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हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। पढ़ें उनके 108 पवित्र नाम... 1.आंजनेया : अंजना का पुत्र 2.महावीर : सबसे बहादुर 3.हनूमत : जिसके गाल फुले हुए हैं 4.मारुतात्मज : पवन देव के लिए रत्न जैसे प्रिय 5.तत्वज्ञानप्रद : बुद्धि देने वाले 6.सीतादेविमुद्राप्रदायक : सीता की अंगूठी भगवान राम को देने वाले 7.अशोकवनकाच्छेत्रे : अशोक बाग का विनाश करने वाले 8.सर्वमायाविभंजन : छल के विनाशक 9.सर्वबन्धविमोक्त्रे : मोह को दूर करने वाले 10.रक्षोविध्वंसकारक : राक्षसों का वध करने वाले 11.परविद्या परिहार : दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले 12.परशौर्य विनाशन : शत्रु के शौर्य को खंडित करने वाले 13.परमन्त्र निराकर्त्रे : राम नाम का जाप करने वाले 14.परयन्त्र प्रभेदक : दुश्मनों के उद्देश्य को नष्ट करने वाले 15.सर्वग्रह विनाशी : ग्रहों के बुरे प्रभावों को खत्म करने वाले 16.भीमसेन सहायकृथे : भीम के सहायक 17.सर्वदुखः हरा : दुखों को दूर करने वाले 18.सर्वलोकचारिणे : सभी जगह वास करने वाले 19.मनोजवाय : जिसकी हवा जैसी गति है 20.पारिजात द्रुमूलस्थ : प्राजक्ता पेड़ के नीचे वास करने वाले 21.सर्वमन्त्र स्वरूपवते : सभी मंत्रों के स्वामी 22.सर्वतन्त्र स्वरूपिणे : सभी मंत्रों और भजन का आकार जैसा 23.सर्वयन्त्रात्मक : सभी यंत्रों में वास करने वाले 24.कपीश्वर : वानरों के देवता 25.महाकाय : विशाल रूप वाले 26.सर्वरोगहरा : सभी रोगों को दूर करने वाले 27.प्रभवे : सबसे प्रिय 28.बल सिद्धिकर : 29.सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक : ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले 30.कपिसेनानायक : वानर सेना के प्रमुख 31.भविष्यथ्चतुराननाय : भविष्य की घटनाओं के ज्ञाता 32.कुमार ब्रह्मचारी : युवा ब्रह्मचारी 33.रत्नकुण्डल दीप्तिमते : कान में मणियुक्त कुंडल धारण करने वाले 34.चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला : जिसकी पूंछ उनके सर से भी ऊंची है 35.गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ, : आकाशीय विद्या के ज्ञाता 36.महाबल पराक्रम : महान शक्ति के स्वामी 37.काराग्रह विमोक्त्रे : कैद से मुक्त करने वाले 38.शृन्खला बन्धमोचक: तनाव को दूर करने वाले 39.सागरोत्तारक : सागर को उछल कर पार करने वाले 40.प्राज्ञाय :  40.प्राज्ञाय : विद्वान 41.रामदूत : भगवान राम के राजदूत 42.प्रतापवते : वीरता के लिए प्रसिद्ध 43.वानर : बंदर 44.केसरीसुत : केसरी के पुत्र 45.सीताशोक निवारक : सीता के दुख का नाश करने वाले 46.अन्जनागर्भसम्भूता : अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले 47.बालार्कसद्रशानन : उगते सूरज की तरह तेजस 48.विभीषण प्रियकर : विभीषण के हितैषी 49.दशग्रीव कुलान्तक : रावण के राजवंश का नाश करने वाले 50.लक्ष्मणप्राणदात्रे : लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले 51.वज्रकाय : धातु की तरह मजबूत शरीर 52.महाद्युत : सबसे तेजस 53.चिरंजीविने : अमर रहने वाले 54.रामभक्त : भगवान राम के परम भक्त 55.दैत्यकार्य विघातक : राक्षसों की सभी गतिविधियों को नष्ट करने वाले 56.अक्षहन्त्रे : रावण के पुत्र अक्षय का अंत करने वाले 57.कांचनाभ : सुनहरे रंग का शरीर 58.पंचवक्त्र : पांच मुख वाले 59.महातपसी : महान तपस्वी 60.लन्किनी भंजन : लंकिनी का वध करने वाले 61.श्रीमते : प्रतिष्ठित 62.सिंहिकाप्राण भंजन : सिंहिका के प्राण लेने वाले 63.गन्धमादन शैलस्थ : गंधमादन पर्वत पार निवास करने वाले 64.लंकापुर विदायक : लंका को जलाने वाले 65.सुग्रीव सचिव : सुग्रीव के मंत्री 66.धीर : वीर 67.शूर : साहसी 68.दैत्यकुलान्तक : राक्षसों का वध करने वाले 69.सुरार्चित : देवताओं द्वारा पूजनीय 70.महातेजस : अधिकांश दीप्तिमान 71.रामचूडामणिप्रदायक : राम को सीता का चूड़ा देने वाले 72.कामरूपिणे : अनेक रूप धारण करने वाले 73.पिंगलाक्ष : गुलाबी आँखों वाले 74.वार्धिमैनाक पूजित : मैनाक पर्वत द्वारा पूजनीय 75.कबलीकृत मार्ताण्डमण्डलाय : सूर्य को निगलने वाले 76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले 76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले 77.रामसुग्रीव सन्धात्रे : राम और सुग्रीव के बीच मध्यस्थ 78.महारावण मर्धन : रावण का वध करने वाले 79.स्फटिकाभा : एकदम शुद्ध 80.वागधीश : प्रवक्ताओं के भगवान 81.नवव्याकृतपण्डित : सभी विद्याओं में निपुण 82.चतुर्बाहवे : चार भुजाओं वाले 83.दीनबन्धुरा : दुखियों के रक्षक 84.महात्मा : भगवान 85.भक्तवत्सल : भक्तों की रक्षा करने वाले 86.संजीवन नगाहर्त्रे : संजीवनी लाने वाले 87.सुचये : पवित्र 88.वाग्मिने : वक्ता 89.दृढव्रता : कठोर तपस्या करने वाले 90.कालनेमि प्रमथन : कालनेमि का प्राण हरने वाले 91.हरिमर्कट मर्कटा : वानरों के ईश्वर 92.दान्त : शांत 93.शान्त : रचना करने वाले 94.प्रसन्नात्मने : हंसमुख 95.शतकन्टमदापहते : शतकंट के अहंकार को ध्वस्त करने वाले 96.योगी : महात्मा 97.रामकथा लोलाय : भगवान राम की कहानी सुनने के लिए व्याकुल 98.सीतान्वेषण पण्डित : सीता की खोज करने वाले 99.वज्रद्रनुष्ट : 100.वज्रनखा : वज्र की तरह मजबूत नाखून 101.रुद्रवीर्य समुद्भवा : भगवान शिव का अवतार 102.इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक : इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने वाले 103.पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने : अर्जुन के रथ पार विराजमान रहने वाले 104.शरपंजर भेदक : तीरों के घोंसले को नष्ट करने वाले 105.दशबाहवे : दस भुजाओं वाले 106.लोकपूज्य : ब्रह्मांड के सभी जीवों द्वारा पूजनीय 107.जाम्बवत्प्रीतिवर्धन : जाम्बवत के प्रिय 108.सीताराम पादसेवक : भगवान राम और सीता की सेवा में तल्लीन रहने वाले ©Samartha

#my❤️  हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। पढ़ें उनके 108 पवित्र नाम... 1.आंजनेया : अंजना का पुत्र

2.महावीर : सबसे बहादुर

3.हनूमत : जिसके गाल फुले हुए हैं

4.मारुतात्मज : पवन देव के लिए रत्न जैसे प्रिय

5.तत्वज्ञानप्रद : बुद्धि देने वाले

6.सीतादेविमुद्राप्रदायक : सीता की अंगूठी भगवान राम को देने वाले

7.अशोकवनकाच्छेत्रे : अशोक बाग का विनाश करने वाले

8.सर्वमायाविभंजन : छल के विनाशक

9.सर्वबन्धविमोक्त्रे : मोह को दूर करने वाले

10.रक्षोविध्वंसकारक : राक्षसों का वध करने वाले

11.परविद्या परिहार : दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले

12.परशौर्य विनाशन : शत्रु के शौर्य को खंडित करने वाले

13.परमन्त्र निराकर्त्रे : राम नाम का जाप करने वाले

14.परयन्त्र प्रभेदक : दुश्मनों के उद्देश्य को नष्ट करने वाले

15.सर्वग्रह विनाशी : ग्रहों के बुरे प्रभावों को खत्म करने वाले

16.भीमसेन सहायकृथे : भीम के सहायक

17.सर्वदुखः हरा : दुखों को दूर करने वाले

18.सर्वलोकचारिणे : सभी जगह वास करने वाले

19.मनोजवाय : जिसकी हवा जैसी गति है

20.पारिजात द्रुमूलस्थ : प्राजक्ता पेड़ के नीचे वास करने वाले

21.सर्वमन्त्र स्वरूपवते : सभी मंत्रों के स्वामी

22.सर्वतन्त्र स्वरूपिणे : सभी मंत्रों और भजन का आकार जैसा

23.सर्वयन्त्रात्मक : सभी यंत्रों में वास करने वाले

24.कपीश्वर : वानरों के देवता

25.महाकाय : विशाल रूप वाले

26.सर्वरोगहरा : सभी रोगों को दूर करने वाले

27.प्रभवे : सबसे प्रिय

28.बल सिद्धिकर :

29.सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक : ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले

30.कपिसेनानायक : वानर सेना के प्रमुख

31.भविष्यथ्चतुराननाय : भविष्य की घटनाओं के ज्ञाता

32.कुमार ब्रह्मचारी : युवा ब्रह्मचारी

33.रत्नकुण्डल दीप्तिमते : कान में मणियुक्त कुंडल धारण करने वाले

34.चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला : जिसकी पूंछ उनके सर से भी ऊंची है

35.गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ, : आकाशीय विद्या के ज्ञाता

36.महाबल पराक्रम : महान शक्ति के स्वामी

37.काराग्रह विमोक्त्रे : कैद से मुक्त करने वाले

38.शृन्खला बन्धमोचक: तनाव को दूर करने वाले

39.सागरोत्तारक : सागर को उछल कर पार करने वाले

40.प्राज्ञाय : 

