Affirmations :- 1-हर रोज मुझे अच्छे और सकारात्मक सपने आते है... 2-मैं हमेशा बड़ा सोचता हूँऔर बड़े परिणामो की उम्मीद करता हूँ ... 3-मुझे विश्वास है की में कामयाब हो सकता हूँ... 4-मैं किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता... 5-मुझे अपनी जिंदगी में बहुत आगे जाना है 6-मैं अभी से रोज कुछ नया सिख रहा हूँ । 7-“मैं जादू हूँ- मैं चमत्कार देख रहा हूँ... 8-मेरा जीवन हर एक दिन बेहतर हो रहा है ।” बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....! 🙏सुप्रभात 🌹 आपका दिन शुभ हो स्वरचित स्वमौलिक विकास शर्मा'"शिवाया" 🔱जयपुर -राजस्थान 🔱 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#कविता  ✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️

🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक पांचवी कविता :-

          
         विषय -  पुत्रवधु

आज फिर एक पुत्रवधु को जलाया गया 
आज फिर एक पुत्रवधु को घर से निकाला गया 
आज फिर एक पिता समान ससुर द्वारा पुत्रवधु को नोंचा गया 
आज फिर एक भाई समान जेठ /देवर द्वारा पुत्रवधु को रौंदा गया-1

क्या पुत्रवधु एक कबाड़ है जिसे जलाया जाता है  
क्या पुत्रवधु बैंक खाता है जिसके खाली होने पर घर से निकाला जाता है 
क्या ससुर को पिता तुल्य मानना अपराध है जो उसे नोंचा जाता है 
क्या जेठ /देवर को मात्र राखी नहीं बाँधने से उसे रौंदा जाता है -2

इतिहास गवाह है की सास पुत्रवधु की  सबसे बड़ी दुश्मन 
इतिहास गवाह है की नन्द और जेठानी सास के दो  बाजु 
क्यों एक पुरानी पुत्रवधु नई पुत्रवधु की दुश्मन 
अभी तक बना हुआ है पहेली ये प्रश्न -3

पुत्रवधु की एक गलती भी अस्वीकार 
पुत्र की अनगिनत गलती भी स्वीकार 
पुत्री 10  बजे भी सोकर उठे तो स्वीकार 
पुत्रवधु को थोड़ी भी देर हो जाए तो अस्वीकार -4

पुत्र की गलती पर अभी बच्चा है का पर्दा है 
पुत्रवधु की गलती पर संस्कार गलत का गर्दा है 
पुत्र निकम्मा नाकाबिल तो भी थक जाता है 
पुत्रवधु घर ऑफिस सम्हाल कर भी रोबोट है -5

हम क्यों नहीं समझते इन चापलूसों की भाषा 
की हम बहु नहीं बेटी ले जा रहे हैं 
की बेटी की आड़ में बेटा पैदा करने की मशीन ले जा रहे हैं 
की बेटी की आड़ में नौकरानी मुफ्त की ले जा रहे हैं -6

पुत्र बीमार तो डॉक्टर के चक्कर और दवाइयों की भरमार 
पुत्रवधु बीमार तो देशी घरेलु नुस्खों की बहार 
पुत्र शारीरिक कमजोर तो भी पुत्रवधु दोषी 
कब तक होती रहेगी पुत्रवधु की पेशी -7

कब हम समझेंगे की वो भी है किसी बगिया का फूल 
कब हम समझेंगे की वो भी है किसी माँ बाप की नाजुक कली 
कब हम समझेंगे की  वो भी है छोटी की सहेली 
कब हम उसको एक इंसान समझेंगे -कब आखिर कब -8

Affirmations :-
1-हर रोज मुझे अच्छे और सकारात्मक सपने आते है...
2-मैं हमेशा बड़ा सोचता हूँऔर बड़े परिणामो की उम्मीद करता हूँ ...
3-मुझे विश्वास है की में कामयाब हो सकता हूँ...
4-मैं  किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता...
5-मुझे अपनी जिंदगी में बहुत आगे जाना है
6-मैं अभी से रोज कुछ नया सिख रहा हूँ ।
7-“मैं जादू हूँ- मैं चमत्कार देख रहा हूँ...
8-मेरा जीवन हर एक दिन बेहतर हो रहा है ।”

बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....!
🙏सुप्रभात 🌹
आपका दिन शुभ हो 
स्वरचित स्वमौलिक
विकास शर्मा'"शिवाया" 
🔱जयपुर -राजस्थान 🔱

©Vikas Sharma Shivaaya'

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक पांचवी कविता :-

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हिंदू हृदय सम्राट महाबली महा पराक्रमी सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वाले परम प्रतापी महाराज महाराणा प्रताप जी की जयंती पर सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि फूड मंत्र परिवार छतरपुर ©Ritesh Gupta

#पौराणिककथा #maharanapratap  हिंदू हृदय सम्राट महाबली महा पराक्रमी सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वाले परम प्रतापी महाराज महाराणा प्रताप जी की जयंती पर सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि 

फूड मंत्र परिवार छतरपुर

©Ritesh Gupta

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ महामृत्युंजय;- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ हे तीन आँखों वाले महादेव, हमारे पालनहार, पालनकर्ता, जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बिना किसी यत्न के डाल से अलग हो जाता है, कृपया कर हमें उसी तरह इस दुनिया के मोह एवं माया के बंधनों एवं जन्म मरण के चक्र से मुक्ति दीजिए 🙏 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की स्वयं पर विश्वास करना सफलता प्राप्त करने का सबसे पहला रहस्य है..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की प्रशंसा हृदय से,हस्तक्षेप बुद्धिमत्ता से और प्रतिक्रिया विवेक से करने में ही समझदारी है अन्यथा मौन ही उतम है..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की अहसास सच्चे हों वही काफी है यकीन तो लोग सच पर भी नहीं करते है..., आखिर में एक ही बात समझ आई की यूं तो उलझे है सभी अपनी उलझनों में पर सुलझाने की कोशिश हमेशा होनी चाहिए...! बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....! 🙏सुप्रभात 🌹 आपका दिन शुभ हो विकास शर्मा'"शिवाया" 🔱जयपुर -राजस्थान 🔱 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#समाज  ✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️

