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New थंडी वाजून ताप येणे Status, Photo, Video

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"करूणा सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं न चन्द्रमा की ठंडक में लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है कि दुनिया में करुणा की कमी पड़ गई है इतनी कम पड़ गई है करुणा कि बर्फ़ पिघल नहीं रही नदियाँ बह नहीं रहीं झरने झर नहीं रहे चिड़ियाँ गा नहीं रहीं गाएँ रँभा नहीं रहीं कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं कि आदमी उसमें अपना चेहरा देख सके और उसमें तैरते बादल के टुकड़े से उसे धो-पोंछ सके दरअसल पानी से होकर देखो तभी दुनिया पानीदार रहती है उसमें पानी के गुण समा जाते हैं वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है पता नहीं आने वाले लोगों को दुनिया कैसी चाहिए कैसी हवा, कैसा पानी चाहिए पर इतना तो तय है कि इस समय दुनिया को ढेर सारी करुणा चाहिए।"

करूणा
सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं
न चन्द्रमा की ठंडक में

लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है
कि दुनिया में
करुणा की कमी पड़ गई है
इतनी कम पड़ गई है करुणा
कि बर्फ़ पिघल नहीं रही
नदियाँ बह नहीं रहीं
झरने झर नहीं रहे
चिड़ियाँ गा नहीं रहीं
गाएँ रँभा नहीं रहीं

कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं
कि आदमी उसमें अपना चेहरा देख सके
और उसमें तैरते बादल के टुकड़े से उसे धो-पोंछ सके

दरअसल पानी से होकर देखो
तभी दुनिया पानीदार रहती है
उसमें पानी के गुण समा जाते हैं
वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है

पता नहीं
आने वाले लोगों को दुनिया कैसी चाहिए
कैसी हवा, कैसा पानी चाहिए
पर इतना तो तय है
कि इस समय दुनिया को
ढेर सारी करुणा चाहिए।

#krishna_flute

15 Love
255 Views
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51 y

 

"एक उगाए अन्न देश में , एक संभाले सीमा। लगे निरंतर श्रम में हैं पड़े कोई काम ना धीमा । इन दोनों के हैं काम महान बोलो जय जवान जय किसान। सजग देश के ये प्रहरी है, आंखें चौकस रहती हैं। जरा सा दुश्मन आंख दिखाएं, फौरन बंदूक गरजती है। अपने देश पर इनकी जां कुर्बान बोलो जय जवान जय किसान। चाहे गर्मी हो या सर्दी हो , या फिर मेघ बरसते हों। जाड़ा ताप सहें निरंतर , चाहे घर जाने को तरसते हों। सबसे पहले ये फर्ज को देते मान बोलो जय जवान जय किसान। अन्नदाता हैं ये अपने देश के, कठिन परिश्रम करते हैं । वहां के पसीना अन्न उगाते,   ये पेट देश का भरते हैं । भोले- भाले दुनियादारी से अनजान बोलो जय जवान जय किसान। स्वरचित-आशा शुक्ला"

एक उगाए अन्न देश में ,
एक संभाले सीमा।
लगे निरंतर श्रम में हैं
पड़े कोई काम ना धीमा ।
इन दोनों के हैं काम महान बोलो जय जवान जय किसान।

सजग देश के ये प्रहरी है,
आंखें चौकस रहती हैं।
जरा सा दुश्मन आंख दिखाएं,
फौरन बंदूक गरजती है।
अपने देश पर इनकी जां कुर्बान बोलो जय जवान जय किसान।

चाहे गर्मी हो या सर्दी हो ,
या फिर मेघ बरसते हों।
जाड़ा ताप सहें निरंतर ,
चाहे घर जाने को तरसते हों।
सबसे पहले ये फर्ज को देते मान बोलो जय जवान जय किसान।

अन्नदाता हैं ये अपने देश के,
कठिन परिश्रम करते हैं ।
वहां के पसीना अन्न उगाते,
  ये पेट देश का भरते हैं ।
भोले- भाले दुनियादारी से अनजान बोलो जय जवान जय किसान।
स्वरचित-आशा शुक्ला