40.प्राज्ञाय : विद्वान

41.रामदूत : भगवान राम के राजदूत

42.प्रतापवते : वीरता के लिए प्रसिद्ध

43.वानर : बंदर

44.केसरीसुत : केसरी के पुत्र

45.सीताशोक निवारक : सीता के दुख का नाश करने वाले

46.अन्जनागर्भसम्भूता : अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले

47.बालार्कसद्रशानन : उगते सूरज की तरह तेजस

48.विभीषण प्रियकर : विभीषण के हितैषी

49.दशग्रीव कुलान्तक : रावण के राजवंश का नाश करने वाले

50.लक्ष्मणप्राणदात्रे : लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले

51.वज्रकाय : धातु की तरह मजबूत शरीर

52.महाद्युत : सबसे तेजस

53.चिरंजीविने : अमर रहने वाले

54.रामभक्त : भगवान राम के परम भक्त

55.दैत्यकार्य विघातक : राक्षसों की सभी गतिविधियों को नष्ट करने वाले

56.अक्षहन्त्रे : रावण के पुत्र अक्षय का अंत करने वाले

57.कांचनाभ : सुनहरे रंग का शरीर

58.पंचवक्त्र : पांच मुख वाले

59.महातपसी : महान तपस्वी

60.लन्किनी भंजन : लंकिनी का वध करने वाले

61.श्रीमते : प्रतिष्ठित

62.सिंहिकाप्राण भंजन : सिंहिका के प्राण लेने वाले

63.गन्धमादन शैलस्थ : गंधमादन पर्वत पार निवास करने वाले

64.लंकापुर विदायक : लंका को जलाने वाले

65.सुग्रीव सचिव : सुग्रीव के मंत्री

66.धीर : वीर

67.शूर : साहसी

68.दैत्यकुलान्तक : राक्षसों का वध करने वाले

69.सुरार्चित : देवताओं द्वारा पूजनीय

70.महातेजस : अधिकांश दीप्तिमान

71.रामचूडामणिप्रदायक : राम को सीता का चूड़ा देने वाले

72.कामरूपिणे : अनेक रूप धारण करने वाले

73.पिंगलाक्ष : गुलाबी आँखों वाले

74.वार्धिमैनाक पूजित : मैनाक पर्वत द्वारा पूजनीय

75.कबलीकृत मार्ताण्डमण्डलाय : सूर्य को निगलने वाले

76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले

76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले

77.रामसुग्रीव सन्धात्रे : राम और सुग्रीव के बीच मध्यस्थ

78.महारावण मर्धन : रावण का वध करने वाले

79.स्फटिकाभा : एकदम शुद्ध

80.वागधीश : प्रवक्ताओं के भगवान

81.नवव्याकृतपण्डित : सभी विद्याओं में निपुण

82.चतुर्बाहवे : चार भुजाओं वाले

83.दीनबन्धुरा : दुखियों के रक्षक

84.महात्मा : भगवान

85.भक्तवत्सल : भक्तों की रक्षा करने वाले

86.संजीवन नगाहर्त्रे : संजीवनी लाने वाले

87.सुचये : पवित्र

88.वाग्मिने : वक्ता

89.दृढव्रता : कठोर तपस्या करने वाले

90.कालनेमि प्रमथन : कालनेमि का प्राण हरने वाले

91.हरिमर्कट मर्कटा : वानरों के ईश्वर

92.दान्त : शांत

93.शान्त : रचना करने वाले

94.प्रसन्नात्मने : हंसमुख

95.शतकन्टमदापहते : शतकंट के अहंकार को ध्वस्त करने वाले

96.योगी : महात्मा

97.रामकथा लोलाय : भगवान राम की कहानी सुनने के लिए व्याकुल

98.सीतान्वेषण पण्डित : सीता की खोज करने वाले

99.वज्रद्रनुष्ट :

100.वज्रनखा : वज्र की तरह मजबूत नाखून

101.रुद्रवीर्य समुद्भवा : भगवान शिव का अवतार

102.इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक : इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने वाले

103.पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने : अर्जुन के रथ पार विराजमान रहने वाले

104.शरपंजर भेदक : तीरों के घोंसले को नष्ट करने वाले

105.दशबाहवे : दस भुजाओं वाले

106.लोकपूज्य : ब्रह्मांड के सभी जीवों द्वारा पूजनीय

107.जाम्बवत्प्रीतिवर्धन : जाम्बवत के प्रिय

108.सीताराम पादसेवक : भगवान राम और सीता की सेवा में तल्लीन रहने वाले

©Samartha

#my❤️

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जीवन में समय के साथ या तो दुख खतम हो जाता है या फिर दुख सहते सहते हम भूल जाते हैं की ये दुख है -इंद्रजीत ©Indrajeeet Sen

#oneliners #humanlife #BookLife #Quotes #follow  जीवन में समय के साथ या तो दुख खतम हो जाता है
या फिर 
दुख सहते सहते हम भूल जाते हैं की ये दुख है 

-इंद्रजीत

©Indrajeeet Sen

लोग भूल जाते है...... अपनों से हमेशा सावधान रहें..... रावण राम के नहीं बल्कि विभीषण की वजह से मारा गया था..... ऐसा कहने वाले लोग खुद ही विभीषण होते है..... यहाँ भूल जाते है लोग लक्ष्मण के त्याग को, कि कैसे लक्ष्मण ने महल का सुख छोड़, राम के दुःख मे राम के साथ खड़ा था...... लोग भूल जाते है कि - राजा बनने के बाद भी कैसे भरत ने सिंघासन पर राम के चरनपाटुका को रखकर उसकी पूजा किया करता था....... सिर्फ इतना ही नहीं लोग भूल जाते है यहाँ भी कुम्भकरण के बलिदान को जिसको पता था की वो साक्षात् भगवान से लड़ने जा रहा है, उसकी मौत निश्चित है, लेकिन फिर भी कुम्भकरण ने भाई का फ़र्ज निभाया और अपनी मौत से लड़ा..... भूल जाते लोग उस इंद्रजीत को भी, जिसने पिता के सम्मान मे साक्षात् मौत से लड़ा था..... मै कहता हूँ कि भूल जाओ विभीषण को, याद रखो लक्ष्मण,भरत, कुम्भकरण और इंद्रजीत को सुख हो या दुःख परिवार का साथ दो...... #aznabi_36 ~vikas✍ ©Writer Vikas aznabi

#NojotoRamleela #aznabi_36  लोग भूल जाते है......

अपनों से हमेशा सावधान रहें.....
रावण राम के नहीं बल्कि विभीषण की वजह से मारा गया था.....
ऐसा कहने वाले लोग खुद ही विभीषण होते है.....

यहाँ भूल जाते है लोग लक्ष्मण के त्याग को, कि कैसे लक्ष्मण ने महल का सुख छोड़, राम के दुःख मे राम के साथ खड़ा था......
लोग भूल जाते है कि - राजा बनने के बाद भी कैसे भरत ने सिंघासन पर राम के चरनपाटुका को रखकर उसकी पूजा किया करता था.......
सिर्फ इतना ही नहीं लोग भूल जाते है यहाँ भी कुम्भकरण के बलिदान को जिसको पता था की वो साक्षात् भगवान से लड़ने जा रहा है, उसकी मौत निश्चित है, लेकिन फिर भी कुम्भकरण ने भाई का फ़र्ज निभाया और अपनी मौत से लड़ा.....
भूल जाते लोग उस इंद्रजीत को भी, जिसने पिता के सम्मान मे साक्षात् मौत से लड़ा था.....

मै कहता हूँ कि भूल जाओ विभीषण को, याद रखो लक्ष्मण,भरत, कुम्भकरण और इंद्रजीत को सुख हो या दुःख परिवार का साथ दो......

#aznabi_36
~vikas✍

©Writer Vikas aznabi

लोग भूल जाते है...... अपनों से हमेशा सावधान रहें..... रावण राम के नहीं बल्कि विभीषण की वजह से मारा गया था..... ऐसा कहने वाले लोग खुद ही विभ

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पहुंच गई लंका वानर सेना राम लखन के संग, रावण अहंकारी भी व्याकुल था करने को जंग। हुई जंग शुरू, दोनो तरफ से वीर सब टकराए, अन्याय संग न्याय की जंग में दोनो पक्षों ने वीर गवाए। पहले अपने अहंकार में रावण भी था युद्ध करने आया, राम लखन ने की ऐसी लड़ाई, रावण को खूब थकाया। थके रावण को लौट जाने का राम ने दिया परामर्श, शर्मिंदा था रावण अपनी पराजय से, कभी कांपते थे जिसके नाम से धरा और अर्श। फिर भी उस अभिमानी को बात समझ ना आई, तब याद आई कुंभकरण की, जो था उसका भाई। कुंभकरण एक विशाल देह का दैत्य था, छह माह पश्चात, एक दिन के लिए उठता था। उठाने को उसे रावण ने आदेश था दिया, बड़ी मुश्किल से सेना ने इस काम को अंजाम दिया। उठ कर कुंभकरण ने जब सुना सारा वृतांत, जान गया था, सीता हरण का पाप ही करवाएगा सबका देहांत फिर भी भाई का साथ देने हेतु युद्ध क्षेत्र में था गया, बहुत से वानरों का भक्षण करने के बाद राम लखन ने उसके अंगों को काट दिया। रावण ने जाना जब कुंभकरण का हो गया था अंत, इंद्रजीत तैयार हुआ युद्ध करने को तुरंत। इंद्रजीत ने लक्ष्मण संग किया युद्ध भयानक, हरा ना पाया तो छल करने को अदृश्य हो गया अचानक। अदृश्य हो कर उसने ऐसा बाण चलाया, मूर्छित कर दिया लक्ष्मण जी को, और उनको मृत समझ वापस था आया। संजीवनी बूटी लाने के खातिर पूरा पहाड़ हनुमान जी थे लाए, पुनः जीवित कर लक्ष्मण को राम को शोक से मुक्त करवाए। विभीषण जी ने बता कर भेद इंद्रजीत का यज्ञ भंग करवाया, उनकी सहायता से लक्ष्मण ने इंद्रजीत मार गिराया। पुत्र भाई की मौत पश्चात, रावण की आई बारी, बहुत दिनों तक दोनो सनाओं में युद्ध हुआ भीष्म और भारी। अपने पुष्पक विमान पर रावण रहा था ऐंठ, तब देवताओं ने श्री राम को इंद्र रथ किया भेंट। आकाश मार्ग में राम रावण का युद्ध हुआ घनघोर, विभीषण ने जब बताई कमजोरी, छोड़ा बाण रावण की नाभी में जिस से टूट गई प्राणों की डोर। अंत में सत्य ने असत्य पर विजय थी पाई, मार कर रावण को राम सिया की खतम हुई जुदाई। इस विजय के अवसर पर विजय दशमी मनाई जाती अन्याय पर न्याय की जीत का सबक रामायण सिखाती। ©Vasudha Uttam

#पौराणिककथा #NojotoRamleela #nojotoenglish #nojotohindi #nojotonews  पहुंच गई लंका वानर सेना राम लखन के संग,
रावण अहंकारी भी व्याकुल था करने को जंग।

हुई जंग शुरू, दोनो तरफ से वीर सब टकराए,
अन्याय संग न्याय की जंग में दोनो पक्षों ने वीर गवाए।

पहले अपने अहंकार में रावण भी था युद्ध करने आया,
राम लखन ने की ऐसी लड़ाई, रावण को खूब थकाया।
थके रावण को लौट जाने का राम ने दिया परामर्श,
शर्मिंदा था रावण अपनी पराजय से, कभी कांपते थे जिसके नाम से धरा और अर्श।
फिर भी उस अभिमानी को बात समझ ना आई,
तब याद आई कुंभकरण की, जो था उसका भाई।

कुंभकरण एक विशाल देह का दैत्य था,
छह माह पश्चात, एक दिन के लिए उठता था।
उठाने को उसे रावण ने आदेश था दिया,
बड़ी मुश्किल से सेना ने इस काम को अंजाम दिया।
उठ कर कुंभकरण ने जब सुना सारा वृतांत,
जान गया था, सीता हरण का पाप ही करवाएगा सबका देहांत
फिर भी भाई का साथ देने हेतु युद्ध क्षेत्र में था गया,
बहुत से वानरों का भक्षण करने के बाद राम लखन ने उसके अंगों को काट दिया।