               महामृत्युंजय;-
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
हे तीन आँखों वाले महादेव,  हमारे पालनहार, पालनकर्ता, जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बिना किसी यत्न के डाल से अलग हो जाता है,  कृपया कर हमें उसी तरह इस दुनिया के मोह एवं माया के बंधनों एवं जन्म मरण के चक्र से मुक्ति दीजिए 🙏

🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की स्वयं पर विश्वास करना सफलता प्राप्त करने का सबसे पहला रहस्य है...,

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की प्रशंसा हृदय से,हस्तक्षेप बुद्धिमत्ता से और प्रतिक्रिया विवेक से करने में ही समझदारी है अन्यथा मौन ही उतम है...,

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की अहसास सच्चे हों वही काफी है यकीन तो लोग सच पर भी नहीं करते है...,

आखिर में एक ही बात समझ आई की यूं तो उलझे है सभी अपनी उलझनों में पर सुलझाने की कोशिश हमेशा होनी चाहिए...!                   
             
बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....!
🙏सुप्रभात 🌹
आपका दिन शुभ हो 
विकास शर्मा'"शिवाया" 
🔱जयपुर -राजस्थान 🔱

©Vikas Sharma Shivaaya'

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ महामृत्युंजय;- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृत

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अपने पार्टनर का प्रेम कैसे प्राप्त करें

Saturday, 7 May | 09:10 am

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Kabir Is Supreme God आध्यात्मिक ज्ञान न होने से मानव की वर्तमान सोच:- अधिक से अधिक धन अर्जित कर मान बड़ाई प्राप्ति हेतु अभी जो चाहे वो कर लो

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एक शादी के निमंत्रण पर जाना था... पर मेरा वहाँ जाने का बिल्कुल मन नहीं था... क्योंकि गाँव की शादी में मुझे कोई रुचि नहीं थीं..।लेकिन घरवालों की जिद्द की वजह से मैं उनके साथ चल दिया...।वहाँ पहुंचकर.....बहाना बनाकर मैं गाँव की गलियों में विचरण करने निकल गया..। घरवालों ने शादी के कार्यक्रम तक आने का कहा..। उनकी बातों को अनसुना कर वहाँ से निकल गया..। विचरण करते करते मैं गाँव के बाहर आ गया था..। वहाँ मैने देखा... एक बड़ी सी लग्जरी गाड़ी में से एक सज्जन उतरे... उनके पहनावे और चाल चलन में उनकी रईसी साफ़ झलक रहीं थीं...। उनकी उम्र यहीं कोई पचास की होगी..। मैने देखा वो सज्जन एक पालिथिन लेकर एक पेड़ के चबुतरे पर गए... फिर उस पालिथिन को चबुतरे पर उड़ेल दिया और आओ आओ की आवाज निकालने लगे... पास के खेतों में चारा चरती हुई कुछ चार पांच गायें आवाज सुनते ही वहाँ आई और गुड़ जो उस सज्जन ने डाला था वो खाने लगी...। कुछ गायों को वो अपने हाथ से खिला रहे थे.. कुछ स्वयं खा रहीं थीं..। वो प्यार से सभी गायों के कभी सिर पर तो कभी गले पर हाथ फेर रहें थें..। कुछ मिनटों बाद सभी गाएं वहाँ से चलीं गई...। यहाँ तक तो सब कुछ सामान्य था... लेकिन उसके बाद जो हुआ वो अविस्मरणीय और आश्चर्य से भरा हुआ था..। मैने देखा.... सभी गायों के चले जाने के बाद उस सज्जन ने वहाँ बचा हुआ गायों का जूठा गुड़ उठाया और खुद खा लिया...। तीन चार टुकड़े उन्होंने उठाएं और खाकर वहाँ से वापस अपनी गाड़ी की ओर चल दिए...। ये सब देखकर मैं सोच में पड़ गया...। इतना अमीर... पैसे वाला शख्स जूठा गुड़ क्यूँ खा रहा हैं.... वो भी गायों का जूठा... जो वो खुद ही लाया था... खाना था तो पहले खुद के लिए निकाल देता..। तरह तरह के सवाल दिमाग में घुम रहें थे..। जिझासा वश में दौड़ कर उनके पास गया और उनकों आवाज देकर रोका :- रुकिए महाराज... कुछ देर ठहरिए... महानुभव मैंने अभी अभी जो देखा... वो मेरे ह्रदय में सौ सवाल पैदा कर गई हैं...। कृपया उनका समाधान किजिए वरना उधल पुथल चलतीं रहेगी..। वो सज्जन