#कविता

#AajkeGandhi
#lovebeat

38 Love
213 Views

गुलाबी थंडी

14 Love
42 Views

"तुम झूलाने लगी अपनी -उज्जवलता से प्रकाश - फैलाने लगी अपनी शीतलता से हर ताप हरने लगी अपने - नन्हें - परों  को खोलकर अब आकाश में भरना चाहती हो उड़ान नापना चाहती हो क्षितिज का विस्तार चोंच में अपनी पकड़ना चाहती हो चाँद तुम्हारे साथ बांटना चाहती हूं मैं यह - एहसास इसी तरह तुम -मुझ -में मैं -तुम में जीवित- रहूंगी -सदा मर - कर भी मैं - अमर हो जाऊंगी तब तुम्हारी मां नहीं बेटी कहलाऊंगी बंजर धरती ने एक  दिन ली अंगड़ाई ना जाने कैसे लहर सी लाई अंतस - पिघला लगा- लहलहाने एक नन्हा अंकुर चकित मैं इस चमत्कार पर रुई -दूध -उज्जवल -रंग नन्ही- नन्ही -सुकोमल -किसलय - हथेलियाँ भूल गई मैं स्वयं को हो गई धन्य मैं पाकर यह अद्भुत - उपहार गूंजी - किलकारी तो मैं- किलकने- लगी तुतलाई -तुम- तो मैं -तुतलाने- लगी मिट्टी -तुम-खाती- तो मैं -स्वाद पाती बड़े जूते पहन तुम इठलाती तो मैं बलि - बलि जाती मुझे बचपन के हिंडोले में अहसास "

तुम झूलाने लगी
अपनी -उज्जवलता से
 प्रकाश - फैलाने लगी 
अपनी शीतलता से
हर ताप हरने लगी
अपने - नन्हें - परों  को खोलकर 
अब आकाश में भरना चाहती हो उड़ान
नापना चाहती हो क्षितिज का विस्तार
चोंच में अपनी पकड़ना चाहती हो चाँद 
तुम्हारे साथ बांटना चाहती हूं
मैं यह - एहसास
इसी तरह तुम -मुझ -में
मैं -तुम में जीवित- रहूंगी -सदा 
मर - कर भी मैं - अमर हो जाऊंगी
तब तुम्हारी मां नहीं
बेटी कहलाऊंगी
 
बंजर धरती ने 
एक  दिन ली अंगड़ाई
ना जाने कैसे लहर सी लाई
अंतस - पिघला
लगा- लहलहाने एक नन्हा अंकुर
चकित मैं इस चमत्कार पर
रुई -दूध -उज्जवल -रंग 
नन्ही- नन्ही -सुकोमल 
-किसलय - हथेलियाँ 
भूल गई मैं स्वयं को
हो गई धन्य मैं 
पाकर यह अद्भुत - उपहार
गूंजी - किलकारी तो 
मैं- किलकने- लगी
तुतलाई -तुम- तो 
मैं -तुतलाने- लगी
मिट्टी -तुम-खाती- तो मैं -स्वाद पाती 
बड़े जूते पहन तुम इठलाती 
तो मैं बलि - बलि जाती
मुझे बचपन के हिंडोले में
 अहसास

#Broken

31 Love
243 Views
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"आवाजावर असते इथे रिऍक्शन्सचे येणे आशयाचे कुणालाही नसते घेणेदेणे भगवंत माळी."

आवाजावर असते इथे रिऍक्शन्सचे येणे
आशयाचे कुणालाही नसते घेणेदेणे


भगवंत माळी.

#अफलातून_रसिक

7 Love
510 Views

"#NojotoVideoजो , चमकना है क्षितिज पर, ताप तो सहना पड़ेगा..."

#NojotoVideoजो , चमकना है क्षितिज पर, ताप तो सहना पड़ेगा...