रावण ने जाना जब कुंभकरण का हो गया था अंत,
इंद्रजीत तैयार हुआ युद्ध करने को तुरंत।
इंद्रजीत ने लक्ष्मण संग किया युद्ध भयानक,
हरा ना पाया तो छल करने को अदृश्य हो गया अचानक।
अदृश्य हो कर उसने ऐसा बाण चलाया,
मूर्छित कर दिया लक्ष्मण जी को, और उनको मृत समझ वापस था आया।

संजीवनी बूटी लाने के खातिर पूरा पहाड़ हनुमान जी थे लाए,
पुनः जीवित कर लक्ष्मण को राम को शोक से मुक्त करवाए।
विभीषण जी ने बता कर भेद इंद्रजीत का यज्ञ भंग करवाया,
उनकी सहायता से लक्ष्मण ने इंद्रजीत मार गिराया।

पुत्र भाई की मौत पश्चात, रावण की आई बारी,
बहुत दिनों तक दोनो सनाओं में युद्ध हुआ भीष्म और भारी।
अपने पुष्पक विमान पर रावण रहा था ऐंठ,
तब देवताओं ने श्री राम को इंद्र रथ किया भेंट।
आकाश मार्ग में राम रावण का युद्ध हुआ घनघोर,
विभीषण ने जब बताई कमजोरी, छोड़ा बाण रावण की नाभी में जिस से टूट गई प्राणों की डोर।

अंत में सत्य ने असत्य पर विजय थी पाई,
मार कर रावण को राम सिया की खतम हुई जुदाई।

इस विजय के अवसर पर विजय दशमी मनाई जाती
अन्याय पर न्याय की जीत का सबक रामायण सिखाती।

©Vasudha Uttam

#NojotoRamleela #Nojoto #nojotonews #nojotoenglish #nojotohindi Ruchika @Priya Gour Priya dubey Ravi vibhute Anita Mishra Spykee brar

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मद में चूर ऐसे रावण जब पापों की गगरी भरते जाते हैं तब तब श्री राम प्रभु अवतार ले धरा पर अवश्य ही आते हैं कुम्भकर्ण इंद्रजीत सहित हुआ सेना का श्री हाथों उद्धार हर एक राक्षस हो पावन स्वतः पहुंच गया श्री वैकुंठ द्वार छल, बल, अनीति का बस क्षणिक होता है अपना प्रभाव सत्य, नीति, कल्याण भाव से ही जीत का होता प्रादुर्भाव कुकर्म, अनाचार,अभिमान की आखिर होती है बस हार श्री राम के हाथों लगते ब्रह्मास्त्र से हर रावण का होता है उद्धार रावण के पास भी तो था अनन्य गुणों का भण्डार बस उसके दुष्कर्मों ने ही पहुँचाया उसे मृत्यु के द्वार अपने अंतर के रावण को मारने की सीख प्रभु ने थी सिखाई श्री राम की सीख पर चलें हम भी, सबको विजयादशमी की बहुत बधाई ©Divya Joshi

#NojotoRamleela #vijyadashmi #lekhaniblog #divyajoshi #lekhani  मद में चूर ऐसे रावण जब पापों की गगरी भरते जाते हैं
तब तब श्री राम प्रभु अवतार ले धरा पर अवश्य ही आते हैं

कुम्भकर्ण इंद्रजीत सहित हुआ सेना का श्री हाथों उद्धार
हर एक राक्षस हो पावन स्वतः पहुंच गया श्री वैकुंठ द्वार

छल, बल, अनीति का बस क्षणिक होता है अपना प्रभाव
 सत्य, नीति, कल्याण भाव से ही जीत का होता प्रादुर्भाव

कुकर्म, अनाचार,अभिमान की आखिर होती है बस हार 
श्री राम के हाथों लगते ब्रह्मास्त्र से हर रावण का होता है उद्धार 

रावण के पास भी तो था अनन्य गुणों का भण्डार 
बस उसके दुष्कर्मों ने ही पहुँचाया उसे मृत्यु के द्वार

अपने अंतर के रावण को मारने की सीख प्रभु ने थी सिखाई
श्री राम की सीख पर चलें हम भी, सबको विजयादशमी की बहुत बधाई

©Divya Joshi

विजयादशमी मद में चूर ऐसे रावण जब पापों की गगरी भरते जाते हैं तब तब श्री राम प्रभु अवतार ले इस धरा पर अवश्य ही आते हैं कुम्भकर्ण इंद्रजीत स

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सीता जी तक पहुंचने को विशाल समंदर करना था पार, वानर सेना में अंगद और हनुमान जैसे वीरों के पास शक्तियां थी अपार। हनुमान जी को समरण करवाए, जामवंत उनकी शक्तियां अपरिचित, उनकी अंत हीन शक्तियां जो श्राप हेतु भूले बैठे थे वह कदाचित। याद कर पवन पुत्र, हुए समंदर पार करने को तैयार, विशाल रूप कर धारण, उड़ चले.. कर राम की जय जय कार। राह में उनके, बहुत सी आई थी बाधाएं, अपनी चतुरता से, हनुमान जी सब पार कर पाए। गुप्त रूप में अणु रूप कर धारण लंका में किया प्रवेश, ली जानकारी संपूर्ण लंका की, और देखा उन्होंने लंकेश। महलों में जब मिली ना सीता, अशोक वाटिका हुए प्रस्थान, वहा एक अबला बैठी दिखी, जिनको राक्षसनियां कर रही थी परेशान। बैठ पेड़ पर गाने लगे श्री राम का गुणगान, परिचित कराया खुद को कहकर: राम भगत हनुमान। संशय दूर करने को सिया मां का, राम मुद्रिका दिखाई, बोले हनुमान: मेरी पीठ बैठ चल पड़ो मैया, खतम करो यह जुदाई। बोली सिया मां: मेरे राम मुझे आदर संग ले कर जाए, युद्ध कर इन राक्षसों संग, इनको सबक सिखाए। हाथ जोड़ हनुमान जी तब अपने असली रूप में आए, तबाह कर दी अशोक वाटिका, अपना उग्र रूप दिखाए। जान एक वानर की उपस्थिति, रावण ने सेना को भिजवाया, जम्भूवली, सैनानायको सहित अक्ष कुमार मार गिराया। हो क्रोधित तब रावण ने इंद्रजीत को था भिजवाया, ब्रह्मास्त्र की लाज रखने को हनुमान जी ने खुद को बंधी बनवाया। बन बंधी हुए प्रस्तुत वह रावण के समक्ष, बहुत क्रोधित था रावण, सुन मर गया था उनका पुत्र अक्ष। मृत्युदंड देने को जब रावण ने फरमाया, विभीषण ने दूत हत्या के पाप से अवगत उसे करवाया। बोला रावण अहंकार में, वानरों को उनकी पूंछ होती है प्रिय, लगाने को अग्नि पूंछ पर उनको सजा दी इसलिए। दे कर यह सजा रावण बाद में बहुत पछताया, एक जली पूंछ से हनुमान जी ने, फिर पूरी लंका को जलाया। ©Vasudha Uttam

#NojotoRamleela #nojotoenglish #समाज #nojotohindi #nojotonews  सीता जी तक पहुंचने को विशाल समंदर करना था पार,
वानर सेना में अंगद और हनुमान जैसे वीरों के पास शक्तियां थी अपार।
हनुमान जी को समरण करवाए, जामवंत उनकी शक्तियां अपरिचित,
उनकी अंत हीन शक्तियां जो श्राप हेतु भूले बैठे थे वह कदाचित।
याद कर पवन पुत्र, हुए समंदर पार करने को तैयार,
विशाल रूप कर धारण, उड़ चले.. कर राम की जय जय कार।
राह में उनके, बहुत सी आई थी बाधाएं,
अपनी चतुरता से, हनुमान जी सब पार कर पाए।
गुप्त रूप में अणु रूप कर धारण लंका में किया प्रवेश,
ली जानकारी संपूर्ण लंका की, और देखा उन्होंने लंकेश।
महलों में जब मिली ना सीता, अशोक वाटिका हुए प्रस्थान,
वहा एक अबला बैठी दिखी, जिनको राक्षसनियां कर रही थी परेशान।
बैठ पेड़ पर गाने लगे श्री राम का गुणगान,
परिचित कराया खुद को कहकर: राम भगत हनुमान।
संशय दूर करने को सिया मां का, राम मुद्रिका दिखाई,
बोले हनुमान: मेरी पीठ बैठ चल पड़ो मैया, खतम करो यह जुदाई।
बोली सिया मां: मेरे राम मुझे आदर संग ले कर जाए,
युद्ध कर इन राक्षसों संग, इनको सबक सिखाए।
हाथ जोड़ हनुमान जी तब अपने असली रूप में आए,
तबाह कर दी अशोक वाटिका, अपना उग्र रूप दिखाए।
जान एक वानर की उपस्थिति, रावण ने सेना को भिजवाया,
जम्भूवली, सैनानायको सहित अक्ष कुमार मार गिराया।
हो क्रोधित तब रावण ने इंद्रजीत को था भिजवाया,
ब्रह्मास्त्र की लाज रखने को हनुमान जी ने खुद को बंधी बनवाया।
बन बंधी हुए प्रस्तुत वह रावण के समक्ष,
बहुत क्रोधित था रावण, सुन मर गया था उनका पुत्र अक्ष।
मृत्युदंड देने को जब रावण ने फरमाया,
विभीषण ने दूत हत्या के पाप से अवगत उसे करवाया।
बोला रावण अहंकार में, वानरों को उनकी पूंछ होती है प्रिय,
लगाने को अग्नि पूंछ पर उनको सजा दी इसलिए।
दे कर यह सजा रावण बाद में बहुत पछताया,
एक जली पूंछ से हनुमान जी ने, फिर पूरी लंका को जलाया।

©Vasudha Uttam

#NojotoRamleela #nojoto #nojotonews #nojotohindi #nojotoenglish Ruchika Anita Mishra @Priya Gour @sunny Adlakha Sudha Tripathi Ravi vibh

35 Love

है परम् पिता परमात्मा जगत संचालक श्री हरि। थाने आणि साल माका साथे घणी भरी करि।। थाने असो कय चलायो सुक्का को चटको। आसाढ़ महीनों खतम होबा वालो अब तो फ़ाणि पटको।। है इंदर देव या विपदा घणी भारी।थाए लेव सरम नी आरी। कय थाकि आत्मा भटक गी। थोड़ा नीचे तो देखो सोयाबीन नेव लटक गी।। नि आयो आज काल मे फ़ाणि तो किसान ए मरणो पडेगो। इंदर देव अब नी मान्या थे तो थाकि सोगन मेघनाथ ए याद करणो पडेगो।। सभी देवता का जाके कर ली सब रीत । है लकेश पुत्र मायावी मेघनाथ इंद्रजीत भूल गए इंद्र अपने सब वादे। दादा मेघनाथ अब तू अणाये समझा दे।। R सेन✍️✍️ ©rajesh sen