मुस्कुराए और बोले:- बोलो बेटा... क्या जानना चाहते हो..। मैने कहा :- महाराज आप खुद इतने अमीर हैं फिर भी आपने गायों का बचा हुआ जूठा गुड़ ही क्यूँ खाया..? वो सज्जन मुस्कुराएं और मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे उसी चबुतरे के पास लेकर गए और बोले:- बेटा बात आज से पैतिंस साल पहले की हैं.... घर में आंतरिक कलह और रोज़ रोज़ के झगड़ों से तंग आकर मैनें अपना घर छोड़ दिया... मैं भागते भागते इस जगह आ पहुंचा...। लेकिन दो दिन बाद ही मेरी हिम्मत जवाब देने लगी...। भूख की वजह से शरीर बेहाल हो गया...। यहाँ इसी जगह पर मैंने देखा की एक सज्जन गुड़ के कुछ टुकड़े गायों के लिए डालकर गया था..। तब यहाँ ये चबुतरा नहीं था...। पीपल का बड़ा सा पेड़ था.। मैं बेहाल सा होकर उसी पेड़ के नीचे बेसुध होकर पड़ा था...। मैने देखा वो सज्जन गुड़ डालकर चला गया... तब कुछ एक दो गाएं वहाँ आई और गुड़ को सिर्फ सुंघ कर वापस लौट गई....। मैं भूख के मारे निठाल सा हो गया था.. कोई रास्ता ना देख... मैने वो मिट्टी में रखा हुआ गुड़ साफ़ किया और झट से खा गया..। दो दिन बाद पेट में कुछ गया तो एक शांति सी मिली.... मैं वहीं उस पेड़ के नीचे सो गया..। सुबह हुई... अपने नित्य कर्म करके मैं काम की तलाश में निकल पड़ा....। लेकिन दुर्भाग्य मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा था...। कहीं काम नहीं मिला.. थक कर भूख से बेहाल होकर शाम ढलते ही मैं फिर उसी जगह आ पहुंचा...। आज भी वो सज्जन आए... गुड़ डाला और चले गए...। कल ही की तरह गायें आई.. गुड़ को देखा और बिना खाए चलीं गई...। मैं भी भूखा तो था ही... बिना समय गंवाएं झट से सारा गुड़ खा गया... और उसी पेड़ के नीचे सो गया..। अगले दिन फिर काम की तलाश में निकल गया...। इस बार ऊपरवाले को मुझपर दया आई और मुझे एक ढाबे पर काम मिल गया..। अब मैं वहीं रहकर काम करने और रहने लगा..। कुछ दिन बाद मालिक ने कुछ पैसे दिए..... ।मैनें एक किलो गुड़ लिया और ना जाने कौनसी शक्ति थीं जो मुझे वहाँ खींच रहीं थी...।वहां से सात किमी पैदल चलकर मैं उसी पेड़ के पास आया और सारा गुड़ डाल दिया....। गाएं भी नजदीक ही थीं...मेरे आवाज लगाते ही तुरंत आ गई..।इस बार मैने देखा की गाएं ने सारा गुड़ खा लिया...। यानि उन दो दिनों मैं उन गायों ने जानबूझकर गुड़ नहीं खाया था...। उन्होंने मेरे लिए गुड़ छोड़ दिया था...। उनकी ये ममता देखकर मेरा दिल भर आया..। मैं ढाबे पर आकर सोचता रहा...। कुछ समय बाद ही मुझे एक फर्म में काम मिला...। निरंतर कड़ी मेहनत से मैं बहुत जल्द एक फर्म का मालिक बन गया..। शादी हुई... बच्चे हुएं...। दिन ब दिन मैं तरक्की करता गया...। लेकिन अपने इस लंबे सफर में मैने कभी गाय माता को नहीं भुलाया...। मैं अक्सर यहाँ आता रहता हूँ और इनको गुड़ खिलाने के साथ साथ इनका स्नेह पाता हूँ...। आज मैं पांच फर्म का मालिक हूँ...। धन दौलत की कोई कमी नहीं हैं... लेकिन जो सुकून मुझे यहाँ आकर मिलता हैं... वो कहीं नहीं मिलता...। जो मिठास इनके जूठे गुड़ में मिलती हैं... वो किसी व्यंजन में नहीं मिलतीं..। इन गायों की ममता की वजह से ही मैं आज जिंदा हूं...। इनका उपकार तो मैं कभी नहीं भुला सकता..। मैं लाखों रुपये गौशाला में दान करता हूँ... लेकिन इन गायों का स्नेह मुझे आजभी यहाँ खींच लाता हैं...। ऐसा कहते कहते वो सज्जन भावुक हो गए और वहाँ से चले गए...। मैं कुछ पल उनको जातें देखता रहा... फिर ना जाने क्या सोचता हुआ... मैने भी वहाँ रखा एक गुड़ का टुकड़ा लिया और अपनी जिहृवा पर रखा.... सचमुच उसके जैसी मिठास मैने कभी महसूस नहीं की थी..। किसी ने सच ही कहा हैं गाय सच में हमारी माता तुल्य होतीं हैं..। उनकी ममता सच में अद्भुत हैं..। मैं उनके बारे में सोचता हुआ...। शादी के कार्यक्रम में शरीक होने चल पड़ा और इस बार दिल से मैने सारे कार्यक्रम का आनंद उठाया...। ©Diya Jethwani