#Nojoto #Nojotohindi #Motivational #kalakash #poem #Poetry #Quotes
#NojotoVideo

343 Love
4.4K Views
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आठवणींचे येणे

4 Love
6 Views

बाप थंडी आणि मी

3 Love
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ताप ग्रीष्म विशेष

2 Love
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"```मैं हूं अगर जो हूं अभी, तो कौन अब तक मौन था ?``` ```जो कह रहा था पिछले पल, "मैं कौन हूं", वो कौन था ?``` ```मैं देखता हूं ख़ुद को ही, मैं खुद को ही हूं ढूंढता,``` ```प्रचंड अग्नि के ताप सा प्रती पल मैं तप रहा``` ```आ रहा है वक़्त मेरा या, वक़्त के साथ ही चल रहा..?``` ```हर लम्हा मैं जिन्दा हो रहा, या हर घड़ी हूं मर रहा ।``` ```सवाल में जकड़ रहा, मैं खुद से ही हूं लड़ रहा ।``` ```मैं हूं अगर जो हूं अभी, तो कौन अब तक मौन था ?``` ```जो कह रहा था पिछले पल, "मैं कौन हूं", वो कौन था ?```"

```मैं हूं अगर जो हूं अभी, तो कौन अब तक मौन था ?``` 
```जो कह रहा था पिछले पल, "मैं कौन हूं", वो कौन था ?``` 
```मैं देखता हूं ख़ुद को ही, मैं खुद को ही हूं ढूंढता,``` 
```प्रचंड अग्नि के ताप सा प्रती पल मैं तप रहा``` 
```आ रहा है वक़्त मेरा या, वक़्त के साथ ही चल रहा..?``` 
```हर लम्हा मैं जिन्दा हो रहा, या  हर घड़ी हूं मर रहा ।``` 
```सवाल में जकड़ रहा, मैं खुद से ही हूं लड़ रहा ।``` 
```मैं हूं अगर जो हूं अभी, तो कौन अब तक मौन था ?``` 
```जो कह रहा था पिछले पल, "मैं कौन हूं", वो कौन था ?```

#inspirational

7 Love
3 Views

"सुनो! तुम आओगी न? जब मेरी रूह को हार की ग्रीष्म ताप घेर लेगी, तुम आओगी न? जब मेरा वजूद शीशे के सामान चूर होकर मेरे ही सपनो को चुभेगा, तुम साथ मर्हम लाओगी न सुनो! तुम आओगी न? जब मेरी हर ना कामयाब कोशिश मुझे तुमसे दूर करेंगी, और मैं व्याकुल हो उठुंगा, तुम मेरी नींद लाओगी न, सुनो! तुम आओगी न? जब मेरे सिरहाने, कोई गोद नही बचेगा और हर दरवाजे बंद होजाएंगे, तुम मेरे अरमान लाओगी न, सुनो! तुम आओगी न? अगर ना हो पाए तो ख़ुद पर ज़ुल्म मत करना, मेरी बंदगी हो तुम ख़ुद पर सितम मत करना, पर सांसें मेरी जब थम जाएंगी, मेरे शरीर के लिए मिट्टी लाओगी ना, सुनो! तब तो तुम आओगी ना? Shiva"

सुनो! तुम आओगी न?
जब मेरी रूह को हार की ग्रीष्म ताप घेर लेगी, 
तुम आओगी न?

जब मेरा वजूद शीशे के सामान चूर होकर मेरे ही सपनो को चुभेगा, तुम साथ मर्हम लाओगी न
सुनो! तुम आओगी न?

जब मेरी हर ना कामयाब कोशिश मुझे तुमसे दूर करेंगी, और मैं व्याकुल हो उठुंगा, तुम मेरी नींद लाओगी न,
सुनो! तुम आओगी न?

जब मेरे सिरहाने, कोई गोद नही बचेगा और हर दरवाजे बंद होजाएंगे, तुम मेरे अरमान लाओगी न,
सुनो! तुम आओगी न?

अगर ना हो पाए तो ख़ुद पर ज़ुल्म मत करना, 
मेरी बंदगी हो तुम ख़ुद पर सितम मत करना,
पर सांसें मेरी जब थम जाएंगी, 
मेरे शरीर के लिए मिट्टी लाओगी ना, 
सुनो! तब तो तुम आओगी ना?

Shiva

सुनो! तुम आओगी न?
#Hope

14 Love
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"हुड हुड थंडी गर्मीत लावते पहुडायला शेकोटीभवती सर्वांना लावते गर्दी करायला. सप्तरंगी"

हुड हुड थंडी 
 गर्मीत लावते पहुडायला
शेकोटीभवती सर्वांना
लावते गर्दी करायला.
              सप्तरंगी

थंडी

5 Love

गुलाबी थंडी

1 Love

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"गोठवणार्या थंडीत प्रिये, तू आग अशी होउन ये... भले जळू दे विरह सारा, तू क्षण अधिरे घेवून ये... कवीराज ९०२१०३४९१७."

गोठवणार्या थंडीत प्रिये,
तू आग अशी होउन ये...
भले जळू दे विरह सारा,
तू क्षण अधिरे घेवून ये...

कवीराज
९०२१०३४९१७.

थंडी

0 Love

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"सकाळच्या गुलाबी थंडीत धुक्यात हवा गोड असायची, मला तिची अन् तिला माझी विलक्षण ओढ असायची.!"