#OneSeason  है परम् पिता परमात्मा जगत संचालक श्री हरि।
थाने आणि साल माका साथे घणी भरी करि।।
थाने असो कय चलायो सुक्का को चटको।
आसाढ़ महीनों खतम होबा वालो अब तो फ़ाणि पटको।।
है इंदर देव या विपदा घणी भारी।थाए लेव सरम नी आरी।
कय थाकि आत्मा भटक गी।
थोड़ा नीचे तो देखो सोयाबीन  नेव लटक गी।।
नि आयो आज काल मे फ़ाणि तो किसान ए मरणो पडेगो।
इंदर देव अब नी मान्या थे तो थाकि सोगन  मेघनाथ ए याद करणो पडेगो।।
सभी देवता का जाके कर ली सब रीत ।
है लकेश पुत्र मायावी मेघनाथ इंद्रजीत
भूल गए इंद्र अपने सब वादे। दादा मेघनाथ अब तू अणाये समझा दे।।
R सेन✍️✍️

©rajesh sen

#OneSeason

2 Love

आसमा का तारा बनकर,आँखों का सितारा बनकर, साथ मेरे तुम हों न, मीठी सी वाणी बनकर,आँखों का पानी बनकर, साथ मेरे तुम हो न, संध्या की आहट से ,सुबह की जगमगाहट तक साथ मेरे तुम हो न, ओझल हो आँखों से मेरे,दिल पूछे तुम्हारा पता कहा हैं, ढूंढ़ रही हर पल एक आस सी, बता दे मेरी खता क़्या हैं, वापसी का ख्वाब आपके , मन का हर कोना देखता हैं, छिपकर सिसक कर कानो में, हर रोज अब यही कहता हैं, यादो की मुस्कुराहट बनकर , धड़कन पहचान बनकर, तुम ही तो हो न साथ नहीं मम्मा तुम मेरे , पर पास सदा तुम हो न 🧡 आपकी जागे💕 ©इंद्रजीत नायक

#daughterlove #lostmom  आसमा का तारा बनकर,आँखों का सितारा बनकर,
साथ मेरे तुम हों न,
मीठी सी वाणी बनकर,आँखों का पानी बनकर,
साथ मेरे तुम हो न,
संध्या की आहट से ,सुबह की जगमगाहट तक 
साथ मेरे तुम हो न,
ओझल हो आँखों से मेरे,दिल पूछे तुम्हारा पता कहा हैं,
ढूंढ़ रही हर पल एक आस सी, बता दे मेरी खता क़्या हैं,
 वापसी का ख्वाब आपके , मन का हर कोना देखता हैं,
छिपकर सिसक कर कानो में, हर रोज अब यही कहता हैं,
यादो की मुस्कुराहट बनकर ,
धड़कन पहचान बनकर,
तुम ही तो हो न
साथ नहीं मम्मा तुम मेरे , पर पास सदा तुम हो न 🧡



आपकी जागे💕

©इंद्रजीत नायक

कौशल्या दशरथ के दुलारे, श्री रघुनंदन राम हमारे... तुमको हमारे सहस्त्रों प्रणाम, हे पुरुषोत्तम राजा राम... बाल्यकाल से दुख निवारे, ताड़का जैसी दुष्टा को संहारे... ऋषियों के बिगड़े काज सँवारे, अहिल्या को चरण रज से तारे... विश्वामित्र संग मिथिला पधारे, धनुभंग कर परशुराम सम्भारे... विवाह किया संग जनकदुलारी के, चारों भाई नव वधुओं संग अयोध्या पधारे... मांगे कैकेयी ने दशरथ से दो वर, राज छोड़ प्रभु वन को पधारे... वन गए राम ; प्राण तज दिए पिताजी, हुई सूनी अयोध्या ; फिर आए भरत जी... जान प्रपंच अपनी माता का, राज छोड़ चले प्रभु को लेने... प्रेम और भक्ति को देख भरत की, ब्रह्माण्ड हुआ आतुर भरत-मिलन को देखने... चित्रकूट में मिले भरत जी, राम लौटा दिए पादुकाओं संग... पंचवटी में हरी जानकी, मिले पवनसुत ऋष्यमूक पर्वत पर... पहले बालीवध फिर लंकादहन हुआ, रामसेतु बना सागर पार किया... अंत किया बड़े-बड़े दानवों का, मेघनाद ने लक्ष्मण पर आघात किया... हनुमान लाए पर्वत को उठाकर, संजीवनी से लखन का उपचार हुआ... मारा इंद्रजीत को उर्मिलावल्लभ ने, फिर प्रभु ने कुल सहित रावण का संहार किया... मुक्त किया माता सीता को, लंकापुरी में अधर्म का नाश किया... राजा बने अयोध्या के राम रघुरायी , ग्यारह हज़ार वर्ष तक धर्म से राज किया... ©Pooja Patel

 कौशल्या दशरथ के दुलारे, 
श्री रघुनंदन राम हमारे... 
तुमको हमारे सहस्त्रों प्रणाम, 
हे पुरुषोत्तम राजा राम...
बाल्यकाल से दुख निवारे, 
ताड़का जैसी दुष्टा को संहारे... 
ऋषियों के बिगड़े काज सँवारे, 
अहिल्या को चरण रज से तारे...
विश्वामित्र संग मिथिला पधारे, 
धनुभंग कर परशुराम सम्भारे...
विवाह किया संग जनकदुलारी के, 
चारों भाई नव वधुओं संग अयोध्या पधारे...
मांगे कैकेयी ने दशरथ से दो वर, 
राज छोड़ प्रभु वन को पधारे...
वन गए राम ; प्राण तज दिए पिताजी, 
हुई सूनी अयोध्या ; फिर आए भरत जी...
जान प्रपंच अपनी माता का, 
राज छोड़ चले प्रभु को लेने... 
प्रेम और भक्ति को देख भरत की, 
ब्रह्माण्ड हुआ आतुर भरत-मिलन को देखने...
चित्रकूट में मिले भरत जी, 
राम लौटा दिए पादुकाओं संग...
पंचवटी में हरी जानकी, 
मिले पवनसुत ऋष्यमूक पर्वत पर... 
पहले बालीवध फिर लंकादहन हुआ,
रामसेतु बना सागर पार किया... 
अंत किया बड़े-बड़े दानवों का, 
मेघनाद ने लक्ष्मण पर आघात किया...
हनुमान लाए पर्वत को उठाकर, 
संजीवनी से लखन का उपचार हुआ... 
मारा इंद्रजीत को उर्मिलावल्लभ ने, 
फिर प्रभु ने कुल सहित रावण का संहार किया...
मुक्त किया माता सीता को, 
लंकापुरी में अधर्म का नाश किया...
राजा बने अयोध्या के राम रघुरायी , 
ग्यारह हज़ार वर्ष तक धर्म से राज किया...

©Pooja Patel

कौशल्या दशरथ के दुलारे, श्री रघुनंदन राम हमारे... तुमको हमारे सहस्त्रों प्रणाम, हे पुरुषोत्तम राजा राम... बाल्यकाल से दुख निवारे, ताड़का जैसी दुष्टा को संहारे... ऋषियों के बिगड़े काज सँवारे, अहिल्या को चरण रज से तारे... विश्वामित्र संग मिथिला पधारे, धनुभंग कर परशुराम सम्भारे... विवाह किया संग जनकदुलारी के, चारों भाई नव वधुओं संग अयोध्या पधारे... मांगे कैकेयी ने दशरथ से दो वर, राज छोड़ प्रभु वन को पधारे... वन गए राम ; प्राण तज दिए पिताजी, हुई सूनी अयोध्या ; फिर आए भरत जी... जान प्रपंच अपनी माता का, राज छोड़ चले प्रभु को लेने... प्रेम और भक्ति को देख भरत की, ब्रह्माण्ड हुआ आतुर भरत-मिलन को देखने... चित्रकूट में मिले भरत जी, राम लौटा दिए पादुकाओं संग... पंचवटी में हरी जानकी, मिले पवनसुत ऋष्यमूक पर्वत पर... पहले बालीवध फिर लंकादहन हुआ, रामसेतु बना सागर पार किया... अंत किया बड़े-बड़े दानवों का, मेघनाद ने लक्ष्मण पर आघात किया... हनुमान लाए पर्वत को उठाकर, संजीवनी से लखन का उपचार हुआ... मारा इंद्रजीत को उर्मिलावल्लभ ने, फिर प्रभु ने कुल सहित रावण का संहार किया... मुक्त किया माता सीता को, लंकापुरी में अधर्म का नाश किया... राजा बने अयोध्या के राम रघुरायी , ग्यारह हज़ार वर्ष तक धर्म से राज किया... ©Pooja Patel

13 Love

राजं-----! ___________ कविता संग्रह - चातक ________________ प्रा. इंद्रजीत पाटील ____________________

#dawn  राजं-----! 
___________

कविता संग्रह - चातक
________________

प्रा. इंद्रजीत पाटील
____________________

#dawn

4 Love

इंद्रजीत पाटील

#reading  इंद्रजीत पाटील

#reading

3 Love

कविता माझी प्रा. इंद्रजीत पाटील

#rकeading  कविता माझी 
प्रा. इंद्रजीत पाटील

कविता माझी प्रा. इंद्रजीत पाटील

#seaside  कविता माझी 

 प्रा. इंद्रजीत पाटील

#seaside

5 Love

बहुत चल-दिए जिंदगी के सीधे रास्तों पे... पर रास्ते ज्यादा सीधे हो तो मंजिल तक नहीं पहुंचते... इसलिए सोचती हूं अब जिंदगी में थोड़ा फितूर होना चाहिए... ✍ प्रणाली इंद्रजीत.73

#emptiness💔  बहुत चल-दिए जिंदगी के सीधे रास्तों  पे...

पर रास्ते ज्यादा सीधे हो तो मंजिल तक नहीं पहुंचते...

इसलिए सोचती हूं
अब जिंदगी में थोड़ा फितूर होना चाहिए...

✍ प्रणाली इंद्रजीत.73

#Life_experience

खालसा एड से जुड़े युवा इंद्रजीत सिंह की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। पीड़ित व्यक्तियों के लिए समर्पित इंद्रजीत सिंह ने दिल्ली दंगा पीड़ितो

8 Love

आप की कहानी आपकी ही जुबानी लिखिए और बनिए कलम के जादूगर email devalikacontest@gmail.com

#devalika  आप की कहानी आपकी ही जुबानी लिखिए और बनिए कलम के जादूगर
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#devalika --- पात्र हमारा कहानी आपकी-- "अखिल भारतीय पात्र लघु कथा लेखन प्रतियोगिता 2020" इस प्रतियोगिता का उद्देश्य आपके लेखन कौशल को समाज

7 Love

email your short story at devalikacontest@gmail.com and become a renowned author. for more details read full post.

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8 Love

a nationwide short story contest. write a story on characters of devalika and be a Published author now. email your story devalikacontest@gmail.com for more details read full post.

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--- पात्र हमारा कहानी आपकी-- "अखिल भारतीय पात्र लघु कथा लेखन प्रतियोगिता 2020" इस प्रतियोगिता का उद्देश्य आपके लेखन कौशल को समाज के सामने ल

8 Love

अखिल भारतीय लघु कथा प्रतियोगिता भाग ले और अपनी कहानी लाखों लोगों तक पहुंचाएं ईमेल करें devalikacontest@gmail.com for more details read post carefully.