#प्रेरक #PARENTS  एक शादी के निमंत्रण पर जाना था... पर मेरा वहाँ जाने का बिल्कुल मन नहीं था... क्योंकि गाँव की शादी  में मुझे कोई रुचि नहीं थीं..।लेकिन घरवालों की जिद्द की वजह से मैं उनके साथ चल दिया...।वहाँ पहुंचकर.....बहाना बनाकर मैं गाँव की गलियों में विचरण करने निकल गया..। घरवालों ने शादी के कार्यक्रम तक आने का कहा..। उनकी बातों को अनसुना कर वहाँ से निकल गया..। विचरण करते करते मैं गाँव के बाहर आ गया था..। 
वहाँ  मैने देखा... एक बड़ी सी लग्जरी गाड़ी में से एक सज्जन उतरे... उनके पहनावे और चाल चलन में उनकी रईसी साफ़ झलक रहीं थीं...। उनकी उम्र यहीं कोई पचास की होगी..। 
मैने देखा वो सज्जन एक पालिथिन लेकर एक पेड़ के चबुतरे पर गए... फिर उस पालिथिन को चबुतरे पर उड़ेल दिया और आओ आओ की आवाज निकालने लगे... पास के खेतों में चारा चरती हुई कुछ चार पांच गायें आवाज सुनते ही वहाँ आई और गुड़ जो उस सज्जन ने डाला था वो खाने लगी...। कुछ गायों को वो अपने हाथ से खिला रहे थे.. कुछ स्वयं खा रहीं थीं..। वो प्यार से सभी गायों के कभी सिर पर तो कभी गले पर हाथ फेर रहें थें..। कुछ मिनटों बाद सभी गाएं वहाँ से चलीं गई...। यहाँ तक तो सब कुछ सामान्य था... लेकिन उसके बाद जो हुआ वो अविस्मरणीय और आश्चर्य से भरा हुआ था..। 
मैने देखा.... सभी गायों के चले जाने के बाद उस सज्जन ने वहाँ बचा हुआ गायों का जूठा गुड़ उठाया और खुद खा लिया...। तीन चार टुकड़े उन्होंने उठाएं और खाकर वहाँ से वापस अपनी गाड़ी की ओर चल दिए...। ये सब देखकर मैं सोच में पड़ गया...। इतना अमीर... पैसे वाला शख्स जूठा गुड़ क्यूँ खा रहा हैं.... वो भी गायों का जूठा... जो वो खुद ही लाया था... खाना था तो पहले खुद के लिए निकाल देता..। तरह तरह के सवाल दिमाग में घुम रहें थे..। जिझासा वश में दौड़ कर उनके पास गया और उनकों आवाज देकर रोका :- रुकिए महाराज... कुछ देर ठहरिए... महानुभव मैंने अभी अभी जो देखा... वो मेरे ह्रदय में सौ सवाल पैदा कर गई हैं...। कृपया उनका समाधान किजिए वरना उधल पुथल चलतीं रहेगी..। 
वो सज्जन मुस्कुराए और बोले:- बोलो बेटा... क्या जानना चाहते हो..। 
मैने कहा :- महाराज आप खुद इतने अमीर हैं फिर भी आपने गायों का बचा हुआ जूठा गुड़ ही क्यूँ खाया..? 
वो सज्जन मुस्कुराएं और मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे उसी चबुतरे के पास लेकर गए और बोले:- बेटा बात आज से पैतिंस साल पहले की हैं.... घर में आंतरिक कलह और रोज़ रोज़ के झगड़ों से तंग आकर मैनें अपना घर छोड़ दिया... मैं भागते भागते इस जगह  आ पहुंचा...। लेकिन दो दिन बाद ही मेरी हिम्मत जवाब देने लगी...। भूख की वजह से शरीर बेहाल हो गया...। यहाँ इसी जगह पर मैंने देखा की एक सज्जन गुड़ के कुछ टुकड़े गायों के लिए डालकर गया था..। तब यहाँ ये चबुतरा नहीं था...। पीपल का बड़ा सा पेड़ था.। मैं बेहाल सा होकर उसी पेड़ के नीचे बेसुध होकर पड़ा था...। मैने देखा वो सज्जन गुड़ डालकर चला गया... तब कुछ एक दो गाएं वहाँ आई और गुड़ को सिर्फ सुंघ कर वापस लौट गई....। मैं भूख के मारे निठाल सा हो गया था.. कोई रास्ता ना देख... मैने वो मिट्टी में रखा हुआ गुड़ साफ़ किया और झट से खा गया..। दो दिन बाद पेट में  कुछ गया तो एक शांति सी मिली.... मैं वहीं उस पेड़ के नीचे सो गया..। सुबह हुई... अपने नित्य कर्म करके मैं काम की तलाश में निकल पड़ा....। लेकिन दुर्भाग्य मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा था...। कहीं काम नहीं मिला.. थक कर भूख से बेहाल होकर शाम ढलते ही मैं फिर उसी जगह आ पहुंचा...। आज भी वो सज्जन आए... गुड़ डाला और चले गए...। कल ही की तरह गायें आई.. गुड़ को देखा और बिना खाए चलीं गई...। मैं भी भूखा तो था ही... बिना समय गंवाएं झट से सारा गुड़ खा गया... और उसी पेड़ के नीचे सो गया..। अगले दिन फिर काम की तलाश में निकल गया...। इस बार ऊपरवाले को मुझपर दया आई और मुझे एक ढाबे पर काम मिल गया..। अब मैं वहीं रहकर काम करने और रहने लगा..। कुछ दिन बाद मालिक ने कुछ पैसे दिए..... ।मैनें एक किलो  गुड़ लिया और ना जाने कौनसी शक्ति थीं जो मुझे वहाँ खींच रहीं थी...।वहां से सात किमी पैदल चलकर मैं उसी पेड़ के पास आया और सारा गुड़ डाल दिया....। गाएं भी नजदीक ही थीं...मेरे आवाज लगाते ही तुरंत आ गई..।इस बार मैने देखा की गाएं ने सारा गुड़ खा लिया...। यानि उन दो दिनों मैं उन गायों ने जानबूझकर गुड़ नहीं खाया था...। उन्होंने मेरे लिए गुड़ छोड़ दिया था...। उनकी ये ममता देखकर मेरा दिल भर आया..। मैं ढाबे पर आकर सोचता रहा...। कुछ समय बाद ही मुझे एक फर्म में काम मिला...। निरंतर कड़ी मेहनत से मैं बहुत जल्द एक फर्म का मालिक बन गया..। शादी हुई... बच्चे हुएं...। दिन ब दिन मैं तरक्की करता गया...। लेकिन अपने इस लंबे सफर में मैने कभी गाय माता को नहीं भुलाया...। मैं अक्सर यहाँ आता रहता हूँ और इनको गुड़ खिलाने के साथ साथ इनका स्नेह पाता हूँ...। आज मैं पांच फर्म का मालिक हूँ...। धन दौलत की कोई कमी नहीं हैं... लेकिन जो सुकून मुझे यहाँ आकर मिलता हैं... वो कहीं नहीं मिलता...। जो मिठास इनके जूठे गुड़ में मिलती हैं... वो किसी व्यंजन में नहीं मिलतीं..। इन गायों की ममता की वजह से ही मैं आज जिंदा हूं...। इनका उपकार तो मैं कभी नहीं भुला सकता..। मैं लाखों रुपये गौशाला में दान करता हूँ... लेकिन इन गायों का स्नेह मुझे आजभी यहाँ खींच लाता हैं...। 
ऐसा कहते कहते वो सज्जन भावुक हो गए और वहाँ से चले गए...। 
मैं कुछ पल उनको जातें देखता रहा... फिर ना जाने क्या सोचता हुआ... मैने भी वहाँ रखा एक गुड़ का टुकड़ा लिया और अपनी जिहृवा पर रखा.... सचमुच उसके जैसी मिठास मैने कभी महसूस नहीं की थी..। किसी ने सच ही कहा हैं गाय सच में हमारी माता तुल्य होतीं हैं..। उनकी ममता सच में अद्भुत हैं..। मैं उनके बारे में सोचता हुआ...। शादी के कार्यक्रम में शरीक होने चल पड़ा और इस बार दिल से मैने सारे कार्यक्रम का आनंद उठाया...।