सकाळच्या गुलाबी थंडीत
धुक्यात हवा गोड असायची,
मला तिची अन् तिला माझी
विलक्षण ओढ असायची.!

गुलाबी थंडी

30 Love
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"आली ही थंडी गुलाबी..."

आली ही थंडी गुलाबी...

 

0 Love

""

"हेमंताची थंडी अंगाला कडाडते । सुर्याची किरण ऊबदार वाटते ॥"

हेमंताची थंडी अंगाला कडाडते ।
सुर्याची किरण ऊबदार वाटते ॥

 

15 Love
2 Share

""

"ताप से सोना निखरता है संघर्ष से जीवन संवरता है!! ©अंजलि जैन"

ताप से सोना निखरता है 
संघर्ष से जीवन संवरता है!!

©अंजलि जैन

#ताप/संघर्ष#१९.१०.२०

14 Love

""

"सफर कि थंडी हवाये अक्सर मुझे चिडाती है, तुम्हारी जुल्फे छुनेका मुझपर रौब दिखाती है!"

सफर कि थंडी हवाये अक्सर मुझे चिडाती है,
तुम्हारी जुल्फे छुनेका मुझपर रौब दिखाती है!

 

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"करूणा सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं न चन्द्रमा की ठंडक में लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है कि दुनिया में करुणा की कमी पड़ गई है इतनी कम पड़ गई है करुणा कि बर्फ़ पिघल नहीं रही नदियाँ बह नहीं रहीं झरने झर नहीं रहे चिड़ियाँ गा नहीं रहीं गाएँ रँभा नहीं रहीं कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं कि आदमी उसमें अपना चेहरा देख सके और उसमें तैरते बादल के टुकड़े से उसे धो-पोंछ सके दरअसल पानी से होकर देखो तभी दुनिया पानीदार रहती है उसमें पानी के गुण समा जाते हैं वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है पता नहीं आने वाले लोगों को दुनिया कैसी चाहिए कैसी हवा, कैसा पानी चाहिए पर इतना तो तय है कि इस समय दुनिया को ढेर सारी करुणा चाहिए।"

करूणा
सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं
न चन्द्रमा की ठंडक में

लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है
कि दुनिया में
करुणा की कमी पड़ गई है
इतनी कम पड़ गई है करुणा
कि बर्फ़ पिघल नहीं रही
नदियाँ बह नहीं रहीं
झरने झर नहीं रहे
चिड़ियाँ गा नहीं रहीं
गाएँ रँभा नहीं रहीं

कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं
कि आदमी उसमें अपना चेहरा देख सके
और उसमें तैरते बादल के टुकड़े से उसे धो-पोंछ सके

दरअसल पानी से होकर देखो
तभी दुनिया पानीदार रहती है
उसमें पानी के गुण समा जाते हैं
वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है

पता नहीं
आने वाले लोगों को दुनिया कैसी चाहिए
कैसी हवा, कैसा पानी चाहिए
पर इतना तो तय है
कि इस समय दुनिया को
ढेर सारी करुणा चाहिए।

#krishna_flute

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"एक उगाए अन्न देश में , एक संभाले सीमा। लगे निरंतर श्रम में हैं पड़े कोई काम ना धीमा । इन दोनों के हैं काम महान बोलो जय जवान जय किसान। सजग देश के ये प्रहरी है, आंखें चौकस रहती हैं। जरा सा दुश्मन आंख दिखाएं, फौरन बंदूक गरजती है। अपने देश पर इनकी जां कुर्बान बोलो जय जवान जय किसान। चाहे गर्मी हो या सर्दी हो , या फिर मेघ बरसते हों। जाड़ा ताप सहें निरंतर , चाहे घर जाने को तरसते हों। सबसे पहले ये फर्ज को देते मान बोलो जय जवान जय किसान। अन्नदाता हैं ये अपने देश के, कठिन परिश्रम करते हैं । वहां के पसीना अन्न उगाते,   ये पेट देश का भरते हैं । भोले- भाले दुनियादारी से अनजान बोलो जय जवान जय किसान। स्वरचित-आशा शुक्ला"

एक उगाए अन्न देश में ,
एक संभाले सीमा।
लगे निरंतर श्रम में हैं
पड़े कोई काम ना धीमा ।
इन दोनों के हैं काम महान बोलो जय जवान जय किसान।

सजग देश के ये प्रहरी है,
आंखें चौकस रहती हैं।
जरा सा दुश्मन आंख दिखाएं,
फौरन बंदूक गरजती है।
अपने देश पर इनकी जां कुर्बान बोलो जय जवान जय किसान।

चाहे गर्मी हो या सर्दी हो ,
या फिर मेघ बरसते हों।
जाड़ा ताप सहें निरंतर ,
चाहे घर जाने को तरसते हों।