 अखिल भारतीय लघु कथा प्रतियोगिता 
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7 Love

"पात्र हमारा कहानी आपकी प्रतियोगिता 2020" 3000 शब्दों में लिखें कहानी और उसे ईमेल करें devalikacontest@gmail.com चयनित होने पर कहानी प्रकाशित की जाएगी "देवालिका की उप कहानियां" नामक पुस्तक पर | अधिक जानकारी ऊपर दी गई है

#devalika  "पात्र हमारा कहानी आपकी प्रतियोगिता 2020"
3000 शब्दों में लिखें कहानी और उसे ईमेल करें devalikacontest@gmail.com 
चयनित होने पर कहानी प्रकाशित की जाएगी "देवालिका की उप कहानियां" नामक पुस्तक पर | अधिक जानकारी ऊपर दी गई है

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10 Love

हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। पढ़ें उनके 108 पवित्र नाम... 1.आंजनेया : अंजना का पुत्र 2.महावीर : सबसे बहादुर 3.हनूमत : जिसके गाल फुले हुए हैं 4.मारुतात्मज : पवन देव के लिए रत्न जैसे प्रिय 5.तत्वज्ञानप्रद : बुद्धि देने वाले 6.सीतादेविमुद्राप्रदायक : सीता की अंगूठी भगवान राम को देने वाले 7.अशोकवनकाच्छेत्रे : अशोक बाग का विनाश करने वाले 8.सर्वमायाविभंजन : छल के विनाशक 9.सर्वबन्धविमोक्त्रे : मोह को दूर करने वाले 10.रक्षोविध्वंसकारक : राक्षसों का वध करने वाले 11.परविद्या परिहार : दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले 12.परशौर्य विनाशन : शत्रु के शौर्य को खंडित करने वाले 13.परमन्त्र निराकर्त्रे : राम नाम का जाप करने वाले 14.परयन्त्र प्रभेदक : दुश्मनों के उद्देश्य को नष्ट करने वाले 15.सर्वग्रह विनाशी : ग्रहों के बुरे प्रभावों को खत्म करने वाले 16.भीमसेन सहायकृथे : भीम के सहायक 17.सर्वदुखः हरा : दुखों को दूर करने वाले 18.सर्वलोकचारिणे : सभी जगह वास करने वाले 19.मनोजवाय : जिसकी हवा जैसी गति है 20.पारिजात द्रुमूलस्थ : प्राजक्ता पेड़ के नीचे वास करने वाले 21.सर्वमन्त्र स्वरूपवते : सभी मंत्रों के स्वामी 22.सर्वतन्त्र स्वरूपिणे : सभी मंत्रों और भजन का आकार जैसा 23.सर्वयन्त्रात्मक : सभी यंत्रों में वास करने वाले 24.कपीश्वर : वानरों के देवता 25.महाकाय : विशाल रूप वाले 26.सर्वरोगहरा : सभी रोगों को दूर करने वाले 27.प्रभवे : सबसे प्रिय 28.बल सिद्धिकर : 29.सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक : ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले 30.कपिसेनानायक : वानर सेना के प्रमुख 31.भविष्यथ्चतुराननाय : भविष्य की घटनाओं के ज्ञाता 32.कुमार ब्रह्मचारी : युवा ब्रह्मचारी 33.रत्नकुण्डल दीप्तिमते : कान में मणियुक्त कुंडल धारण करने वाले 34.चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला : जिसकी पूंछ उनके सर से भी ऊंची है 35.गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ, : आकाशीय विद्या के ज्ञाता 36.महाबल पराक्रम : महान शक्ति के स्वामी 37.काराग्रह विमोक्त्रे : कैद से मुक्त करने वाले 38.शृन्खला बन्धमोचक: तनाव को दूर करने वाले 39.सागरोत्तारक : सागर को उछल कर पार करने वाले 40.प्राज्ञाय :  40.प्राज्ञाय : विद्वान 41.रामदूत : भगवान राम के राजदूत 42.प्रतापवते : वीरता के लिए प्रसिद्ध 43.वानर : बंदर 44.केसरीसुत : केसरी के पुत्र 45.सीताशोक निवारक : सीता के दुख का नाश करने वाले 46.अन्जनागर्भसम्भूता : अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले 47.बालार्कसद्रशानन : उगते सूरज की तरह तेजस 48.विभीषण प्रियकर : विभीषण के हितैषी 49.दशग्रीव कुलान्तक : रावण के राजवंश का नाश करने वाले 50.लक्ष्मणप्राणदात्रे : लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले 51.वज्रकाय : धातु की तरह मजबूत शरीर 52.महाद्युत : सबसे तेजस 53.चिरंजीविने : अमर रहने वाले 54.रामभक्त : भगवान राम के परम भक्त 55.दैत्यकार्य विघातक : राक्षसों की सभी गतिविधियों को नष्ट करने वाले 56.अक्षहन्त्रे : रावण के पुत्र अक्षय का अंत करने वाले 57.कांचनाभ : सुनहरे रंग का शरीर 58.पंचवक्त्र : पांच मुख वाले 59.महातपसी : महान तपस्वी 60.लन्किनी भंजन : लंकिनी का वध करने वाले 61.श्रीमते : प्रतिष्ठित 62.सिंहिकाप्राण भंजन : सिंहिका के प्राण लेने वाले 63.गन्धमादन शैलस्थ : गंधमादन पर्वत पार निवास करने वाले 64.लंकापुर विदायक : लंका को जलाने वाले 65.सुग्रीव सचिव : सुग्रीव के मंत्री 66.धीर : वीर 67.शूर : साहसी 68.दैत्यकुलान्तक : राक्षसों का वध करने वाले 69.सुरार्चित : देवताओं द्वारा पूजनीय 70.महातेजस : अधिकांश दीप्तिमान 71.रामचूडामणिप्रदायक : राम को सीता का चूड़ा देने वाले 72.कामरूपिणे : अनेक रूप धारण करने वाले 73.पिंगलाक्ष : गुलाबी आँखों वाले 74.वार्धिमैनाक पूजित : मैनाक पर्वत द्वारा पूजनीय 75.कबलीकृत मार्ताण्डमण्डलाय : सूर्य को निगलने वाले 76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले 76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले 77.रामसुग्रीव सन्धात्रे : राम और सुग्रीव के बीच मध्यस्थ 78.महारावण मर्धन : रावण का वध करने वाले 79.स्फटिकाभा : एकदम शुद्ध 80.वागधीश : प्रवक्ताओं के भगवान 81.नवव्याकृतपण्डित : सभी विद्याओं में निपुण 82.चतुर्बाहवे : चार भुजाओं वाले 83.दीनबन्धुरा : दुखियों के रक्षक 84.महात्मा : भगवान 85.भक्तवत्सल : भक्तों की रक्षा करने वाले 86.संजीवन नगाहर्त्रे : संजीवनी लाने वाले 87.सुचये : पवित्र 88.वाग्मिने : वक्ता 89.दृढव्रता : कठोर तपस्या करने वाले 90.कालनेमि प्रमथन : कालनेमि का प्राण हरने वाले 91.हरिमर्कट मर्कटा : वानरों के ईश्वर 92.दान्त : शांत 93.शान्त : रचना करने वाले 94.प्रसन्नात्मने : हंसमुख 95.शतकन्टमदापहते : शतकंट के अहंकार को ध्वस्त करने वाले 96.योगी : महात्मा 97.रामकथा लोलाय : भगवान राम की कहानी सुनने के लिए व्याकुल 98.सीतान्वेषण पण्डित : सीता की खोज करने वाले 99.वज्रद्रनुष्ट : 100.वज्रनखा : वज्र की तरह मजबूत नाखून 101.रुद्रवीर्य समुद्भवा : भगवान शिव का अवतार 102.इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक : इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने वाले 103.पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने : अर्जुन के रथ पार विराजमान रहने वाले 104.शरपंजर भेदक : तीरों के घोंसले को नष्ट करने वाले 105.दशबाहवे : दस भुजाओं वाले 106.लोकपूज्य : ब्रह्मांड के सभी जीवों द्वारा पूजनीय 107.जाम्बवत्प्रीतिवर्धन : जाम्बवत के प्रिय 108.सीताराम पादसेवक : भगवान राम और सीता की सेवा में तल्लीन रहने वाले ©Samartha

#my❤️  हनुमान की उपासना से जीवन के सारे कष्ट, संकट मिट जाते है। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता है जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। मंगलवार और शनिवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। पढ़ें उनके 108 पवित्र नाम... 1.आंजनेया : अंजना का पुत्र

2.महावीर : सबसे बहादुर

3.हनूमत : जिसके गाल फुले हुए हैं

4.मारुतात्मज : पवन देव के लिए रत्न जैसे प्रिय

5.तत्वज्ञानप्रद : बुद्धि देने वाले

6.सीतादेविमुद्राप्रदायक : सीता की अंगूठी भगवान राम को देने वाले

7.अशोकवनकाच्छेत्रे : अशोक बाग का विनाश करने वाले

8.सर्वमायाविभंजन : छल के विनाशक

9.सर्वबन्धविमोक्त्रे : मोह को दूर करने वाले

10.रक्षोविध्वंसकारक : राक्षसों का वध करने वाले

11.परविद्या परिहार : दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले

12.परशौर्य विनाशन : शत्रु के शौर्य को खंडित करने वाले

13.परमन्त्र निराकर्त्रे : राम नाम का जाप करने वाले

14.परयन्त्र प्रभेदक : दुश्मनों के उद्देश्य को नष्ट करने वाले

15.सर्वग्रह विनाशी : ग्रहों के बुरे प्रभावों को खत्म करने वाले

16.भीमसेन सहायकृथे : भीम के सहायक

17.सर्वदुखः हरा : दुखों को दूर करने वाले

18.सर्वलोकचारिणे : सभी जगह वास करने वाले

19.मनोजवाय : जिसकी हवा जैसी गति है

20.पारिजात द्रुमूलस्थ : प्राजक्ता पेड़ के नीचे वास करने वाले

21.सर्वमन्त्र स्वरूपवते : सभी मंत्रों के स्वामी

22.सर्वतन्त्र स्वरूपिणे : सभी मंत्रों और भजन का आकार जैसा

23.सर्वयन्त्रात्मक : सभी यंत्रों में वास करने वाले

24.कपीश्वर : वानरों के देवता

25.महाकाय : विशाल रूप वाले

26.सर्वरोगहरा : सभी रोगों को दूर करने वाले

27.प्रभवे : सबसे प्रिय

28.बल सिद्धिकर :

29.सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक : ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले

30.कपिसेनानायक : वानर सेना के प्रमुख

31.भविष्यथ्चतुराननाय : भविष्य की घटनाओं के ज्ञाता

32.कुमार ब्रह्मचारी : युवा ब्रह्मचारी

33.रत्नकुण्डल दीप्तिमते : कान में मणियुक्त कुंडल धारण करने वाले

34.चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला : जिसकी पूंछ उनके सर से भी ऊंची है

35.गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ, : आकाशीय विद्या के ज्ञाता

36.महाबल पराक्रम : महान शक्ति के स्वामी

37.काराग्रह विमोक्त्रे : कैद से मुक्त करने वाले

38.शृन्खला बन्धमोचक: तनाव को दूर करने वाले

39.सागरोत्तारक : सागर को उछल कर पार करने वाले

40.प्राज्ञाय : 