©Diya Jethwani

कर्म #PARENTS

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#कविता  स्मरण कर वीर शिवाजी महाराज का
दुश्मन के झुकते शीष मिलेंगे
तेरे संगी बन स्वयं कष्ट को हरने
वो समक्ष खड़े जगदीश मिलेंगे

©Navin Gautam

स्मरण कर वीर शिवाजी महाराज का दुश्मन के झुकते शीष मिलेंगे तेरे संगी बन स्वयं कष्ट को हरने वो समक्ष खड़े जगदीश मिलेंगे ©Navin Gautam

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जय श्री राम जय श्री राधे जय बाबा जी महाराज की ©Ashvindra Raja Raja

#समाज #MeriEid  जय श्री राम जय श्री राधे जय बाबा जी महाराज की

©Ashvindra Raja Raja

#MeriEid

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भागवत प्रवक्ता पंडित श्री राजेश कृष्ण जी महाराज मोबाइल नंबर 961 7779519 ©Rajesh Vaishanw neora

#समाज  भागवत प्रवक्ता पंडित श्री राजेश कृष्ण जी महाराज मोबाइल नंबर 961 7779519

©Rajesh Vaishanw neora

जय श्री राधे

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एक साधु जंगल में अपनी कुटिया बनाकर रहता था। एक दिन अचानक जोरों की वर्षा होने लगी।साधु ने कुटिया के दरवाजे को खोल दिया।राहगीर वर्षा से बचने के लिए साधु की कुटिया में आने लगे।कुटिया काफी छोटी थी। धीरे-धीरे कुटिया भरने लगी।पुनः कुछ राहगीर आ गये।एक राहगीर ने आवाज लगाई साधु महाराज मैं बरसात में भीग रहा हूं। मेरे साथ पत्नी और बच्चे हैं।कृपा कर दरवाजा खोलिए और हम लोगों को बचा लीजिए। कुटिया में पहले से मौजूद राहगीर साधु से बोल उठे।बाबा अब दरवाजा नहीं खोलिएगा।यहां पर जगह नहीं बची है।बाहर खड़े उस राहगीर से कह दीजिए कि कहीं और दूसरी जगह चला जाए। अगर वो लोग यहां आ गए तो हम सब को बाहर निकलना पड़ेगा। और हम लोग उनकी जगह भीग जाएंगे।साधु ने मना करने के बावजूद दरवाजा खोल दिया और बरसात में भींगते हुए राहगीर को प्रवेश कराते हुए खुद बाहर निकल गए। साधु ने पहले राहगीर से कहा यदि यही व्यवहार तुम्हारे साथ भी होती तो तुम भींगने से कैसे बचते?विपत्ति के समय यदि हम किसी भी कीमत पर बचना चाहते हैं तो हमें दूसरों के बचने के बारे में भी सोचना चाहिए। स्वार्थ में हम खुद के बारे में तो सोचते हैं परंतु दूसरों के बारे में सोचना बंद कर देते हैं।साधु की बात सभी राहगीर को समझ में आ गई थी। ©S Talks with Shubham Kumar

#प्रेरक #writings  एक साधु जंगल में अपनी कुटिया बनाकर रहता था। एक दिन अचानक जोरों की वर्षा होने लगी।साधु ने कुटिया के दरवाजे को खोल दिया।राहगीर वर्षा से बचने के लिए साधु की कुटिया में आने लगे।कुटिया काफी छोटी थी। धीरे-धीरे कुटिया भरने लगी।पुनः कुछ राहगीर आ गये।एक राहगीर ने आवाज लगाई साधु महाराज मैं बरसात में भीग रहा हूं। मेरे साथ पत्नी और बच्चे हैं।कृपा कर दरवाजा खोलिए और हम लोगों को बचा लीजिए। कुटिया में पहले से मौजूद राहगीर साधु से बोल उठे।बाबा अब दरवाजा नहीं खोलिएगा।यहां पर जगह नहीं बची है।बाहर खड़े उस राहगीर से कह दीजिए कि कहीं और दूसरी जगह चला जाए। अगर वो लोग यहां आ गए तो हम सब को बाहर निकलना पड़ेगा। और हम लोग उनकी जगह भीग जाएंगे।साधु ने मना करने के बावजूद दरवाजा खोल दिया और बरसात में भींगते हुए राहगीर को प्रवेश कराते हुए खुद बाहर निकल गए। साधु ने पहले राहगीर से कहा यदि यही व्यवहार तुम्हारे साथ भी होती तो तुम भींगने से कैसे बचते?विपत्ति के समय यदि हम किसी भी कीमत पर बचना चाहते हैं तो हमें दूसरों के बचने के बारे में भी सोचना चाहिए। स्वार्थ में हम खुद के बारे में तो सोचते हैं परंतु दूसरों के बारे में सोचना बंद कर देते हैं।साधु की बात सभी राहगीर को समझ में आ गई थी।

©S Talks with Shubham Kumar

स्वार्थ नहीं #writings

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#सुप्रभात #विचार #nojotohindi #Good  .  🌷G⭕⭕D🌷
    
🌴〽🔘➰ N❗N G🌴
   
जय श्री वीर तेजाजी महाराज की जी 
    
मनुष्य का सच्चा साथी और हर स्थिति में उसे संभालने वाला अगर कोई है तो वह आत्मविश्वास ही है...!

क्योंकि आत्मविश्वास ही हमारी बिखरी हुई समस्त चेतना और ऊर्जा को एकत्रित करके लक्ष्य की दिशा में लगाता है...!!
  