सबसे पहले ये फर्ज को देते मान बोलो जय जवान जय किसान।

अन्नदाता हैं ये अपने देश के,
कठिन परिश्रम करते हैं ।
वहां के पसीना अन्न उगाते,
  ये पेट देश का भरते हैं ।
भोले- भाले दुनियादारी से अनजान बोलो जय जवान जय किसान।
स्वरचित-आशा शुक्ला

#कविता

#AajkeGandhi
#lovebeat

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गुलाबी थंडी

14 Love
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"तुम झूलाने लगी अपनी -उज्जवलता से प्रकाश - फैलाने लगी अपनी शीतलता से हर ताप हरने लगी अपने - नन्हें - परों  को खोलकर अब आकाश में भरना चाहती हो उड़ान नापना चाहती हो क्षितिज का विस्तार चोंच में अपनी पकड़ना चाहती हो चाँद तुम्हारे साथ बांटना चाहती हूं मैं यह - एहसास इसी तरह तुम -मुझ -में मैं -तुम में जीवित- रहूंगी -सदा मर - कर भी मैं - अमर हो जाऊंगी तब तुम्हारी मां नहीं बेटी कहलाऊंगी बंजर धरती ने एक  दिन ली अंगड़ाई ना जाने कैसे लहर सी लाई अंतस - पिघला लगा- लहलहाने एक नन्हा अंकुर चकित मैं इस चमत्कार पर रुई -दूध -उज्जवल -रंग नन्ही- नन्ही -सुकोमल -किसलय - हथेलियाँ भूल गई मैं स्वयं को हो गई धन्य मैं पाकर यह अद्भुत - उपहार गूंजी - किलकारी तो मैं- किलकने- लगी तुतलाई -तुम- तो मैं -तुतलाने- लगी मिट्टी -तुम-खाती- तो मैं -स्वाद पाती बड़े जूते पहन तुम इठलाती तो मैं बलि - बलि जाती मुझे बचपन के हिंडोले में अहसास "

तुम झूलाने लगी
अपनी -उज्जवलता से
 प्रकाश - फैलाने लगी 
अपनी शीतलता से
हर ताप हरने लगी
अपने - नन्हें - परों  को खोलकर 
अब आकाश में भरना चाहती हो उड़ान
नापना चाहती हो क्षितिज का विस्तार
चोंच में अपनी पकड़ना चाहती हो चाँद 
तुम्हारे साथ बांटना चाहती हूं
मैं यह - एहसास
इसी तरह तुम -मुझ -में
मैं -तुम में जीवित- रहूंगी -सदा 
मर - कर भी मैं - अमर हो जाऊंगी
तब तुम्हारी मां नहीं
बेटी कहलाऊंगी
 
बंजर धरती ने 
एक  दिन ली अंगड़ाई
ना जाने कैसे लहर सी लाई
अंतस - पिघला
लगा- लहलहाने एक नन्हा अंकुर
चकित मैं इस चमत्कार पर
रुई -दूध -उज्जवल -रंग 
नन्ही- नन्ही -सुकोमल 
-किसलय - हथेलियाँ 
भूल गई मैं स्वयं को
हो गई धन्य मैं 
पाकर यह अद्भुत - उपहार
गूंजी - किलकारी तो 
मैं- किलकने- लगी
तुतलाई -तुम- तो 
मैं -तुतलाने- लगी
मिट्टी -तुम-खाती- तो मैं -स्वाद पाती 
बड़े जूते पहन तुम इठलाती 
तो मैं बलि - बलि जाती
मुझे बचपन के हिंडोले में
 अहसास

#Broken

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"आवाजावर असते इथे रिऍक्शन्सचे येणे आशयाचे कुणालाही नसते घेणेदेणे भगवंत माळी."

आवाजावर असते इथे रिऍक्शन्सचे येणे
आशयाचे कुणालाही नसते घेणेदेणे


भगवंत माळी.

#अफलातून_रसिक

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"#NojotoVideoजो , चमकना है क्षितिज पर, ताप तो सहना पड़ेगा..."

#NojotoVideoजो , चमकना है क्षितिज पर, ताप तो सहना पड़ेगा...

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#NojotoVideo

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आठवणींचे येणे

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बाप थंडी आणि मी

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ताप ग्रीष्म विशेष

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"```मैं हूं अगर जो हूं अभी, तो कौन अब तक मौन था ?``` ```जो कह रहा था पिछले पल, "मैं कौन हूं", वो कौन था ?``` ```मैं देखता हूं ख़ुद को ही, मैं खुद को ही हूं ढूंढता,``` ```प्रचंड अग्नि के ताप सा प्रती पल मैं तप रहा``` ```आ रहा है वक़्त मेरा या, वक़्त के साथ ही चल रहा..?``` ```हर लम्हा मैं जिन्दा हो रहा, या हर घड़ी हूं मर रहा ।``` ```सवाल में जकड़ रहा, मैं खुद से ही हूं लड़ रहा ।``` ```मैं हूं अगर जो हूं अभी, तो कौन अब तक मौन था ?``` ```जो कह रहा था पिछले पल, "मैं कौन हूं", वो कौन था ?```"