40.प्राज्ञाय : विद्वान

41.रामदूत : भगवान राम के राजदूत

42.प्रतापवते : वीरता के लिए प्रसिद्ध

43.वानर : बंदर

44.केसरीसुत : केसरी के पुत्र

45.सीताशोक निवारक : सीता के दुख का नाश करने वाले

46.अन्जनागर्भसम्भूता : अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले

47.बालार्कसद्रशानन : उगते सूरज की तरह तेजस

48.विभीषण प्रियकर : विभीषण के हितैषी

49.दशग्रीव कुलान्तक : रावण के राजवंश का नाश करने वाले

50.लक्ष्मणप्राणदात्रे : लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले

51.वज्रकाय : धातु की तरह मजबूत शरीर

52.महाद्युत : सबसे तेजस

53.चिरंजीविने : अमर रहने वाले

54.रामभक्त : भगवान राम के परम भक्त

55.दैत्यकार्य विघातक : राक्षसों की सभी गतिविधियों को नष्ट करने वाले

56.अक्षहन्त्रे : रावण के पुत्र अक्षय का अंत करने वाले

57.कांचनाभ : सुनहरे रंग का शरीर

58.पंचवक्त्र : पांच मुख वाले

59.महातपसी : महान तपस्वी

60.लन्किनी भंजन : लंकिनी का वध करने वाले

61.श्रीमते : प्रतिष्ठित

62.सिंहिकाप्राण भंजन : सिंहिका के प्राण लेने वाले

63.गन्धमादन शैलस्थ : गंधमादन पर्वत पार निवास करने वाले

64.लंकापुर विदायक : लंका को जलाने वाले

65.सुग्रीव सचिव : सुग्रीव के मंत्री

66.धीर : वीर

67.शूर : साहसी

68.दैत्यकुलान्तक : राक्षसों का वध करने वाले

69.सुरार्चित : देवताओं द्वारा पूजनीय

70.महातेजस : अधिकांश दीप्तिमान

71.रामचूडामणिप्रदायक : राम को सीता का चूड़ा देने वाले

72.कामरूपिणे : अनेक रूप धारण करने वाले

73.पिंगलाक्ष : गुलाबी आँखों वाले

74.वार्धिमैनाक पूजित : मैनाक पर्वत द्वारा पूजनीय

75.कबलीकृत मार्ताण्डमण्डलाय : सूर्य को निगलने वाले

76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले

76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले

77.रामसुग्रीव सन्धात्रे : राम और सुग्रीव के बीच मध्यस्थ

78.महारावण मर्धन : रावण का वध करने वाले

79.स्फटिकाभा : एकदम शुद्ध

80.वागधीश : प्रवक्ताओं के भगवान

81.नवव्याकृतपण्डित : सभी विद्याओं में निपुण

82.चतुर्बाहवे : चार भुजाओं वाले

83.दीनबन्धुरा : दुखियों के रक्षक

84.महात्मा : भगवान

85.भक्तवत्सल : भक्तों की रक्षा करने वाले

86.संजीवन नगाहर्त्रे : संजीवनी लाने वाले

87.सुचये : पवित्र

88.वाग्मिने : वक्ता

89.दृढव्रता : कठोर तपस्या करने वाले

90.कालनेमि प्रमथन : कालनेमि का प्राण हरने वाले

91.हरिमर्कट मर्कटा : वानरों के ईश्वर

92.दान्त : शांत

93.शान्त : रचना करने वाले

94.प्रसन्नात्मने : हंसमुख

95.शतकन्टमदापहते : शतकंट के अहंकार को ध्वस्त करने वाले

96.योगी : महात्मा

97.रामकथा लोलाय : भगवान राम की कहानी सुनने के लिए व्याकुल

98.सीतान्वेषण पण्डित : सीता की खोज करने वाले

99.वज्रद्रनुष्ट :

100.वज्रनखा : वज्र की तरह मजबूत नाखून

101.रुद्रवीर्य समुद्भवा : भगवान शिव का अवतार

102.इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक : इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने वाले

103.पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने : अर्जुन के रथ पार विराजमान रहने वाले

104.शरपंजर भेदक : तीरों के घोंसले को नष्ट करने वाले

105.दशबाहवे : दस भुजाओं वाले

106.लोकपूज्य : ब्रह्मांड के सभी जीवों द्वारा पूजनीय

107.जाम्बवत्प्रीतिवर्धन : जाम्बवत के प्रिय

108.सीताराम पादसेवक : भगवान राम और सीता की सेवा में तल्लीन रहने वाले

©Samartha

#my❤️

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जीवन में समय के साथ या तो दुख खतम हो जाता है या फिर दुख सहते सहते हम भूल जाते हैं की ये दुख है -इंद्रजीत ©Indrajeeet Sen

#oneliners #humanlife #BookLife #Quotes #follow  जीवन में समय के साथ या तो दुख खतम हो जाता है
या फिर 
दुख सहते सहते हम भूल जाते हैं की ये दुख है 

-इंद्रजीत

©Indrajeeet Sen

लोग भूल जाते है...... अपनों से हमेशा सावधान रहें..... रावण राम के नहीं बल्कि विभीषण की वजह से मारा गया था..... ऐसा कहने वाले लोग खुद ही विभीषण होते है..... यहाँ भूल जाते है लोग लक्ष्मण के त्याग को, कि कैसे लक्ष्मण ने महल का सुख छोड़, राम के दुःख मे राम के साथ खड़ा था...... लोग भूल जाते है कि - राजा बनने के बाद भी कैसे भरत ने सिंघासन पर राम के चरनपाटुका को रखकर उसकी पूजा किया करता था....... सिर्फ इतना ही नहीं लोग भूल जाते है यहाँ भी कुम्भकरण के बलिदान को जिसको पता था की वो साक्षात् भगवान से लड़ने जा रहा है, उसकी मौत निश्चित है, लेकिन फिर भी कुम्भकरण ने भाई का फ़र्ज निभाया और अपनी मौत से लड़ा..... भूल जाते लोग उस इंद्रजीत को भी, जिसने पिता के सम्मान मे साक्षात् मौत से लड़ा था..... मै कहता हूँ कि भूल जाओ विभीषण को, याद रखो लक्ष्मण,भरत, कुम्भकरण और इंद्रजीत को सुख हो या दुःख परिवार का साथ दो...... #aznabi_36 ~vikas✍ ©Writer Vikas aznabi

#NojotoRamleela #aznabi_36  लोग भूल जाते है......

अपनों से हमेशा सावधान रहें.....
रावण राम के नहीं बल्कि विभीषण की वजह से मारा गया था.....
ऐसा कहने वाले लोग खुद ही विभीषण होते है.....

यहाँ भूल जाते है लोग लक्ष्मण के त्याग को, कि कैसे लक्ष्मण ने महल का सुख छोड़, राम के दुःख मे राम के साथ खड़ा था......
लोग भूल जाते है कि - राजा बनने के बाद भी कैसे भरत ने सिंघासन पर राम के चरनपाटुका को रखकर उसकी पूजा किया करता था.......
सिर्फ इतना ही नहीं लोग भूल जाते है यहाँ भी कुम्भकरण के बलिदान को जिसको पता था की वो साक्षात् भगवान से लड़ने जा रहा है, उसकी मौत निश्चित है, लेकिन फिर भी कुम्भकरण ने भाई का फ़र्ज निभाया और अपनी मौत से लड़ा.....
भूल जाते लोग उस इंद्रजीत को भी, जिसने पिता के सम्मान मे साक्षात् मौत से लड़ा था.....

मै कहता हूँ कि भूल जाओ विभीषण को, याद रखो लक्ष्मण,भरत, कुम्भकरण और इंद्रजीत को सुख हो या दुःख परिवार का साथ दो......

#aznabi_36
~vikas✍

©Writer Vikas aznabi

लोग भूल जाते है...... अपनों से हमेशा सावधान रहें..... रावण राम के नहीं बल्कि विभीषण की वजह से मारा गया था..... ऐसा कहने वाले लोग खुद ही विभ

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पहुंच गई लंका वानर सेना राम लखन के संग, रावण अहंकारी भी व्याकुल था करने को जंग। हुई जंग शुरू, दोनो तरफ से वीर सब टकराए, अन्याय संग न्याय की जंग में दोनो पक्षों ने वीर गवाए। पहले अपने अहंकार में रावण भी था युद्ध करने आया, राम लखन ने की ऐसी लड़ाई, रावण को खूब थकाया। थके रावण को लौट जाने का राम ने दिया परामर्श, शर्मिंदा था रावण अपनी पराजय से, कभी कांपते थे जिसके नाम से धरा और अर्श। फिर भी उस अभिमानी को बात समझ ना आई, तब याद आई कुंभकरण की, जो था उसका भाई। कुंभकरण एक विशाल देह का दैत्य था, छह माह पश्चात, एक दिन के लिए उठता था। उठाने को उसे रावण ने आदेश था दिया, बड़ी मुश्किल से सेना ने इस काम को अंजाम दिया। उठ कर कुंभकरण ने जब सुना सारा वृतांत, जान गया था, सीता हरण का पाप ही करवाएगा सबका देहांत फिर भी भाई का साथ देने हेतु युद्ध क्षेत्र में था गया, बहुत से वानरों का भक्षण करने के बाद राम लखन ने उसके अंगों को काट दिया। रावण ने जाना जब कुंभकरण का हो गया था अंत, इंद्रजीत तैयार हुआ युद्ध करने को तुरंत। इंद्रजीत ने लक्ष्मण संग किया युद्ध भयानक, हरा ना पाया तो छल करने को अदृश्य हो गया अचानक। अदृश्य हो कर उसने ऐसा बाण चलाया, मूर्छित कर दिया लक्ष्मण जी को, और उनको मृत समझ वापस था आया। संजीवनी बूटी लाने के खातिर पूरा पहाड़ हनुमान जी थे लाए, पुनः जीवित कर लक्ष्मण को राम को शोक से मुक्त करवाए। विभीषण जी ने बता कर भेद इंद्रजीत का यज्ञ भंग करवाया, उनकी सहायता से लक्ष्मण ने इंद्रजीत मार गिराया। पुत्र भाई की मौत पश्चात, रावण की आई बारी, बहुत दिनों तक दोनो सनाओं में युद्ध हुआ भीष्म और भारी। अपने पुष्पक विमान पर रावण रहा था ऐंठ, तब देवताओं ने श्री राम को इंद्र रथ किया भेंट। आकाश मार्ग में राम रावण का युद्ध हुआ घनघोर, विभीषण ने जब बताई कमजोरी, छोड़ा बाण रावण की नाभी में जिस से टूट गई प्राणों की डोर। अंत में सत्य ने असत्य पर विजय थी पाई, मार कर रावण को राम सिया की खतम हुई जुदाई। इस विजय के अवसर पर विजय दशमी मनाई जाती अन्याय पर न्याय की जीत का सबक रामायण सिखाती। ©Vasudha Uttam

#पौराणिककथा #NojotoRamleela #nojotoenglish #nojotohindi #nojotonews  पहुंच गई लंका वानर सेना राम लखन के संग,
रावण अहंकारी भी व्याकुल था करने को जंग।

हुई जंग शुरू, दोनो तरफ से वीर सब टकराए,
अन्याय संग न्याय की जंग में दोनो पक्षों ने वीर गवाए।

पहले अपने अहंकार में रावण भी था युद्ध करने आया,
राम लखन ने की ऐसी लड़ाई, रावण को खूब थकाया।
थके रावण को लौट जाने का राम ने दिया परामर्श,
शर्मिंदा था रावण अपनी पराजय से, कभी कांपते थे जिसके नाम से धरा और अर्श।
फिर भी उस अभिमानी को बात समझ ना आई,
तब याद आई कुंभकरण की, जो था उसका भाई।