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

        🙏 🌹🌻 शूप्रभात🌻🌹🙏
                                                    
        🌹🙏  आपका दिन मंगलमय हो!🙏🌹

©CHOUDHARY HARDIN KUKNA

#सुप्रभात #Nojoto #Good #nojotohindi Madhusudan Shrivastava ANOOP PANDEY (इमोशनल किंग ) ds@entertainer.... Shashank Rajput SOHRAB KHAN F

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🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् सदा वसंतम हृदयारविंदे भवम भवानी सहितं नमामि || कर्पूरगौरं-कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले। करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं। संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं। भुजगेंद्रहारम्- इसका अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं। सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं,उनको मेरा नमन है🙏 ✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की हम जिनके झूठ का मान रख लेते हैं वो समझते हैं कि हमें बेवक़ूफ़ बना दिया ..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की सतगुरु- परमात्मा का प्यार एक सागर की तरह है,हम इसकी शुरूआत देख सकते हैं परंतु अंत नहीं ..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की दो बातों पर नियंत्रण होना जरूरी है-आमदनी पर्याप्त ना हो तो खर्चों पर और जानकारी प्रर्याप्त न हो तो शब्दों पर..., आखिर में एक ही बात समझ आई की मेहनत का मार्ग सरल तो नहीं होता पर हां सफलता मिलने के बाद जिंदगी को सरल जरूर बना देता है ...! बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....! 🙏सुप्रभात 🌹 आपका दिन शुभ हो स्वरचित स्वमौलिक विकास शर्मा'"शिवाया" 🔱जयपुर -राजस्थान 🔱 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#समाज  🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्
सदा वसंतम हृदयारविंदे
भवम भवानी सहितं नमामि ||

कर्पूरगौरं-कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।
करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं।
संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं।
भुजगेंद्रहारम्- इसका अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं।
सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं,उनको मेरा नमन है🙏

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की हम जिनके झूठ का मान रख  लेते हैं वो समझते हैं कि हमें बेवक़ूफ़ बना दिया ...,

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की सतगुरु- परमात्मा का प्यार एक सागर की तरह है,हम इसकी शुरूआत देख सकते हैं परंतु अंत नहीं ...,
          
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की दो बातों पर नियंत्रण होना जरूरी है-आमदनी पर्याप्त ना हो तो खर्चों पर और जानकारी प्रर्याप्त न हो तो शब्दों पर...,

आखिर में एक ही बात समझ आई की मेहनत का मार्ग सरल तो नहीं होता पर हां सफलता मिलने के बाद जिंदगी को सरल जरूर बना देता है ...!

बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....!
🙏सुप्रभात 🌹
आपका दिन शुभ हो 
स्वरचित स्वमौलिक
विकास शर्मा'"शिवाया" 
🔱जयपुर -राजस्थान 🔱

©Vikas Sharma Shivaaya'

🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् सदा वसंतम हृदयारविंदे भवम भवानी सहितं नम

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कहीं भजन कीर्तन की चर्चा पढ़ता कहीं अजान , अल्ला को ललकार रहे हैं कहीं वीर हनुमान , राजनीति के इस दलदल में कैसा उलट-पुलट है , नेताओं की मस्ती कटती व्याकुल हर इंसान ! अशांत (पटना) ©Ramshloksharmaashant

#blindtrust  कहीं भजन कीर्तन की चर्चा
पढ़ता  कहीं अजान ,
अल्ला  को  ललकार  रहे हैं
कहीं   वीर  हनुमान ,
राजनीति के  इस दलदल में
कैसा उलट-पुलट है ,
नेताओं   की   मस्ती  कटती
व्याकुल  हर  इंसान !

अशांत (पटना)

©Ramshloksharmaashant

कविता #blindtrust

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अनन्त कोटि ब्रह्मांड का एक रति नहीं भार ! कुल सतगुरु एक है वो कबीर सृजनहार!! 🙏 तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ©Satyapal Singh

#हर_सूर्यास्त_हमारे_जीवन_से_एक_दिन_कम_कर_देता_है_लेकिन_हर_सूर्योदय_हमें_आशा_भरा #कीउम्मीदकरें #देता_है #दिन_दे #इसलिए #विचार  अनन्त कोटि ब्रह्मांड का एक रति नहीं भार ! 
कुल सतगुरु एक है वो कबीर सृजनहार!! 

                     🙏 तत्वदर्शी संत रामपाल          जी महाराज

©Satyapal Singh
#पूर्णब्रह्मसन्तरामपाल #विचार

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#पूर्णब्रह्म #जानकारी

#पूर्णब्रह्म सन्त रामपाल जी महाराज

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✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक छठी कविता :- विषय - "कर्मफल" कांटे बिछा कर तू -फूलों की आस ना कर अहंकार दर्शा कर- नम्रता की आस ना कर जख्म को उसके कुरेद कर तू- मरहम की आस ना कर गुनाहों की बखशीश मांग -उससे रहम की फ़रियाद कर -1 तुझे पता है की तूने इम्तिहान में क्या लिखा है प्रश्न पत्र कठिन था -समय कम था -पढ़े हुए से बाहर का आया था ये दर्शा कर तू अपनों को नहीं अपने आपको धोखा दे रहा है तुझे अच्छी तरह पता है परिणाम का -2 एक बात और ये कर्मफल केवल इस जन्म के नहीं ना जाने कितने जन्मों के संचित हैं इसलिए उस परमपिता से धन दौलत ऐश्वर्य नहीं सब जन्मों के जाने अनजाने गुनाहों की बख्शीश मांग -3 ये मत समझ की कोई देख नहीं रहा उस मालिक के सी सी टीवी कैमरे जमीन से आसमान तक अँधेरे से उजाले तक सूर्य से चंद्र तक सब देख रहे हैं -4 करोड़ों अरबों की भीड़ में भी तेरे दुष्कर्म या सत्क्रम तुझे ढून्ढ निकालेंगे ये कर्मफल वो बीज है जो या तो घनी छाँव देगा या देगा तपती धूप ना दे दोष उसको क्यूंकि ये हैं तेरे कर्मों का फल तेरा और केवल तेरा कर्मफल -कर्मफल -5 इसलिए लेना नहीं देना सीख इसलिए अकड़ना नहीं झुकना सीख इसलिए दान कर पुण्य कर सत्कर्म कर क्यूंकि इसी धरती पर है तेरे कर्मों का स्वर्गफल और नरकफल तेरा कर्मफल -कर्मफल -कर्मफल -6 Affirmations :- 1-मैं हर क्षेत्र में कामयाब हो रहा हूँ ... 2-मैं पूरे दिल से आज के दिन का स्वागत करता हूँ ... 3-मुझे आज जो कुछ भी करना है,उसके लिए मैंने अच्छे से सोच रखा है ... 4-मैं अपने जीवन का स्वामी हूँ ... 5-मैं हर काम ईमानदारी से करता हूँ ... 6-दुनिया की हर चीज़ मेरी सफलता के लिए काम कर रही है...! बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....! 🙏सुप्रभात 🌹 आपका दिन शुभ हो स्वरचित स्वमौलिक विकास शर्मा'"शिवाया" 🔱जयपुर -राजस्थान 🔱 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#कविता  ✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️

🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक छठी कविता :-

             विषय - "कर्मफल"

कांटे बिछा कर तू -फूलों की आस ना कर 
अहंकार दर्शा कर- नम्रता की आस ना कर 
जख्म को उसके कुरेद कर तू- मरहम की आस ना कर 
गुनाहों की बखशीश मांग -उससे रहम की फ़रियाद कर -1

तुझे पता है की तूने इम्तिहान में क्या लिखा है 
प्रश्न पत्र कठिन था -समय कम था -पढ़े हुए से बाहर का आया था 
ये दर्शा कर तू अपनों को नहीं अपने आपको धोखा दे रहा है 
तुझे अच्छी तरह पता है परिणाम का -2

एक बात और ये कर्मफल केवल इस जन्म के नहीं 
ना जाने कितने जन्मों के संचित हैं 
इसलिए उस परमपिता से धन दौलत ऐश्वर्य नहीं 
सब जन्मों के जाने अनजाने गुनाहों की बख्शीश मांग -3

ये मत समझ की कोई देख नहीं रहा 
उस मालिक के सी सी टीवी कैमरे 
जमीन  से आसमान तक 
अँधेरे से उजाले तक 
सूर्य से चंद्र तक सब देख रहे हैं -4

करोड़ों अरबों की भीड़ में भी तेरे दुष्कर्म या सत्क्रम 
तुझे ढून्ढ निकालेंगे 
ये कर्मफल वो बीज है जो या तो घनी छाँव देगा  या देगा तपती धूप 
ना दे दोष उसको क्यूंकि ये हैं तेरे कर्मों का फल 
तेरा और केवल तेरा कर्मफल -कर्मफल -5

इसलिए लेना नहीं देना सीख 
इसलिए अकड़ना नहीं झुकना सीख 
इसलिए दान कर पुण्य कर सत्कर्म कर 
क्यूंकि इसी धरती पर है तेरे कर्मों का 
स्वर्गफल और नरकफल 
तेरा कर्मफल -कर्मफल -कर्मफल -6

Affirmations :-
1-मैं हर क्षेत्र में कामयाब हो रहा हूँ ...
2-मैं पूरे  दिल से आज के दिन का स्वागत करता हूँ ...
3-मुझे आज जो कुछ भी करना है,उसके लिए मैंने अच्छे से सोच रखा है ...
4-मैं अपने जीवन का स्वामी हूँ ...

5-मैं हर काम ईमानदारी से करता हूँ ...
6-दुनिया की हर चीज़ मेरी सफलता के लिए काम कर रही है...!

बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....!
🙏सुप्रभात 🌹
आपका दिन शुभ हो 
स्वरचित स्वमौलिक
विकास शर्मा'"शिवाया" 
🔱जयपुर -राजस्थान 🔱

©Vikas Sharma Shivaaya'

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक छठी कविता :- विषय

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🌼🌼शुभ 🌼🌼 💐💐💐प्रभात 💐💐💐 आप सभी पर महाराज शनिदेव एवं पवन पुत्र हनुमान जी की कृपा बनी रहे .. जय शनिदेव महाराज की, जय पवन पुत्र हनुमान जी की शनिदेव का आशिर्वाद हो, हनुमान जी का साथ हो, सभी खुशियों की बरसात हो, हर विपदा का नाश हो, हर मनोकामनाएं आप सभी का पूर्ण हो जो भी आपके पास हो 😊😊😊 ©RAJBHAR KUMAR ANUP

#विचार #good_morning #bajrangbali #jaishanidev  🌼🌼शुभ 🌼🌼
💐💐💐प्रभात 💐💐💐
आप सभी पर महाराज शनिदेव एवं पवन पुत्र हनुमान जी की कृपा बनी रहे .. जय शनिदेव महाराज की, जय पवन पुत्र हनुमान जी की
शनिदेव का आशिर्वाद हो, हनुमान जी का साथ हो, सभी खुशियों की बरसात हो, हर विपदा का नाश हो, हर मनोकामनाएं आप सभी का पूर्ण हो जो भी आपके पास हो 😊😊😊