```मैं हूं अगर जो हूं अभी, तो कौन अब तक मौन था ?``` 
```जो कह रहा था पिछले पल, "मैं कौन हूं", वो कौन था ?``` 
```मैं देखता हूं ख़ुद को ही, मैं खुद को ही हूं ढूंढता,``` 
```प्रचंड अग्नि के ताप सा प्रती पल मैं तप रहा``` 
```आ रहा है वक़्त मेरा या, वक़्त के साथ ही चल रहा..?``` 
```हर लम्हा मैं जिन्दा हो रहा, या  हर घड़ी हूं मर रहा ।``` 
```सवाल में जकड़ रहा, मैं खुद से ही हूं लड़ रहा ।``` 
```मैं हूं अगर जो हूं अभी, तो कौन अब तक मौन था ?``` 
```जो कह रहा था पिछले पल, "मैं कौन हूं", वो कौन था ?```

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"सुनो! तुम आओगी न? जब मेरी रूह को हार की ग्रीष्म ताप घेर लेगी, तुम आओगी न? जब मेरा वजूद शीशे के सामान चूर होकर मेरे ही सपनो को चुभेगा, तुम साथ मर्हम लाओगी न सुनो! तुम आओगी न? जब मेरी हर ना कामयाब कोशिश मुझे तुमसे दूर करेंगी, और मैं व्याकुल हो उठुंगा, तुम मेरी नींद लाओगी न, सुनो! तुम आओगी न? जब मेरे सिरहाने, कोई गोद नही बचेगा और हर दरवाजे बंद होजाएंगे, तुम मेरे अरमान लाओगी न, सुनो! तुम आओगी न? अगर ना हो पाए तो ख़ुद पर ज़ुल्म मत करना, मेरी बंदगी हो तुम ख़ुद पर सितम मत करना, पर सांसें मेरी जब थम जाएंगी, मेरे शरीर के लिए मिट्टी लाओगी ना, सुनो! तब तो तुम आओगी ना? Shiva"