कुंभकरण एक विशाल देह का दैत्य था,
छह माह पश्चात, एक दिन के लिए उठता था।
उठाने को उसे रावण ने आदेश था दिया,
बड़ी मुश्किल से सेना ने इस काम को अंजाम दिया।
उठ कर कुंभकरण ने जब सुना सारा वृतांत,
जान गया था, सीता हरण का पाप ही करवाएगा सबका देहांत
फिर भी भाई का साथ देने हेतु युद्ध क्षेत्र में था गया,
बहुत से वानरों का भक्षण करने के बाद राम लखन ने उसके अंगों को काट दिया।

रावण ने जाना जब कुंभकरण का हो गया था अंत,
इंद्रजीत तैयार हुआ युद्ध करने को तुरंत।
इंद्रजीत ने लक्ष्मण संग किया युद्ध भयानक,
हरा ना पाया तो छल करने को अदृश्य हो गया अचानक।
अदृश्य हो कर उसने ऐसा बाण चलाया,
मूर्छित कर दिया लक्ष्मण जी को, और उनको मृत समझ वापस था आया।

संजीवनी बूटी लाने के खातिर पूरा पहाड़ हनुमान जी थे लाए,
पुनः जीवित कर लक्ष्मण को राम को शोक से मुक्त करवाए।
विभीषण जी ने बता कर भेद इंद्रजीत का यज्ञ भंग करवाया,
उनकी सहायता से लक्ष्मण ने इंद्रजीत मार गिराया।

पुत्र भाई की मौत पश्चात, रावण की आई बारी,
बहुत दिनों तक दोनो सनाओं में युद्ध हुआ भीष्म और भारी।
अपने पुष्पक विमान पर रावण रहा था ऐंठ,
तब देवताओं ने श्री राम को इंद्र रथ किया भेंट।
आकाश मार्ग में राम रावण का युद्ध हुआ घनघोर,
विभीषण ने जब बताई कमजोरी, छोड़ा बाण रावण की नाभी में जिस से टूट गई प्राणों की डोर।

अंत में सत्य ने असत्य पर विजय थी पाई,
मार कर रावण को राम सिया की खतम हुई जुदाई।

इस विजय के अवसर पर विजय दशमी मनाई जाती
अन्याय पर न्याय की जीत का सबक रामायण सिखाती।

©Vasudha Uttam

#NojotoRamleela #Nojoto #nojotonews #nojotoenglish #nojotohindi Ruchika @Priya Gour Priya dubey Ravi vibhute Anita Mishra Spykee brar

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मद में चूर ऐसे रावण जब पापों की गगरी भरते जाते हैं तब तब श्री राम प्रभु अवतार ले धरा पर अवश्य ही आते हैं कुम्भकर्ण इंद्रजीत सहित हुआ सेना का श्री हाथों उद्धार हर एक राक्षस हो पावन स्वतः पहुंच गया श्री वैकुंठ द्वार छल, बल, अनीति का बस क्षणिक होता है अपना प्रभाव सत्य, नीति, कल्याण भाव से ही जीत का होता प्रादुर्भाव कुकर्म, अनाचार,अभिमान की आखिर होती है बस हार श्री राम के हाथों लगते ब्रह्मास्त्र से हर रावण का होता है उद्धार रावण के पास भी तो था अनन्य गुणों का भण्डार बस उसके दुष्कर्मों ने ही पहुँचाया उसे मृत्यु के द्वार अपने अंतर के रावण को मारने की सीख प्रभु ने थी सिखाई श्री राम की सीख पर चलें हम भी, सबको विजयादशमी की बहुत बधाई ©Divya Joshi

#NojotoRamleela #vijyadashmi #lekhaniblog #divyajoshi #lekhani  मद में चूर ऐसे रावण जब पापों की गगरी भरते जाते हैं
तब तब श्री राम प्रभु अवतार ले धरा पर अवश्य ही आते हैं

कुम्भकर्ण इंद्रजीत सहित हुआ सेना का श्री हाथों उद्धार
हर एक राक्षस हो पावन स्वतः पहुंच गया श्री वैकुंठ द्वार

छल, बल, अनीति का बस क्षणिक होता है अपना प्रभाव
 सत्य, नीति, कल्याण भाव से ही जीत का होता प्रादुर्भाव

कुकर्म, अनाचार,अभिमान की आखिर होती है बस हार 
श्री राम के हाथों लगते ब्रह्मास्त्र से हर रावण का होता है उद्धार 

रावण के पास भी तो था अनन्य गुणों का भण्डार 
बस उसके दुष्कर्मों ने ही पहुँचाया उसे मृत्यु के द्वार

अपने अंतर के रावण को मारने की सीख प्रभु ने थी सिखाई
श्री राम की सीख पर चलें हम भी, सबको विजयादशमी की बहुत बधाई

©Divya Joshi

विजयादशमी मद में चूर ऐसे रावण जब पापों की गगरी भरते जाते हैं तब तब श्री राम प्रभु अवतार ले इस धरा पर अवश्य ही आते हैं कुम्भकर्ण इंद्रजीत स

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सीता जी तक पहुंचने को विशाल समंदर करना था पार, वानर सेना में अंगद और हनुमान जैसे वीरों के पास शक्तियां थी अपार। हनुमान जी को समरण करवाए, जामवंत उनकी शक्तियां अपरिचित, उनकी अंत हीन शक्तियां जो श्राप हेतु भूले बैठे थे वह कदाचित। याद कर पवन पुत्र, हुए समंदर पार करने को तैयार, विशाल रूप कर धारण, उड़ चले.. कर राम की जय जय कार। राह में उनके, बहुत सी आई थी बाधाएं, अपनी चतुरता से, हनुमान जी सब पार कर पाए। गुप्त रूप में अणु रूप कर धारण लंका में किया प्रवेश, ली जानकारी संपूर्ण लंका की, और देखा उन्होंने लंकेश। महलों में जब मिली ना सीता, अशोक वाटिका हुए प्रस्थान, वहा एक अबला बैठी दिखी, जिनको राक्षसनियां कर रही थी परेशान। बैठ पेड़ पर गाने लगे श्री राम का गुणगान, परिचित कराया खुद को कहकर: राम भगत हनुमान। संशय दूर करने को सिया मां का, राम मुद्रिका दिखाई, बोले हनुमान: मेरी पीठ बैठ चल पड़ो मैया, खतम करो यह जुदाई। बोली सिया मां: मेरे राम मुझे आदर संग ले कर जाए, युद्ध कर इन राक्षसों संग, इनको सबक सिखाए। हाथ जोड़ हनुमान जी तब अपने असली रूप में आए, तबाह कर दी अशोक वाटिका, अपना उग्र रूप दिखाए। जान एक वानर की उपस्थिति, रावण ने सेना को भिजवाया, जम्भूवली, सैनानायको सहित अक्ष कुमार मार गिराया। हो क्रोधित तब रावण ने इंद्रजीत को था भिजवाया, ब्रह्मास्त्र की लाज रखने को हनुमान जी ने खुद को बंधी बनवाया। बन बंधी हुए प्रस्तुत वह रावण के समक्ष, बहुत क्रोधित था रावण, सुन मर गया था उनका पुत्र अक्ष। मृत्युदंड देने को जब रावण ने फरमाया, विभीषण ने दूत हत्या के पाप से अवगत उसे करवाया। बोला रावण अहंकार में, वानरों को उनकी पूंछ होती है प्रिय, लगाने को अग्नि पूंछ पर उनको सजा दी इसलिए। दे कर यह सजा रावण बाद में बहुत पछताया, एक जली पूंछ से हनुमान जी ने, फिर पूरी लंका को जलाया। ©Vasudha Uttam

#NojotoRamleela #nojotoenglish #समाज #nojotohindi #nojotonews  सीता जी तक पहुंचने को विशाल समंदर करना था पार,
वानर सेना में अंगद और हनुमान जैसे वीरों के पास शक्तियां थी अपार।
हनुमान जी को समरण करवाए, जामवंत उनकी शक्तियां अपरिचित,
उनकी अंत हीन शक्तियां जो श्राप हेतु भूले बैठे थे वह कदाचित।
याद कर पवन पुत्र, हुए समंदर पार करने को तैयार,
विशाल रूप कर धारण, उड़ चले.. कर राम की जय जय कार।
राह में उनके, बहुत सी आई थी बाधाएं,
अपनी चतुरता से, हनुमान जी सब पार कर पाए।
गुप्त रूप में अणु रूप कर धारण लंका में किया प्रवेश,
ली जानकारी संपूर्ण लंका की, और देखा उन्होंने लंकेश।
महलों में जब मिली ना सीता, अशोक वाटिका हुए प्रस्थान,
वहा एक अबला बैठी दिखी, जिनको राक्षसनियां कर रही थी परेशान।
बैठ पेड़ पर गाने लगे श्री राम का गुणगान,
परिचित कराया खुद को कहकर: राम भगत हनुमान।
संशय दूर करने को सिया मां का, राम मुद्रिका दिखाई,
बोले हनुमान: मेरी पीठ बैठ चल पड़ो मैया, खतम करो यह जुदाई।
बोली सिया मां: मेरे राम मुझे आदर संग ले कर जाए,
युद्ध कर इन राक्षसों संग, इनको सबक सिखाए।
हाथ जोड़ हनुमान जी तब अपने असली रूप में आए,
तबाह कर दी अशोक वाटिका, अपना उग्र रूप दिखाए।
जान एक वानर की उपस्थिति, रावण ने सेना को भिजवाया,
जम्भूवली, सैनानायको सहित अक्ष कुमार मार गिराया।
हो क्रोधित तब रावण ने इंद्रजीत को था भिजवाया,
ब्रह्मास्त्र की लाज रखने को हनुमान जी ने खुद को बंधी बनवाया।
बन बंधी हुए प्रस्तुत वह रावण के समक्ष,
बहुत क्रोधित था रावण, सुन मर गया था उनका पुत्र अक्ष।
मृत्युदंड देने को जब रावण ने फरमाया,
विभीषण ने दूत हत्या के पाप से अवगत उसे करवाया।
बोला रावण अहंकार में, वानरों को उनकी पूंछ होती है प्रिय,
लगाने को अग्नि पूंछ पर उनको सजा दी इसलिए।
दे कर यह सजा रावण बाद में बहुत पछताया,
एक जली पूंछ से हनुमान जी ने, फिर पूरी लंका को जलाया।

©Vasudha Uttam

#NojotoRamleela #nojoto #nojotonews #nojotohindi #nojotoenglish Ruchika Anita Mishra @Priya Gour @sunny Adlakha Sudha Tripathi Ravi vibh

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है परम् पिता परमात्मा जगत संचालक श्री हरि। थाने आणि साल माका साथे घणी भरी करि।। थाने असो कय चलायो सुक्का को चटको। आसाढ़ महीनों खतम होबा वालो अब तो फ़ाणि पटको।। है इंदर देव या विपदा घणी भारी।थाए लेव सरम नी आरी। कय थाकि आत्मा भटक गी। थोड़ा नीचे तो देखो सोयाबीन नेव लटक गी।। नि आयो आज काल मे फ़ाणि तो किसान ए मरणो पडेगो। इंदर देव अब नी मान्या थे तो थाकि सोगन मेघनाथ ए याद करणो पडेगो।। सभी देवता का जाके कर ली सब रीत । है लकेश पुत्र मायावी मेघनाथ इंद्रजीत भूल गए इंद्र अपने सब वादे। दादा मेघनाथ अब तू अणाये समझा दे।। R सेन✍️✍️ ©rajesh sen