©RAJBHAR KUMAR ANUP
#ज़िन्दगी

परम् पूज्य श्री जियर स्वामी जी महाराज जी

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✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक पांचवी कविता :- विषय - पुत्रवधु आज फिर एक पुत्रवधु को जलाया गया आज फिर एक पुत्रवधु को घर से निकाला गया आज फिर एक पिता समान ससुर द्वारा पुत्रवधु को नोंचा गया आज फिर एक भाई समान जेठ /देवर द्वारा पुत्रवधु को रौंदा गया-1 क्या पुत्रवधु एक कबाड़ है जिसे जलाया जाता है क्या पुत्रवधु बैंक खाता है जिसके खाली होने पर घर से निकाला जाता है क्या ससुर को पिता तुल्य मानना अपराध है जो उसे नोंचा जाता है क्या जेठ /देवर को मात्र राखी नहीं बाँधने से उसे रौंदा जाता है -2 इतिहास गवाह है की सास पुत्रवधु की सबसे बड़ी दुश्मन इतिहास गवाह है की नन्द और जेठानी सास के दो बाजु क्यों एक पुरानी पुत्रवधु नई पुत्रवधु की दुश्मन अभी तक बना हुआ है पहेली ये प्रश्न -3 पुत्रवधु की एक गलती भी अस्वीकार पुत्र की अनगिनत गलती भी स्वीकार पुत्री 10 बजे भी सोकर उठे तो स्वीकार पुत्रवधु को थोड़ी भी देर हो जाए तो अस्वीकार -4 पुत्र की गलती पर अभी बच्चा है का पर्दा है पुत्रवधु की गलती पर संस्कार गलत का गर्दा है पुत्र निकम्मा नाकाबिल तो भी थक जाता है पुत्रवधु घर ऑफिस सम्हाल कर भी रोबोट है -5 हम क्यों नहीं समझते इन चापलूसों की भाषा की हम बहु नहीं बेटी ले जा रहे हैं की बेटी की आड़ में बेटा पैदा करने की मशीन ले जा रहे हैं की बेटी की आड़ में नौकरानी मुफ्त की ले जा रहे हैं -6 पुत्र बीमार तो डॉक्टर के चक्कर और दवाइयों की भरमार पुत्रवधु बीमार तो देशी घरेलु नुस्खों की बहार पुत्र शारीरिक कमजोर तो भी पुत्रवधु दोषी कब तक होती रहेगी पुत्रवधु की पेशी -7 कब हम समझेंगे की वो भी है किसी बगिया का फूल कब हम समझेंगे की वो भी है किसी माँ बाप की नाजुक कली कब हम समझेंगे की वो भी है छोटी की सहेली कब हम उसको एक इंसान समझेंगे -कब आखिर कब -8 Affirmations :- 1-हर रोज मुझे अच्छे और सकारात्मक सपने आते है... 2-मैं हमेशा बड़ा सोचता हूँऔर बड़े परिणामो की उम्मीद करता हूँ ... 3-मुझे विश्वास है की में कामयाब हो सकता हूँ... 4-मैं किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता... 5-मुझे अपनी जिंदगी में बहुत आगे जाना है 6-मैं अभी से रोज कुछ नया सिख रहा हूँ । 7-“मैं जादू हूँ- मैं चमत्कार देख रहा हूँ... 8-मेरा जीवन हर एक दिन बेहतर हो रहा है ।” बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....! 🙏सुप्रभात 🌹 आपका दिन शुभ हो स्वरचित स्वमौलिक विकास शर्मा'"शिवाया" 🔱जयपुर -राजस्थान 🔱 ©Vikas Sharma Shivaaya'

#कविता  ✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️

🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹

मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक पांचवी कविता :-

          
         विषय -  पुत्रवधु

आज फिर एक पुत्रवधु को जलाया गया 
आज फिर एक पुत्रवधु को घर से निकाला गया 
आज फिर एक पिता समान ससुर द्वारा पुत्रवधु को नोंचा गया 
आज फिर एक भाई समान जेठ /देवर द्वारा पुत्रवधु को रौंदा गया-1

क्या पुत्रवधु एक कबाड़ है जिसे जलाया जाता है  
क्या पुत्रवधु बैंक खाता है जिसके खाली होने पर घर से निकाला जाता है 
क्या ससुर को पिता तुल्य मानना अपराध है जो उसे नोंचा जाता है 
क्या जेठ /देवर को मात्र राखी नहीं बाँधने से उसे रौंदा जाता है -2

इतिहास गवाह है की सास पुत्रवधु की  सबसे बड़ी दुश्मन 
इतिहास गवाह है की नन्द और जेठानी सास के दो  बाजु 
क्यों एक पुरानी पुत्रवधु नई पुत्रवधु की दुश्मन 
अभी तक बना हुआ है पहेली ये प्रश्न -3

पुत्रवधु की एक गलती भी अस्वीकार 
पुत्र की अनगिनत गलती भी स्वीकार 
पुत्री 10  बजे भी सोकर उठे तो स्वीकार 
पुत्रवधु को थोड़ी भी देर हो जाए तो अस्वीकार -4

पुत्र की गलती पर अभी बच्चा है का पर्दा है 
पुत्रवधु की गलती पर संस्कार गलत का गर्दा है 
पुत्र निकम्मा नाकाबिल तो भी थक जाता है 
पुत्रवधु घर ऑफिस सम्हाल कर भी रोबोट है -5

हम क्यों नहीं समझते इन चापलूसों की भाषा 
की हम बहु नहीं बेटी ले जा रहे हैं 
की बेटी की आड़ में बेटा पैदा करने की मशीन ले जा रहे हैं 
की बेटी की आड़ में नौकरानी मुफ्त की ले जा रहे हैं -6

पुत्र बीमार तो डॉक्टर के चक्कर और दवाइयों की भरमार 
पुत्रवधु बीमार तो देशी घरेलु नुस्खों की बहार 
पुत्र शारीरिक कमजोर तो भी पुत्रवधु दोषी 
कब तक होती रहेगी पुत्रवधु की पेशी -7

कब हम समझेंगे की वो भी है किसी बगिया का फूल 
कब हम समझेंगे की वो भी है किसी माँ बाप की नाजुक कली 
कब हम समझेंगे की  वो भी है छोटी की सहेली 
कब हम उसको एक इंसान समझेंगे -कब आखिर कब -8

Affirmations :-
1-हर रोज मुझे अच्छे और सकारात्मक सपने आते है...
2-मैं हमेशा बड़ा सोचता हूँऔर बड़े परिणामो की उम्मीद करता हूँ ...
3-मुझे विश्वास है की में कामयाब हो सकता हूँ...
4-मैं  किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता...
5-मुझे अपनी जिंदगी में बहुत आगे जाना है
6-मैं अभी से रोज कुछ नया सिख रहा हूँ ।
7-“मैं जादू हूँ- मैं चमत्कार देख रहा हूँ...
8-मेरा जीवन हर एक दिन बेहतर हो रहा है ।”

बाकी कल ,खतरा अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरूरी ....सावधान रहिये -सतर्क रहिये -निस्वार्थ नेक कर्म कीजिये -अपने इष्ट -सतगुरु को अपने आप को समर्पित कर दीजिये ....!
🙏सुप्रभात 🌹
आपका दिन शुभ हो 
स्वरचित स्वमौलिक
विकास शर्मा'"शिवाया" 
🔱जयपुर -राजस्थान 🔱

©Vikas Sharma Shivaaya'

✒️📙जीवन की पाठशाला 📖🖋️ 🙏 मेरे सतगुरु श्री बाबा लाल दयाल जी महाराज की जय 🌹 मेरे द्वारा स्वरचित एवं स्वमौलिक पांचवी कविता :-

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