सुनो! तुम आओगी न?
जब मेरी रूह को हार की ग्रीष्म ताप घेर लेगी, 
तुम आओगी न?

जब मेरा वजूद शीशे के सामान चूर होकर मेरे ही सपनो को चुभेगा, तुम साथ मर्हम लाओगी न
सुनो! तुम आओगी न?

जब मेरी हर ना कामयाब कोशिश मुझे तुमसे दूर करेंगी, और मैं व्याकुल हो उठुंगा, तुम मेरी नींद लाओगी न,
सुनो! तुम आओगी न?

जब मेरे सिरहाने, कोई गोद नही बचेगा और हर दरवाजे बंद होजाएंगे, तुम मेरे अरमान लाओगी न,
सुनो! तुम आओगी न?

अगर ना हो पाए तो ख़ुद पर ज़ुल्म मत करना, 
मेरी बंदगी हो तुम ख़ुद पर सितम मत करना,
पर सांसें मेरी जब थम जाएंगी, 
मेरे शरीर के लिए मिट्टी लाओगी ना, 
सुनो! तब तो तुम आओगी ना?

Shiva

सुनो! तुम आओगी न?
#Hope

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"हुड हुड थंडी गर्मीत लावते पहुडायला शेकोटीभवती सर्वांना लावते गर्दी करायला. सप्तरंगी"

हुड हुड थंडी 
 गर्मीत लावते पहुडायला
शेकोटीभवती सर्वांना
लावते गर्दी करायला.
              सप्तरंगी

थंडी

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गुलाबी थंडी

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"गोठवणार्या थंडीत प्रिये, तू आग अशी होउन ये... भले जळू दे विरह सारा, तू क्षण अधिरे घेवून ये... कवीराज ९०२१०३४९१७."

गोठवणार्या थंडीत प्रिये,
तू आग अशी होउन ये...
भले जळू दे विरह सारा,
तू क्षण अधिरे घेवून ये...

कवीराज
९०२१०३४९१७.

थंडी

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"सकाळच्या गुलाबी थंडीत धुक्यात हवा गोड असायची, मला तिची अन् तिला माझी विलक्षण ओढ असायची.!"

सकाळच्या गुलाबी थंडीत
धुक्यात हवा गोड असायची,
मला तिची अन् तिला माझी
विलक्षण ओढ असायची.!

गुलाबी थंडी

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""

"आली ही थंडी गुलाबी..."

आली ही थंडी गुलाबी...

 

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""

"हेमंताची थंडी अंगाला कडाडते । सुर्याची किरण ऊबदार वाटते ॥"

हेमंताची थंडी अंगाला कडाडते ।
सुर्याची किरण ऊबदार वाटते ॥

 

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"ताप से सोना निखरता है संघर्ष से जीवन संवरता है!! ©अंजलि जैन"

ताप से सोना निखरता है 
संघर्ष से जीवन संवरता है!!

©अंजलि जैन

#ताप/संघर्ष#१९.१०.२०

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""

"सफर कि थंडी हवाये अक्सर मुझे चिडाती है, तुम्हारी जुल्फे छुनेका मुझपर रौब दिखाती है!"

सफर कि थंडी हवाये अक्सर मुझे चिडाती है,
तुम्हारी जुल्फे छुनेका मुझपर रौब दिखाती है!

 

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