#OneSeason  है परम् पिता परमात्मा जगत संचालक श्री हरि।
थाने आणि साल माका साथे घणी भरी करि।।
थाने असो कय चलायो सुक्का को चटको।
आसाढ़ महीनों खतम होबा वालो अब तो फ़ाणि पटको।।
है इंदर देव या विपदा घणी भारी।थाए लेव सरम नी आरी।
कय थाकि आत्मा भटक गी।
थोड़ा नीचे तो देखो सोयाबीन  नेव लटक गी।।
नि आयो आज काल मे फ़ाणि तो किसान ए मरणो पडेगो।
इंदर देव अब नी मान्या थे तो थाकि सोगन  मेघनाथ ए याद करणो पडेगो।।
सभी देवता का जाके कर ली सब रीत ।
है लकेश पुत्र मायावी मेघनाथ इंद्रजीत
भूल गए इंद्र अपने सब वादे। दादा मेघनाथ अब तू अणाये समझा दे।।
R सेन✍️✍️

©rajesh sen

#OneSeason

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आसमा का तारा बनकर,आँखों का सितारा बनकर, साथ मेरे तुम हों न, मीठी सी वाणी बनकर,आँखों का पानी बनकर, साथ मेरे तुम हो न, संध्या की आहट से ,सुबह की जगमगाहट तक साथ मेरे तुम हो न, ओझल हो आँखों से मेरे,दिल पूछे तुम्हारा पता कहा हैं, ढूंढ़ रही हर पल एक आस सी, बता दे मेरी खता क़्या हैं, वापसी का ख्वाब आपके , मन का हर कोना देखता हैं, छिपकर सिसक कर कानो में, हर रोज अब यही कहता हैं, यादो की मुस्कुराहट बनकर , धड़कन पहचान बनकर, तुम ही तो हो न साथ नहीं मम्मा तुम मेरे , पर पास सदा तुम हो न 🧡 आपकी जागे💕 ©इंद्रजीत नायक

#daughterlove #lostmom  आसमा का तारा बनकर,आँखों का सितारा बनकर,
साथ मेरे तुम हों न,
मीठी सी वाणी बनकर,आँखों का पानी बनकर,
साथ मेरे तुम हो न,
संध्या की आहट से ,सुबह की जगमगाहट तक 
साथ मेरे तुम हो न,
ओझल हो आँखों से मेरे,दिल पूछे तुम्हारा पता कहा हैं,
ढूंढ़ रही हर पल एक आस सी, बता दे मेरी खता क़्या हैं,
 वापसी का ख्वाब आपके , मन का हर कोना देखता हैं,
छिपकर सिसक कर कानो में, हर रोज अब यही कहता हैं,
यादो की मुस्कुराहट बनकर ,
धड़कन पहचान बनकर,
तुम ही तो हो न
साथ नहीं मम्मा तुम मेरे , पर पास सदा तुम हो न 🧡



आपकी जागे💕

©इंद्रजीत नायक

कौशल्या दशरथ के दुलारे, श्री रघुनंदन राम हमारे... तुमको हमारे सहस्त्रों प्रणाम, हे पुरुषोत्तम राजा राम... बाल्यकाल से दुख निवारे, ताड़का जैसी दुष्टा को संहारे... ऋषियों के बिगड़े काज सँवारे, अहिल्या को चरण रज से तारे... विश्वामित्र संग मिथिला पधारे, धनुभंग कर परशुराम सम्भारे... विवाह किया संग जनकदुलारी के, चारों भाई नव वधुओं संग अयोध्या पधारे... मांगे कैकेयी ने दशरथ से दो वर, राज छोड़ प्रभु वन को पधारे... वन गए राम ; प्राण तज दिए पिताजी, हुई सूनी अयोध्या ; फिर आए भरत जी... जान प्रपंच अपनी माता का, राज छोड़ चले प्रभु को लेने... प्रेम और भक्ति को देख भरत की, ब्रह्माण्ड हुआ आतुर भरत-मिलन को देखने... चित्रकूट में मिले भरत जी, राम लौटा दिए पादुकाओं संग... पंचवटी में हरी जानकी, मिले पवनसुत ऋष्यमूक पर्वत पर... पहले बालीवध फिर लंकादहन हुआ, रामसेतु बना सागर पार किया... अंत किया बड़े-बड़े दानवों का, मेघनाद ने लक्ष्मण पर आघात किया... हनुमान लाए पर्वत को उठाकर, संजीवनी से लखन का उपचार हुआ... मारा इंद्रजीत को उर्मिलावल्लभ ने, फिर प्रभु ने कुल सहित रावण का संहार किया... मुक्त किया माता सीता को, लंकापुरी में अधर्म का नाश किया... राजा बने अयोध्या के राम रघुरायी , ग्यारह हज़ार वर्ष तक धर्म से राज किया... ©Pooja Patel

 कौशल्या दशरथ के दुलारे, 
श्री रघुनंदन राम हमारे... 
तुमको हमारे सहस्त्रों प्रणाम, 
हे पुरुषोत्तम राजा राम...
बाल्यकाल से दुख निवारे, 
ताड़का जैसी दुष्टा को संहारे... 
ऋषियों के बिगड़े काज सँवारे, 
अहिल्या को चरण रज से तारे...
विश्वामित्र संग मिथिला पधारे, 
धनुभंग कर परशुराम सम्भारे...
विवाह किया संग जनकदुलारी के, 
चारों भाई नव वधुओं संग अयोध्या पधारे...
मांगे कैकेयी ने दशरथ से दो वर, 
राज छोड़ प्रभु वन को पधारे...
वन गए राम ; प्राण तज दिए पिताजी, 
हुई सूनी अयोध्या ; फिर आए भरत जी...
जान प्रपंच अपनी माता का, 
राज छोड़ चले प्रभु को लेने... 
प्रेम और भक्ति को देख भरत की, 
ब्रह्माण्ड हुआ आतुर भरत-मिलन को देखने...
चित्रकूट में मिले भरत जी, 
राम लौटा दिए पादुकाओं संग...
पंचवटी में हरी जानकी, 
मिले पवनसुत ऋष्यमूक पर्वत पर... 
पहले बालीवध फिर लंकादहन हुआ,
रामसेतु बना सागर पार किया... 
अंत किया बड़े-बड़े दानवों का, 
मेघनाद ने लक्ष्मण पर आघात किया...
हनुमान लाए पर्वत को उठाकर, 
संजीवनी से लखन का उपचार हुआ... 
मारा इंद्रजीत को उर्मिलावल्लभ ने, 
फिर प्रभु ने कुल सहित रावण का संहार किया...
मुक्त किया माता सीता को, 
लंकापुरी में अधर्म का नाश किया...
राजा बने अयोध्या के राम रघुरायी , 
ग्यारह हज़ार वर्ष तक धर्म से राज किया...

©Pooja Patel

कौशल्या दशरथ के दुलारे, श्री रघुनंदन राम हमारे... तुमको हमारे सहस्त्रों प्रणाम, हे पुरुषोत्तम राजा राम... बाल्यकाल से दुख निवारे, ताड़का जैसी दुष्टा को संहारे... ऋषियों के बिगड़े काज सँवारे, अहिल्या को चरण रज से तारे... विश्वामित्र संग मिथिला पधारे, धनुभंग कर परशुराम सम्भारे... विवाह किया संग जनकदुलारी के, चारों भाई नव वधुओं संग अयोध्या पधारे... मांगे कैकेयी ने दशरथ से दो वर, राज छोड़ प्रभु वन को पधारे... वन गए राम ; प्राण तज दिए पिताजी, हुई सूनी अयोध्या ; फिर आए भरत जी... जान प्रपंच अपनी माता का, राज छोड़ चले प्रभु को लेने... प्रेम और भक्ति को देख भरत की, ब्रह्माण्ड हुआ आतुर भरत-मिलन को देखने... चित्रकूट में मिले भरत जी, राम लौटा दिए पादुकाओं संग... पंचवटी में हरी जानकी, मिले पवनसुत ऋष्यमूक पर्वत पर... पहले बालीवध फिर लंकादहन हुआ, रामसेतु बना सागर पार किया... अंत किया बड़े-बड़े दानवों का, मेघनाद ने लक्ष्मण पर आघात किया... हनुमान लाए पर्वत को उठाकर, संजीवनी से लखन का उपचार हुआ... मारा इंद्रजीत को उर्मिलावल्लभ ने, फिर प्रभु ने कुल सहित रावण का संहार किया... मुक्त किया माता सीता को, लंकापुरी में अधर्म का नाश किया... राजा बने अयोध्या के राम रघुरायी , ग्यारह हज़ार वर्ष तक धर्म से राज किया... ©Pooja Patel

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राजं-----! ___________ कविता संग्रह - चातक ________________ प्रा. इंद्रजीत पाटील ____________________

#dawn  राजं-----! 
___________

कविता संग्रह - चातक
________________

प्रा. इंद्रजीत पाटील
____________________

#dawn

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इंद्रजीत पाटील

#reading  इंद्रजीत पाटील

#reading

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कविता माझी प्रा. इंद्रजीत पाटील

#rकeading  कविता माझी 
प्रा. इंद्रजीत पाटील

कविता माझी प्रा. इंद्रजीत पाटील

#seaside  कविता माझी 

 प्रा. इंद्रजीत पाटील

#seaside

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बहुत चल-दिए जिंदगी के सीधे रास्तों पे... पर रास्ते ज्यादा सीधे हो तो मंजिल तक नहीं पहुंचते... इसलिए सोचती हूं अब जिंदगी में थोड़ा फितूर होना चाहिए... ✍ प्रणाली इंद्रजीत.73

#emptiness💔  बहुत चल-दिए जिंदगी के सीधे रास्तों  पे...

पर रास्ते ज्यादा सीधे हो तो मंजिल तक नहीं पहुंचते...

इसलिए सोचती हूं
अब जिंदगी में थोड़ा फितूर होना चाहिए...

✍ प्रणाली इंद्रजीत.73

#Life_experience

खालसा एड से जुड़े युवा इंद्रजीत सिंह की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। पीड़ित व्यक्तियों के लिए समर्पित इंद्रजीत सिंह ने दिल्ली दंगा पीड़ितो

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आप की कहानी आपकी ही जुबानी लिखिए और बनिए कलम के जादूगर email devalikacontest@gmail.com

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email devalikacontest@gmail.com

#devalika --- पात्र हमारा कहानी आपकी-- "अखिल भारतीय पात्र लघु कथा लेखन प्रतियोगिता 2020" इस प्रतियोगिता का उद्देश्य आपके लेखन कौशल को समाज

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email your short story at devalikacontest@gmail.com and become a renowned author. for more details read full post.

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a nationwide short story contest. write a story on characters of devalika and be a Published author now. email your story devalikacontest@gmail.com for more details read full post.

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अखिल भारतीय लघु कथा प्रतियोगिता भाग ले और अपनी कहानी लाखों लोगों तक पहुंचाएं ईमेल करें devalikacontest@gmail.com for more details read post carefully.

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"पात्र हमारा कहानी आपकी प्रतियोगिता 2020" 3000 शब्दों में लिखें कहानी और उसे ईमेल करें devalikacontest@gmail.com चयनित होने पर कहानी प्रकाशित की जाएगी "देवालिका की उप कहानियां" नामक पुस्तक पर | अधिक जानकारी ऊपर दी गई है

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3000 शब्दों में लिखें कहानी और उसे ईमेल करें devalikacontest@gmail.com 
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